जीरो से हीरो की अपनी सीरीज में आज कहानी तेलंगाना के खम्मम जिले के दरिपल्ली रमैया की. पर्यावरण के साथ इनके अनोखे प्यार के चलते इन्हें ट्री मैन कहा जाता है. पेड़ों को बचाने के लिए अपनी जेब में बीज और साइकिल पर पौधे रखने के लिए यह मशहूर हैं. यह सिर्फ इस ख्याल में जीते हैंं कि कैसे ज्यादा से ज्यादा पौधों को लगाया जाये और कैसे पेड़ों को अंधाधुंध कटाई से बचाया जाये. तो आईये नज़र डालते हैं इनके जीवन पर:

मां से विरासत में मिला पौधों से प्यार

बचपन में दरिपल्ली अपनी मां के हर काम पर ध्यान से नज़र रखते थे. मां भी उन्हें तरह-तरह की चीज़ेंं सिखाती थी. पौधारोपण भी उनमें से एक था. बचपन से ही दरिपल्ली देखते आ रहे थे कि उनकी मां कैसे फलों और सब्जियों के बीजों को संभाल कर रखती थी. नन्हें दरिपल्ली के दिल में मां की यह आदत घर कर गयी. बचपन की धुंंधली यादों में दरिपल्ली को खुद भी याद नहीं कि उन्होंने पहला पौधा कब लगाया था. हां उन्हें यह जरुर याद है कि वह किस तरह से पौधों के बीजों को इकठ्ठा करते थे, ताकि कुछ नए पौधों को उनसे जन्म दिया जा सके.

वक्त के साथ-साथ वह बड़े हुए और फिर स्कूल जाने लगे. स्कूल जाने की वजह से अब वह पहले की तरह मां के साथ पौधों के लिए बीज जुटाने में अपना समय नहीं दे पाते थे. लेकिन स्कूल की किताबोंं और शिक्षकों द्वारा पौधों की उपयोगिता के किस्से उनके जीवन का हिस्सा बनते जा रहे थे. उन्होंने तय किया कि वह पौधों को बचायेंगे. उनकी इसी सोच ने उन्हें प्रेरित किया और वह निकल पड़े अपनी नई राह पर.

Daripalli Ramaiah The Tree Man Of India (Pic: thebetterindia.com)

पर्यावरण से मुहब्बत हो गई थी

पर्यावरण के प्रति अपनी मोहब्बत के चलते उन्होंने दसवीं के बाद की पढ़ाई छोड़ दी थी. हालांकि वह पेड़ों से जुड़े मुहावरों व विज्ञापनों को जरुर पढ़ते थे. उन्होंने अब मां के साथ नहीं बल्कि अकेले ही पेड़ लगाने का भार अपने कन्धों पर लेकर घूमना शुरु कर दिया था. वह जब भी अपने सामने खाली बंजर जमीन देखते तो उन्हें बहुत दुख होता. वह ऐसी हर बंजर जमीन को पेड़ोंं से पाटना चाहते थे.

यह काम आसान नहीं था, लेकिन वह आगे बढ़े. शुरुआत उन्होंंने अपने आसपास की बंजर जगह से की. उन्होंंने वहां पौधे लगाने शुरु कर दिया. नतीजन कुछ ही सालों में उनकी वह जगह सुंदर दिखने लगी. इस काम के लिए उन्होंने किसी की मदद नहीं ली थी. वह अकेले ही चुपचाप पौधे लगाये जा रहे थे.

उपहास का पात्र बने, लेकिन…

दरिपल्ली के इस मुहिम को लेकर उन्हें अपने सगे संबंधियों और दोस्तों की आलोचनाएं सहनी पड़ी. कई बार उनका उपहास उड़ाया गया. उन्हें पागल तक कहकर बुलाया गया. पर पर्यावरण को लेकर दरिपल्ली की दीवानगी कम नहीं हुई. वह इन सबको अनदेखा करते हुए और तेजी से आगे बढ़े. उन्हें विश्वास था कि वह एक अच्छा काम कर रहे हैं. इसलिए उन्हें किसी की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. लोगों का तो काम होता है कहना, इसलिए वह तो कहेंगे.

इसी दौरान जब दरिपल्ली की जन्म्मा से  शादी हो हुई, तो लगा कि शायद उनकी मुहिम रुक जाये, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ. उनकी पत्नी समझदार थी. उन्होंने दरिपल्ली का पूरा सहयोग किया. यहां तक कि उन्होंने शादी की सालगिरह जैसे हर एक महत्वपूर्ण मौके पर उनका साथ दिया.

आसान नहीं था यह सफ़र

दरिपल्ली के इस काम के लिए कभी सरकार की तरफ से कोई मदद नहीं मिली. पर उनका मानना था कि वह अकेले ही इस मुहिम के लिए बहुत थे. जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई उनके पेड़ लगाने का दायरा भी उसके साथ-साथ बढ़ता गया. अपने घर के आस-पास का इलाका तो दरिपल्ली ने पूरा हरा-भरा बना दिया था. पर अब वह अपनी आशाओं से भी एक कदम आगे जाना चाहते थे. अब वह अपनी साइकिल पर जगह-जगह घूमने लगे.

साइकिल के पीछे वह पौधे और कुछ बीज रख कर ले जाया करते थे. जैसे ही उन्हें कोई खाली जगह दिखती वह वहां पर पौधा लगा देते थे. दरिपल्ली इस काम से ज्यादा कुछ नहीं चाहते थे. वह तो बस अपने लगे हर पौधे को पेड़ बना हुआ देखना चाहते थे. अब दरिपल्ली के इस हरे सफ़र को लगभग 50 साल हो चुके हैं. लेकिन दरिपल्ली ने कभी हार नहीं मानी और न ही वह कभी निराश हुए.

Daripalli Ramaiah The Tree Man Of India (Pic: thebetterindia.com)

पद्मश्री पुरस्कार से किए गए सम्मानित

पर्यावरण को लेकर उनकी लगन और प्यार के लिए उन्हें राज्य और राष्ट्रीय स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. हाल ही में उन्हें पद्मश्री जैसे बड़े सम्मान से सम्मानित किया गया है. बताते चलें कि एक दौर ऐसा भी आया था कि उनके पास पौधे खरीदने के पैसे नहीं थे. तो उन्होंने अपनी तीन एकड़ जमीन बेच दी थी. दरिपल्ली द्वारा लगाए गए पौधों की गिनती नहीं की जा सकती. फिर भी माना जाता है कि वह करीबन 1 करोड़ पौधों को लगा चुके हैं.

इतने सम्मान के बाद भी दरिपल्ली पर कोई फर्क नहीं पड़ा. वह आज भी वैसे ही हैं जैसे वह पहले थे. अब तो वह और भी ज्यादा काम करना चाहते हैं. उनकी ख्वाहिश है कि वह अपनी आखिरी सांस तक पौधे लगाते रहें. शायद इसलिए उन्हें ‘ट्री मैन’ कहा जाता है.

Daripalli Ramaiah The Tree Man Of India, Receiving Padma Shri (Pic: pib.nic)

यह था दरिपल्ली रमैया के ‘ट्री मैन’ बनने तक का सफर. इनसे प्रेरणा लेते हुए एक नई डगर बनाई जा सकती है. एक ऐसी डगर जिस पर कितना चलना है, कब चलना और क्यों चलना है, सब हम खुद तय कर सकते हैं. जीरो से हीरो बनने की यह कड़ी अनंत है और लगातार चलती रहने वाली है. अपने आस पास देखिये, आपको भी ‘जीरो से हीरो‘ का सफ़र तय करने वाले अवश्य नज़र आ जायेंगे.

Web Title: Daripalli Ramaiah The Tree Man Of India, Hindi Article

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