वैसे तो आज तमाम तरह की एंटीसेप्टिक क्रीम और दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं, फिर भी भारत के घर-घर में मौजूद एक क्रीम ऐसी भी रही है, जो स्वतंत्रता आंदोलन तक से जुड़ी रही. इसने भारतीयों के जेहन में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का तत्व घोला, वहीं इसका जुड़ाव कई मशहूर लोगों से भी रहा.

जी हां… हम बात कर रहे हैं, हाथी के लोगो वाली, हरी ट्यूब में घर घर में पहचानी जाने वाली बोरोलिन क्रीम की!

बोरोलीन एंटीसेप्टिक आयुर्वेदिक क्रीम का इस्तेमाल सालों से भारत के घर घर में किया जा रहा है. ठंड में फटे होंठ हों या खेलते समय लगी चोट हो, एड़ियों का फटना या रुखी त्वचा का होना ऐसे सभी कामों के लिए बोरोलीन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

भारत में प्राचीन समय से हल्दी का उपयोग एंटीसेप्टिक के तौर पर किया जा रहा है. कमोबेश वैसा ही स्थान बोरोलीन का भी माना जा सकता है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि बंगाल का कोई घर शायद ही ऐसा होगा जहां फर्स्ट एड बॉक्स में बोरोलीन न हो. यहां इस क्रीम की शुरूआत से ही चोट और घावों को भरने के लिए बोरोलीन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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बोरोलीन की शुरूआत की कहानी भी काफी रोचक है.

जीडी फार्मास्यूटिकल्स की स्थापना आजादी से पहले भारतीयों की राष्ट्रव्यापी और देशभक्ति का परिणाम है. इस कंपनी की शुरूआत गुलाम भारत में कलकत्ता के एक अमीर व्यापारी गोरमोहन दत्ता द्वारा की गई थी. एक देशभक्त होने के नाते उनका मानना था कि भारत को समृद्ध बनाने का एक ही तरीका है कि सभी भारतीय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर रहें.

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यही कारण था कि उन्होंने आम भारतीयों को आत्मनिर्भर बनाने और अंग्रेजी वस्तुओं की भारत में मांग को घटाने के लिए भारत के प्राचीन आयुर्वेद का सहारा लेते हुए भारतीय उत्पाद बनाना बेहतर समझा. उन्होंने विदेशी कंपनियों के बराबर गुणवत्ता के उत्पाद निर्माण करने का निर्णय लिया.

हालांकि ये काम इतना आसान नहीं था, कंपनी की शुरूआत हो चुकी थी लेकिन ऐसे उत्पाद का निर्माण अभी भी एक चुनौतीपूर्ण काम था. वहीं कई लोगों ने इसके खिलाफ उन्हें भड़काया और उनका विरोध किया लेकिन दत्ता पीछे हटने वालों में से नहीं थे. उन्होंने स्वतंत्र भारत का सपना देखा था, इसलिए आत्मनिर्भर भारत के लिए सन 1929 में इस गौरवशाली सपने के साथ गोरमोहन दत्ता ने अपने घर में आयुर्वेद आधारित दवाओं का निर्माण शुरू किया. इन्हीं दवाओं में से एक थी ‘हरी ट्यूब’ वाली ‘बोरोलिन’, जो आगे चलकर घर-घर की दवा बनी.

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जी डी फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बाजार में उतारे गए अपने इस बहुमूल्य उत्पाद के कारण अंग्रेज आश्चर्य में पड़ गए. निश्चित तौर पर इससे उनके प्रोडक्ट की बिक्री पर सीधा प्रभाव पड़ता. हालांकि इसे बनाया भी इसी उद्देश्य के लिए गया था. वहीं इन्होंने ये कभी नहीं सोचा था कि भारत जैसा देश भी कभी ऐसे उत्पाद बना सकता है. फिर भी उन्होंने इस क्रीम के उत्पादन को रोकने की कोशिश की लेकिन वे विफल रहे और क्रीम लोगों के घरों में अपनी जगह बनाने में कामयाब रही.

बोरोलिन ब्रांड परतंत्र भारत को एक करने और लोगों में भावनात्मक रिश्ता कायम करने में सफल रहा. जल्द ही इसका इस्तेमाल कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक किया जाने लगा.

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बोरोलिन भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और उनकी पीढ़ियों के विश्वास को आज भी उसी स्वरूप में दर्शाती है. परिवार के बड़े बुजुर्गों की तरह अपनों से छोटों को चोटों से उबारने का जिम्मा सालों से बोरोलिन संभाल रही है. वहीं परिवार की देखभाल करने और एक विश्वसनीय सदस्य के रूप में बोरोलिन ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपना विश्वास बनाए रखा है.

बोरोलिन में इस्तेमाल किए जाने वाले बोरिक पाउडर से ‘बोरो’ नाम लिया गया है, जिसमें एंटीसेप्टिक गुण होते हैं. वहीं ‘ओलिन’ शब्द लैटिन भाषा के ओलेम से आया है जिसका अर्थ होता है तेल. इस प्रकार एंटीसेप्टिक गुण, आवश्यक तेलों, वैक्स के संयोजन से ये बनती है बोरोलीन एंटीसेप्टिक आयुर्वेदिक क्रीम. इसका लोगो भारतीयों में हाथी जैसी स्थिरता और ताकत को दिखाने के लिए एक प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया है. इसी कारण भारत में कहीं-कहीं इस क्रीम को हाथी वाली क्रमी भी वोला जाता है.

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आज बाजार में कॉस्मैटिक प्रोडक्ट की बढ़ती डिमांड के साथ कई तरह के महंगी और विदेशी ब्रांड की क्रीम बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, इनमें से बहुत सी अलग-अलग कार्य के लिए जैसे सनस्क्रीन, हील रिपेयर, लिपवाम इत्यादि हैं, जिनकी पहुंच आम भारतीय तक नहीं है, ऐसे में बोरोलिन ही एकमात्र क्रीम है जो आज भी आम भारतीय के बजट में बिल्कुल फिट बैठती है और सभी प्रकार के कामों में इस्तेमाल की जाती है.

Best Sunscreens. (Pic: livemint)

1990 के दशक में बोरोलिन ने बालों की देखभाल के लिए एलेन नाम को अपना एक नया उत्पाद बाजार में उतारा, इसे भी ग्राहकों द्वारा हाथों-हाथ लिया गया.वहीं बोरोलिन का ज्यादातर इस्तेमाल ठंड में किया जाता था. हालांकि इसे गर्मियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है, फिर भी गर्मियों में एंटीसेप्टिक उत्पाद के नाम पर इस कंपनी के पास कुछ भी नहीं था. लिहाजा 2007 में सुथोल का निर्माण शुरू किया गया.

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वर्तमान समय में जीडी फार्मास्यूटिकल्स की दो उत्पादन इकाइयां कार्यरत हैं जहां से पूरे भारत के लिए बोरोलिन का उत्पादन किया जाता है. एक पश्चिम बंगाल के चक्बागी में, जहां 20 एकड़ जमीन पर इसका उत्पादन किया जाता है और दूसरी इकाई मोहन नगर गाजियाबाद में है. बोरोलिन सन 2003 के बाद से भारत का एक सुपरब्रांड है.

Debashis Dutta. (Pic: livemint)

हालांकि 1950 के दशक में बोरोलिन को ‘टेंडर फेस क्रीम’ की स्ट्रैपलाइन के साथ बेचा जाता था तब ये एक कॉस्मेटिक क्रीम के रूप में जानी जाती थी लेकिन 1960 के बाद से इसे बहुउद्देश्यीय क्रीम के रूप में पुकारा जाने लगा. अपनी शुरूआत से आज 89 साल बाद भी बोरोलीन भारत की पहली पसंद की जाने वाली स्किन केयर एंटीसेप्टिक ब्रांड है. वहीं आज तक इसके ट्रेडमार्क, पैकेजिंग और लोगो में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है.

‘त्वचा की शौहरत बढ़ाओ रातों-रात, बोरोलिन लगाओ’, ‘बोरोलीन एंटीसेप्टिक क्रीम बेहद असरदार‘ ये टीवी चैनल पर कुछ सालों पहले तक आने वाले बोरोलीन के जिंगल हैं.

अंग्रेजी शासन से भारत की मुक्ति और आत्मनिर्भरता का जो सपना गोरमोहन दत्ता ने आयुर्वेद दवा और स्वदेशी क्रीम बनाकर देखा था वो 18 साल बाद यानी 15 अगस्त 1947 को जाकर पूरा हो चुका था.

भारत की आजादी की खुशी में जीडी फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बोरोलीन की एक लाख ट्यूब मुफ्त में बांटी गईं.

इतना ही नहीं ये क्रीम समय के साथ इतनी प्रसिद्ध हुई कि आजादी के बाद इसका इस्तेमाल स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और उस समय के मशहूर अभिनेता राजकुमार द्वारा भी किया गया. इनके द्वारा इस क्रीम का इस्तेमाल किए जाने से बोरोलिन को काफी प्रसिद्धी मिली.

इस मशहूर प्रोडक्ट के बारे में अपनी राय से हमें अवगत अवश्य करायें, क्योंकि आपके घरों में भी यह क्रीम अवश्य इस्तेमाल की गयी होगी. हाँ, अगर आपने नहीं किया होगा तो शायद आपके बड़े भाई ने किया हो अन्यथा आपकी पिछली पीढ़ी ने तो अवश्य ही किया होगा.

यकीन न हो तो पूछ कर देखिये!

Web Title: Boroline: Heritage Ayurvedic Cream of family values and traditions, Hindi Article

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