मानव प्रकृति की सर्वोत्तम रचना कही जाती है.

यह हर वह काम कर सकता है, जो बाकी के जीवों के लिए असंभव सा ही है. इसका श्रेय किसी को जाता है तो वह मनुष्य का दिमाग माना जाता है. इसके इस्तेमाल से मनुष्य ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि शायद बनाने वाला भी सोचता होगा कि यह तो मेरी भी कल्पना के परे चला गया है.

मानव ने जब से इस धरती पर जन्म लिया है, तब से लेकर अब तक इसने काफी विकास किया है. अंतरिक्ष के रहस्यों से लेकर विज्ञान के अनगिनत प्रयोग वह करता रहा है. विकास की इसी दौड़ में हमारे शरीर का विकास भी हुआ है.

हमारी बॉडी धीरे-धीरे इतनी विकसित हो गई है कि हमारे शरीर के कुछ अंग जो किसी जमाने में हमारे लिए उपयोगी थे, आज हमारे लिए निरर्थक यानी बेकार हो गए हैं.

ऐसे में वह हमारे शरीर का हिस्सा तो हैं, लेकिन वर्तमान में वह हमारे लिए उपयोगी नहीं रह गए हैं.

तो आईये ऐसे अंगों के बारे में बात करते हैं, जो लगभग-लगभग विलुप्त हो चुके हैं, या हैं भी तो किसी काम के नहीं हैं–

अपेंडिक्स

हम जो भोजन खाते हैं, उसे पचाने के लिए हमारे शरीर में बड़ी और छोटी आतें मौजूद हैं. छोटी और बड़ी आंत के जंक्शन पर एक छोटा सा पार्ट मौजूद होता है, जिसे अपेंडिक्स कहते हैं. किसी जमाने में ये भी पाचन क्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देता था, लेकिन अब इसका हमारे शरीर में कोई काम नहीं है.

हां, कई बार देखा गया है कि यह हमारे शरीर में विकसित हो जाता है और मुसीबत का सबब बन जाता है. अंतत: इसे ऑपरेशन के माध्यम से अलग करने की जरूरत तक पड़ जाती है.

बताते चलें कि अपेंडिक्स पथरी को बढ़ाने में मदद करता है, जिसका समय से इलाज न होने पर जान जाने का भी ख़तरा होता है.

Appendix (Pic: dailymail)

एरेक्टर पिली

हमें और आपको जब कभी ठंड लगती है, तो हमारे शरीर के रोंगटे खड़े हो जाते हैं. ये बाल यानी के रोंगटे, एरेक्टर पिली नाम की मांसपेशी की सहायता से ही खड़े हो जाते हैं.

हमारे पूर्वज यानी होमोसैपियन्स इनका इस्तेमाल अपने दुश्मन को डराने के लिए करते थे.

इसकी वजह से उनका शरीर बहुत ही बड़ा दिखाई देने लगता था और इस तरह सामने वाला उसके इस बदले स्वरूप को देख भाग खड़ा होता था. खैर, अब यह हमारे शरीर का हिस्सा नहीं है.

अकल दाढ़

बचपन में हमारे दूध के दांत टूटने के बाद नए दांत आ जाते हैं. इसके बाद जब हम युवावस्था में प्रवेश करते हैं, तो हमारी अकल यानी दिमाग का भी विकास भी हो जाता है. इसी के साथ ही हमारी अकल की दाढ़ भी हमारी बत्तीसी का हिस्सा बन जाती है. भले ही ये हमारे जबड़े का हिस्सा हो, मगर अकल दाढ़ का अब कोई इस्तेमाल नहीं रह गया है.

पहले जब हमारे पूर्वजों के जबड़े बड़े होते थे, तो इनका प्रयोग होता था.

मगर वक्त के साथ ही हमारे जबड़े का साइज भी छोटा हो गया है. परिणाम यह रहा कि अकल दाढ़ हमारे किसी काम की नहीं रही. यहां ये जानना जरूरी है कि भले ही इसका नाम अकल दाढ़ हो, लेकिन हमारी अकल से इसका कोई लेना देना नहीं है.

हां उम्र बढ़ने के साथ ही ये लोगों को दर्द जरूर देती रहती है.

टेल बोन

आपके शरीर में पूंछ हो ना हो, लेकिन हमारे और आपके पूर्वजों के पूंछ जरूर होती थी. ये पूंछ शरीर का बैलेंस बनाने के काम आती थी, लेकिन जैसे-जैसे हमारे शरीर का विकास होता गया और मानव ने चलना सीखा ये पूंछ लुप्त हो गई. अब ये हमारे रीढ़ की हड्डी के बिल्कुल नीच  टेल बोन के रूप में मौजूद है.

ये भी अब हमारे किसी काम की नहीं रही.

हालांकि, गर्भावस्था में मौजूद भूर्ण का यदि एक्स-रे या फिर अल्ट्रासाउंड किया जाए तो यह उसमें साफ दिखाई देती है.

Tailbone (Pic: io9.gizmodo)

निक्टेटिंग मेंबरेन

बहुत से जानवरों में खासकर पक्षियों में तीसरी पलक पाई जाती है. इसे निक्टेटिंग मेंबरेन कहते हैं. इसका काम आखों की रक्षा, उसमें नमी बनाए रखना और साथ ही समान दृष्टि को बनाए रखना होता है.

वर्तमान मानव के शरीर में इसका स्थान पिकासेमिलुनरिस ने ले लिया है. ये हमारी आखों के अंदरूनी भाग के कोने में एक छोटा सा हिस्सा है. निक्टेटिंग मेंबरेन पुराने जमाने में ये बहुत उपयोगी थी, मगर अब इसकी कुछ खास जरूरत नहीं रह गई है.

ओरंगुटन

ओरंगुटन, मानव और अन्य प्राणियों की प्रजातियों में कान होते हैं, जो बाह्य रूप से पहचाने जाने योग्य होते हैं, लेकिन वे कोई जैविक कार्य नहीं करते हैं, जबकि हिरण, बिल्लियों, मकाक बंदर जैसे जानवरों के लिए यह कान बहुत उपयोगी होते हैं.

ये उनकी सुनने की शक्ति में काम आते हैं. दूसरा वे अपने कानों को हिला-डुला सकते हैं.

वहीं, मानव शरीर में कान के पीछे मौजूद मांसपेशी और कान का बाहरी हिस्सा किसी काम का नहीं है.

अब बस वह इयररिंग पहने के काम ही आता है.

टॉन्सिल्स

टॉन्सिल्स गालों के अंदरूनी हिस्से का नाम है. पहले ये हमारे शरीर में कीटाणुओं और बैक्टिरिया को अंदर जाने से बचाते थे, जो सांस या खाने के दौरान हमारे मुंह में प्रवेश कर जाते थे.

किन्तु, मानव शरीर के विकास के साथ भी ये भी बेकार हो गए हैं. आजकल ये लोगों को माउथ इंफेक्शन देने के लिए जाने जाते हैं, क्योंकि इसकी आड़ में कीटाणु छिप जाते हैं और हमारा मुंह सूज जाता है.

पॉमर ग्रैस्प

जब बच्चा 4-5 महीने का होता है और आप उसके हाथ के पास अपनी उंगली ले जाते हैं, तो वह तुरंत आपकी उंगली को अपने हाथ में जकड़ लेता है. इस क्रिया को पॉमर ग्रैस्प कहते हैं.

ये हमारे पूर्वजों में पाया जाता था, ताकि बच्चा खतरे के वक्त अपनी मां के शरीर को अच्छी तरह जकड़ ले और मादा शिकारी से बचकर भाग सके. ऐसी किसी स्तिथि का सामना अब इंसानों को नहीं करना पड़ता है, इसलिए यह निष्क्रिय हो गई.

Palmar Grasp (Pic: Livestrong)

ये हमारे शरीर में मौजूद कुछ एक अंग है, जो अब हमारे किसी काम के नहीं है. ऐसे कई और अंग है, जिनकी उपयोगिता अब न के बराबर है.

खैर, आप ऊपर दिए विवरण से अपने शरीर के कुछ एक दोषपूर्ण अंगों के बारे में जान ही चुके हैं, इसलिए यदि भविष्य में इनमें से कोई भी अंग अगर आपकी परेशानी का सबब बने तो इसे निकलवाने में तनिक भी संकोच ना करें.

वैसे भी इनके न रहने से आपके शरीर को कोई परेशानी नहीं होगी.

Web Title: Vestigial Organs In Human, Hindi Article

Feature Image Credit: livescience.com