संगीत का कोई धर्म नहीं होता है. संगीत की कोई भाषा, दीवार और बाधाएं नहीं होती हैं. संगीत में इतनी शक्ति है कि यह आपकी रूह को भी छू सकता है. संगीत ही एक ऐसा रास्ता है, जिसके जरिए अलग-अलग धर्म से आई हुई आवाजें एक हो जाती हैं. आज की युवा पीढ़ी में सोनम कालरा एक ऐसा ही आवाज हैं, जो शान्ति और सौहार्द का पैगाम लोगों तक पहुंचा रही हैं.

तो आइए जानते हैं कि आखिर कैसे सोनम कालरा अपनी इस मुहिम में सक्रिय हैं–

बचपन से ही रहा है संगीत से नाता

संगीत और सोनम का रिश्ता बहुत अटूट सा रहा. उन्हें बचपन से ही संगीत ने अपनी ओर आकर्षित किया.

सोनम बताती हैं कि वह अक्सर अपनी मां की गोद में बैठकर बेगम अख्तर के गाए हुए गीतों को सुनती थीं. इस दौरान उनकी मां के चेहरे पर, जो शान्ति और भाव झलकते वो उसे कभी नहीं भूल सकती हैं. यह सिर्फ और सिर्फ संगीत की वजह से ही था.

जैसे-जैसे सोनम बड़ी हुईं, संगीत की तरफ उनका रुझान और भी बढ़ता गया.

1971 के बांग्लादेश युद्ध में भारत की जीत के नायक रहे जनरल जगजीत सिंह औरोरा सोनम के ‘नानाजी’ हैं. लिहाजा सोनम का जन्म एक बेहद स्वतंत्र सोच रखने वाले परिवार में हुआ. एक ऐसे परिवार में जहां, उन्हें कभी किसी तरह का भेदभाव या रूढ़िवादी मानसिकता का सामना नहीं करना पड़ा.

उनके घर में हमेशा उन्हें अपने संगीत के लिए प्रेरित किया. तीनों बहनों में से एक सोनम के घरवालों ने हमेशा तीनों बहनों को यही बोला कि वह हर क्षेत्र में न सिर्फ लड़कों के बराबर हैं, बल्कि उनसे भी आगे हैं.

इस तरह के पारिवारिक माहौल की वजह से भी सोनम को हमेशा आत्मविश्वास मिला.

Sonam Kalra, A Sufi Singer (Pic: Team Roar)

विज्ञापन कंपनी में बतौर ‘आर्ट डायरेक्टर’ किया काम

दिल्ली में पली-बढ़ी सोनम ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. उन्होंने दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स से बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (ग्राफ़िक डिजाइन) में डिग्री प्राप्त की. अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने एक बहुत ही प्रसिद्ध विज्ञापन कंपनी ज्वाइन की, आर्ट डायरेक्टर की पोस्ट पर.

वहां उन्हें राइटर द्वारा लिखे हुए ऐड्स डिज़ाइन करने को कहा जाता था. परन्तु कुछ समय बाद सोनम को ऐसा लगा कि क्यों न वो खुद ही उन विज्ञापन को लिखे. उन्हें लगा कि अब वो उस पड़ाव पर हैं कि वो खुद ही आइडियाज को सृजन कर के रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत कर सकती हैं. 

परन्तु इस जॉब के लम्बे वर्किंग आवर्स की वजह से सोनम संगीत को समय नहीं दे पा रही थीं. इसी बीच उन्होंने 2000 में अपनी कंपनी से 3 महीने का ब्रेक ले लिया. 

आगे चलकर सोनम ने शुभा मुद्रल और पंडित सारथी चटर्जी से शिक्षा ली. उन्होंने बीबीसी और स्टार वर्ल्ड में भी दो ट्रेवल शो होस्ट किए. इसके साथ ही साल 2010 में होने वाले कॉमन वेल्थ गेम को भी उन्होंने लाइव होस्ट किया.

इसके अलावा, वह डिस्कवरी और इंडिगो एयरलाइंस में अपनी आवाज भी दे चुकी हैं. 

Sonam Kalra Worked With Some Highly Recognised Musician (Pic: femina)

शास्त्रीय संगीत, गोस्पेल और जैज़ म्यूजिक में ली तालीम

शास्त्रीय संगीत में तालीम लेने के बाद सोनम ने गोस्पेल और जैज़ भी सीखा. उन्होंने यह सिंगापुर की एश्ली क्लेमेंट से सीखा. इसके अलावा, उन्होंने वेस्टर्न क्लासिकल ओपेरा में भी अपना हाथ आजमाया. आपको बता दें कि सोनम एक अभिनेत्री भी रही हैं, जिसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है. 

सोनम की जिंदगी में उनकी मां का हमेशा एक अहम किरदार रहा. उनकी मां ने हमेशा उनका मार्गदर्शन किया. सोनम की मां का सबसे बड़ा सपना था कि वह अपनी बेटी को स्टेज पर परफॉर्म करते हुए देखें और कुछ ही समय में सोनम ने उनका यह सपना सच किया. 

Sonam Kalra During A Performance In Coke Studio India (Pic: youtube)

‘द सूफी गोस्पेल प्रोजेक्ट’ का विचार और...

इन सब के बीच उन्हें सूफी गोस्पेल प्रोजेक्ट का आइडिया आया. उन्हें यह विचार आने का किस्सा बेहद रोचक है. सूफी गोस्पेल प्रोजेक्ट शुरू करने का विचार उन्हें तब आया जब उन्हें साल 2011 में दिल्ली के निजामुद्दीन में सूफी संत इनायत खान के जन्मदिन पर गोस्पेल संगीत गाने के लिए बुलाया गया. उसी दिन उन्हें यह लगा कि यह उनके लिए एक इशारा था.

एक सिख धर्म से आने वाली लड़की आज एक इस्लामिक जगह पर गोस्पेल गा रही थी. यह अपने आप में एक ‘संगीत की ताकत’ का सन्देश था. इसके बाद वह एक ऐसा मंच बनाने की ओर बढ़ चलीं, जहां सिर्फ और सिर्फ इंसानियत की अहमियत हो, जोकि उनके हिसाब से सूफिज्म के जरिए ही संभव था.

सोनम का 'सूफी गोस्पेल प्रोजेक्ट' प्रार्थना, कविताएं और संगीत को एक साथ लाता है, ताकि वह अलग-अलग विश्वास और भाषाओं के रूप में व्याप्त बाधाओं को तोड़ सकें. इसके साथ ही, संगीत के जरिए लोगों तक समानता, धर्मनिरपेक्षता और हर इंसान में आपसी स्वीकृति की भावना का पैगाम पहुंचा सकें.

सोनम बताती हैं कि उनके म्यूजिक ग्रुप में हर धर्म के लोग हैं. इसमें क्रिस्चियन, मुस्लिम, हिन्दू और सिख धर्म के लोग शामिल हैं. सूफी गोस्पेल प्रोजेक्ट ने अलग-अलग जगहों पर परफॉर्म किया है. उन्होंने कोक स्टूडियो समेत नेशनल से लेकर ऑस्ट्रेलिया के मशहूर सिडनी ओपेरा हाउस और एजिप्ट के पिरामिड्स के सामने इंटरनेशनल परफॉरमेंस भी की हुई है.

साल 2014 में, सोनम को 'देवी' पुरस्कार से सम्मानित किया गया. ये अवॉर्ड 20 ऐसी महिलाओं को मिला जिन्होंने अपने कार्य क्षेत्र में अद्भुत प्रदर्शन दिखाया. उसके बाद साल 2015 में, सोनम को लोरियल फेमिना वीमेन ऑफ वर्थ अवॉर्ड से नवाजा गया था.

2016 में सोनम को संगीत जगत में अपने योगदान के लिए फिक्की अवॉर्ड से नवाजा गया. 2017 में उन्हें विन द्वारा प्रेरणादायक महिला अवॉर्ड प्रदान किया गया. 

‘पार्टीशन: स्टोरीज ऑफ सेपरेशन बाय सोनम कालरा’

सूफी गोस्पेल के साथ-साथ, सोनम 'पार्टीशन: स्टोरीज ऑफ सेपरेशन वाय सोनम कालरा' नाम के प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं. इस प्रोजेक्ट के जरिए वह एक ऐसे संगीत की प्रस्तुति देना चाहती हैं, जिसमें अनुभव हो.  

वह अपनी परफॉरमेंस द्वारा एक बार फिर विभाजन के दौर को जीवंत कर रही हैं. इस प्रोजेक्ट का मकसद ऐसे भविष्य की बात करना है, जिसमें शान्ति और उम्मीद हो.

सबसे ख़ास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में वह उस समय के कवियों जैसे अमृता प्रीतम, फैज़ अहमद फैज़ आदि की कविताओं का कम्पोजीशन कर रही हैं. इसके अलावा, विभाजन का दर्द झेलने वाले लोगों के टेस्टीमोनियल वीडियोस भी प्रस्तुति का एक हिस्सा होते हैं. सोनम बताती हैं कि विभाजन पर बात करना जरूरी है.

ऐसा इसलिए, क्योंकि आने वाली पीढ़ी को ये ज्ञात होना चाहिए कि विभाजन के रूप में लोगों ने कितना दर्द झेला है.  

Sonam Kalra With Mithilesh Singh (Editor, Roar Hindi) (Pic: TeamRoar)

सोनम कालरा के अब तक के सफर को देखें तो वह आज के युवाओं के लिए किसी प्रेरणास्त्रोत से कम नहीं हैं.

उनका सफर संगीत के जरिए आक्रोशित युवाओं को शान्ति और अमन बनाए रखने की सीख देता हैं. सोनम का ये कहना है कि अगर वो अपने संगीत के माध्यम से लोगों में अमन की आशा उजागर कर सके, तो उनके लिए उनका जीवन सफल होगा. 

Web Title: Sonam Kalra: A Singer Who Spreads A Message Of Peace By Her Singing, Hindi Article

Feature Image Credit: finact