उम्मीद है कि इस लेख का पहला और दूसरा भाग आप पढ़ चुके होंगे. इस भाग में हम आपको बतायेंगे कि सपनों के जहाज टाइटैनिक का आखिर कैसे अंत हो गया?

तीन घंटे लगातार सफ़र करने के बाद फिर अचानक जहाज़ के छठे ऑफिसर जेम्स मूडी के फ़ोन की घंटी बजी.

” क्या कोई है वहां ? ”

” हां बोलो? क्या बात है? ”

” बर्फ का पहाड़! ठीक जहाज के आगे है! ”

मूडी ने भागते हुए यह जानकारी मर्डोक तक पहुंचाई. यह खबर सुनते ही मर्डोक सहम से गए, मानो कोई सांप सूंघ गया हो. उनके दिमाग में यह बात तेज़ी से घूमने लगी थी, क्या किया जाये.

It is believed that this is the iceberg with which-Titanic collided

क्वार्टर मास्टर रॉबर्ट हिट्चेंस ने जहाज़ के रुख को तुरंत मोड़ने का आदेश दिया. रोबर्ट ने जहाज़ को बाई ओर मोड़ने और जहाज़ के इंजन को बंद करने के लिए कहा. साथ ही जहाज़  के ऑपरेटर्स को तेजी से पीछे लेने का सन्देश दिया. मगर टाइटैनिक जिस रफ़्तार के साथ आगे बढ़ रहा था, उस तेजी के कारण जहाज़ को वापस पीछे की तरफ लेना में आसान नहीं था. जहाज़ के सेंट्रल टरबाइन को यू अचानक रिवर्स करना लगभग नामुमकिन था. ऊपर से रडार में गड़बड़ी होने के कारण जहाज़ पूरी तरह से नहीं मुड़ पा रहा था. अब महज कुछ सेकंड्स का समय ही बचा था, जो देखते ही देखते खत्म हो गया.

बहुत देर हो चुकी थी. निर्धारित समय में जहाज़ का रुख मोड़ने में वह असफल रहे. टाइटैनिक का पिछला भाग दाहिने तरफ से बर्फ से तेजी से टकरा गया. इसके कारण बर्फीले पहाड़ के छोटे-छोटे टुकड़े नीचे गिरने लगे थे. यह दृश्य देख कर कैप्टेन स्मिथ हैरान थे.

The first and last trip of Titanic through the map

फायरमैन फ्रेडरिक बैरेट छठे बायलर रूम में काम कर रहे थे. तभी उन्हें यह एहसास हुआ, मानो कोई तेज धड़ उनकी ओर बढ़ रहा हो. टाइटैनिक में पानी भरना शुरू हो गया था. देखते-देखते ही सभी बायलर रूम में पानी भर गया. किसी तरह से फ्रेडरिक और उनके कुछ साथी अपनी जान बचाने में कामयाब रहे. दुर्भाग्य से वह ज्यादा समय तक जीवित नहीं बच पाए थे.

प्रथम श्रेणी में आराम फरमा रहे यात्रियों को अचानक जहाज़ के हिलने का आभास हुआ. तीसरी श्रेणी के यात्रियों को सबसे ज्यादा झटका लगा था, जिससे उन्हें यह महसूस हो गया था कि जहाज़ में कोई बड़ी गड़बड़ी हुई है. उसके बाद तीसरी श्रेणी के सभी यात्री अपने-अपने केबिन से बाहर निकलने लगे थे.

मगर पहली श्रेणी के यात्रियों ने इस घटना को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया. कुछ लोग जहाज़ के डेक पर बर्फ के गोले बना कर खेल रहे थे. जैकब एस्टर को इस घटना का आभास हो गया था और उन्होंने तुरंत इस बात की जानकारी अपनी बीवी को दी और तभी जहाज़ आगे बढ़ना रुक गया.

कैप्टेन स्मिथ ने टाइटैनिक के डिज़ाइनर और निर्माता थॉमस अन्द्रेव्स एंड्रयूज को घटना की जानकारी दी. टाइटैनिक में कुल 16 जल प्रतिरोधी डिब्बे थे, जिसमें से 5 डिब्बों में पानी भर चुका था. थॉमस भी यह समझ चुके थे कि बाकी डिब्बों में पानी जल्द ही भर जायेगा, जिसके बाद टाइटैनिक समुद्र में डूबने लगेगा. टाइटैनिक के पास महज 2 घंटे बचे थे, जिसके बाद उसे समुद्र में डूबने से कोई नही बचा सकता था.

Titanic giving signal for help

15 अप्रैल 1912, टाइटैनिक समुद्र में डूबने लगा था. टाइटैनिक के बाकी हिस्सों में पानी बहुत तेजी से भर रहा था. मगर यात्रियों को ऐसा लग रहा था कि दूसरे जहाज़ के आने तक टाइटैनिक नहीं डूबेगा, लेकिन बस कुछ ही सेकंड के बाद उनका यह भ्रम भी टूट गया. जहाज़ का निचला हिस्सा तेजी से डूबने शुरु हो गया था. कुछ ही देर में टाइटैनिक 10 डिग्री एंगल में झुक गया था.

कैप्टेन स्मिथ ने रक्षक नौका को तैनात करने का और रेडियो ऑपरेटर्स को सिग्नल के जरिये सहायता के लिए सन्देश भेजने का आदेश दिया. टाइटैनिक के रेडियो ऑपरेटर्स मोर्स कोड के जरिये संदेश भेजने लगे थे. संदेश था ‘एस.ओ.एस, एस.ओ.एस, सी.क्यू.डी, सी.क्यू.डी- एम.जी.वाई’. इसका मतलब था “जहाज़ तेज़ी से डूब रहा है और यात्रियों को एम.जी.वाई रक्षक नौका के जरिये बाहर निकाला जा रहा है. ऐसा माना जाता है कि टाइटैनिक के संदेश के बाद एक जहाज़ उनकी सहायता के लिए उनके पास गया था, मगर वह भी टाइटैनिक के साथ समुद्र के गर्भ में डूब गया.

जहाज़ के कर्मचारी बाकी सभी यात्रियों को रक्षक नौका के तरफ जाने में मदद कर रहे थे. पहले महिलाओं और बच्चों को नौका में बैठाया गया. नौका को रस्सी से बांध कर नीचे पानी में उतारा गया था, ताकि यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके.

People Leaving the Sinking Titanic through Art

बेंजामिन गुग्गेन्हेइम अपनी पत्नी से अलग थे. उन्हें कुछ यात्रियों ने यह जानकारी दी कि जहाज़ बर्फीले पहाड़ से टकरा गया है. मगर बेंजामिन ने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और अपने केबिन में जाकर सो गए. वहीं नवरातिल अपने दोनों बच्चों के साथ जहाज़ पर इधर-उधर भाग रहे थे.

जहाज़ के कर्मचारियों ने तीसरी श्रेणी से ऊपर आने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए थे, जिसके कारण वहां पानी भरने लगा था. तीसरी श्रेणी के यात्री पानी से बचने के लिए जहाज़ के ऊपरी हिस्सों में जाना चाहते थे, मगर दरवाजे बंद होने के कारण नहीं जा पा रहे थे. इन सब से परेशान हो कर हन्नाह ने अपने हाथ काट कर जहाज़ के कर्मचारियों से पूछा कि क्या उनके खून का रंग प्रथम श्रेणी के यात्रियों से अलग है?

पहली श्रेणी की यात्री होने के कारण इडा स्ट्रॉस को रक्षक नौका में बैठने का मौका मिल गया था. नौका में कदम रखते ही इडा को अपने पति की याद आई और वह अपना निर्णय बदल कर वापस जहाज़ पर चली गई. इडा ने यह कहा था कि पिछले 40 सालों से इडा अपने पति के साथ रह रही है और आगे भी वह दोनों साथ में ही रहेंगे.

Emotional Scene On Titanic

टाइटैनिक का माहौल भावुक हो चुका था. कई महिलाएं ना चाहते हुए भी अपने पति को छोड़कर रक्षक नौका में बैठ गयी थी, तो कई बच्चे अपने पिता को जहाज़ पर देख कर रो रहे थे. बेंजामिन की तरह ही जहाज़ पर कई लोग बच्चों और महिलायों को रक्षक नौका पर ले जाने में मदद कर रहे थे.

इस दुःख के घड़ी में टाइटैनिक के म्यूजिकल बैंड अपने म्यूजिक और संगीत से लोगों का हौसला बढ़ाने में लग गये थे. वाल्लिस हार्टले की अध्यक्षता में जहाज़ के मेन हॉल में म्यूजिक बजता था,  मगर आज वह अपनी टीम के साथ टाइटैनिक के डेक पर बहादुरी दिखाते हुए बाकी यात्रियों का हौसला बढ़ा रहे थे. ऐसा माना जाता है वह टाइटैनिक के अंतिम क्षण तक लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए म्यूजिक बजाते रहे थे. मगर अंत में हार्टले और उनकी टीम टाइटैनिक के साथ-साथ समुद्र में समा गये.

Titanic band in a scene from the Titanic Film

माइकल नवरातिल ने अपने बच्चों को सेफ्टी जैकेट पहना कर रक्षक नौका पर बैठा दिया था. माइकल ने अपने बेटे को अंतिम सन्देश यह दिया था कि, उसकी मां उन्हें जरूर दूंढ़ लेगी. अपने मां से कहना मैं उनसे बहुत प्यार करता था और अभी भी करता हूं. मेरी यह तमन्ना थी कि तुम कभी ना कभी वापस लौट आयोगी और हम सब अपने परिवार के साथ एक साथ रहेंगे. मगर अब यह तमन्ना कभी पूरी नहीं होगी.

समय के साथ-साथ लोग अपनी जान बचाने के लिए उग्र होते जा रहे थे, जो जितना ज्यादा स्वार्थी था, उसे उतनी ही जल्दी थी. वह रात इमानदारों के लिए सबसे ज्यादा काली रात थी. हालांकि, रक्षक नौका पर केवल महिला और बच्चे ही जा रहे थे, मगर इसकी परवाह किये बिना जोसफ इस्मा अपनी पत्नी और सेक्रेटरी के साथ  नौका पर बैठ कर निकल गये थे.

रक्षक नौका मेंं लगभग 40 यात्री जाते थे, मगर जोसफ के नौका पर केवल 12 लोग ही थे. ऐसा माना जाता है नौका पर बैठे लोग कुछ और लोगों को बैठा कर उनकी मदद करना चाहते थे, मगर गॉर्डोन ने ऐसा करने ने मना कर दिया. इस काम के लिए गॉर्डोन ने भारी रिश्वत दी थी. उसे इस बात का डर था कि ज्यादा लोगों के बैठने से यह नौका भी डूब जाती. इसी के साथ यह टाइटैनिक का आखिरी रक्षक नौका थी, जो सही सलामत यात्रियों को बचने में कामयाब रही.

Sinking Titanic

जैकब निश्चिंत होकर सिगरेट का आनंद ले रहे थे, मानो उन्हें मौत का कोई डर नहीं था. इडा और बेंजामिन डेक पर अपनी अंतिम समय के लिए तैयार थे. टाइटैनिक के कैप्टेन स्मिथ जहाज़ पर कहीं नहीं दिख रहे थें. माइकल नवरातिल जहाज़ के कोने से अपनों बच्चों को जाते हुए देख रहे थें, उन्हें यह आभास था कि वह दोबारा एक दूसरे को कभी नहीं देख पाएंगे.

टाइटैनिक से गयी हुई अंतिम नौका टाइटैनिक का आखिरी दृश्य था. टाइटैनिक द्वारा राकेट से संदेश दिया जा रहा था कि शायद कोई जहाज़ मदद के लिए आ जाए, मगर शायद वह टाइटैनिक के अंत का समय था. कोई भी जहाज़ उनकी सहायता के लिए नहीं था. ऐसा माना जाता है कि अचानक आसमान में रौशनी फ़ैल गयी थी, जैसे किसी ने संकेत दिया हो कि वह सहायता के लिए आ रहे थे. मगर क्या यह लोगों का भ्रम था? या सच में कोई जहाज़ आस पास था? इस सवाल का जवाब अब तक नहीं मिल पाया है.

देखते ही देखते टाइटैनिक का अगला हिस्सा समुद्र में 90 डिग्री पर खड़ा हो गया था. जहाज़ का आख़िरी छोर पानी में डूब चुका था और अपने भारी वजन के कारण टाइटैनिक तेजी से समुद्र में डूबने लगा था. जहाज़ में पानी भर जाने के कारण उसका इलेक्ट्रिकल सिस्टम भी ख़राब हो गया था, जिसके बाद चारों तरफ़ बस अंधेरा ही अंधेरा था.

Titanic Propeller in 90 Degree

भारी वजन के कारण टाइटैनिक के दो टुकड़े हो गये थे. जहाज़ का एक हिस्सा पूरी तरह से समुद्र में विलीन हो गया था. वहीं दूसरा हिस्सा भी थोड़ी देर पानी में तैरने के बाद धीरे-धीरे पानी के अंदर जाने लगा था.

रात के 2:30 मिनट का समय था. टाइटैनिक अटलांटिक महासागर की गोद में समाने लगा था और कुछ ही सेकंड में पूरी तरह पानी में डूब गया था. पानी के दबाव के कारण टाइटैनिक का बहुत सा हिस्सा अलग होकर समुद्र में बिखरने लगा था. 40,000 टन का टाइटैनिक महासागर में करोब 15 किलो मीटर दूर बिखर गया था और 3800 मीटर गहराई में जा कर डूब गया था.

Titanic Going down into the Ocean

कुछ समय पहले दुनिया में जहाजों का बादशाह अब नेस्तनाबूद हो गया था. 2 डिग्री से नीचे के तापमान में कई लोग अपनी ज़िन्दगी के लिए जंग लड़ रहे थे. उन्होंने लाख कोशिश की अपनी जान बचने की, मगर जमा देने वाले ठंडे पानी में वह ज्यादा देर तक अपने आप को नहीं बचा सके और अपनी जान गवां दी.

उस पल की अंतिम आवाज, जो किसी ने सुनी थी वह थी, ” हे भगवान! हे भगवान! “

टाइटैनिक के दुर्घटना के बाद कार्पथिया जहाज़ यात्रियों की सहायता के लिए लगभग 4 बजे घटनास्थल पर पंहुचा. हालांकि, अब तक काफी देर हो चुकी थी.

Titanic lifeboat

18 अप्रैल 1912 को कार्पथिया जहाज़ कुछ जिंदा बचे यात्रियों के साथ न्यूयॉर्क पंहुचा. वहां करीबन 40 हज़ार लोग इस जहाज़ का इन्तजार कर रहे थे.

लेकिन तब तक लोग यह समझ चुके थे कि अटलांटिक महासागर में दुनिया के सपनों के जहाज ‘टाइटैनिक’ के साथ-साथ 1500 लोग दफन हो चुके हैं.

तो यह थी दुनिया के सबसे बड़े जहाज टाइटैनिक की पूरी कहानी. हमारी यह पेशकश आपको कैसी लगी, नीचे दिए कमेंट बॉक्स में देना मत भूलियेगा.

Original Article Source / Writer: Roar BanglaMehedi Hasan Nirob

Translated by: Nitesh Kumar

Web Title: The Of Magnificent Titanic, Hindi Article

Keywords: The Of Magnificent Titanic, The history behind the creation of the Titanic,  MMS or Royal Maine Ship Titanic, White Star Line, Cunard Company,  White Star Line’s Olympic Class Ship, Olympics, Titanic and Britannics, 31 March 1909, Titanic, World’s Largest Ship, People Died in Titanic, Atlantic Ocean.

Featured image credit / Facebook open graph: Roar Bangla