दुनिया के इतिहास में कई सम्राट हुए, जो खुद को नायक बताते रहे. वह कुछ समय के लिए चमके भी, पर जल्द ही गायब होते गए, लेकिन सम्राट अशोक की चमक आज भी फीकी नहीं पड़ी है. वह आज भी एक सितारे की तरह चमकदार बने हुए हैं.
दुनियाभर में उन्हें दो वजहों से जाना जाता है. पहला, कलिंग युद्ध के लिए और दूसरा, भारत और दुनिया में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए, पर इसके साथ-साथ उनसे जुड़े कुछ और पहलू भी हैं, जिन पर नज़र डालना जरुरी है, तो आईये आज बात करते हैं सम्राट अशोक की:

99 भाईयों की हत्या कर बने थे राजा

यूं तो इस्लामिक शासक ही सत्ता छीनने के लिए बदनाम रहे हैं, पर अशोक जैसे महान राजा ने भी यह कुकृत्य किया था.

सम्राट अशोक बिन्दुसार के पुत्र थे. माना जाता है कि उनकी प्रतिभा के चलते उनके सौतेले भाई उनसे जलते थे. इसी कड़ी में जब बिन्दुसार की मृत्यु हुई तो उनके सौतेले भाई सुशीम ने राज गद्दी का सही हकदार होने का दावा ठोका, परन्तु ज्यादातर मंत्री अशोक को राजा देखना चाहते थे. ऐसे में समस्या यह थी कि, जब तक अशोक के सौतेले भाई रहते उनका राजा बनना मुश्किल था, इसलिए कहा जाता है कि उन्होंने तय किया कि वह किसी को नहीं छोड़ेंगे और उन्होंने अपने 99 भाइयों की हत्या करते हुए राज गद्दी पर कब्जा किया.

Story on Samrat Ashoka (Pic: Historical Events/Youtube)

क्रूरता के कारण लोगों ने कहा, ‘चंड अशोक’

अशोक एक गुस्सैल राजा थे. कहानियों के अनुसार वह अपने हरम में सैकड़ों औरतों को रखते थे और उनके साथ मनमानी करते थे. उन पर कईयों को ज़िंदा जलवाने तक का आरोप है. कहानियां तो यह भी कहती हैं कि उन्होंने गद्दारी के शक में अपने सैकड़ों मंत्रियों को मौत की सजा दे दी थी, बिलकुल तानाशाहों की तरह. उन्होंने एक यातना गृह भी बनवाया था, जहां वह अपने विरोधियों को कैद करके यातनाएं देते थे. वह यातना गृह इतने खराब होते थे कि इन्हें उस समय धरती का नरक कहा जाता था. लोगों का मानना है कि अशोक के इन्हीं अमानवीय कार्यों के कारण उन्हें ‘चंड अशोक’ की संज्ञा दी गई थी.

भारत के अन्दर विजेता बनकर उभरे

अपने शासन के नवें वर्ष तक अशोक ने मौर्य साम्राज्य की परम्परागत नीतियों का अनुसरण किया. अशोक ने देश के अन्दर साम्राज्य का विस्तार किया. उन्होंने अपना साम्राज्य आज के वर्मा से इरान तक और कश्मीर से तमिल नाडु तक स्थापित कर लिया था. भारत के अन्दर वह एक विजेता बनकर उभरे. उन्होंने नेपाल को जीता और तक्षशिला के विद्रोह को शान्त किया. वह कलिंग को जीतने में भी कामयाब रहे थे.

कलिंग के युद्ध ने किया हृदय परिवर्तन…

कलिंग, जो उस समय एक स्वतंत्र लोकतान्त्रिक राज्य था. अशोक ने इसको जीतने के लिए हमला कर दिया. जीत का भूत अशोक पर इतना ज्यादा था कि वह तेजी से आगे बढ़ते गए और लोगों को काटते गए. इस युद्ध में लगभग 100000 सैनिक मारे गए और 150000 से ज्यादा लोगों को बंदी बनाया गया. इस युद्ध को जीतने के बाद जब अशोक रणभूमि पहुंचे, तो वहां पड़े शवों और उन पर विलाप करते हुए परिजनों को देखकर उनका दिल पसीज गया. वह खुद से सवाल करने लगे कि उन्होंने यह क्या कर दिया? यदि यह विजय है तो पराजय क्या है?

यह न्याय है या अन्याय है? अगर इसको वीरता कहते है तो बर्बादी कैसी होती होगी? क्या मासूम बच्चों और स्त्रियों की हत्या वीरता है? क्या यह मैंने अपने साम्राज्य के विस्तार और समृद्धि के लिए किया या फिर दूसरे राज्य के विनाश के लिए? इन शवों के ढ़ेर के क्या मायने हैं? क्या सच में यह मेरी विजय के सूचक हैं या मेरी कायरता के?

Story on Samrat Ashoka, Kalinga War (Pic: historydiscussion.ne)

…और तब चल पड़े अच्छाई की राह पर

ऐसा माना जाता है कि कलिंग के इस युद्ध के बाद अशोक ने बौद्ध धर्म को अपना लिया. उन्होंने बौद्ध धर्म को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी फैलाया. इसके लिए उन्होंने बुद्ध के जीवन से जुड़ी जगहों पर कई स्तूपों का निर्माण किया. इसकी बदौलत उन्हें धर्म अशोक की पदवी भी मिली, जिसका अर्थ है पावन या पवित्र अशोक. उन्होंने बेटे महेंद्र और बेटी संघमित्रा को सिलोन भेजा. ताकि,वहां बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया जा सके. अशोक ने बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए हजारों स्तूप बनवाए. सांची का स्तूप इसका एक बड़ा उदाहरण है. सारनाथ में बना अशोक स्तंभ अशोक ने ही बनवाया था, जोकि एक बहुत ही लोकप्रिय स्तूप होने के साथ-साथ भारत का राष्ट्रीय चिह्न भी है.

चलते-चलते…

  • अशोक ने लगभग 40 वर्षों तक शासन किया जिसके बाद लगभग 234 ईसापूर्व में उनकी मृत्यु हुई.
  • माना जाता है कि अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य राजवंश लगभग 50 वर्षों तक चला.
  • प्रसिद्ध कवि जयशंकर प्रसाद ने कलिंग में तबाही के बाद सम्राट अशोक की भावनाओं को प्रस्तुत करते हुए ‘अशोक की चिंता’ नामक एक कविता की रचना की.
  • 1996 में अशोक पर आधारित ‘उत्तर-प्रियदर्शी’ नाम का एक काव्य नाटक भी बना. इसका मंचन रतन थियाम ने किया था.
  • अशोक पर पियर्स एंथोनी ने ‘स्पेस ओपेरा’ नाम का एक नॉवेल लिखा, जिसमें अशोक का चरित्र चित्रण एक बेहतरीन प्रशासक के तौर पर किया गया है.
  • 2001 में संतोष सिवान ने उन पर आधारित ‘अशोक’ नाम से ऐतिहासिक फिल्म बनाई थी, जिसमें शाहरुख खान ने सम्राट अशोक और करीना कपूर ने कलिंग की राजकुमारी की भूमिका निभाई थी.
  • 1973 में, अमर चित्र कथा ने सम्राट अशोक के जीवन पर आधारित एक ग्राफिक नॉवेल प्रकाशित किया था.
  • 2002 में, ‘एम्परर अशोक’ नाम से एक गाना रिलीज हुआ था, जिसे मैसन जेनिंग्स ने तैयार किया था. इसमें अशोक के जीवन का चरित्र-चित्रण था.
  • 2015 में, अशोक के जीवन पर आधारित ‘चक्रवर्तीं अशोक सम्राट’ नामक एक टीवी सीरियल भी तैयार किया गया. इसके निर्माता अभिमन्यु सिंह हैं तथा इस कार्यक्रम को अशोक बंकर ने लिखा है.

Story on Samrat Ashoka (Pic: netra)

अशोक भारतीय इतिहास का एक मजबूत चरित्र है. हालांकि, उनके दामन पर भी भाईयों की हत्या के साथ-साथ कई प्रकार की बर्बरता के दाग लगे, पर दूसरे क्रूर शासकों और अशोक में अंतर यही रहा कि अशोक बाद में न केवल खुद सुधर गए, बल्कि लाखों लोगों के जीवन में मानवीय प्रेरणा का संचार भी किया. वह एक विजेता, दार्शनिक एवं प्रजापालक शासक के रूप में हमेशा अमर रहेंगे, इस बात में दो राय नहीं.

Web Title: Story on Samrat Ashoka, Hindi Article

Keywords: Ashoka Life History in Hindi, Samrat Ashoka Biography in Hindi, Samrat Ashok Life History Hindi, Samrat Ashok Life History Hindi, An Archaeological History of Indian Buddhism, History, History in hindi, Historical, History, India

Featured image credit / Facebook open graph: wallpaperclicker / josephart