‘विलियम द कॉन्करर’ एक ऐसा शासक, जो पहले 8 साल की उम्र में नार्मडी का ड्यूक बना और बाद में अपने बल पर इंग्लैंड का शासक. गजब की बात तो यह थी कि वह बिल्कुल भी पढ़ा लिखा नहीं था, लेकिन उसने इंग्लैंड में शिक्षा के लिए अनेक काम किए. शायद यही कारण रहा कि इंग्लैंड यूरोप में एक शक्तिशाली देश बनकर उभरा. तो आईये विलियम को जरा नजदीक से जानने की कोशिश करते हैं:

क्यों कहा जाता था ‘विलियम द बास्टर्ड’?

1028 (link in English) में विलियम का जन्म हुआ था, लेकिन उनका दुनिया में आना सहज नहीं था. उनकी मां अविवाहित थी. वह नार्मडी के ड्यूक रॉबर्ट I की नाजायज संतान थे. इस कारण उन्हें बचपन से ही ताने सुनने को मिले. उनके दुश्मन उन्हें ‘विलियम द बास्टर्ड’ कहकर बुलाते थे. यह सुनना विलियम को बिल्कुल भी पसंद नहीं था. वह लोगों से नफरत करने लगा. धीरे-धीरे वह क्रूर होता चला जा रहा था. इसी बीच उसके पिता की मृत्यु हो गई. पिता की मत्यु के बाद दुश्मनों ने विलियम को खत्म करने की कोशिशें शुरु कर दीं. हालांकि, वह सफल नहीं हो सके. फ्रांस के राजा हेनरी प्रथम का उसे संरक्षण प्राप्त था. उनकी मदद से वह जीवित रहने में सफल रहा.

Story of William the Conqueror (Pic: acornstairlifts.co.uk)

8 की उम्र में बना नार्मडी का ड्यूक

विलियम महज 8 साल का रहा होगा, जब उसे आधिकारिक रुप से नार्मडी का नया ड्यूक घोषित किया गया. चूंकि, उसने बचपन से ही लोगों के ताने सुने थे, इसलिए सत्ता संभालते ही वह हिंसा के रास्ते पर चल पड़ा. वह बहुत बेरहम था. वह दुश्मनों को मौत देने में बिल्कुल भी पीछे नहीं हटता था. इसके लिए उसकी खूब आलोचनाएं होती रहीं, पर वह रुका नहीं. उस पर अपनी सत्ता का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगता रहा, लेकिन उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ा. वह मतवाले हाथी की तरह अपनी राह पर आगे बढ़ता रहा.

विलियम का राजा बनना तय था, लेकिन…

जल्दी ही राजनीतिक घटनाओं पर एक नए स्टैंड को लेते हुए विलियम ने सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली. उसमें युद्ध कौशल कूट-कूट कर भरा हुआ था. इसका सहारा लेते हुए उसने आसपास के प्रांतों को जीतना शुरु कर दिया. 1064 (Link in English) तक वह अपने पड़ोसी प्रांतों- ब्रिटनी और मेन को जीतने में कामयाब रहा. उसकी यशकीर्ति के किस्से मशहूर होने लगे. विलियम की नेतृत्व क्षमता को देखते हुए इंग्लैंड के राजा एडवर्ड कन्फॉन्सर ने उन्हें इंग्लैंड का उत्तराधिकारी बनाने का मन बना लिया. असल में एडवर्ड विलियम के दूर का रिश्तेदार था.

इंग्लैंड पर आक्रमण की असल वजह

विलियम का राजा बनना तय था, पर नियति को कुछ और मंजूर था. अचानक खबर आई कि एडवर्ड नहीं रहे. यह खबर विलियम के लिए निराशाजनक थी. इसी बीच एक और खबर आई कि एडवर्ड के भाई की मिलीभगत से इंग्लैंड के शक्तिशाली हेरोल्ड गॉडविन ने खुद को इंग्लैंड का उत्तराधिकारी होने का दावा ठोक दिया. बाद में उसे इंग्लैंड के सरकारी महकमे से भी हेराल्ड को हरी झंडी मिल गई.

यह विलियम के लिए विश्वासघात जैसा था. वह आग बबूला हो उठा. उसने तय किया कि किसी भी कीमत वह इंग्लैंड का राजा बनकर रहेगा. उसने अपनी तैयारियां शुरु कर दीं. जल्द ही उसने एक मजूबत सेना के साथ इंग्लैंड पर हमला बोल दिया.

English forces at Hastings (Pic: familypedia)

लड़ाईयों का सिलसिला

सबसे पहले विलियम ने इंग्लैंड के पेवेन्से (Link in English) को अपना निशाना बनाया. उसे पेवेन्से को जीतने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. इसकी सूचना हेराल्ड को मिली तो उसने जवाब में हेस्टिंग्स पहुंचकर विलियम को युद्ध के लिए ललकारा. विलियम ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए खुद अपनी सेना का नेतृत्व किया और पहले ही दिन में वह यह युद्ध जीतने में कामयाब रहा.

हेस्टिंग्स की लड़ाई जीतने के बाद वह नहीं रुका. वह पूरे इंंग्लैंड पर अपनी विजय पाताका फहराना चाहता था. अगले कड़ी में उसने लंदन को निशाना बनाया. माना जाता है कि महज दो हफ्तों में ही विलियम ने इंग्लैंड पर अपना कब्ज़ा कर लिया था, और अंग्रेजी सिंहासन के अधिकार का दावा ठोक दिया था.

…और बन गया इंग्लैंड का राजा

हेस्टिंग्स की लड़ाई में हेरोल्ड और उसके दो भाइयों को मौत देने के बाद विलियम के राजा बनने का रास्ता साफ हो चुका था. 1066 के क्रिसमस दिवस पर वह इंग्लैंड का राजा बनने में सफल रहा. वेस्टमिंस्टर एब्बे में उसने इंग्लैंड के पहले नॉर्मन राजा का ताज पहना. इस तरह अंग्रेजी इतिहास का एंग्लो-सैक्सन चरण समाप्त हो गया. फ्रेंच राजा की अदालत की भाषा बन गई. हालांकि, आधुनिक अंग्रेजी को बढ़ावा देने के लिए विलियम ने कई कदम उठाए, जबकि वह बिल्कुल पढ़ा लिखा नहीं था. अंग्रेजी से तो उसका दूर-दूर का नाता नहीं था.

इंग्लैंड के विकास में बड़ी भूमिका

राजा बनने के आगामी सालों में विलियम ने इंग्लैंड को बदलने का मन बनाया. उसने इंग्लैंड की ढ़ेर सारी जमीन पर कब्जा करते हुए उन्हें नॉर्मन अनुयायियों में बांट दिया. सरकार के मुख्य पदों पर नोर्मन्स की नियुक्ति कर दी गई. तेजी से उसने इंग्लैंड के सरकारी महकमे के साथ-साथ वहां के संगठनों में भी अपनी पकड़ बना ली. हालांकि, उसका सख्त रवैया लोगों को रास नहीं आया था. उसका जमकर विरोध हुआ था, लेकिन अपने कुशल नेतृत्व के चलते वह इन सबसे पार पाने में सफल रहा. उसे लोग धीरे-धीरे पसंद करने लगे थे.

वह यह यकीन दिलाने में कामयाब हो चुका था कि वह इंग्लैंड का भला चाहता था. बाद में उसने इंग्लैंड की आबादी और संपत्ति की एक विस्तृत जनगणना (Link in English) करने का आदेश भी दिया. माना जाता है कि विलियम का यह कदम उसकी सरकार के लिए मील का पत्थर साबित हुआ.

Story of William the Conqueror (Pic: horriblehistories)

इस तरह से बचपन में ‘विलियम बास्टर्ड’ नाम से बुलाया जाने वाला नार्मडी का वह बालक ‘विलियम विजेता’ बनकर निखरा. वह इंग्लैंड का एक प्रभावी राजा साबित हुआ. माना जाता है कि इंग्लैंड को यूरोप के सबसे शक्तिशाली देश बनाने में विलियम का ही हाथ था. वह बात और है कि कुछ सालों के शासन के बाद ही वह 1087 में मत्यु को प्राप्त हो गया था.

Web Title: Story of William the Conqueror, Hindi Article

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