ऐलेक्ज़ैन्डर ग्राहम बेल विश्व जगत का वह नाम है, जिन्होंने ‘टेलीफोन’ बनाकर पूरी दुनिया में खुद को स्थापित किया. पर क्या आप जानते हैं कि विज्ञान का यह विद्यार्थी इश्क की क्लास का भी टॉपर रहा है. माबेल हब्बार्ड (जोकि उनकी पत्नी बनीं) के साथ ग्राहम बेल के प्यार के किस्से बहुत मशहूर रहे. तो आईये पढ़ते हैं ऐलेक्ज़ैन्डर ग्राहम बेल की लव स्टाेरी…

ग्राहम बेल की मां के पास सुनने की शक्ति नहीं थी. इस कारण उन्हें बचपन से ही ढेर सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. शायद यही कारण था कि जिन लोगों को सुनाई नहीं देता था, वह उनकी मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे. इसी कड़ी में वह एक ऐसे स्कूल में क्लासेस देने जाते थे, जो पूरी तरह से बहरे बच्चों के लिए समर्पित था. ग्राहम वहां बच्चों को सिखाते थे कि कैसे अपनी इस कमजोरी को वह ताकत बना सकते हैं. यह ग्राहम का ही प्रभाव था कि अमीर घरानों के लोग भी अपनी बच्चों को वहां लेकर आते थे. बेल धीरे-धीरे काफी मशहूर हो चुके थे.

 Alexander Graham Bell (Pic: biography.com)

एक दिन ग्राहम बच्चों के साथ थे, तभी उनकी नज़र एक ऐसे चेहरे पर पड़ी, जिसको ग्राहम ने पहले कभी नहीं देखा था. यह चेहरा था माबेल हब्बार्ड का. ग्राहम की नजरें नहीं हट रही थी, वह टकटकी लगाकर माबेल को देखे जा रहे थे. माबेल बहुत सुंदर थीं. उनकी चमकदार आंखों और यौवन से ग्राहम पूरी तरह से क्लीन बोल्ड हो गए थे. हालांकि, इस बात का एहसास ग्राहम को अभी नहीं था. इसलिए उन्होंने माबेल से कुछ नहीं कहा और पढ़ाई में उनकी मदद करने लगे. इस बीच कुछ दिनों बाद ही ग्राहम को अपनी टेलीफोन की शोध के लिए बाहर जाना पड़ा और उनका स्कूल जाना बन्द हो गया.

इधर ग्राहम की जगह बच्चों के लिए दूसरे शिक्षक की नियुक्ति कर दी गई. ग्राहम की तरह वह हर रोज आती और बच्चों को सिखाती, लेकिन वह ग्राहम की तरह प्रभावशाली नहीं थीं. उसे बच्चे इतना पसंद नहीं करते थे. उन्हें तो अपने लिए ग्राहम ही चाहिए थे. अब ग्राहम अपने शोध के कार्यों में लगे थे, इसलिए उनका आना संभव नहीं था.

माबेल के पिता बहुत अमीर थे, इसलिए उन्होंने तय किया कि वह माबेल को ग्राहम के पास भेजेंगे. ग्राहम से भी बात की गई और माबेल को रवाना कर दिया गया. माबेल जब ग्राहम के पास पहुंती तो वह उन्हें देखकर हैरान थीं. ग्राहम ने अजीब किस्म के कपड़े पहन रखे थे. दाढ़ी भी बड़ी-बड़ी हो गई थी.

असल में वह अपने शोध में इस तरह डूब गये थे कि उनके लिए इन सबके लिए वक्त नहीं था. माबेल को उनका यह रुप बिल्कुल पसंद नहीं आया था, लेकिन उन पर इसका खास फर्क भी नहीं पड़ा. वह तो ग्राहम से शिक्षा लेने के लिए आई थीं. ग्राहम से मुलाकात के बाद तय किया गया कि अगले दिन से ग्राहम उन्हें शिक्षा देंगे.

तय टाइम के हिसाब से ग्राहम और माबेल मिले और शुरु हो गई उनकी क्लासेस. शुरुआती संकोच के बाद धीरे-धीरे दोनों आपस में घुल मिल गए. क्लासेस के दौरान बीच-बीच में वह माबेल की तारीफ करते थे, जिस पर वह मुस्कुराकर मूक स्वीकृति देती थी कि उन्हें अपनी तारीफ सुनना पंसद है.

 Graham Bell With his Wife (Pic: biography.com)

जल्द ही दोनों को महसूस हो गया कि वह एक-दूजे के प्यार में हैं. ऐसे में दोनों के बीच नजदीकियों का बढ़ना स्वभाविक था. ग्राहम का प्यार बहुत बढ़ चुका था, वह माबेल को पत्नी के रुप में देखने लगे थे. लेकिन वह जानते थे कि माबेल को पाना इतना आसान नहीं है. चूंकि माबेल एक अमीर घराने से थीं, इसलिए उनके पिता को इस रिश्ते से आपत्ति हो सकती थी. यह बात ग्राहम को अंदर ही अंदर अपने काम के लिए प्रेरित कर रही थी. क्योंकि उनका काम ही था, जो माबेल को उनकी पत्नी बनवा सकता था.

ग्राहम ने खुद को शोध में पूरी तरह से झोंक दिया था. वह पूरी शिद्दत से टेलीफोन को बनाने में लग गये. जैसे-जैसे समय बीत रहा था, वैसे-वैसे ग्राहम की तेजी भी बढ़ती जा रही थी. आखिरकार वह दिन आ गया, जिसका ग्राहम बेसब्री से इंतजार कर रहे थे.  1874 में वह टेलीफोन का बनाने में सफल हो हुए. ग्राहम के इस आविष्कार ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था. हर तरफ से सिर्फ उनके नाम के ही चर्चे थे.

वह अब माबेल के पिता से उनका हाथ मांग सकते थे. माबेल भी अपने प्यार के बारे में पिता को बता चुकी थीं. नतीजन पिता भी बेल के इस प्रस्ताव को ठुकरा न सके. बेल के दोनों सपने पूरे हो चुके थे. उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था. माना जाता है कि वह सगाई से पहले बहुत नर्वस थे. वह माबेल को एक पत्र में लिखते हैं कि ‘मैं सो नहीं पा रहा हूं. मुझे यह सब एक सपने जैसा लग रहा है. मुझे नींद नहीं आ रही है. मैं सिर्फ तुम्हारे बारे में सोच रहा हूं’. जल्द ही माबेल और ग्राहम की सगाई हो गई. अब वह महज एक कदम दूर थे पति-पत्नी बनने में.

सगाई के बाद शादी के लिए दोनों ने लगभग दो साल का इंतजार किया. असल में ग्राहम अपनी कंपनी खड़ी करने के बाद शादी करना चाहते थे. इसी कड़ी में उन्होंंने 1877 में अपनी पहली टेलीफोन कंपनी बनाई और फिर शादी के लिए आगे बढ़े. इसके कुछ दिनों बाद दोनों ने शादी कर ली थी. शादी के बाद दोनों की जिंदगी में सिर्फ खुशियां ही खुशियां थी. माबेल दो खूबसूरत बच्चोंं की मांं भी बनीं.

Alexander Graham Bell with his family (Pic: nationalgeographic.com)

वक्त के साथ-साथ दोनों की उम्र भी बढ़ी. इसी दौरान ग्राहम को मधुमेह (सुगर) जैसी बीमारी ने पकड़ लिया. इस कारण वह बहुत बीमार रहने लगे. वह जीवन के आखिरी पड़ाव पर थे. ऐसे में माबेल का प्यार और समर्पण देखने लायक था. वह दिन रात उनकी सेवा में लगी रहती और बार-बार रोते हुए कहती रहती कि ग्राहम तुम्हें मैं कुछ नहीं होने दूंगी. तुम मुझे अकेले छोड़कर कहीं नहीं जा सकते. पर नियति को कुछ और मंजूर था. एक रोज ग्राहम ज्यादा बीमार हो गए और फिर हमेशा के लिए अपनी आंखें बंद कर ली.

ग्राहम के जाने के बाद माबेल टूट चुकी थीं. अब अपनी बच्चियों के अलावा उनके पास जीने की कोई दूसरी वजह नहीं बची थी. कुछ वक्त बाद वह भी ग्राहम के पास चली गईं.

आज के दौर में तेजी से बढ़ते नफरत और द्वेष के प्रकोप से बचने के लिए ग्राहम और माबेल की यह प्रेम कहानी संजीवनी हो सकती है. बशर्ते इसमें निहित समर्पण, स्नेह और लगन के भाव को हम अपने अंदर उतारने में कामयाब हों तब!

Web Title: Untold Love Story Of Alexander Graham Bell, Hindi Article

Keywords: Telephone, Mobile, Love, Love Story, Graham Bell, Romance, Invention, National Geographic, Sound Waves, Science

Featured image credit / Facebook open graph: bigeyedwish.com