जीन्स का फैशन कभी ‘आउट ऑफ फैशन’ न हुआ, न हुआ था और शायद ही कभी होगा. यह हर मौके पर जंच जाता है. इसे किसी भी कपड़े के साथ मैच करके पहना जा सकता है. अब वह चाहे टी-शर्ट हो, कुर्ता हो या शर्ट सब के साथ अच्छा मैच हो जाता है.

यही वजह रही कि यह लोगों के बीच इतने बड़े स्तर पर पहना जाता है. इसके बारे में कहा जाता है कि यह पृथ्वी पर सबसे ज्यादा पहना जाने वाला कपड़ा है. एक समय में मजदूरों और वर्कर के द्वारा पहनी जाने वाली यह जीन्स आज आम से लेकर ख़ास इंसान द्वारा पहनी जाती है. ऐसे में, जीन्स के इतिहास के बारे में जानना दिलचस्प रहेगा.

तो आइये जानते हैं, जीन्स का इतिहास जो सालों से एक ट्रेंड ही बना हुआ है-

गलती से बना नया फैब्रिक 'डेनिम'

‘डेनिम’ शब्द “Serge de Nîmes” से निकला है, यह एक फैब्रिक का नाम ही है. इस फैब्रिक की उत्पत्ति फ्रांस के नेम्स (Nîmes) में हुई थी. 18वीं शताब्दी में इटली के जेनोआ में बनाए जाने वाले Serge (फैब्रिक) की तरह ही नेम्स के वर्कर्स ने भी फैब्रिक बनाने की कोशिश की.

वैसा तो, वे लोग Serge फैब्रिक नहीं बना पाए, लेकिन एक नए प्रकार का फैब्रिक जरूर बना दिया. जिसका नाम उन्होंने ‘Serge de Nîmesरखा. बाद में इस नाम को छोटा करके डेनिम रख दिया. इस तरह डेनिम का आविष्कार हुआ.

अब बात कर लेते हैं जीन्स कि तो, यह ऐसी पैंट होती है जो ‘डेनिम’ या ‘डंगरी’ के कपड़े से बनी हुई होती है. आज विश्व में सबसे ज्यादा मशहूर इस फैब्रिक का आविष्कार साल 1873 में हुआ था. इसका आविष्कार करने वाले जैकब डेविस औए लीवाई स्ट्रॉस हैं. उस समय इसका निर्माण भले ही दूसरे कार्यों या विशेष वर्ग के लिए होता था. लेकिन, आज विश्व भर में इसे बड़े चाव से पहना और पसंद किया जाता है.

इसके विषय में यह भी कहा जा सकता है कि यह धरती पर सबसे ज्यादा प्रचलित परिधान है. इस पैंट का नाम जीन्स पड़ने के पीछे भी एक वजह है. दरअसल, इटली के एक शहर जेनोआ में कपास से एक पैटर्न का फैब्रिक बनाया जाता था. जिसे वहां ‘जीन’ नाम से बुलाया जाता था. बस, इसी जीन के नाम पर जीन्स रख दिया गया.

Jeans Was Invented In The Year 1873  (Pic: independent)

डेनिम में 'तांबे की कील' लगाकर बन गई जीन्स

साल 1851 में, लीवाई स्ट्रॉस जर्मनी से न्यूयॉर्क आये. वह यहाँ अपने बड़े भाई के साथ उनके बिज़नेस में हाथ बटाना चाहते थे. उनके भाई का कपड़ों का ही बिज़नेस था. दो साल वहां उन्होंने अपने भाई के साथ काम किया. लेकिन, साल 1853 में गोल्ड रश अपनी चरम सीमा पर था. पश्चिमी देशों में खासकर एक बड़े स्तर पर लोग गोल्ड माइनिंग में लगे हुए थे.

जब लीवाई ने इस बात को जाना तो, उन्होंने सैन फ्रांसिस्को में जाकर अपने इस व्यापार को फैलाने के बारे में सोचा. इसी सोच के साथ वह सैन फ्रांसिस्को चले गए. वहां जाकर उन्होंने सूखे फैब्रिक के साथ कॉटन के कपड़े भी बेचना शुरू कर दिया.

जीन्स के बनने की कहानी यहीं से शुरू होती है. अब हुआ यूं कि जैकब डेविस नाम का एक टेलर था. वह नेवाडा के रेनो में रहता था. डेविस टेंट्स, कंबलें और सामानों के कवर्स सिला करते थे. एक दिन उनकी दुकान पर एक ग्राहक आई और उसने एक बेहद मजबूत पैंट सिलने को कहा. उसने एक ऐसी पैंट सिलने को कहा जो बहुत मेहनत के काम करते वक़्त भी जस की तस रहे.

इसके बाद जैकब ने इस पैंट को डेनिम के कपड़े से बनाने के बारे में सोचा. वह लीवाई स्ट्रॉस एंड कंपनी के पास जाकर डेनिम फैब्रिक खरीदकर लाया. उसने इन पेंट्स को मजबूत बनाने के मकसद से इनमें तांबे की कील लगाने का फैसला किया. यह कील ऐसी जगह लगाई जानी थी जहाँ से पैंट के फटने का सबसे ज्यादा खतरा होता है. जैसे -पॉकेट आदि.

उसका यह आईडिया काफी सफल रहा और वह अपने इस आविष्कार पर अपना पेटेंट लेना चाहता था. इसके लिए उसने लीवाई को अपना पार्टनर बनाने के बारे में सोचा और उससे जाकर इसके लिया पूछा. लीवाई ने इसके लिए हां कर दी और फिर इसका पेटेंट भी ले लिया.

इसके बाद दोनों ने मिलकर एक बड़ी फैक्ट्री सेटअप की. इस तरह जीन्स का जन्म हुआ.

Copper Rivets Had been Used By Jacobs To Make It Stronger (Pic: liveabout)

नीली डेनिम का क्रेज ही कुछ अलग रहा

अगर आप सोच रहें हैं की ‘डेनिम' का रंग नीला कैसे हुआ तो, इसका जवाब भी है. दरअसल, कपास बुनाई की टेक्सटाइल्स में इस कपड़े को बनाने के लिए दो या उसे ज्यादा धागों के ताने बाने से बुनना होता था.

जहाँ एक धागे का एक ताना ‘नील’ से रंगा होता था, वहीं दूसरा ताना सफ़ेद या किसी और रंग से रंगा होता. इस तरह डेनिम की बुनाई होती और इसे नीला रंग मिल जाता है. जीन्स के शुरुआती समय में इसे या तो बहुत मेहनत करने वाले माइनर पहनते थे या फिर ‘काऊबॉय’. समय के साथ यह धीरे-धीरे पोलो खेलने वाले लोगों के बीच भी बहुत मशहूर हो गई.

यह एक बेहद मजबूत पेंट थी, जिसकी वजह से इसका प्रयोग ज्यादा से ज्यादा लोगों ने करना शुरू कर दिया था. यही वजह है आज के समय में भी पोलो खिलाड़ी प्रैक्टिस के समय ब्लू जींस पहनते थे और मैच खेलने के लिए सफ़ेद जीन्स को पहनते हैं.

माना जाता है कि दुनिया की सबसे अच्छी जीन्स जापान में बनायी जाती है. अगर विश्व स्तर पर इसकी मान की बात की जाए तो नार्थ अमेरिका में इसकी डिमांड सबसे ज्यादा रहती है. जहाँ 39 प्रतिशत ब्लू जीन्स खरीदी जाती है, जबकि 10 प्रतिशत ब्लू जीन्स जापान और कोरिया में बिकती है.

जीन्स के मशहूर होने की एक बड़ी वजह रहा हॉलीवुड की फिल्में और उसमें हीरो द्वारा पहने जाने वाली जीन्स. इसका क्रेडिट जाता है जेम्स डीन को. साल 1955 में, जेम्स की फिल्म Rebel Without a Cause में उन्होंने टी-शर्ट, एक लेदर जैकेट और जीन्स पहने हुआ था. इस फिल्म के बाद उस समय के पुरुषों की यह पहली पसंद बन गई.

लोगों में उनके इस लुक को कॉपी करने के लिए होड़ सी लग गई थी. इस फिल्म का निर्माण पहले ब्लैक एंड वाइट में होना था. लेकिन बाद में स्टूडियो ने इसका निर्माण रंगीन में ही करने का फैसला लिया. डीन की जीन्स को जान-बूझकर और भी डार्क बनाया गया ताकि वह अपनी ओर लोगों को आकर्षित कर सके. अमेरिका में तेजी से शुरू हो रहे टीनएज कल्चर ने इस परिधान को अपनाया.

यह उनकी पहली पसंद के रूप में उभरने लगा. यह स्टाइल स्टेटमेंट बन चुका था, जो आज भी बरकरार है. इस से पहले 1953 में मार्लोन ब्रांडो ने भी जीन्स को काफी चर्चित किया था. उन्होंने अपनी फिल्म 'द वाइल्ड वन' में पूरे समय इसे पहनकर रखा है. रही बात इस जीन्स को महिलाओं में चर्चित करने कि तो इसके लिए मर्लिन मुनरो का नाम लेना बिलकुल सही रहेगा.

उन्होंने अपनी फिल्म Misfits के जरिये इसे महिलाओं के बीच भी प्रसिद्ध कर दिया. इस फिल्म में उनका लुक जेम्स जैसा था, जिसे लेडी वर्जन भी कहा गया.

Blue Denim Was Popularised By Hollywood Actors And Music Artists (Pic: library)

बेल-बॉटम और स्किनी जीन्स का भी रहा क्रेज 

इसके बाद, 18वीं शताब्दी के मध्य में बूट-कट जीन्स पैंट बहुत चलन में आई थी. यह फैशन ट्रेंड बोट सेलर्स से प्रभावित रहा. दरअसल, जब वह जीन्स पहनते थे तो उन्हें अपने बूट्स पहनने में दिक्कत होती थी. इसके लिए उन्होंने पैंट के नीचे का हिस्सा खुला बनाया. यह उनके लिए पहनने में आरामदायक और काम करने भी आसानी हो गई.

इन जीन्स को भी पॉपुलर करने में हॉलीवुड को ही श्रेय जाता है. 80 का दशक आते-आते यह बेल-बॉटम जीन्स के रूप में जानी जाने लगी. स्किनी या पेंसिल जीन्स का डिजाईन 17वीं शताब्दी में पहनी जाने वाली टाइट पैंट से प्रेरित रहा.

जो फ्रांस से निकलकर इंग्लैंड और फिर यूरोप में चलन में आ गयी थी. यह अमीर लोगों की पसंद हुआ करती थी. ये टाइट पेंट्स ‘पेंटालून’ नाम से जानी जाती थी. तकनीकी क्रांति के बाद एक बार फिर लोगों ने इन्हें पहनना कम कर दिया और आरामदायक और ढीली पैंट पहनना शुरू कर दिया. इसका फैशन आता और जाता रहा. 50 के दशक में यह एक बार फिर वापस आती है. इस बार इसे म्यूजिक स्टार्स और एक्टर्स ने ट्रेंड किया.  

इस जीन्स को द बीटल्स और बॉब डिलन जैसे म्यूजिक स्टार्स ने उस समय बहुत पहना.  

Bell-Bottom And Skinny Jeans Are Back in Trend (Pic: justthat)

अब जब कभी भी जीन्स पहने तो इसके रोचक इतिहास को जरूर याद कर लें. अगर आप भी इससे सम्बंधित कोई जानकारी रखते हैं तो, हमारे साथ कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें.

 

 



Web Title: History Of Jeans, Hindi Article
Representative Feature Image Credit: telegraph