युद्ध आज से नहीं बल्कि हजारों सालों से चलता आ रहा है. इतिहास के किसी भी काल की बात की जाए तो हर काल में कोई ना कोई ऐसा युद्ध रहा जो यादगार बन गया.

इसी कड़ी में किसी भी युद्ध को लड़ने के लिए आदमी और हथियार की जरूरत पड़ती ही है. बिना हथियार और कौशल के कोई भी युद्ध जीतना मुश्किल होता है.

वैसे तो आज दुनिया ने इतनी तरक्की कर ली है कि आज एक से बढ़कर एक हथियार हैं मगर प्राचीन समय की बात की जाए तो उस समय के हथियार आज की तरह आधुनिक नहीं हुआ करते थे.

जैसे ही हम बात करते हैं प्राचीन समय की तो हमारे ध्यान में एक ही तरह के हथियारों की याद आती है… जैसे- तलवार, भाले, धनुष… पर प्राचीन समय में और भी कई तरह के हथियार हुआ करते थे जिन्हें हम भूल चुके हैं.

आज हम आपको प्राचीन समय के कुछ ऐसे ही हथियारों के बारे में बताने जा रहे हैं–

कटार

कटार प्राचीन भारतीय हथियार है जो देखने में एक खंजर की तरह लगता था. इसको इस प्रकार से बनाया जाता था कि यह आराम से मुट्ठी से पकड़ा जा सके. यह छोटा था मगर इसे इतना दमदार बनाया जाता था कि किसी भी व्यक्ति को बुरी तरह से घायल कर सके.

इसकी सबसे ज्यादा खास बात यह थी कि यह छोटा होता था और हाथों में आराम से आ सकता था.

अक्सर दुश्मन को दिखाई नहीं देता था यह, इसलिए इसका वार उसे चौंका देता था. इतना ही नहीं इसको इस्तेमाल करना भी बहुत आसान होता था.

कटार की धार को इतना तेज किया जाता था कि एक बार में ही किसी को भी इससे घायल किया जा सके.

कटार इस्तेमाल करने वाला हर व्यक्ति अपने कटार को अपने हिसाब से ही बनवाया करता था. इस हथियार के बारे में कोई सटीक जानाकरी तो नहीं मिलती पर माना जाता है कि यह 17 वीं से 18वीं सदी के बीच अविष्कार किया गया था.
भारत में मुगलों के शासन में इसका इस्तेमाल काफी देखा गया था. इसको कई अलग-अलग धातुओं से बनाया जाता था जैसे लोहा, चांदी, सोना, आदि.

Katar (Pic: look4ward)

नेस्ट ऑफ़ बीज

माना जाता है की नेस्ट ऑफ़ बीज की शुरूआत चीन से हुई थी. यह देखने में साधारण सा लगता है पर पुराने समय के युद्ध के लिए यह बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता था.

नेस्ट ऑफ़ बीज में एक बार में कम से कम 32तीर लगाए जा सकते थे. यह एक बारी में ही उन सभी तीरों को छोड़ देता था. इससे इतने तीर निकलते थे कि कोई एक तो दुश्मन पर लग ही जाता था.

इससे एक ही बार में कई दुश्मनों को मारा जा सकता था. यह और भी खतरनाक जब हो जाया करता था जब इन तीर पर आग या जहर लगा के किसी पर छोड़ा जाता था. इसके कारण दुश्मन की मरने की संभावना दोगुनी हो जाती थी.

नेस्ट ऑफ़ बीज का इतिहास भी बहुत पुराना रहा है. शुरूआत में इसका इस्तेमाल मूस राजवंश में व्यापक रूप से किया गया. इसके बाद 11वीं शताब्दी में इन हथियारों का इस्तेमाल अधिक मात्रा में किया जाने लाग था.

चीन इसका इस्तेमाल आतशबाजी रॉकेट की तरह से करता था. इनमें आग लगा के वह दुश्मन को भारी मात्रा में चोटिल कर देते थे.

Nest of Bees (Pic: quora)

क्रॉसबो

क्रॉसबो को ‘चू को नू’ भी कहा जाता है!

माना जाता है कि क्रॉसबो का आविष्कार 5वीं शताब्दी में किया गया था. इसकी शुरुआत मध्य एशिया में हुई थी और वहां से यह धीरे-धीरे यूरोप तक पहुँच गया था.

इसको इस तरह से डिजाइन किया गया था कि इसे चलाना बिलकुल भी मुश्किल न लगे और इसका निशाना भी सटीक लगे. इसे एक ऐसा व्यक्ति भी चला सकता था जिसे भारी हथियार उठाने की आदत न हो. यह हर आम आदमी के लिए हथियार था.

इतिहासकारों का मानना है कि इसका आविष्कार 400 ईसा पूर्व चीन या मध्य एशिया के पड़ोसी क्षेत्रों में किया गया था. हालांकि अभी भी पक्का नहीं है कि यह पहली बार कब आया था.

इसका आविष्कार किसी ने भी किया हो, मगर इसके जरिए बहुत से लोगों ने अपनी जान बचाई थी. कितनी ही जंगों में इसका इस्तेमाल किया गया था. कितने ही लोगों ने अपनी रक्षा के लिए इसका इस्तेमाल किया.

आज तो यह कहीं भी देखने को मिलते ही नहीं.

Repeating Crossbow (Pic: instructables)

चक्रम

चक्रम एक भारतीय पंरपरागत हथियार है.

माना जाता है कि इस हथियार का प्रयोग उत्तर भारत के सिखों द्वारा सैकड़ों वर्षों तक किया गया था. इस तरह के हथियारों का जिक्र प्राचीन ग्रीस में भी पाया जाता है.

यह एक सपाट धातु से बनाया जाता था जो आमतौर पर स्टील की तरह मजबूत और हल्का हुआ करता था.

हालांकि इनको पीतल और कुछ अन्य धातुओं में भी देखा गया है.

यह पूरी तरह से गोल होता है और इसके बाहरी किनारों की धार काफी तेज हुआ करती है. इस तरह के हथियार के आकार की बात की जाए तो इसका व्यास 5 से 12 इंच तक पाया गया है.

यह प्राचीन समय में काफी खास माना जाता था, इसलिए इनको चांदी और सोने से सजावट करके बनाया जाता था.

इन्हें हाथ से इस्तेमाल किया जाता था. इसको पकड़ने के लिए अंगूठे और तर्जनी अंगुली का प्रयोग होता था. इसे किसी गेंद की तरह अपने दुश्मन पर फेंका जाता था. 50 से 100 गज तक की दूरी में यह दुश्मन पर अगर लग जाता तो उसे गहरी चोट आना लाज़मी था.

यही कारण है कि छोटी दूरी की लड़ाईयों में इन्हें खूब इस्तेमाल किया गया.

Chakram (Pic: dndbeyond)

हूँगा मूंगा

हूँगा मूंगा हथियार की बात की जाए तो इस हथियार का इतिहास हजारों साल से भी पुराना रहा है. यह हथियार लगभग 750 ईसा पूर्व से 43 ईस्वी के आसपास का माना जाता है.

प्राचीन समय में इस तरह के हथियारों को लोहे से बनाया जाता था.

यह बहुत ही खतरनाक हथियार होता था, क्योंकि इसे कई तरह से इस्तेमाल किया जा सकता था. इससे मारने पर यह सुनिश्चित हो जाता था कि सामने वाला गंभीर रूप से घयाल हो जाए.

यही कारण है कि कई सालों तक इसका इस्तेमाल होता था, वह भी सिर्फ जंग पर नहीं बल्कि शिकार के लिए भी.

Kpinga (Pic: imgur)

हुक स्वोर्ड्स

प्राचीन समय में कुछ खतरनाक लड़ाकों के पास ही यह दिखाई देते थे. देखने में यह हथियार एक तलवार की तरह होता है पर इसमें कुछ छोटे-छोटे बदलाव होते हैं.

यह हथियार एक जोड़े में आता था इसलिए इन्हें हुक स्वोर्ड्स कहा जाता था. यह नीचे से एक हुक की तरह घुमावदार होता है और इसकी तेज धार होती है.

इसका सबसे बड़ा फायदा यह था कि यह दोनों हाथों में होता था. एक हाथ के वार से अगर कोई बच भी जाए तो दूसरे हाथ से वह मारा ही जाता था.

Hook Sword (Pic: allempires)

मॉर्निंग स्टार वेपन

मॉर्निंग स्टार मध्यकालीन युग का एक हथियार है. यह पुरी तरह से ठोस लोहे का होता है जिसके आखिर के हिस्से में कांटे वाली एक गेंद होती है. इस हथियार से कई तरह से लड़ा जा सकता था. इसकी सबसे बड़ी ख़ूबी थी की इसके जरिए दूर से ही दुश्मन पर हमला किया जा सकता था.

दुश्मन को मारने या घाव देने के लिए यह काम में लाया जाता था. इसके जरिए ताकत से किया हुआ हमला अच्छे खासे पहलवान को घुटनों पर लाने के लिए काफी होता था. अगर इसका इस्तेमाल सही से किया जाए तो ढाल लिया हुआ व्यक्ति भी इसके आगे कुछ न कर पाए.

माना जाता है कि 1302 के आसपास बैटल ऑफ़ द गोल्डन स्पर्स के दौरान फ्रांसीसी शूरवीरों के खिलाफ इसका उपयोग किया गया था. इस हथियार को पैदल सैनिकों द्वारा ज्यादा इस्तेमाल किया जाता था.

Morning Star Weapon (Pic: tortugatrading)

ट्रेबुचेत

मध्ययुगीन के समय में ट्रेबुचेत नाम के इस हथियार का बहुत खौफ था. इस हथियार से 250 मीटर से अधिक दूरी पर बड़े पत्थरों को फेंकने का काम किया जाता था.

यह एक प्रकार की मशीन की तरह हुआ करता था. इसमें पत्थरों को भर के सेनाओं के ऊपर फेंक दिया जाता था. ऐसा करने से कई सैनिक एक साथ घायल हो जाया करते थे.

इस हथियार का इतिहास भी बहुत पुराना रहा है. कहते हैं कि इसका आविष्कार सबसे पहले 5वीं सदी में चीन में किया गया था.

इसे उस समय की तोप कहना लगत नहीं होगा. इसमें बारूद तो इस्तेमाल नहीं होता था मगर इसकी ताकत तोप के गोले से कम नहीं थी.

हजारों सैनिकों के ऊपर जब यह पत्थर फेंकता था तो अपने आप ही दुश्मन सेना की पूरी टुकड़ी बिखर जाती थी. इसके बाद उन पर हमला करना आसान हो जाता था.

Trebuchet (Pic: commons)

बारूद के आविष्कार के बाद से जब से हथियार बनने लगे तो इन प्राचीन हथियारों की अहमियत ख़त्म होने लगी. वक़्त के साथ-साथ आज तो इन्हें कोई देखता भी नहीं है.

हाँ मगर हमें कभी भी इन्हें भूलना नहीं चाहिए. यही वह हथियार थे जिनके इस्तेमाल से हमारे पूर्वजों ने कई महान जंग जीती थीं.

Web Title: Weapons of Ancient Times, Hindi Article

Feature Representative Image Credit: mein-mmo