नेपोलियन के बारे में कहा जाता है कि वह जो चाहता था, वह करता था. उसके मजबूत व्यक्तित्व को लेकर कई सारी कहानियां चर्चित हैं. पर कहते हैं न कि कोई कितना भी ताकतवर क्यों न हो, कभी न कभी वह कोई न कोई गलती कर बैठता है. कई बार इन गलतलियों को सुधारने का मौका मिल जाता है, पर कई बार यह गलतियां भारी पड़ जाती हैं.

1815 (Link in English) के वाटरलू की लड़ाई में नेपोलियन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. अपने अनेक सफल अभियानों को पूरा करने के बाद उसे ‘वाटर लू’ की लड़ाई में हार का मुंह देखना पड़ा.

यही नहीं पराजय के बाद उन्हें बन्दी भी बनाया गया और ‘सेन्ट हैलेना द्वीप’ पर भेज दिया गया. यही वह जगह थी जहां फ़्रांस के इस सम्राट ने हमेशा के लिए अपनी आंखे बंद कर लीं और इसी के साथ उसके साथ ही चला गया उसका विश्व विजेता बनने का सपना. तो आईये इस ऐतिहासिक लड़ाई से जुड़े पहलुओं को जानने की कोशिश करते हैं:

क्यों लड़ा गया ‘वाटर लू’ का युद्ध?

वाटर लू की लड़ाई के कारणों को जानने के लिए, इसके पीछे के पहलुओं को जानना जरुरी है. असल में 1805 तक आते-आते नेपोलियन का यूरोप के अधिकांश भागों में कब्जा हो चुका था. ब्रिटिश को छोड़कर सभी ने लगभग-लगभग उसको यूरोप का राजा स्वीकार कर लिया था. बावजूद इसके उसकी महत्वाकांक्षाएं थीं कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं थीं.

उसने रूसी साम्राज्य पर आक्रमण करने का फैसला किया, ताकि जार को ब्रिटेन पर व्यापार प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर कर सकें. वह अपने इस अभियान में काफी हद तक सफल भी रहा था.

मास्को तक उसका कब्जा हो गया था, लेकिन बाद में परिस्थितियां ऐसी बनीं कि नेपोलियन को पीछे हटना पड़ा था. इस लड़ाई में उसकी सेना का बड़ा नुकसान हो गया था. धीरे-धीरे फ्रांस कमजोर हुआ तो ब्रिटेन, रूस, ऑस्ट्रिया और प्रशिया ने उस पर चढ़ाई कर दी. इसके फलस्वरुप नेपोलियन को 1814 (Link in English) में एल्बा के द्वीप पर कैद में रहना पड़ा.

हालांकि, नेपोलियन 1815 में एल्बा से भाग गया था. वह अपने फ्रांस लौट आया था. उसने वहां उनके पुराने सम्राट यानी खुद के प्रति निष्ठा घोषित करने के लिए लोगों को प्रेरित किया. वह जल्द ही अपनी योजना में कामयाब रहा और दोबार से फ्रांस की सत्ता पर काबिज हो गया. दुश्मन देश यह देखकर दंग रह गए. उन्होंने दोबारा से फ्रांस पर चढ़ाई करने की योजना शुरु कर दी थी. नेपोलियन को चारों तरफ से घेरने की योजना बनाई जाने लगी, लेकिन नेपोलियन कहां आसानी से हाथ आने वाला था. उसने जवाब में अपनी सेना को पूरी तरह से नियंत्रित किया और उसकी ताकत को बढ़ाना शुरु कर दिया. बाद में यही ‘वाटर लू’ की लड़ाई का बड़ा कारण बना.

The Battle of Waterloo (Pic: britishbattles.com)

ब्रसेल्स पर कब्जा चाहता था नेपोलियन

18 जून 1815 को, नेपोलियन वॉटरलू के मैदान में एक ऐतिहासिक युद्ध के लिए तैयार थे. इस युद्ध में एक तरफ फ्रांस था, तो दूसरी तरफ ब्रिटेन, रूस, प्रशिया, आस्ट्रिया, हंगरी की सेनाएं थीं. नेपोलियन ब्रसेल्स पर कब्जा करना चाहता था. युद्ध से पहले ही नेपोलियन ने युद्ध के लिए अपनी पूरी रणनीति बना ली थी, पर बारिश ने काम खराब कर दिया था. रात भर हुई बारिश के कारण नेपोलियन की सेना का आगे बढ़ना आसान नहीं था. बावजूद इसके उसे विश्वास था कि वह दुश्मन को हराकर ब्रसेल्स पर अपना झंड़ा फहरा लेगा.

नहीं दिखाई कोई जल्दबादी, क्योंंकि…

दुश्मन भी कमजोर न था. वेलिंगटन ने नेपोलियन की सेना को रोकने के लिए मजबूत प्लान बना लिया था. उसका मानना था कि रात में हुई बारिश के कारण नेपोलियन के सैनिकों को गीली मिट्टी में आगे बढ़ना मुश्किल होगा. उसने रणनीति के हिसाब से नेपोलियन को रोकने के लिए ब्रसेल्स की उन सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, जहां से नेपोलियन के सैनिक घुस सकते थे. नेपोलियन दुश्मन की चाल समझ गया था, इसलिए उसने जल्दबाजी नहीं की और दुश्मन की तरफ से वार का इंतजार किया. तब तक उसने अपनी सेना से गढ्ढ़े खोदकर रक्षात्मक पोजीशन लेने का आदेश दे दिया. दुश्मन ने नेपोलियन को कमजोर समझने की गलती की और उस पर हमला कर दिया. नेपोलियन यही चाहता था. उसने दुश्मन को करारा जवाब दिया.

अब यह लड़ाई बड़ा स्वरुप ले चुकी थी. नेपोलियन की सेना ने तेजी से वेलिंगटन की सबसे अच्छी तरह से बचाव वाली जगह पर हमला कर दिया. यहां स्थिति मजबूत होते देखकर नेपोलियन ने कुछ घंटे बाद ही अपनी सेना को मोंट-सेंट-जीन गांव पर हमला करने का आदेश दे दिया. उसका मानना था कि वेलिंगटन की सेना का यह मुख्य केंद्र है. उसके आदेश पर दुश्मन पर बमबारी शुरू कर दी गई.

लगभग एक घंटे चली इसी गोलाबारी के बाद वह मजबूत स्थिति में था. उसका अगला लक्ष्य हाउंगमाउंट (Link in English) फार्महाउस पर कब्जा करना था. इसके लिए वह पूरे दिन संघर्ष करता रहा. अंतत: अंग्रेजों को वह स्थान छोड़कर भागना पड़ा.

Hougoumont Château at the Battle of Waterloo (Pic: britishbattles.com)

पर्शियन सेना की एंट्री ने चौंकाया

नेपोलियन की सेना के हौंसले बुलंद थे. वेलिंगटन बैकफुट पर थे. ऐसा लग रहा था कि ब्रिटिश हार की कगार पर थे. फिर ब्रिटिश कमांडर ने अपने भारी कैवलरी ब्रिगेड को एक मुठभेड़ का आदेश दिया. यह नेपोलियन के सैनिक को कुछ हद तक रोकने में कामयाब रहा, लेकिन इसके लिए इसको अपने बहुत सैनिक गंवाने पड़े थे. कुछ देर बाद नेपोलियन ने अपनी घुड़सवार सेना को ब्रिटिशों पर हमला करने का आदेश दिया. साथ ही पैदल सैनिकों को तेजी से अंदर घुसने का फरमान भी दिया. नेपोलियन का यह दांव उसे महंगा पड़ा. उसके बहुत सैनिक इसमें मारे गये.

इसी बीच अचानक प्रशिया की सेना के आगमन ने नेपोलियन को चौका दिया. वह इसके लिए अभी तैयार नहीं था. उसे लगा था कि उनके आने से पहले वह यह युद्ध जीत लेगा.

प्रशिया सेना की इंट्री इस युद्ध का टर्निंग प्वाइंट था. नेपोलियन को पता था कि अब उसका आगे बढ़ना खतरे से खाली नहीं है, लेकिन उसने अपने हथियार नहीं डाले और अंग्रेजों को तबाह करने के प्रयास में तेजी से आगे बढ़ा. हालांकि, प्रशिया की बड़ी सेना के आगे उसकी एक नहीं चली. फ़्रांस सेना ने बिखरना शुरू कर दिया था और अंत में नेपोलियन को बंदी बना लिया गया.

वाटर लू के मैदान पर लड़ी गई यह लड़ाई ब्रिटीश व सहयोगियों के लिए एक निर्णायक विजय थी. नेपोलियन को सेंट हेलेना के द्वीप में बंदी बनाकर भेज दिया गया, जहां उन्होंने 1821 में अपनी आखिरी सांसें लीं.

Battle of Waterloo (Pic: britishbattles.com)

वाटरलू का युद्ध, एक युग का अंत था और नेपोलियन की हार यूरोप में शांति के रुप में देखी जा रही थी. नेपोलियन जीत के करीब था, लेकिन ब्रिटिश सेना का अपेक्षा से अधिक ताकत से लड़ना उसको भारी पड़ा. वहीं दूसरी तरफ युद्ध से पहले हुई बारिश और प्रशिया सेना के समय से पहले आगमन ने नेपोलियन की रणनीति की उच्चतम गुणवत्ता पर पानी फेर दिया. यदि प्रशिया सेना का आगमन कुछ देर और नहीं हुआ होता, तो शायद इस युद्ध का परिणाम कुछ और होता.

खैर, इस युद्ध ने भले ही नेपोलियन का अंत कर दिया हो, लेकिन उनकी बहादुरी की कहानियां आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुईं हैं.

Web Title: The Battle of Waterloo, Hindi Article

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