एक और एक मिल जायें तो ग्यारह हो जाते हैं!

दुनिया में अगर जोश और होश से काम लिया जाये तो इंसान पहाड़ों को चीर सकता है. दुनिया में एक दूसरे का सहयोग होना बहुत ज़रुरी है. दोस्त को मुश्किल समय में अपने ख़ास दोस्त का साथ न हो तो उसके लिए मंज़िल को पार करना कड़ी चुनौती होती है. ठीक ऐसे ही यह अनूठा साथ ख़ून के रिश्ते में भी होना चाहिये.

अगर दो भाई अपने जोश और से होश से काम लें तो दुनिया में बड़े कारनामें अंजाम दे सकते हैं. आज हम आपको ऐसे ही दो भाईयों के जीवन के बारे में बतायेंगे जिन्होंने एक दूसरे के साथ सहयोग करते हुये ऐसी चीज़ का आविष्कार कर दिया जिसने दुनिया ही बदल डाली.

यह आविष्कार था हवाई जहाज का!

उनके इस आविष्कार ने हज़ारों-लाखों किलोमीटर की दूरी को इतना छोटा कर दिया कि आज पूरी दुनिया में कहीं भी इनके जरिए जाया जा सकता है.

तो चलिए जानते हैं कि आखिर कैसा था इन दोनों भाइयों का सफ़र और कैसे इन्होंने किया हवाई जहाज का आविष्कार–

अटूट प्रेम

जी हां, इन दोनों भाईयों को दुनिया राइट ब्रदर्स के नाम से जानती है. एक भाई का नाम था ऑरविल और एक थे विल्बर राइट. ऑरविल और विल्बर राइट की पैदाइश अमेरिका की है. विल्बर राइट की पैदाइश 16 अप्रैल 1867 में अमेरिका में हुई. ऑरविल ने विल्बर राइट के जन्म के पांच साल बाद दुनिया में 19 अगस्त 1871 में अपनी आंखे खोलीं.

दोनों भाई बचपन से ही काफी शरारती थे. बड़े भाई विल्बर की शरारतें तो इस कदर बढ़ गईं थीं कि उन्हें अपनी शरारतों के कारण स्कूल से कई बार निकाला भी गया. विल्बर से उम्र में पांच साल छोटे ऑरविल अपने भाई के मुकाबले काफी शरीफ थे.

वह इतने शरारती नहीं थे.

हालांकि दोनों भाईयों को बचपन से ही एक दूसरे से अटूट प्यार था. दोनों एक दूसरे के बिना रह नहीं पाते थे. उनका यह प्यार उन्हें आगे चलकर एक अनूठी पहचान दिला देगा… शायद ही दोनों भाईयों ने कभी सोचा हो.

Wright Brother’s (Pic: wikimedia)

बचपन से था चीजें बनाने का शौक!

अमेरिका में जिस उम्र में बच्चे खेल के मैदान में जाकर भागदौड़ करते थे, उस उम्र में दोनों भाई अपने घर के स्टोर में पड़े पुराने सामान के साथ दिन गुज़ारा करते थे. ऑरविल और विल्बर राइट स्कूल से आकर हमेशा ही सीधा अपने घर के स्टोर रूम में जाया करते थे. वहीं पर वह पुरानी चीजों को तोड़ते-जोड़ते थे. बाकी बच्चों से अलग उन्हें न जाने इस काम में क्या मजा आता था.

दोनों भाईयों की इस आदत से उनके माता पिता भी काफी चिंतित थे. हालांकि उनके माता पिता को इस बात का गुमान नहीं था कि उनके बच्चों की स्टोर में पुराने कबाड़ को तलाश करने की गंदी आदत उन्हें एक दिन हवाई जहाज़ के आविष्कार तक ले जायेगी.

बचपन में हुई प्लेन से पहली मुलाक़ात

राइट ब्रदर्स के स्टोर में पुराने गंदे सामान को ढूंढने की आदत से उनके माता पिता काफी चिंतित थे. उनकी यह आदत छुड़ाने के लिए उनके पिता ने उन्हें लकड़ी और कागज़ से बना हुआ एयरप्लेन लाकर दे दिया. पिता की यह तरकीब काम भी कर गई. राइट ब्रदर्स अब घर के पुराने स्टोर से निकलकर घर के पीछे बने आंगन में पहुंच गये थे.

बल्कि यूं कहें कि वह घर के आंगन में नहीं एक आविष्कारक दुनिया में दस्तक दे चुके थे.

दो तीन दिन सब कुछ ठीक रहा, लेकिन एक दिन उनका काग़ज़ और लकड़ी का एयरप्लेन खेलने के दौरान टूट गया. कहते हैं न कि इंसानी ज़रुरत आविष्कारक को जन्म देती है, लेकिन राइट ब्रदर्स के डर ने उन्हें आविष्कार के रास्ते पर ला दिया. खिलौने के रुप में एयरप्लेन टूटने के बाद दोनों भाई डर गये.

उन्हें डर था कि उनके पिता उन्हें डांटेंगे. इसी डर से उन्होंने एयरप्लेन को जोड़ना शुरु कर दिया. बचपन से चीजें जोड़ने का जो शौक उन्हें था वह यहाँ उनके काम आया. दोनों भाईयों ने मिलकर आखिर में वह प्लेन जोड़ ही दिया. कहते हैं कि उस प्लेन को देख के ही उनके अंदर आसमान में उड़ने की इच्छा पैदा होने लगी.

Wooden Toy Plane (Pic: pintrest)

बीच में ही छोड़ दिया था स्कूल

उम्र बढ़ने के साथ राइट ब्रदर्स समझदार होते जा रहे थे.

कुछ समय बाद दोनों भाईयों का दाख़िला स्कूल में हो गया, लेकिन दोनों भाईयों ने हाइस्कूल में आने के बाद पढ़ाई छोड़ दी. राइट ब्रदर्स का पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं था. दोनों भाई हाइस्कूल का डिप्लोमा पूरा किये बिना स्कूल से निकल गये थे. इसके बाद दोनों ने अपना ख़ुद का एक न्यूज़पेपर निकालना शुरु किया.

अपने अखबार में ऑरविल पब्लिशर थे और विल्बर एडिटर थे, लेकिन चार महीने बाद इसमें भी उन्हें नुकसान हुआ और न्यूज़पेपर को बंद करना पड़ा. इसके बाद राइट ब्रदर्स ने अपनी साइकिल रिपेयरिंग कंपनी खोली.

कंपनी का नाम रख़ा गया राइट ब्रदर्स साइकिल कंपनी. कंपनी में दोनों को मुनाफ़ा हुआ और कंपनी काफी साल तक चली. हालांकि इसमें भी थोड़े समय बाद उन्हें नुक्सान ही हुआ और उन्होंने यह कंपनी भी बंद कर दी. वह कुछ ऐसा करना चाहते थे जिसमें उनका दिल लगा रहे मगर उन्हें वैसा कोई काम मिल ही नहीं रहा था. इसके बावजूद भी वह उस काम की तलाश में रहे.

बचपन का शौक़ जवानी में आया काम

राइट ब्रदर्स जो भी काम कर रहे थे उसमें कुछ दिन बाद उन्हें घाटा उठाना पड़ता था. उनके सारे काम फ़ेल हो जा रहे थे. बावजूद इसके वह हिम्मत नहीं हारे. रोचक बात यह है कि उन्हें उनके फ़ेल हुये कामों से ही हवाईजहाज़ बनाने का आइडिया दिमाग में आया.

कहते हैं न कि “जहां चाह है, वहां राह है”.

जानकर ताज्जुब होगा कि अख़बार छापने के काम के दौरान उनके पास कागज़ से उड़ने वाले एयरप्लेन के विज्ञापन आते थे. इससे उन्हें उनके बारे में काफी जानकारी हो गई थी. वहीं साइकिल कंपनी चलाने के दौरान वह एक ईवेंट में गये थे.

वहां एयरप्लेन के आविष्कार करने की बात की जा रही थी, लेकिन उस दौरान वह साइकिल कंपनी चला रहे थे. इसलिए उस इवेंट को उन्होंने इतनी संजीदगी से नहीं लिया और वहां से आ गये. जब उनके सारे कारोबार ठप पड़ गए तब उनके दिमाग में आया कि क्यों न वह भी हवाई जहाज की खोज करें. यही से शुरू हुआ वह सफर जिसने भविष्य में सब कुछ बदल दिया.

शुरू हुआ हवाई जहाज बनाने का सफर

राइट ब्रदर्स ने 1899 में एयरप्लेन बनाने का काम शुरु किया.

हालांकि इससे पहले अमेरिका में कई साइंटिस्ट प्लेन बनाने की जुगत में थे, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती आती थी कि प्लेन का बैलेंस हवा में नहीं बन पाता था. इसलिए ग्लाइडर के रुप उड़ाया जाने वाला लकड़ी और कागज़ का प्लेन कुछ देर हवा में उड़कर टूट जाता था.

दोनों भाइयों ने इस पर काम करना शुरु किया और काफी मशक्कत के बाद ग्लाइडर के दोनों साइड लंबे आकार में पर बना दिये. उनका यह प्रयोग सफल रहा. इससे प्लेन हवा में टिक पा रहा था. इसमें कुछ खामियां जरूर थी मगर उन्हें विश्वास था कि यह एक दिन काम जरूर करेगा.

एक बार प्लेन बनाने के काम में जब दोनों भाई लग गए तो उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. प्लेन बनाने का काम उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल था. इसमें समय भी बहुत लगना था मगर उन्होंने हार नहीं मानी. वह कई सालों तक इस पर काम करते रहे. इन सालों में वह कई बार विफल भी हुए पर उन्होंने कोशिश जारी रखी.

Wright Brothers Started Making Plane (Pic: writebrothers)

…और ‘सालों की मेहनत’ लाई रंग

चौदह साल की अथक मेहनत के बाद दोनों भाईयों ने साल 1903 में अपना पहला एयरप्लेन उड़ाया. इतना ही नहीं बल्कि दोनों भाईयों ने इस प्लेन को उड़ाने के बाद इसकी सफ़ल लैंडिंग भी कराई. बस फिर क्या था, देखते ही देखते दुनिया भर में उनकी इस उपलब्धि की खबर फ़ैल गई. हर कोई राइट ब्रदर्स को देखना चाहता था और उनसे मिलना चाहता था.

दोनों भाईयों ने उसके बाद अपनी मेहनत जारी रखी और हर साल एयरप्लेन को मोडिफाई करते गये. तब कहीं जाकर एयरप्लेन पूरी तरह से विकसित हो पाया. आपको जानकर हैरानी होगी कि दोनों भाईयों ने खुद को एयरप्लेन बनाने के लिए इतना समर्पित कर दिया था कि दोनों भाईयों ने ज़िंदगी में शादी तक नहीं की थी.

राइट ब्रदर्स की इस उपलब्धि के लिए अमेरिकी सरकार ने उनके योगदान के लिए अमेरिका में राइट ब्रदर्स नेश्नल म्यूज़ियम का निर्माण कराया.

Wright Brothers First Plane (Pic: wrightbrothers)

मज़बूत इरादे और नहीं हारने की आदत से दुनिया में सब कुछ हासिल किया जा सकता है. ज़रुरी नहीं कि कुछ नया करने के लिए आपके पास डिग्री हो. राइट ब्रदर्स ने बिना डिग्री हासिल किये दुनिया को हवा में उड़ने वाली मशीन से परिचित करा दिया. यह उनका खुद पर अटूट विश्वास ही था जिसके कारण उन्होंने यह मुकाम हासिल किया.

आप क्या कहते हैं हवाई जहाज के इस सफ़र को, कमेन्ट-बॉक्स में अवश्य बताएं!

Web Title: The Journey Of Wright Brothers, Hindi Article

Featured Image Credit: Young