साथ छोड़ने वालों को तो एक बहाना चाहिए,
वरना निभाने वाले तो मौत के दरवाज़े तक साथ नहीं छोड़ते…

किसी की लिखी हुई ये पंक्तियां उन प्रेमी जोड़ों पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं, जो अपने प्यार में फना हो गए. वैसे भी दुनिया में दो प्यार करने वालों के रास्तें कभी आसान नहीं रहे हैं. लगभग हर प्रेमी जोड़े को अपने प्यार को परवान चढ़ाने के लिए, आग का दरिया पार करनी ही पड़ा.

इस कोशिश में कई बार दो प्यार करने वालों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है.

इतिहास के पन्नों में ऐसे लाखों प्रेमी जोड़ों के किस्से मौजूद हैं, जो दुनिया में एक साथ ‘जी’ तो न सके, किन्तु साथ मरकर अपने प्यार को अमर जरूर कर दिया.

पंजाब के सोहनी- महिवाल की प्रेम कहानी भी कुछ ऐसी है.

तो आईए जानते हैं कि आखिर क्यों उनका प्यार परवान नहीं चढ़ सका-

सोहनी-महिवाल की पहली मुलाकात

सोहनी-महिवाल की प्रेम कहानी की असली जड़ें, आज भी पाकिस्तान में दफ़न हैं. पाकिस्तान में स्थित गुजरात के एक छोटे से गांव में सोहनी का कुम्हार परिवार में जन्म हुआ था. सोहनी के पिता तुल्हा मिट्टी से बर्तन तैयार करते थे. सोहनी इस काम में अपने पिता का हाथ बटाती थी.

साथ ही तैयार हुए माटी के बर्तनों में अपने हाथों से सुंदर कलाकृतियां बनाती थी. माना जाता है कि सोहनी जिस तरह से बर्तनों को सजाती थी, वह खुद भी उतनी ही सुंदर और बेहद शांत स्वभाव की थी. एक दिन वह अपने पिता के साथ दुकान पर तभी, शहजादे इज्जत बेग की नज़र उन पर पड़ी. चूंकि, सोहनी देखने में बहुत सुंदर थी, इसलिए शहज़ादे उन पर अपना दिल हार बैठा.

बताते चलें कि इज्ज़त बेग ही महिवाल था, जो बाद में सोहनी की मोहब्बत में महिवाल बन गया.

Sohni Mahiwal Love Story (Representative Pic: thearthopper)

सोहनी के लिए महिवाल बना नौकर

सच्ची मोहब्बत में इंसान क्या-क्या नहीं करता. अपने प्यार को पाने के लिए इंसान दुनिया के सारी सुविधाएं छोड़ देता है. ठीक इसी तरह उज़्बेकिस्तान बुखारा के शहज़ादे इज्ज़त बेग ने सोहनी को पाने के लिए महलों की शाही ज़िंदगी छोड़ गांव की धूल में रहना पसंद किया.

चूंकि, शहज़ादे को पहली नज़र में ही सोहनी से मोहब्बत हो गई, इसिलए उसने अपने साथियों के साथ सोहनी के गांव में डेरा डाल लिया. वह रोज़ दुकान पर मटके खरीदने के बहाने जाता और सोहनी को निहारता.

इधर, सोहनी भी शहज़ादे को दिल दे बैठी और दोनों को एक दूसरे से मोहब्बत हो गई.

सोहनी के पास ज्यादा वक्त बिता सके, इसके लिए शाहजादे ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए सोहनी के पिता से अनुरोध किया कि वह उसे कोई काम दे दे. इस पर सोहनी के पिता तुल्हा ने उसे अपने पालतू जानवर चराने के लिए रख लिया.

अब चूंकि, उस समय पंजाब में जानवर चराने वालों को महिवाल के नाम से जाना जाता है, इसलिए शहज़ादा इज्ज़त बेग महिवाल के नाम से मशहूर हो गया.

सोहनी की शादी की खबर तोड़ा सपना

असल में शहज़ादे को यकीन था कि वह एक दिन सोहनी को पा लेगा और फिर दोनों हंसी खुशी रहने लगेंगे. मगर प्यार में जब तक इम्तिहान न हो, तो वह प्यार नहीं होता.

महिवाल और सोहनी की ज़िंदगी में तब तूफान आ गया, जब सोहनी के पिता तुल्हा ने सोहनी की शादी गांव के किसी और कुम्हार लड़के के साथ करने का फैसला किया.

यह सुनकर सोहनी- महिवाल की प्यार की दुनिया के ख़्वाब एकदम चकनाचूर हो गए.

माना जाता है कि उस दौरान कुम्हार जाति के लोग अपने बच्चों का ब्याह कुम्हार जाति में ही करते थे. यह भी कहा जाता है कि तब लोग एक ही गांव में ही अपने बच्चों की शादी करते थे, ताकि उनके बच्चे उनकी नजरों के सामने रहें.

एक मत यह भी था कि सोहनी-महिवाल की मोहब्बत कि भनक सोहनी के परिवार वालों को लग गई थी. इसी उन्होंने सोहनी की शादी ज़बरदस्ती किसी दूसरे लड़के से करने का फैसला किया था.

खैर, कारण कुछ भी रहे हो सच को यह था कि सोहनी की शादी किसी और से तय हो चुकी थी. अगले कुछ ही दिनों में जिस लड़की को महिवाल तहे दिल से चाहता था, उसकी डोली सजकर किसी और के घर विदा हो रही थी.

Sohni Mahiwal Love (Representative Pic: Pinterest)

शादी के बाद भी नहीं कम हुआ प्रेम

सोहनी की शादी होने के बाद महिवाल का रो-रो कर बुरा हाल था. वहीं सोहनी भी अपने महिवाल से दूर रहकर बैचेन थी. सोहनी की शादी किसी और से होने के बाद भी महिवाल किसी भी कीमत पर सोहनी को अपना बनाना चाहता था. हालांकि, उसे पता था कि यह आसान नहीं है.

सोहनी की याद में महिवाल फ़कीर बन गया और गांव- गांव भटकने लगा.

कहते हैं न कि मोहब्बत अगर सच्ची हो तो, एक न एक दिन दो प्यार करने वालों को मिला ही देती है. सोहनी- महिवाल के रास्ते भले ही अलग हो गये थे, लेकिन किस्मत ने उनकी मंज़िल शायद एक ही लिख रखी थी.

शायद इसलिए शादी के बाद सोहनी-महिवाल एक बार फिर से मिले. इस मुलाक़ात के बाद दोनों के दिल में छुपा प्यार भी सामने आ गया. दोनों ने घर वालों से छिपकर मिलने का फैसला किया.

महिवाल चैनाब दरिया के दूसरे किनारे पर रात को पेड़ के नीचे सोहनी का इंतज़ार करता और सोहनी रात के अंधेरे में पानी के मटके के सहारे महिवाल से मिलने जाती. दोनों अपने गुज़रे मोहब्बत के ज़माने को याद करते और पेड़ के नीचे रात गुज़ारते.

अचानक एक दिन सोहनी की भाभी को इस बात की भनक लग गई कि सोहनी पानी के मटके का सहारा लेकर दरिया के पार महिवाल से मिलने जाती है. सोहनी की भाभी ने सोहनी की सास को इस हरक़त के बारे में बताया.

आगे जो हुआ वह हमेशा के लिये यादगार बनकर रह गया.

सोहनी की भाभी बन गई विलेन!

सोहनी-महिवाल हर रोज़ चैनाब नदी के किनारे मिलते थे और ख़्वाबों की दुनिया में घंटो खो जाते थे. दोनों इस बात से बेख़बर थे कि उन्हें दोबारा अलग करने के लिए सोहनी की भाभी और उसकी सास बड़ी साजिश रच रहे हैं.

सोहनी की भाभी और सास ने सोहनी के पति को उसकी शिक़ायत करने की बजाए सोहनी को मारने का इरादा कर लिया था. उन्होंने सोहनी के उस मटके को छुपा दिया, जिसके सहारे वह महिवाल से मिलने के लिए चैनाब नदी को पार करती थी.

उसकी जगह उन्होंने एक कमजोर मटका रख दिया. इस बात से बेख़बर सोहनी जब मटका लेकर रात को महिवाल से मिलने के लिए चैनाब नदी में तैरने के लिए उतरी, तो बीच नदी में वह कमज़ोर मटका टूट गया. इस कारण सोहनी तेज़ लहरों में बहकर चैनाब नदी में डूब गई.

इधर, सोहनी के नहीं पहुंचने पर महिवाल ने चैनाब की तेज़ लहरों में कूदकर जान दे दी.

बाद में दोनों की लाशें दूर नदी में मिली. इस घटना से चारों तरफ सन्नाटा छा गया था. दुनिया में दोनों एक दूजे के नहीं हुए, पर मरने के बाद दोनों की लाश एक दूसरे से चिपकी पड़ी थी.

खैर, इस तरह वह प्यार करने वालों के लिए मिसाल बन गए. यही कारण है कि दोनों की याद में शाहदापुर में एक मज़ार भी बनी हुई है, जहां प्रेमी जोड़े पहुंचकर उन्हें याद करते हैं.

Movie on Sohni and Mahiwal (Pic: Red Chillies)

इसी क्रम  में इस प्रेमी जोड़े पर 1984 में भारतीय सिनेमा ने सोहनी-महिवाल नाम की एक फिल्म भी बनाई थी, जिसमें सनी देओल और पूनम ढिल्लन की जोड़ी को सोहनी-महिवाल के रूप में लोगों ने काफी सराहा था.

Web Title: Untold Love Story of Soni and Mahiwal, Hindi Article

Feature Image Credit: Top1status