टाइटैनिक को सपनों का जहाज कहा जाता था, और वास्तव में वह सपनों का जहाज था (पहले भाग में आपने इस बारे में विस्तृत रूप में पढ़ा)10 अप्रैल 1912, सुबह के 9 बजे  लंदन से केवल एक ट्रेन साउथेम्प्टन के वॉटरलू स्टेशन पर पहुंची थी, जिसमें ज्यादातर लोग टाइटैनिक के सफ़र के लिए आये थे.

टाइटैनिक की यात्रा के लिए आये लोगों का हुजूम आम दिनों के मुकाबले स्टेशन पर ज्यादा था. दूर- दूर से लोग साउथेम्प्टन स्टेशन पर अपनी यात्रा के लिए पहुंचे हुए थे. टाइटैनिक का आज पहला समुद्री सफ़र था. टाइटैनिक इंग्लैंड से अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी जाने के लिए तैयार था.

Titanic before the start of the journey to Southampton Duke

इस भीड़ में माइकल नवरातिल अपने दो छोटे बेटों के साथ संघर्ष कर रहे थे. उन्हें अपनी पत्नी से तलाक लिए कुछ ही महीने हुए थे. किसी कारणवश माइकल अपने बच्चों के साथ बहुत ज्यादा समय नहीं बिता पाया था, इसलिए ईस्टर पर अपने बच्चों के साथ समय बिताना उसके लिए बहुत ख़ुशी की बात थी. माइकल ने अपने बच्चों के साथ अमेरिका जाकर ईस्टर मनाने का निर्णय लिया और टाइटैनिक में दूसरी श्रेणी का टिकट भी खरीद लिया था.

टाइटैनिक के कप्तान एडवर्ड जॉन स्मिथ इस समय थोड़े चिंतित से थे. एडवर्ड वाइट स्टार लाइन के वरिष्ठ कप्तान थे. साथ ही वह दुनिया भर में मशहूर थे, इस कारण एडवर्ड को टाइटैनिक का कप्तान बनने का प्रस्ताव दिया गया था. ओलिंपिक जहाज़ की जिम्मेदारी होने के बावजूद वह टाइटैनिक के चीफ ऑफिसर हेनरी वाइल्ड, विलियम मर्डोक और दूसरे अधिकारी चार्ल्स लाइट के साथ शामिल होने के लिए राजी हो गये थे.

Titanic Officer Murdoch, Evans, Alexander and Captain Smith (from left)

तीसरी श्रेणी के यात्री जहाज़ में प्रवेश करने लगे थे. मगर हर एक यात्री की जांच के बाद ही उन्हें टाइटैनिक में प्रवेश करने की अनुमति थी, ताकि किसी भी प्रकार का गैरकानूनी सामान अमेरिका में न पहुंचे, जिससे टाइटैनिक की बदनामी हो या देश की छवि खराब हो. सभी यात्रियों की मेडिकल जांच भी हो रही थी, ताकि जहाज में कोई बीमारी न फ़ैल सके और तीसरी श्रेणी के सभी यात्रियों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना न करना पड़े.

Southampton Dock from Titanic

तीसरी श्रेणी के बहुत से यात्री अपने अच्छे भविष्य के लिए अमेरिका जा रहे थे. वहीं प्रथम श्रेणी के यात्री अब तक जहाज़ पर नहीं पहुंचे थे. उनमें से ज्यादातर लोग इंग्लैंड के नवाब और अमीर परिवार से थे. यह लोग अपने सामान को जहाज तक लाने में व्यस्त थे. सभी सामानों को जहाज़ तक पहुंचाने के लिए भी हजारों लोग लगे हुए थे. मीडिया के लिए सबसे ज्यादा उत्सुकता की बात यह थी कि कैप्टन जॉन स्मिथ प्रथम श्रेणी के केबिन के पास खड़े थे, जो मीडिया को संबोधित करने वाले थे.

टाइटैनिक के सफ़र में महज एक घंटे बचे थे. तीसरी श्रेणी के यात्रियों के बाद पहली और दूसरी श्रेणी के लोग भी जहाज़ पर पहुंच चुके थे. पहली और दूसरी श्रेणी के लोगों को उनके केबिन तक पहुंचा दिया गया था. टाइटैनिक अब हर तरीके से रवाना होने के लिए तैयार था. सभी यात्री टाइटैनिक की रेलिंग पर अपने दोस्त, सम्बन्धी और परिवार के अन्य सदस्यों को अलविदा कहने के लिए खड़े थे.

Southampton Dock is leaving the Titanic

दोपहर के करीब 12 बजे थे और टाइटैनिक का सफ़र शुरू हो गया था. टाइटैनिक साउथेम्प्टन स्टेशन से धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा था. अपने विशाल आकार के कारण टाइटैनिक कई बार गंभीर दुर्घटना से बाल बाल बच पाया था. मगर टाइटैनिक से समुद्र में बने तेज बहाव के कारण आस पास के छोटे ज़हाज पानी में बहने लगे थे. खैर, अंततः टाइटैनिक अपनी मंजिल की ओर बढ़ने लगा.

साउथेम्प्टन को पार कर टाइटैनिक इंग्लिश चैनल की ओर धीरे-धीरे बढ़ने लगा था. तेज हवा के कारण मौसम में हल्की ठण्ड थी, जो कैप्टेन जॉन स्मिथ को काफी पसंद थी. तभी प्रथम ऑफिसर ने मर्डोक को टाइटैनिक की रफ़्तार बढ़ाने का आदेश दिया, ताकि टाइटैनिक अपने समय से पहले ही अमेरिका पहुंचकर सभी यात्रियों और मीडिया को हैरान कर सके.

Passengers are walking on the top of the Titanic

टाइटैनिक शाम की रौशनी में आगे बढ़ रह था. वहीं नीचे पानी में बहुत सी डॉल्फिन्स करतब कर रहीं थीं. इस नज़ारे को देख माइकल नवरातिल के दोनों बच्चे आनंद ले रहे थे. दूसरी ओर एक फोटोग्राफर टाइटैनिक की तस्वीर ले रहा था. असल में यह फोटोग्राफर पादरी फ्रांसिस ब्राउन थे, जो आयरलैंड के क्वीन्सटाउन जा रहे थे. ज्यादा समय न होने के कारण वह ज्यादा तस्वीर नहीं ले पाए. टाइटैनिक की जिम, मार्की रूम, प्रथम श्रेणी में बने भोजनालय गृह की कुछ तस्वीरें फ्रांसिस ने ले ली थी.

Titanic deck

साउथेम्प्टन को पीछे छोड़े करीब 4 घंटे बीत चुके थे. टाइटैनिक चार्बर्ग फ्रेंच पोर्ट पर पहुंच गया था, जहां से कई यात्री टाइटैनिक पर सवार होने वाले थे. मगर इतने बड़े जहाज़ को सही तरीके से बंदरगाह पर रोकने का कोई उपाय न होने के कारण सभी यात्रियों को छोटी नाव के जरिये जहाज़ पर लाया गया. इन छोटी नावों का नाम एस. एस ट्रैफिक और एस. एस नोमेडिक था.

सभी यात्रियों को जहाज़ पर लाने में लगभग 90 मिनट लगे थे. जिसके बाद टाइटैनिक रात के 8 बजे क्वीन्सटाउन के लिए रवाना हो गया था. मौसम और भी ठंडा होता जा रहा था.

11 अप्रैल 1912 को 11 बजे टाइटैनिक आयरलैंड के कॉर्क हार्बर पहुंचा. आसमान में बादल छाए हुए थे, लेकिन फिर भी मौसम काफी गर्म था. यहां भी वही समस्या हुई कि इतने बड़े जहाज़ के ठहराव के लिए कोई उपाय नहीं था. इस बार भी यात्रियों को लेने के लिए नाव का इस्तेमाल करना पड़ा, वहीं फोटोग्राफर फ्रांसिस ब्राउन क्वीन्सटाउन में टाइटैनिक से उतर गये थे. मगर फ्रांसिस वहीं रुककर टाइटैनिक की तस्वीर लेने लगे थे. तब फ्रांसिस ने बहुत सारी तस्वीरें खींची थी, जो इतिहास में टाइटैनिक की आखिरी तस्वीरों में शुमार है. जाहिर है फ्रांसिस को इस बात का जरूर अफ़सोस होगा कि वह टाइटैनिक की और तस्वीरें नहीं ले पाए.

Titanic last photo

माइकल नेविटिला हमेशा अपने दोनों बच्चों का ध्यान रखते थे, लेकिन एक दिन कार्ड खेलने के लिए उन्होंने अपने पास बैठी स्विस महिला लेहमन को बच्चों का ध्यान रखने के लिए कहा था. वास्तव में अगर इस भीड़ में बच्चे अगर कहीं खो जाते तो उन्हें ढूंढना बहुत मुश्किल काम होता.

वहीं हडसन और बेसी अपने बच्चों के साथ व्यस्त थे. पहली श्रेणी के यात्री जब भी अपने केबिन से निकलकर सीढ़ियों से नीचे आते हैं, तो उनकी निगाहें ऊपर की ओर रुक सी जाती है. टाइटैनिक में लगा अद्भुत झूमर सभी के आकर्षण का केंद्र था.

पहली और दूसरी श्रेणी के यात्रियों को मनोरंजन के लिए जो सुविधा दी गयी थी, वह तीसरी श्रेणी के यात्रियों को नहीं मिली थी, लेकिन अपने मनोरंजन के लिए वहां के लोग आपस में ही नाच-गाकर जश्न मनाते थे. टाइटैनिक में खाने पीने के सामान की कोई कमी नहीं थी. पहली श्रेणी के लोग भोजन स्थल पर खाने का इन्तजार कर रहे थे. लगभग 10 से 12 पाउंड्स का भोजन एक समय में इस्तेमाल किया जाता था.

A list of Titanic’s first day meal

तीन दिन के लगातार सफ़र के बाद अचानक टाइटैनिक में एक दुर्घटना हुई. टाइटैनिक के एक हिस्से में आग लग गई थी. हालांकि, जहाजों में आग लगना कोई नई बात नहीं थी. फायरमैन फ्रेडरिक बैरेट ने इस घटना की पूरी जांच की. ऐसी छोटी घटना से कोई बड़ी दुर्घटना भी हो सकती थी. वह तो अच्छा हुआ था, जो इस बात की जानकारी सभी लोगों को नहीं थी.

आयरलैंड पार करने के बाद से आसमान भी साफ होने लगा था. 13 अप्रैल तक का मौसम काफी सुहाना था, लेकिन उसके अगले दिन से ही मौसम का रुख तेज ठंडी हवा और लगभग ढ़ाई फ़ीट ऊंची लहर के साथ बदल चुका था.

Titanic View in The Night Time

14 अप्रैल 1912, टाइटैनिक के सफ़र की 9वीं रात. टाइटैनिक अब अटलांटिक महासागर में काफी दूर तक पहुंच गया था. तभी रात के 1:45 बजे एक सन्देश आया, जिसने टाइटैनिक के अधिकारियों को तनाव में डाल दिया. वह सन्देश ‘बर्ग, ग्रोव्लर्स और क्षेत्रीय बर्फ’ का था. अधिकारियों को यह सन्देश मिला कि बर्फ की एक चट्टान टाइटैनिक के रास्ते में आ रही है. यह बात टाइटैनिक के कैप्टन को भी बताई गयी. कैप्टन ब्रूस ने तुरंत टाइटैनिक को दक्षिण की ओर मोड़ने का आदेश दिया, लेकिन जहाज़ की रफ़्तार पहले जितनी ही थी.

टाइटैनिक के रेडियो विभाग के कर्मचारी जैक पिलिपेस और हेरोल्ड ब्रिज रेडियो में आई गड़बड़ी को ठीक करने में लगे हुए थे. उसी समय एक जर्मन जहाज ‘एस एस अमेरिका’ ने टाइटैनिक जहाज़ को रेडियो सन्देश देकर यह बताया कि टाइटैनिक दो बड़े बर्फ के पहाड़ में बीच से निकलने जा रहा है, जिससे परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रेडियो में गड़बड़ी होने के कारण यह सन्देश उनतक नहीं पहुंच पाया.

Harold Bridges are working in the Morning Room

मगर जैसे-जैसे आसमान साफ़ होता गया, टाइटैनिक के यात्री जहाज़ के चारों तरफ बर्फ देख सकते थे. टाइटैनिक अटलांटिक महासागर की बर्फीली जगह पर पहुंच गया था. तत्कालीन समय में उस जगह की स्थिति पिछले 50 सालों से ज्यादा ख़राब थी.

उसी शाम एस एस ने एक और संदेश कैलिफ़ोर्निया स्थित टाइटैनिक के अधिकारियों को भेजा. सन्देश था ‘तीन बड़े बर्फ के पहाड़’. यह चेतावनी एक बार और टाइटैनिक के अधिकारियों को दी गयी थी. मगर इस बार रेडियो के अधिकारी जैक फिलिप्स और हेरोल्ड ब्रिज ने इस चेतावनी को अनावश्यक समझा और इसे उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया.

रात 10:30 बजे के करीब कैलिफ़ोर्निया ऑफिस के अधिकारी सायरिल एवंस ने टाइटैनिक को एक बार और सावधान करने के लिए संपर्क किया, लेकिन फिल्लिप उस वक्त इतने थक गये थे कि, उन्होंने गुस्से में आकर सायरिल को यह कहकर फ़ोन काट दिया कि वह अभी किसी जरूरी काम में व्यस्त हैं. इसके बाद सायरिल एवंस रेडियो बंद कर सोने चला गया था.

और इसके साथ ही टाइटैनिक को दी गयी यह अंतिम चेतावनी थी. तब टाइटैनिक अटलांटिक महासागर में अकेला जहाज़ था और उसके आस पास कोई भी जहाज़ मौजूद नहीं था, जिससे संपर्क किया जा सके.

टाइटैनिक में एक बहुत ही महत्वपूर्ण चीज़ की कमी थी वह था दूरबीन. अगर दूरबीन होता तो बर्फीले पहाड़ को आसानी से पहचाना जा सकता था. यह सच बात है कि अगर उस वक़्त दूरबीन होता तो शायद आज हमारे बीच टाइटैनिक मौजूद होता. चारों तरफ ऐसा अन्धकार था कि कुछ ख़ास दूर की चीजें नहीं दिख रही थी.

Titanic In Iceberg Areas in The Atlantic Ocean

एक घंटे बाद, रात के लगभग 11:30 बजे फ्रेडरिक और उसके साथी ली को जहाज़ के सामने कुछ धुआं सा दिखा, मगर वह समझ नहीं पाया. चेतावनी के बाद से वह दोनों थोड़े सावधान हो गये थे, जोकि उनके हाव-भाव में भी दिखता था. इस सारी घटनाओं के बाद भी टाइटैनिक 39 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से आगे बढ़ रहा था.

ठीक 9 मिनट बाद 11:39 बजे जहाज के सामने एक बड़ा बर्फ का पहाड़ था और टाइटैनिक उस पहाड़ से महज कुछ सेकंड की दूरी पर ही था!
आगे की कहानी इसके अगले भाग में… हमारी यह पेशकश आपको कैसी लगी? नीचे दिए कमेंंट बॉक्स में बताना मत भूलियेगा.

Original Article Source / Writer: Roar BanglaMehedi Hasan Nirob

Translated by: Nitesh Kumar

Web Title: Titanic’s first voyage: Southampton to New York, Hindi Article

Keywords: The history behind the creation of the Titanic,Titanic’s first voyage: Southampton to New York,   MMS or Royal Maine Ship Titanic, White Star Line, Cunard Company,  White Star Line’s Olympic Class Ship, Olympics, Titanic and Britannics, 31 March 1909, Titanic, World’s Largest Ship, Rose Dawson, Atlantic Ocean, 14 April 1912.

Featured image credit / Facebook open graph: Roar Bangla