आज कई देशों में क्रिकेट की खुमारी देखने को मिलती है, खासकर भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में तो क्रिकेट संस्कृति ही बन चुका है.

ऐसे में समय के साथ क्रिकेट में भी काफी बदलाव हुआ है. पहले टेस्ट मैच, वनडे मैच और फटाफट टी-20 क्रिकेट ने इसके रोमांच को और बढ़ा दिया है. साथ ही क्रिकेट बिना कमेंट्री एक म्यूट फिल्म जैसा दिखता है. ऐसे में कमेंटेटरों ने भी क्रिकेट और उसके आकार को काफी हद तक बढ़ाया है.

कई बार किक्रेट कमेंट्री सुनते हुए हमें ऐसे शब्द सुनने को मिलते हैं जो सुनने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन हमें इनका मतलब पता नहीं होता, मसलन डक और काऊ कॉर्नर.

फिलहाल आज हम ‘डक’ शब्द के बारे में बात करेंगे, ये कैसे क्रिकेट में आया और उसका इस्तेमाल क्रिकेटरों के जीरो रन पर आउट होने पर ही क्यों किया जाता है..?

तो चलिए जानते हैं आखिर ‘डक’ क्रिकेट की दुनिया में इतना प्रचलित कैसे हो गया –

क्या हैं ‘डक’ के मायने..?

‘डक’ यानी ‘शून्य’!

मैच के दौरान अपनी पारी में बल्लेबाज़ जब खाता खोले बिना आउट होता है, तो उसके लिए ये काफी शर्मिंदगी का पल होता है. इसलिए कमेंटेटर शून्य पर आउट होने वाले बल्लेबाज़ को ‘डक’ आउट कहते थे, और इसे ही आजकल क्रिकेट की भाषा में ‘डक‘ कहा जाता है.

इसके अलावा क्रिकेट में अलग-अलग स्थिति में शून्य पर आउट होने को विभिन्न प्रकार के डक आउट करार दिया जाता है.

इससे पहले कि हम क्रिकेट में डक शब्द के इतिहास को टटोलें, यह जानना दिलचस्प रहेगा कि इसका प्रयोग आखिर कब और कैसे किया गया.

बतख के अंडे से बना डक!

क्रिकेट में ‘डक’ शब्द का प्रयोग बतख़ के अंडे के आकार से शुरू हुआ है.

असल में 0 का आकार बतख के अंडे के समान होता है. इसलिए जीरो या शून्य पर आउट होने वाले खिलाड़ी के लिए वास्तविक तौर पर ‘बतख का अंडा आउट‘ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था, जो समय के साथ छोटा होता गया और आज इसे केवल ‘डक’ कहा जाता है.

वहीं, माना जाता है कि 17 जुलाई 1866 को एक मैच के दौरान प्रिंस ऑफ वेल्स बिना रन जोड़े जीरो पर आउट होकर पवेलियन लौट गए थे. जिसके बाद एक अखबार ने खबर प्रकाशित की, जिसमें लिखा गया कि राजकुमार ‘बतख के अंडे‘ पर सवार होकर रॉयल पवेलियन लौट गए.

अखबार का मतलब साफ था कि प्रिंस शून्य रन पर आउट हुए हैं, इसके तुरंत बाद ‘डक’ शब्द प्रसिद्ध हो गया और कई अन्य अखबारों द्वारा इस्तेमाल किया जाने लगा.

Duck Out in Cricket. (Pic: flickr)

बिना गेंद खेले आउट होना ‘डायमंड डक’

डायमंड डक शून्य पर आउट होने के मामले में सबसे ऊंची उपाधि है.

मैच में जब कोई बल्लेबाज़ बिना गेंद का सामना किए ही आउट हो जाता है, तब उसे डायमंड डक कहा जाता है.

आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई बल्लेबाज़ बिना गेंद खेले आउट हो जाए. हम बताते हैं क्रिकेट में ऐसा तब होता है जब बल्लेबाज़ रन आउट होता है.

असल में जब गेंद खेलने वाला बल्लेबाज़ रन लेने के लिए दौड़ लगाता है तो नॉन स्ट्राइक पर खड़ा बल्लेबाज़ विकेट स्ट्राइक एंड पर रन करने के लिए भागता है. ऐसे में फील्डर गेंद विकेटकीपर को फेंके और विकेटकीपर बल्लेबाज़ को रनआउट कर दे तब वह गोल्डन डक कहलाता है.

Run Out. (Pic: SportzWiki)

ओपनर का आउट होना ‘रॉयल डक’

डायमंड डक के बाद बारी आती है ‘रॉयल डक‘ की. ‘रॉयल डक’ अमूमन ओपनर बल्लेबाज़ के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ‘रॉयल डक’ को ‘प्लेटीनम डक’ भी कहा जाता है. जब किसी भी टीम का ओपनिंग बल्लेबाज़ मैच की पहली गेंद पर अपना विकेट गंवा देता है तो कमेंटेटर इसे ‘रॉयल डक’ के नाम से पुकारते हैं.

मैच की पहली पारी की पहली गेंद पर आउट होने की बात हो या फिर लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम का ओपनिंग बल्लेबाज़ गेंदबाज़ के पहले ओवर की पहली गेंद पर आउट होता है, तब भी वह ‘रॉयल डक’ की श्रेणी में आता है.

Rohit Sharma Bowled. (Pic: Raman Gupta)

पहली गेंद पर आउट होना ‘गोल्डन डक’

जब बल्लेबाज़ अपनी पारी की पहली ही गेंद पर आउट हो जाता है, तो उसे ‘गोल्डन डक‘ कहा जाता है. किसी भी बल्लेबाज़ के लिए यह काफी शर्मनाक पल होता है कि वह मैच की पहली ही गेंद या फिर अपनी पारी की पहली ही गेंद का सामना करते हुए अपना विकेट गेंदबाज़ को दे बैठे.

ऐसी स्थिति में कमेंट्री बॉक्स में बैठे कमेंटेटर बल्लेबाज़ को गोल्डन डक पर आउट होने वाला बल्लेबाज़ करार करते हैं. कई बार बल्लेबाज़ मैच की बहुत अच्छी गेंद पर नहीं चाहते हुए भी विकेट गंवा देता है, तो कई बार मैच ऐसी स्थिति में होता है कि बल्लेबाज़ को आने वाली गेंद पर रिस्क लेना ज़रूरी होता है. ऐसी स्थिति में अक्सर अंतिम ओवरों में टीम को जीत दिलाने के फेर में बल्लेबाज़ ‘गोल्डन डक’ पर आउट हो जाता है.

जानकर हैरानी होगी कि भारत के सफल कप्तानों में शुमार किए जाने वाले कैप्टन कूल एमएस धोनी बांग्लादेश के खिलाफ अपने पहले ही मैच में गोल्डन डक हुए थे. भारत को दो वर्ल्ड कप जिताने वाले माही के नाम यह अनचाहा रिकार्ड भी शामिल है.

Batsmen bold in cricket (pic: wallpapers)

बल्लेबाज़ जिनके नाम है ‘डक’ आउट होने का रिकाॅर्ड

कोई भी खिलाड़ी ‘डक’ आउट नहीं होना चाहता, खासकर इंटरनेशनल मैच के दौरान डक आउट होने वाले बल्लेबाज़ को पवेलियन लौटने के दौरान काफी शर्म महसूस होती है.

क्रिकेट प्रशंसक अपने पसंदीदार खिलाड़ी से शतक की उम्मीद करते हों और वह डक पर आउट होकर पवेलियन लौट जाए तो उनके लिए भी यह पल काफी दुखद होता है.

इंटरनेशनल क्रिकेट में अगर इस अनचाहे रिकाॅर्ड की बात करें तो इसमें सबसे ऊपर नाम वेस्टइंडीज़ के खिलाड़ी कोर्टनी वाल्श का आता है. कोर्टनी वाल्श अपने करियर के 132 मैचों में सबसे ज्यादा 43 बार डक पर आउट हुए हैं. हालांकि यह बात और है कि कोर्टनी वॉल्श एक गेंदबाज़ रहे इसलिए बल्लेबाज़ी में उनका बल्ला खामोश रहता था.

वहीं, दूसरे नंबर पर न्यूजीलैंड के गेंदबाज़ क्रिस मार्टिन का नाम आता है, जो 36 मर्तबा डक पर आउट हुए हैं. वहीं साल 2004 से 2018 के क्रिकेट कलेंडर में सबसे अधिक डक पर आउट होने का यह अनूठा अनचाहा रिकाॅर्ड इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ स्टूअर्ट ब्राड के नाम है. इंग्लैंड का यह तेज़ गेंदबाज़ इस कलेंडर वर्ष में 25 बार डक पर आउट हो चुका है.

हैरानी की बात यह है कि डक पर सबसे ज्यादा बार आउट होने वाले ये तीनों खिलाड़ी गेंदबाज़ हैं.

Courtney Walsh Bowled. (pic: imgci)

क्रिकेट में डक के अलावा कई ऐसे शब्द हैं जो कमेंट्री के दौरान सुनने को मिलते हैं, उसमें से कई शब्दों का मतलब हम नहीं जानते.

अगर आप भी क्रिकेट की डिक्शनरी के ऐसे शब्दों को जानते हैं, या जानना चाहते हैं, तो नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखें.

Web Title: Why out on the Score of Zero is termed as Duck in the Cricket, Hindi Article

Featured Image Credit: Cricket Australia/Liberty Specialty Markets