आधुनिक दौर में इंसान ने तकनीकी विकास की कितनी भी बड़ी-बड़ी ऊंचाइयां क्यों न छू ली हो, लेकिन आज भी वह समय के आगे बेबस नजर आता है.

शायद, इसलिए ही हमारे बड़े बुर्जुग कहते थे कि समय से बलवान कोई नहीं होता. हर दिन के साथ यह बीतता जाता है और हमारा वर्तमान कुछ समय बाद हमारा इतिहास बन जाता है, जिसमें कुछ अच्छी यादें होती हैं तो कुछ बुरी.

मतलब इतिहास कभी किसी के लिए सामान नहीं होता. अगर हम दुनिया की बात करें तो पूरी दुनिया में कितने ही देश हैं जहां हजारों शहर, गांव व कस्बे बसते हैं. यहां हर दिन कुछ न कुछ घटता है, लेकिन कई बार कुछ घटनाएं ऐसी भी होती हैं, जो इतनी खास बन जाती हैं कि वह उस तारीख, उस दिन को एक अलग ही पहचान दे देती हैं.

ऐसी ही एक तारीख 23 मार्च भी है.

वैसे तो शायद वर्तमान में यह महज एक आम सी तारीख व दिन है, मगर इतिहास में झांकने पर पता चलता है कि यह दिन कितना महत्वपूर्ण है.

कैसे आईए जानते हैं-

भगत सिंह को अंग्रेजों ने दी थी फांसी

23 मार्च, भला इस तारीख के महत्व को कौन भारतीय नहीं जानता होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन साल 1931 को लाहौर जेल में भारत माता के इन तीन महान सपूतों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को ब्रिटिश सरकार ने फांसी पर लटका दिया था.

भगत सिंह की फांसी ने देश में चल रही आजादी की लहर को इतना भड़का दिया था कि उसमें ब्रिटिश सरकार जल कर राख हो गई.

दरअसल साल 1928 में जब भारतीय नैशनल लीडर लाला लाजपत राय ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एक शांतिमय आंदोलन कर रहे थे, तो ब्रिटिश सैनिकों द्वारा उन पर लाठीचार्ज किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई.

इस लाठीचार्ज के लिए जिम्मेवार अंग्रेजी सुपरिटेंडेंट जेम्स स्कॉट से लाला जी की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह, राज गुरु और सुखदेव ने जेमस स्कॉट की हत्या कर दी. वे यही नहीं रुके और  1929 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेम्बली में बम धमाके किए और खुद ही ब्रिटिश सैनिकों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. असेम्बली में बम फेंकने और हत्या के आरोप में तीनों क्रान्तिकारियों को फांसी की सजा सुना दी गई.

ऐसी मान्यता है कि इस फांसी को रोका जा सकता था, मगर राजनीतिक मोल भाव के चलते इन तीनों को मौत के हवाले कर दिया गया.

 Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev (Pic: JB PLUS)

पाकिस्तान का गणतंत्र दिवस

पाकिस्तान के लोगों के लिए इस दिन की अहमियत शायद सबसे ज्यादा है, क्योंकि आज ही के दिन उन्हें उनके देश द्वारा उनके मौलिक अधिकार दिए गए थे. यानि 23 मार्च का दिन पाकिस्तान में गणतंत्र दिवस के रुप में मनाया जाता है.

दरअसल साल 1947 में ब्रिटिश हकुमत से आजादी मिलने के साथ भारत में एक ओर जंग छिड़ गई थी और वह जंग थी भारत को दो टुकड़ों में बांटने की. बहरहाल, इस जंग को लगाने वाले लोग अपने मनसूबों में सफल रहे और उन्होंने देश के दो टुकड़े कर दिए. इससे दुनिया में एक अलग देश पाकिस्तान का जन्म हुआ.

इस देश की अधिकतर जनसंख्या मुस्लिम है. अलग देश बनने के बाद अब समाज को एक सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए जरुरत थी एक संविधान की. इसके लिए देश के बुद्धिजीवियों द्वारा गहन चर्चा व बातचीत के बाद आखिरकार पाकिस्तान का संविधान बनाया गया. इसे 23 मार्च 1956 को ड्राफ्ट किया गया.

इस तरह नए संविधान के अनुसार देश में गर्वनर जर्नल के पद को बर्खास्त कर उसके स्थान पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पद तय किए गए. इसके अलावा देश के पहले राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा द्वारा देश में स्थिरता कायम करने के लिए सैन्य बल की कमान अयूब खान को सौंपी गई.

साथ ही अन्य जरुरी कार्यों के लिए जिम्मेवार लोगों को लगाया गया.

Today Pakistan’s Constitution Has Drafted (Representative Pic: DNA India)

फ्रांस के थिएटर में जिंदा जल गए दर्शक

23 मार्च 1881 में फ्रांस के नाइस शहर के म्यूनिसिपल थिएटर में घटी आगजनी की घटना ने हर किसी के दिल को दहला दिया था! इस आगजनी में करीब 150 से 200 लोगों की जलने से मौत हो गई थी. इस आगजनी का कारण गैस के कारण हुआ विस्फोट बताया गया.

बाद में इस मामले की जांच में बहुत से खुलासे हुए, जिन्होंने थिएटर प्रबंधकों की पोल खोल कर रख दी. रिपोर्ट के अनुसार थिएटर में लोगों की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजामात नहीं किए गए थे. थिएटर के पर्दें फायर परुफ होने चाहिए, जबकि ऐसा नहीं था. साथ ही थिएटर के निकास द्वार पर लगे लैंपस में तेल नहीं था.

इन्हीं सबके चलते सारी जगह पूरी तरह से अंधेरे से में पसरी हुई थी, जिस कारण लोगों को निकास मार्ग का पता नहीं चला और वह वहीं जलकर मर गए. विस्फोट के पहले शिकार थिएटर की निचली गैलरी में बैठे लोग बने, जिन्हें कहीं भागने का भी समय नहीं मिला. आगजनी की इस घटना को लेकर पूरे फ्रांस द्वारा दुख प्रकट किया गया.

Tragic Fire Incident Held In Municipal Theater (Representative Pic: Alchetron)

टाइटैनिक ने ऑस्कर में मचाई धूम

साल 1998 में 23 मार्च का दिन हॉलीवुड निर्देशक जेम्स कैमरून के जीवन का सबसे बड़ा दिन था. इस दिन उनके द्वारा निर्देशित मूवी टाइटैनिक को ऑस्कर अवार्ड की 14 अलग-अलग श्रेणीयों में नामांकित किया गया था.

इनमें से टाइटैनिक ने 10 श्रेणीयों में अवार्ड हासिल किए थे. टाइटैनिक इस दशक की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक थी. यह उस समय की सबसे महंगी मूवी बताई जाती है. शुरुआत में इस फिल्म के निर्माण में 100 मिलियन का बजट तय किया गया था, जोकि फिल्म के खत्म होते-होते 200 मिलियन तक जा पहुंचा.

यह फिल्म साल 1997 में क्रिसमस के मौके पर रिलीज की गई थी. गौरतलब हो कि इस फिल्म ने ब्लॉकबस्टर ओपनिंग की. साथ ही अगले 6 महीने में 1 बिलियन की कमाई कर यह इकलौती ऐसी मूवी बन गई, जिसने इतने ज्यादा पैसे कमाए हो.

यही कारण था कि ऑस्कर में भी इस फिल्म ने बाजी मारी.

Titanic Wins 10 Oscar In Different Categories, Director James Cameron (Representative Pic: Academyawardspicture)

अमेरिकी सेना ने गंवाए 4000 जवान

23 मार्च 2008 का दिन शायद अमरीकी सेना व वहां के नागरिकों के लिए भी बेहद दुख भरा दिन था. ऐसा इसलिए, क्योंकि इसी दिन बगदाद में अमेरिकी सेना के 4000 सैनिक शहीद हो गए थे. इस घटना को 2003 में इराक में शुरु हुई जंग में हुए सैन्य नुकसान के तौर पर सबसे बड़ा और दर्दनाक हादसा माना गया.

यह हादसा तब हुआ, जब सभी अमेरिकी सैनिक अपनी गाड़ियों में बैठकर जा रहे थे. तभी अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और सब तहस-नहस हो गया. नुकसान केवल अमेरिकी सेना का ही नहीं हुआ. इसी दिन अमेरिकी रॉकेट और मोर्टार द्वारा किए हमले में कई दर्जन इराकी नागरिक भी मारे गए थे.

इस हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने दुख प्रकट किया था.

When America Loss His 4000 Troops In Iraq (Pic: The Globe Post)

तो यह थीं 23 मार्च से जुड़ी दुनियाभर की प्रमुख घटनाएं.

आपको इनमें से कौन सी घटना सबसे ज्यादा रोचक लगी, कृपया कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं.

Web Title: Day in History 23 March, Hindi Article

Featured Image Credit: Seven Pulse/youtube