मेहरूनिसा को जानते हैं आप!

शायद नहीं.

किन्तु, ‘नूरजहां’ का नाम लेते ही जेहन में एक हसीन मुगल शाहजादी की तस्वीर उभर आती है. नूरजहां का दूसरा परिचय यह है कि उन्हें मुगल काल की सबसे ताकतवर महिला के रुप में भी देखा जाता है.

यहां नूरजहां का जिक्र इसलिए हो रहा है, क्योंकि नूरजहां ही मेहरूनिसा थीं’.

अब सवाल यह है कि आखिर वह परिस्थितियां कौन सी थीं कि मेहरुनिसा को नूरजहां बनना पड़ा.

आईए जानने की कोशिश करते हैं–

अकबर के खास थे ‘पिता’

मेहरुनिसा का जन्म 1577 में हुआ था. वह मिर्जा घियास की चौथी संतान थीं, जोकि मुगल शासक अकबर के खास माने जाते थे. अकबर ने उन्हें ‘इतमत-उद-दौला’ की पदवी दे रखी थी. पिता अच्छे पद पर थे, इसलिए मेहरुनिसा का बचपन अच्छा बीता.

मेहरूनिसा 17 साल की थीं, जब उनके शादी शेर अफगान अली कुली खान इस्ताजलु से कर दी गई. उनका पति बहुत बहादुर था. उसका अपने इलाके में खासा दबदबा था. इस लिहाज से मेहरुनिसा की जिंदगी अच्छे से गुजर रही थी. तभी 1607 के आसपास उनके पति का निधन हो गया. यह मेहरूनिसा के लिए बहुत बुरा दौर था. इतना बुरा कि मेहरुनिसा को खुद काम करने की जरूरत आन पड़ी और वह मुगल साम्राज्य की दासी बन गईं.

आगे मुगल शासक अकबर के निधन के बाद उनके उत्तराधिकारी जहांगीर ने गद्दी संभाली, तो मेहरुनिसा को जहांगीर की सौतेली मां रुकैया सुल्ताना बेगम की सेवा करने का मौका मिला.

Mughal Queen Noor Jahan (Pic: Flowers…)

जहांगीर ने बनाया ‘नूरजहां’

आगे के कुछ साल ऐसे ही बीते…

फिर अचानक 1611 के आसपास उनके अच्छे दिन आ गए.

असल में जहांगीर ने एक दिन मेहरुनिसा को देखा. चूंकि, वह देखने में वह बहुत ही सुंदर थी, इसलिए जहांगीर उनके आकर्षण में गिरफ्तार हो गया. वह कितनी खूबसूरत थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कलमकारों ने उन्हें कलमबद्ध किया और उनकी सुंदरता का बखान करते हुए उन पर कई रचनाएं की.

यही नहीं उन पर आधारित टीवी सीरियल भी बनाए गए.

कहते हैं कि शादी के बाद जहाँगीर ने उन्हें खूब प्यार दिया. उन्हें उसने ‘नूरजहां’ कहकर नया नाम दिया. यहां तक कि उसने नूरजहां को अपने शयनकक्ष तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें सरकारी कामकाज के कई अधिकार भी दिए.

इनके चलते वह मुगल काल के शासन में सक्रिय रहने लगीं.

एक कुशल ‘रणनीतिकार’

‘नूरजहां’ केवल सुंदर नहीं, बल्कि चतुर और साहसी भी थीं. कहते हैं कि जहांगीर को नशे की बुरी लत थी, इस कारण शासन में उसकी पकड़ कम होने लगी थी. यह देखकर नूरजहां ने कमान अपने हाथों में ले ली थी.

हालांकि, फ्रंट फुट पर जहांगीर ही रहता था, किन्तु पीछे से सारा कामकाज नूरजहां ही देखती थीं. उनकी बदौलत उस दौर में मुगल शासन के विकास की रफ्तार तेज हुई. फिर चाहे वह महिलाओं के हित के मामले रहे हों या फिर व्यापार-संबधी सुधार के. हर क्षेत्र में नूरजहां की सकारात्मक पहल देखने को मिली.

यह वही दौर था जब नूरजहां के नाम के सिक्के तक जारी किए गए थे.

उनका प्रभाव किस तरह का था, इसका अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि राजनीतिक मसलों तक का हल ‘नूरजहां’ की इजाजत पर होता था. ऐसा कहा जाता है कि जन सुनवाई के दौरान महारानी राजा के बगल में बैठतीं और उनके इशारों पर जहांगीर फैसला सुनाता था.

Mugal Art (Pic: Pinterest)

दुश्मन से लिया लोहा और…

जहांगीर के अंदर अच्छाईयों की बात की जाए, तो उसका उदार होना उसे अन्य मुगल शासकों से अलग करता था. हालांकि, उसकी यही अच्छाई उसके लिए काल भी बनी थी. महाबत नामक एक शख्स ने अपनी बहादुरी से जहांगीर का दिल जीत लिया और मुगल सेना का कमान संभालने लगा.

बाद में उसने मौके का फायदा उठाकर जहांगीर को बंदी बना लिया. किस्मत से ‘नूरजहां’ अपनी बुद्धि के चलते वहां से बच निकलीं. बाद में कुछ दिनों की प्रतीक्षा के बाद ‘नूरजहां’ ने गुरिल्ला आर्मी के जरिए झेलम को पार कर महाबत को मजा चखाया और जहांगीर को आजाद कराया.

इसके बाद नूरजहां ने जहांगीर के दिल में न केवल सुंदरी बल्कि, साहसी होने की छाप छोड़ दी. परिणाम यह रहा कि जहांगीर ने पूरी तरह से अपने साम्राज्य की कमान नूरजहां के हाथों में सौंप दी और 1627 ईस्वी में मौत को प्यारा हो गया.

पति जहांगीर के निधन के बाद, नूरजहां के सौतेले बेटे खुर्रम ने उनके प्रभाव को कम करते हुए, उन्हें उनके महल तक ही सीमित कर दिया. बाद में 1645 के आसपास उन्होंने भी हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर लीं.

जाते-जाते पति की याद में…

अमूमन प्यार की निशानी की बात होती है, तो सबकी जुबान पर ताजमहल का नाम होता है, जिसे मुगल शासक शाहजहां ने ही अपनी पत्नी मुमताज बेगम की याद में बनवाया था.

किन्तु क्या आपको पता है कि उससे पहले भी किसी ने अपने प्यार के लिए एक मकबरा बनवाया था.

जी हां, यहां बात नूरजहां की हो रही है, जिन्होंने जहांगीर की मौत के बाद उनकी याद में एक शानदार मकबरा बनवाया था.  इसके अलावा आगरा में ताज महल के कंस्ट्रक्शन से पहले ‘नूरजहां’ ने अपने पिता मिर्जा घियास बेग की याद में एत्माद उद्दौलाह का मकबरा बनवाया.

वहीं जहांगीर ने भी मरने से पहले ‘नूरजहां’ की याद में एक शानदार महल बनवाया था. वह भी वहां, जहां पर मेहरून्निसा (नूरजहां) का जन्म हुआ था. उन्होंने इस शाही महल का नाम ‘नूरमहल’ रखा था. आज भी वह महल पंजाब के जालंधर, जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.

इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात तो यह है कि कभी लाहौर से दिल्ली जाने का मुख्य मार्ग ‘नूरमहल’ से होकर ही गुजरता था.

Tomb of a Mughal Emperor (Pic: emily…)

तो ये था नूरजहां के मेहरून्निसा से ‘नूरजहां’ बनने तक का सफरनामा, जिसमें उन्होंने जीवन के कई उतार-चढ़ाव देखे, किन्तु कभी हौंसला नहीं हारा. साथ ही अपने साहस और बुद्धि के चलते वह हर एक पड़ाव को पार करने में सफल रहीं.

शायद यही कारण रहा कि उन्हें मुगलकाल की सबसे प्रभावशाली महिला के रूप में देखा जाता है.

इस बारे में आप क्या कहते हैं, कमेन्ट-बॉक्स में अवश्य बताएं.

Web Title: The Most Powerful Mughal Queen Noor Jahan, Hindi Article

Feature Representative Image Credit:Exotic