लगभग हर भारतीय ने सर्दी या कफ की समस्या होने पर हल्दी वाला दूध जरूर पिया होगा. ऐसे ही, कितने सारे घरेलू उपचार से हम छोटी-छोटी सेहत से जुड़ी परेशानियों को ठीक कर लेते हैं.

कहते हैं सिरदर्द का सबसे बेहतर उपाय है, गरमा-गरम अदरक वाली चाय का एक कप. घरेलू उपचार के क्रम में, नवजात शिशु की तेल से मालिश के पीछे का फंडा भी आपने सुना ही होगा. कहा जाता है कि वह शिशु की मांसपेशियां और हड्डियों को मजबूत करता है.

इसी तरह कई सारे उपचार हमने सुने हैं और उनमें से कई अपनाए भी हैं. हालांकि क्या आपने कभी सोचा कि डॉक्टर्स भी इनमें से कुछ उपायों को बेहद सटीक और कारगर मानते हैं.

तो चलिए जानते हैं, ऐसे ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में जिनका डंका मेडिकल साइंस ने भी माना–

दूध में एक चुटकी हल्दी देगी बहुत से फायदे...

सबसे पुराना या फिर सबसे आम घरेलू उपचार का नाम लिया जायेगा, तो हल्दी वाले दूध का नाम सबसे ऊपर होगा. भारतीय मांओं का तो यह सबसे खास नुस्खा माना जाता है.

गरमा-गरम दूध में एक चुटकी हल्दी का मेल शरीर की सारी थकान और दर्द कुछ ही देर में गायब कर देता है. वैसे भी, हल्दी को एंटीसेप्टिक की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है.

किसी चोट या घाव पर इसका मलहम लगाने से वह काफी जल्दी ठीक हो जाता है. आखिर हल्दी में ऐसा क्या है, जिससे इतने फायदे होते हैं?

दरअसल, हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) होता है, जो कि एक जबरदस्त एंटीऑक्सीडेंट है. यही वजह है कि ये इतने काम की चीज है.

जब हम इसका सेवन करते हैं, तो यह शरीर के मुक्त पार्टिकल्स को खत्म करता है. इसके फलस्वरूप, हमारा इम्युनिटी सिस्टम भी मजबूत होता है.

इतना ही नहीं दूध में मिलने के बाद, तो यह और भी फायदेमंद बन जाता है. गौरतलब है, दूध प्रोटीन का एक बेहतरीन स्रोत है.

इतने गुणों को पढ़ने के बाद ये मत सोच लीजिये कि यह गंभीर समस्या में भी उतना ही असरदार साबित होगा.  यह छोटी परेशानियों के लिए ठीक है मगर बड़ी बीमारियों के लिए तो आपको डॉक्टर के पास जाना ही पड़ेगा. 

हालांकि, हल्दी वाला दूध आप अपनी दवाइयों के साथ भी ले सकते हैं. तो अगली बार हल्दी दूध के मेल को बस एक दादी माँ का नुस्खा ही न समझें.

 A Combination of Turmeric and Milk is Very Beneficial For Health (Pic: easyhealthoptions)

सरसों का तेल बनाता है बच्चे को अंदर से मजबूत!

शहर में अब लोग काफी मॉडर्न हो गए हैं. वो अब सरसों के तेल की मालिश की जगह मार्केट के नए-नए प्रोडक्ट्स को इस्तेमाल करना बेहतर समझते हैं.

हालांकि बात करें ग्रामीण भारत की, तो आज भी एक माँ सरसों के तेल से ही अपने बच्चे की मालिश करती है. भारतीय घरों में सालों से सरसों के तेल से बच्चे की मालिश करने का रिवाज चलता आ रहा है. 

माना जाता है कि इससे उसकी मांसपेशियों और हड्डियों का विकास होता है और वह मजबूत बनती हैं. आपको बता दें कि, सरसों के तेल की तासीर गरम होती है.

इससे शिशु की मालिश करने से उसके शरीर के छिद्र खुलते हैं और त्वचा कोमल बनी रहती है. यही नहींं, अच्छे से की गयी मालिश से बच्चे के शरीर का ब्लड सर्कुलेशन भी ठीक बना रहता है.

अक्सर, आपने देखा ही होगा मालिश के तुरंत बाद बच्चा सो जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस मालिश से उसे बहुत रिलैक्स महसूस होता है.

बात अब जरा साइंस के नजरिए से करें, तो इसमें ओमेगा 3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड मौजूद होता है. इसकी वजह से यह इतना कमाल दिखा पाता है.

इन सब के अलावा, इसकी अजीब सी महक के कारण बच्चे के मालिश किये शरीर पर मच्छर या अन्य कीड़े नहींं काटते.

हालांकि डॉक्टर्स की माने, तो इसका उपयोग बच्चे के एक साल के होने पर करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि, नवजात शिशु की त्वचा बेहद नाजुक और कोमल होती है.

Oil Massage Helps a Child To Develop Strong Muscles (Pic: Forekatik)

अदरक और शहद से छूमंतर हो जायेगा कफ

अदरक के गुणों का क्या बखान किया जाए. इससे बनी एक कप चाय सिरदर्द में अमृत का काम करती है. वहीं यह सर्दी, खांसी की समस्याओं को भी काफी हद तक ठीक करने में सहायक है.

इतना ही नहीं अदरक कफ का सफाया करने के लिए भी मशहूर है. आपने जरुर इससे जुड़े कई सारे नुस्खे अपनाएं भी होंगे. एक सबसे आम नुस्खा है, उबले पानी में अदरक को उबालकर उसमें थोड़ा सा शहद डालकर पिया जाए. कहते हैं कि यह कफ और गले से जुड़ी समस्याओं के लिए रामबाण इलाज का काम करता है.

दरअसल, अदरक में एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो दर्द में आराम देता है. जब इसका सेवन शहद के साथ किया जाता है, तो यह गले की जलन में भी काफी राहत देता है. हालांकि डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को इसे लेते समय थोड़ा ध्यान देना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि, ज्यादा  शहद की मात्रा उनके लिए नुकसानदायक हो सकती है. लिहाजा, उन्हें इसके उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए.

 Ginger is a known cough suppressant (Pic: dilmahtea)

चिकन सूप और जुकाम का भी है 36 का आंकड़ा!

चिकन सूप का नाम पढ़ते ही, आपके मुंह में पानी आ गया होगा. यह एक ऐसा नुस्खा है जिसे चिकन पसंद करने वाले लोग खुले दिल से अपनाते हैं.

दरअसल, कॉमन कोल्ड या जुकाम में यह काफी लाभकारी होता है. यदि आपको कोल्ड के लक्षण दिखाई दें, तो आपका एक बाउल गरमा-गर्म चिकन सूप पीना आपकी हालत सुधार सकता है.

इसके सेवन से गला और नाक दोनों ही खुल जाते हैं. इतना ही नहीं यह गले की जलन को भी ठीक करता है. गरम चिकन सूप बॉडी को फिर से हाइड्रेट करने में मदद करता है.

साइंस की भाषा में बात करे, तो चिकन सूप बॉडी में न्युट्रोफिल्स (एक प्रकार का सफेद सेल) के मूवमेंट को रोकता है. इससे कन्जैशन नहींं होता. यह जुकाम में सांस न ले पाने की दिक्कत को भी दूर करता है.

हालांकि ध्यान रहे कि अगर 36 घंटे बाद भी इन लक्षणों में कोई बदलाव नहींं होता, तो, डॉक्टर से परामर्श जरूर लें. ऐसा इसलिए क्योंकि यह कभी-कभी तुरंत लाभ तो देता है, लेकिन परमानेंट नहींं.

Chicken Soup Cures Common Cold (Pic: Frecipes)

हम आये दिन ऐसे कई घरेलू नुस्खों का प्रयोग करते ही रहते हैं, लेकिन उनके पीछे की साइंस से अनजान रहते हैं. लिहाजा अब अगली बार इन नुस्खों का इस्तेमाल करें, तो इनमें मौजूद तत्वों और उनके गुणों का ना भूले.

ये सिर्फ दादी या नानी माँ के नुस्खे ही नहींं बल्कि ऐसे उपचार हैं, जिनके पीछे लॉजिक भी होता है. थोड़ी बहुत परेशानी में यह रामबाण इलाज का काम करते हैं और तुरंत राहत भी देते हैं.

इन नुस्खों को अपनाकर आप भी बन सकते हैं अपने घर के वैद्य.

Web Title: Science Behind Using Home Remedies, Hindi Article

Feature Image Credit: wealthresult