यूं तो 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे के रुप में मनाया जाता है, लेकिन इसी दिन एक ऐसे व्यक्ति का जन्म हुआ, जिसने पहले तो आक्रमण कर भारत को जमकर लूटा और बाद में अपने साम्राज्य की स्थापना कर भारत पर राज किया. जी हां, हम बात कर रहे हैं मुगल साम्राज्य की स्थापना करने वाले बाबर की. यह वही शासक था, जिसे अयोध्या में बाबरी मस्जिद और रामजन्म भूमि विवाद के लिए भी ज़िम्मेदार माना जाता है, तो आईये जरा नजदीक से जानने की कोशिश करते हैं इसके क्रूर किरदार को:

कौन था बाबर, जिसने भारत को लूटा?

मध्य एशिया के समरकंद राज्य की एक बहुत छोटी सी जागीर फरगना में 1483 ई. में बाबर का जन्म हुआ. इसका ताल्लुक सीधे तौर पर तैमूर से था. बाबर का पिता उमर शेख मिर्जा तैमूर का वंशज था और उसकी माता मुग़ल जाति के विख्यात चंगेज़ ख़ां के वंश में ख़ान यूनस की पुत्री थी. बाबर की नसों में तुर्कों के साथ मंगोलों का भी रक्त था. बाबर ने काबुल पर अधिकार कर स्वयं को मुग़ल प्रसिद्ध किया था. यही नाम बाद में भारत में भी प्रचलित हो गया.

Story of a Cruel King Babur (Pic: superzindagi.in)

बाप से विरासत में मिली थी शराब की लत

बाबर के पिता उमर शेख को शराब पीने का बड़ा शौक था. अक्सर वह बाबर को भी इसको चखने का न्यौता देता था. साथ ही उसे कबूतर पालने का भी बड़ा चाव था. माना जाता है कि कबूतरों को दाना देते हुए एक हौज में गिर जाने से उसकी मृत्यु हो गई थी. पिता की मृत्यु के समय बाबर की आयु केवल बारह वर्ष की थी. विरासत में उसे पिता से शराब की लत तथा अपने को तैमूरवंश का कहलाने का गौरव प्राप्त हुआ था. वह कभी भी अपने को मंगोल या मुगलों से नहीं जोड़ता था, बल्कि मुगल कहने से उसे चिढ़ होती थी.

कम उम्र से ही था अय्याशी का शौकीन

बाबर ने अपनी आत्मकथा ‘तुजुक ए बाबरी’ में लिखा कि उसका पहला शिक्षक शेख मजीद बेग एक बड़ा अय्याश था इसलिए बहुत गुलाम रखता था. इसी कड़ी में उसने अपने दूसरे शिक्षक कुलीबेग के बारे में लिखा कि वह न नमाज पढ़ता था, न रोजा रखता था, वह बहुत कठोर भी था. तीसरे शिक्षक पीर अली दोस्तगाई के बारे में उसने लिखा कि वह बेहद हंसोड़- ठिठोलिया और बदकारी में माहिर था. हालांकि…

बाबर बताता है कि वह अपने शिक्षकों की करतूतों को बिल्कुल पसंद नहीं करता था. परन्तु असल में उसने उनके कई सारे अवगुणों को अपना लिया था. यहां बाबर के जीवन का जिक्र जरुरी है. माना जाता है कि जब वह महज 16-17 साल का था तब उसको बाबुरी नामक एक किशोर के साथ प्रेम हो गया था.

इसको लेकर बाबर ने आशिकी पर शेर लिखे थे, परन्तु जब बाबर ने बाद में उसे एक बार आगरा की गली में देखा तो उसने स्वयं बाबरनामा में लिखा, वह लड़का मिल गया जो हमारी सोहब्बत में रह चुका था. हम उससे आंखें नहीं मिला पाये, क्योंकि अब हम बादशाह हो चुके थे. ऐसे किस्सों से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाबर कितना अय्याश किस्म का था.

छल कपट से किया था काबुल पर कब्जा

बाबर ने समरकंद को जीतने के लिए तीन बार प्रयास किये थे, पर सभी में उसे असफलता ही मिली. इसलिए जल्दी ही उसने कपट तथा चतुराई से 1504 में काबुल पर कब्जा कर लिया. अब उसने भारत की ओर ध्यान दिया, जो उसके जीवन की बड़े लंबे समय से लालसा थी. बाबर के भारत आक्रमण का मूल कारण, भारत की राजनीतिक परिस्थितियों से भी अधिक स्वयं उसकी दयनीय तथा असहाय अवस्था थी. वह काबुल के उत्तर अथवा पश्चिम में संघर्ष करने की अवस्था में न था. हां, वह भारत की धन संपत्ति जरूर लूटना चाहता था. इसके लिए उसने अपने पूर्वजों महमूद गजनवी तथा मोहम्मद गौरी का हवाला देकर भारत को तैमूरिया वंश का क्षेत्र बताया था.

3000 से भी अधिक निर्दोषों को मारा

बाबर की कट्टरता और क्रूरता को इसी से समझा जा सकता है कि उसने अपने पहले आक्रमण में ही बाजौर के सीधे-सादे 3000 से भी अधिक निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी. वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि बाजौर वाले विद्रोही तथा मुसलमानों के शत्रु थे. यहां तक कहा जाता है कि उसने इस युद्ध के दौरान एक पुश्ते पर आदमियों के सिरों को काटकर उसका स्तंभ बनवा दिया था. यह नृशंस अत्याचार उसने ‘भेरा’ पर आक्रमण करके भी किये.

गुरुनानक ने देखा था बाबर का अत्याचार

बाबर द्वारा किए गया तीसरा, चौथा व पांचवां आक्रमण- जो, सैयदपुर, लाहौर तथा पानीपत की घटनाओं से जुड़ा हुआ था. माना जाता है इस दौरान गुरुनानक जी ने बाबर के वीभत्स अत्याचारों को अपनी आंखों से देखा था. उन्होंने इन आक्रमणों को पाप की बारात और बाबर को यमराज की संज्ञा दी थी. इन आक्रमणों में बाबर ने किसी के बारे में नहीं सोचा. उसके रास्ते में बूढ़े, बच्चे और औरतें, जो कोई भी आया वह उन्हें काटता रहा. वह किसी भी कीमत पर अपने साथ ज्यादा से ज्यादा धन लूट कर ले जाना चाहता था.

राणा सांगा ने याद दिला दिया था छठी का दूध

यूं तो बाबर का टकराव इब्राहिम लोदी जैसे कई शासकों के साथ हुआ, लेकिन किसी ने उसे ज्यादा परेशान नहीं किया. कहा जाता है कि जब वह मेवाड़ के राणा सांगा के साथ दो-दो हाथ करने पहुंचा तो उन्होंने उसको उसका छठी का दूध याद दिला दिया था. राणा सांगा के साथ हुए इस टकराव का बाबर के जीवन का सबसे बड़ा टकराव माना जाता है. बाबरनामा में इसका विस्तृत वर्णन है. कहते हैं यह टकराव बाबर के लिए एक ‘प्रतिष्ठा का प्रश्न’ बन गया था. हालांकि, 1527 ई. (Link in English) में खानवा के युद्ध में, अन्तत: उसे सफलता मिल गई थी.

…रामजन्म भूमि विवाद का जनक?

अपने पूर्वजों की तर्ज पर बाबर ने क्रूरता जारी रखी. उसने मुसलमानों की हमदर्दी पाने के लिए हिन्दुओं का नरसंहार ही नहीं किया, बल्कि अनेक हिन्दू मंदिरों को भी नष्ट किया. उसके एक अधिकारी ने संभल में एक मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण करवाया. उसके सदर शेख जैना ने चन्देरी के अनेक मंदिरों को नष्ट किया. यहां तक माना जाता है कि बाबर की आज्ञा से मीर बाकी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर निर्मित प्रसिद्ध मंदिर को नष्ट कर मस्जिद बनवाई थी. यही नहीं ग्वालियर के निकट उरवा में अनेक जैन मंदिरों को भी नष्ट किया था.

Story of a Cruel King Babur (Pic: thefamouspeople.com)

यह कहना गलत नहीं होगा कि क्रूर बाबर का भारत पर आक्रमण हर तरह से महमूद गजनवी या मोहम्मद गौरी जैसा ही थी, जिन्होंने अपने हितों के खातिर किसी भी प्रकार के नरसंहार को सही माना. जाहिर तौर पर इतिहास में ऐसे क्रूर शासकों को उनकी क्रूरता के लिए कहीं ज्यादा याद किया जायेगा, बजाय किसी और बात के! अपना कमेन्ट देना न भूलियेगा…

Web Title: Story of a Cruel King Babur, Hindi Article

Keybords: Mughal Empire, Babur, ‎Baburnama, Central Asian, Panipat, Humayun, Gardens of Babur, Kabul, Afghanistan, Humayun, Gulbadan Begum, Kamran Mirza, Agra, Umar Shaikh Mirza II, Qutlugh Nigar Khanum

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