आज के आधुनिक समाज में आपको ढ़ेर सारे युवा मिल जायेंगे, जिनके जीवन में कोई न कोई ‘खास’ होता है. यहां ‘खास’ से मतलब उनके किसी करीबी से बिल्कुल नहीं है. यहां खास का सीधा संबंध उनकी गर्लफ्रेंड से है.

अक्सर देखा गया है कि युवा अपने प्यार के रिश्ते को लेकर बहुत संजीदा होते हैं. उनकी कोशिश रहती है कि वह हर कदम पर अपने इस रिश्ते को नये आयाम पर ले जायें.

इसी कड़ी में बात जब इस रिश्ते को शादी में बदलने की आती है, तो सवाल यह होता है कि यह कितना सही है. सही गलत से भी ज्यादा यह कि आने वाले दिनों में ऐसे रिश्ते किस प्रकार की चुनौतियां आपके सामने लाते हैं.

तो आईये इस सवाल का जवाब ढूं‌‌‍ढने की कोशिश करते हैं:

शादी के साथ नई चुनौतियां

गर्लफ्रेंड के साथ शादी का चलन आजकल आम हो चला है. भारत के युवाओं की दिलचस्पी इसमें तेजी से बढ़ रही है. असल में वे अपना जीवन साथी अपने हिसाब से चुनना चाहते हैं. अपनी पंसद-नापसंद उनके लिए सबसे प्रमुख होती है.

फिर पहली नजर का प्यार हो, या फिर सालों पुराना रिश्ता. उनकी शादी का आधार उनकी इच्छा ही होती है. वह इसके लिए किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करते हैं. घर वाले तैयार होते हैं, तब तो ठीक है. नहीं तो वे परिवार से खिलाफत करने से भी पीछे नहीं हटते हैं.

बस यहीं से शुरु हो जाता है, चुनौतियों का एक नया अध्याय!

उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार के साथ सामंजस्य बनाना होता है.

चूंकि, अधिकांश मामलों में माता-पिता इस शादी के पहले से खिलाफ होते हैं, इसलिए भारतीय समाज में सहजता से वे इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर पाते हैं. परिणाम स्वरुप आये दिन घर में छोटी-छोटी चीजों को लेकर विवाद शुरु हो जाते हैं. इसको झेलने की क्षमता कई बार युवाओं में नहीं होती है. ऐसे में युवाओं को किसी गलत विकल्प को चुनने से बचना चाहिए.

जैसे, वह परिवार से अलग रहने लगते हैं. कई बार तो उन्हें लगता है कि उन्होंने अपनी मर्जी से शादी करके कोई बड़ी गलती कर दी है. ऐसे में पति-पत्नी के बीच आपसी टकराव भी होने लगते हैं.

कई बार तो आपसी विवादों की वजह से वह संबंध तक खत्म करने की ओर बढ़ चलते हैं.

Relationships (Representative Pic: arjunkarthaphotography)

‘आत्म सम्मान’ को लेकर लड़ाई

शादी होते ही नई जिम्मेदारियों का आना लाजमी होता है. शादी के पहले तो कपल अलग-अलग रहते हैं. इस वजह से उन्हें पता नहीं होता है कि परिवार बनाने के लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ती है.

सच तो यह है कि लव मैरिज दो शिक्षित वर्ग के युवाओं के बीच ही ज्यादा होती है. ऐसे में कोई भी एक-दूसरे के सामने झुकना पसंद नहीं करता है. अफेयर के दिनों में तो यह ठीक होता है. किन्तु, शादी के बाद खासकर लड़कियां किसी भी प्रकार की रोक-टोक सहन नहीं कर पाती हैं. जबकि, भारत एक पुरुष प्रधान देश है. यहां पुरुष अपनी मर्दानगी को बचाने की अक्सर कोशिश करते रहते हैं.

वह कितने भी पढ़े-लिखे क्यों न हो, लेकिन उनके अंदर यह भाव जरुर होता है कि पत्नी को उनकी सेवा करनी चाहिए. कई बार इस सोच से ‘गर्लफ्रेंड’ रही उनकी पत्नी इत्तेफाक नहीं रखती है. उनके मन में आने लगता है कि जब मैंने अपनी मर्जी से शादी की तो फिर मैं ऐसे बंधन में क्यों बंधी रहूं, लव मैरिज करने का आखिर मुझे क्या फायदा हुआ?

किचन की जिम्मेदारी इसका एक उदाहरण है. शादी के बाद खासकर लड़कियों की चाहत होती है कि उनका पार्टनर उसी तरह से उनका ख्याल रखें, जैसे पहले रखता था. उनका मानना होता है कि शादी के बाद वह उनका हर काम में सपोर्ट करेगा. किन्तु, जब शादी करके लड़कियां उसके घर जाती हैं, तो वहां पर उन्हें हर काम खुद से करना पड़ता है.

शुरूआती दिनों में तो पति अपनी पत्नी का रसोई में हाथ बँटा देता है, लेकिन बाद में तो वह रसोई में जाकर झांकता भी नहीं है. धीरे-धीरे ये मामले झगड़े का रुप ले लेते हैं और रिश्ता टूटने का कारण बन जाते हैं.

घर में नए मेहमान, यानी बच्चों के जन्म के बाद तो कई बार पत्नी को अपनी जॉब तक छोड़नी पड़ती है, जिसकी टीस बाद में रिश्ते को नुक्सान पहुंचाती है.

Fighting in Relationships (Representative Pic: theswexperts)

बेस्ट गर्लफ्रेंड, बेस्ट वाइफ हो जरुरी नहीं!

युवाओं में प्यार की बात की जाये तो वह अक्सर शारीरिक आकर्षण से शुरु होता है. इसी के चलते वह जल्द शादी के बंधन में बंध जाते हैं. किन्तु, जरूरी तो नहीं है कि उनकी बेस्ट वन, उनकी बेस्ट पत्नी भी साबित हो.

वैसे भी शादी का अर्थ सिर्फ शारीरिक आकर्षण नहीं होता है. यह दो परिवारों का मिलन होता है.

एक-दूसरे से आकर्षित होकर कपल शादी कर तो लेते हैं, लेकिन कई बार उनके बीच समर्पण की कमी देखनी को मिलती है. ऐसी स्थिति में दोनों के बीच मोहभंग होने की संभावना बढ़ जाती है और रिश्ते टूट की कगार पर पहुंच जाते हैं.

निराशाजनक है लव मैरिज के आंकड़ें

इसमें दो राय नहीं कि समाज में लव मैरिज की संख्या तेजी से बढ़ रही है. वैसे तो यह इस लिहाज से यह बहुत सुखद है कि समाज में बदलाव हो रहा है. सभी को अपने तरीके से आगे का जीवन जीने का अधिकार मिलता जा रहा है, किन्तु इसकी दूसरी तस्वीर भयावह है.

आंकड़ों की बात करें तो लव मैरिज में डाइवोर्स की संख्या बढ़ रही है. एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में डाइवोर्स मामलों की दर 53 प्रतिशत है.

जबकि, भारत में डाइवोर्स की दर लगभग 1.2 प्रतिशत ही आंकी जाती है. हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इसमें लव मैरिज के मामले सबसे ज्यादा दर्ज किए गये हैं.

बॉम्बे हाई कोर्ट भी इस बात पर अपनी मुहर लगाता है. एक अन्य शोध की मानें तो लव मैरिज करने वाले 80 फीसदी लोगों का रिश्ता कुछ समय के बाद कमजोर हो जाता है.

इन्हीं आंकड़ों के बल पर लव मैरिज को लेकर जनधारणा बनती है कि लव मैरिज कहीं असफल तो नहीं होगी?

Love Marriage (Representative Pic: dnaindia)

लव मैरिज के ‘मजबूत पहलू’…

लव मैरिज करने वाले व्यक्ति एक दूसरे को पहले से जानते हैं, इसलिए उन्हें एक दूसरे को समझने में परेशानी नहीं आती है. कई बार तो ये कपल आपसी सामंजस्य से मिसाल बना देते हैं.

बॉलीवुड के किंग शाहरुख़ ख़ान और गौरी खान की जोड़ी इसका एक बड़ा उदाहरण है. बॉलीवुड की इस जोड़ी को लव मैरिज की सफल जोड़ी कहा जा सकता है. शाहरुख़ स्टार बनने से पहले गौरी के साथ रिलेशनशिप में थे. दोनों ने जीवन के हर मोड़ पर एक दूसरे का हाथ पूरी मजबूती के साथ पकड़कर रखा.

यही कारण है कि पूरे परिवार की जिम्मेदारियों के अलावा गौरी फैशन डिजाइनिंग के क्षेत्र का बड़ा नाम हैं.

शाहरुख़-गौरी की जोड़ी एक उदाहरण भर है. समाज में ऐसे अनगिनत उदाहरण मौजूद हैं, जो बताते हैं कि लव मैरिज समाज में मौजूद जाति प्रथा और दहेज जैसी कुरीतियों को कम करने में मददगार साबित होती है.

वहीं महिलाओं के साथ शोषण की घटनाएं भी इसके चलते कम हुई हैं.

Shah Rukh Khan & Gauri Khan (Representative Pic: pinterest)

मतलब साफ है कि अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड से शादी करने की सोच रहे हैं तो इसमें कोई बुराई नहीं है. बस आपको याद रखना पड़ेगा कि इसके साथ अापकी जिम्मेदारियां भी बढ़ेंगी. आपको अपने पार्टनर का हर तरह से सपोर्ट करना होगा. फिर चाहे वह किचन में उसके साथ खाना ही बनाना हो, बच्चों को संभालना ही क्यों न हो!

दूसरी तरफ लड़कियों को यह ख्याल रखना पड़ेगा कि भारत में पुरुष प्रधानता की वजह से उनके पार्टनर में शादी के बाद बदलाव आ सकते हैं. उन्हें शादी के बाद प्रोफेशनल काम के साथ-साथ बच्चों की देखभाल और परिवार के साथ सामंजस्य बैठाना आना चाहिए.

सच तो यह है कि शादी या कोई भी रिश्ता एक दूसरे की कद्र करने का नाम है और जहाँ एक दूसरे का दर्द समझा जाए, एक दूसरे के अहसास को महसूस किया जाए, फिर कोई कारण नहीं कि आपके ऊपर नकारात्मकता हावी होगी. बल्कि, कई मामलों में तो आप सकारात्मकता की मिसाल बनकर उभर सकते हैं.

आप क्या कहते हैं… गर्लफ्रेंड से शादी करने या न करने के ऊपर?

Web Title: Reasons Not to Get Married to Your Girlfriend, Hindi Article

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