इतिहास में जितनी भी क्रांतियाँ हुई हैं, उन सबका एक ही उद्देश्य रहा है बदलाव. 1789 (Link in English) में फ्रांस में भी ऐसी ही भावना के साथ एक क्रांति ने जन्म लिया. 1799 तक लोग इसके लिए जूझते रहे. फ्रांस के लिए यह समय भारी बदलाव का था. इस दौरान फ्रांस में राजशाही, कुलीनतंत्र और चर्च की सत्ता ध्वस्त कर दी गई थी. हालांकि, यह जीत आसान नहीं थी. यहां तक पहुंचने के लिए फ्रांस के हजारों लोगों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी थी. इस काल में कई सारे लोग उभरे जिन्होंने अपने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया. रॉबस्पियर उन्हीं में से एक नाम था. तो आईये जरा नजदीक से जानने की कोशिश करते हैं फ्रांस की क्रांति के इस आंदोलनकारी वकील को:

कम उम्र में ही खो दिए थे मां-बाप मगर…

रॉबस्पियर 1758 (Link in English) में फ्रांस के अरास में पैदा हुए थे. वह महज 6 साल के हुए थे, जब उनकी मां का निधन हो गया. वह इस गम से बाहर आते इससे पहले कुछ सालों बाद ही उनके पिता भी चल बसे. उनके दादा-दादी ने उनको पाल-पोसकर बड़ा किया. वह बचपन से पढ़ने में कुशाग्र थे, इसलिए उन्हें पढ़ने के लिए पेरिस भेज दिया गया. वहां उन्होंने लाइकी लुई-ले-ग्रांड से स्नातक किया. चूंकि उनकी रुचि कानून की पढ़ाई में थी इसलिए उन्होंने आगे की पढ़ाई कानून में की. 1781 में वह क़ानून की उपाधि प्राप्त करने में सफल रहे. पढ़ाई खत्म होते ही उन्हें नौकरी मिल गई और वह अपने शहर वापस आ गये.

देखते ही देखते वह एक मशहूर वकील बनकर उभरे. उन्होंने दबे-कुचले लोगों के लिए हमेशा आवाज उठाई. उनके लिए वह लड़ाई लड़ने से कभी पीछे नहीं हटे. वह एक प्रभावशाली व्यक्ति बने तो राजनीति के दरवाजे उनके लिए खुल गये.

Terror of Robespierre in French Revolution (Pic: historytoday.com)

30 की उम्र में एस्टेट जनरल चुने गए

राजनीति की शुरुआत उनके लिए अच्छी रही. उनके उल्लेखनीय कामों के चलते उन्हें महज 30 साल की उम्र में विधिमंडल के एस्टेट जनरल के लिए चुना गया. यह उनके लिए खुद को स्थापित करने का बड़ा मौका था. उन्होंने इस पद का पूरा प्रयोग किया. उन्होंने फ्रांसीसी राजशाही पर अपने हमले तेज कर दिए. वह लोकतांत्रिक सुधार चाहते थे. उन्होंने हर मंच से इसकी वकालत शुरु कर दी. उनकी इस पहल ने उनको लोगों का मसीहा बना दिया.

रॉबस्पियर ने मौत की सजा और गुलामी का भी विरोध किया. हर हाल में वह लोगों का हित चाहते थे. बाद में वह फ्रांस की राष्ट्रीय संविधान सभा, और शक्तिशाली जैकबिन राजनीतिक गुट के अध्यक्ष बनने में भी सफल रहे थे.

फ्रांसीसी संविधान में महत्वपूर्ण भूमिका

1792 में विधान सभा में गिरोडीवादी नेताओं ने फ्रांस को ऑस्ट्रिया के खिलाफ युद्ध घोषित करने की आवाज उठाई, तो रॉबस्पियर ने उनका विरोध किया. उनका मत था कि यह युद्ध आम लोगों के हित में नहीं है. इससे फ्रांस को बड़ा नुकसान हो सकता था. उन्होंने कहा कि युद्ध हमारी क्रांति के आदर्शों को फैलाने का उचित तरीका नहीं है. कोई भी सशस्त्र मिशनरियों को प्यार नहीं करता है.

फ्रांसीसी संविधान की नींव रखने में रॉबस्पियर की महत्वपूर्ण भूमिका रही. इसमें उन्होंने मानव अधिकारों और उनके हितों का ख्याल रखा. वह फ्रांस में रिपब्लिक ऑफ वर्च्यू स्थापित करना चाहते थे. फ्रांस की क्रान्ति के समय लुई सोलहवें के मृत्युदण्ड की व्यवस्था कराने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा था. उन्होंने राजा को दण्ड देने के लिए सफलतापूर्वक तर्क दिए और लोगों को दमन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित किया.

Terror of Robespierre in French Revolution (Pic: britannica.com)

आतंक का शासनकाल

राजशाही के पतन के बाद फ्रेंच क्रांतिकारी राजनेताओं का मानना ​​था कि अराजकता को दबाने के लिए एक स्थिर सरकार की आवश्यकता थी. इसी के तहत 1793 (Link in English) के, कन्वेंशन में जेकोबिन्स ने एक क्रांतिकारी ट्रिब्यूनल स्थापित किया. इसी के तहत आम सुरक्षा के लिए एक 9 सदस्यीय समिति का निर्माण किया. रॉबस्पियर इस समिति के हिस्सा बने. सामान्य सुरक्षा समिति ने देश में आंतरिक पुलिस का प्रबंधन करना शुरू कर दिया. यह ऐसा दौर था जिसे आतंक का शासनकाल कहा जाता है. इसमें वह सभी गुटों के साथ सख्ती से पेश आए, जो क्रांतिकारी सरकार के खिलाफ थे.

इसी कड़ी में रॉबस्पियर की समिति ने तय किया कि हेबर्टिस्ट पार्टी का नाश करना होगा. इसी के तहत उन पर चढ़ाई कर दी गई. इस संघर्ष में लगभग 3,00,000 संदिग्ध दुश्मनों को गिरफ्तार किया गया और 17,000 से अधिक लोगों को मार डाला गया. रक्तपात के इस तांडव में रॉबस्पियर अपने कई राजनीतिक विरोधियों को खत्म करने में सफल रहा था.

बाद में उस पर सवाल उठे तो उसने कहा कि, यह जरुरी था. उसका मत था कि समिति का यह फैसला बिल्कुल सही था. उसके मुताबिक ‘बिना आतंक के सद्गुण और बिना सद्गुण के आतंक निरर्थक होते हैं’ हालांकि, उसके इस तर्क को खारिज कर दिया गया था.

पहले मिली जेल फिर मौत

कुछ समय बाद क्रांतिकारी सरकार के इस आतंक के शासनकाल पर लोगों ने सवाल उठाने शुरु कर दिए. रॉबस्पियर और उनके अनुयायियों के विरोध में कुछ नए संगठनों ने आकार लेना शुरु कर दिया. उन्हीं के प्रयासों के चलते रॉबस्पियर को उनके सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया.

हालांकि, वह जेलर की मदद से जेल से भाग निकलने में सफल रहा और पेरिस के सिटी हॉल में छिप गए थे. जहां पकड़े जाने के डर से उसने आत्महत्या का प्रयास भी किया, लेकिन वह असफल रहे. कुछ ही समय बाद, राष्ट्रीय कन्वेंशन के सैनिकों ने इमारत पर हमला किया और उन्हें दुबारा से गिरफ्तार करते हुए मौत दे दी गई. (Link in English)

The Reign of Terror (Pic: veranijveld.com)

वैसे तो मैक्समिलियन रॉबस्पियर हिंसक नहीं था. वह तो फ़्रांसीसी क्रान्ति से जुड़े प्रभावशाली लोगों में गिना जाता था, लेकिन उसने हिंसा का सहारा लिया था. उसे यह रास्ता चुनना महंगा पड़ा. वह अपने विरोधियों को तो खत्म करने में सफल रहा, लेकिन खुद को भी नहीं बचा सका. अफसोस हमेशा लोगों के हितों की वकालत करने वाले इस फ्रांसीसी वकील को लोगों ने आतंक का दूसरा नाम भी कहकर बुलाया था.

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