फिल्मों में आपने बहुत बार जासूसों को देखा होगा.

वह देश को दुश्मनों से बचाते हैं… आतंकवादियों से लड़ते हैं… आधुनिक हथियार उनके पास होते हैं. उन जासूसों को देख कर न जाने कितने ही लोगों को यह विचार आ जाता है कि वह भी जासूस बनें, लेकिन कैसे?

देश के कितने ही नौजवान जासूस बनना चाहते हैं पर उन्हें पता ही नहीं है कि आखिर उन्हें उसके लिए क्या करना पड़ेगा?

तो अगर आप भी उन नौजवानों में से एक हैं तो आपकी इस परेशानी का हल हम आज आपको देंगे. चलिए आज आपको बताते हैं कि कैसे आप भी बन सकते हैं जासूस और कैसी होती है उनकी जिंदगी–

चुनिंदा लोगों को ही मिलता है ‘मौका’

सेना और पुलिस की भर्ती सार्वजनिक तौर पर होती है इसलिए हर किसी को उसके बारे में पता रहता है. वहीं रॉ के जासूसों की भर्ती बहुत ही चोरी-छिपे की जाती है. यही कारण है कि अधिकतर लोगों को इसके बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं होता. रॉ अपनी हर बात को छिपाती है. यही वजह है कि यह न के बराबर ही भर्तियाँ करती है. अधिकतर समय रॉ अपने जासूस सरकारी दफ्तरों और सेना से ही चुनती है. सेना, सुरक्षा बलों से सबसे ज्यादा जासूस चुने जाते हैं क्योंकि वह पहले से ही ट्रेंड होते हैं.

माना जाता है कि कई बार रॉ विश्वविद्यालयों से भी अपने लिए भर्ती करती है, लेकिन उनमें से बहुत ही कम को जासूस बनने का मौका मिलता है. जासूस बनने के प्रोग्राम के लिए सेलेक्ट होने मात्र के लिए एक व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से तंदरुस्त होना चाहिए. रॉ एजेंट हर दम उनपर नजर रखते हैं. रॉ के लिए सेलेक्ट होना आसान नहीं होता. एक व्यक्ति को कई सारे मुश्किल पड़ाव पार करने पड़ते हैं. इसमें सबसे पहले आता है ‘नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट‘. इस टेस्ट में रॉ अपने कैंडिडेट्स की दिमागी क्षमता को जांचता है कि आखिर वह कितना तेज सोच सकते हैं.

सिर्फ इतने पर ही सब खत्म नहीं होता है. इसके बाद एक टेस्ट और होता है, जिसमें कैंडिडेट्स की मानसिक स्थिति जाँची जाती है. इसमें हर तरह से उनके दिमाग को भटकने की कोशिश की जाती है. उनके दिमाग को पूरी तरह चकराने की कोशिश की जाती है. जब यह दोनों टेस्ट कोई पार कर लेता है तो बारी आती है पर्सनल इंटरव्यू की.

इंटरव्यू कोई एक बार नहीं बल्कि कई बार लिए जाते हैं. जो चुनिंदा कैंडिडेट्स इन सब पड़ावों को पार कर लेते हैं उन्हें ही सेलेक्ट किया जाता है अगली ट्रेनिंग के लिए.

ट्रेनिंग के पहले हिस्से में तो कैंडिडेट के दिमाग को पूरी तरह टेस्ट किया जाता है, लेकिन इसके बाद आता है असली पड़ाव जिसमें उनकी मानसिक और शारीरिक दोनों ही काबिलियत को जांचा जाता है.

Mostly Force People Got Selected For Raw Agent Job (Representative Pic: movietarot)

कड़ी ट्रेनिंग से बनता है असली जासूस!

रॉ से जुड़ना इतना आसान नहीं है. शुरूआती पड़ाव में तो केवल आपके दिमाग का ही टेस्ट लिया जाता है, लेकिन असली ट्रेनिंग तो इसके बाद शुरू होती है. इस ट्रेनिंग में सिखाया जाता है कि कैसे एक असली जासूस बना जाए. इसमें न सिर्फ कैंडीडेट का दिमाग बल्कि उसकी शारीरिक परिक्षा भी ली जाती है.

इसमें उन्हें हर वह गुर सिखाया जाता है जो ट्रेनिंग के बाद असल जिंदगी में उनके काम आ सके. कैंडिडेट्स को अमेरिका, इंग्लैंड, इजराइल जैसे कई देशों में भी भेजा जाता है ताकि वह वहां लड़ने के गुर सीख पाएं.

शरीर थका देनी वाली कड़ी आत्म सुरक्षा की ट्रेनिंग उन्हें दी जाती है. बंदूकों का इस्तेमाल तो उन्हें बताया ही जाता है, लेकिन उन्हें बिना बंदूक के लड़ने के काबिल भी बनाया जाता है. कई बार मौके ऐसे भी आ सकते हैं जब रॉ के जासूस के पास बंदूक न हो… ऐसे में उसके अपने हाथ ही उसके बचाव में काम आ सकते हैं. इसलिए ही इन्हें बहुत मुश्किल ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है.

रॉ एजेंट की दो ट्रेनिंग होती है. पहली होती है बेसिक ट्रेनिंग जो केवल दस दिनों की होती है. बेसिक ट्रेनिंग में इन्हें बताया जाता है कि इन्हें आखिर काम क्या करना है. एक बार जैसे ही यह ट्रेनिंग खत्म होती है उसके बाद शुरू हो जाती है इनकी असली एडवांस ट्रेनिंग.

इस ट्रेनिंग में इन्हें पहले बताया जाता है कि कैसे एक जासूस काम करता है. इन्हें कई रिपोर्ट पढ़नी पड़ती हैं जिससे इन्हें काम करने का तरीका मालूम होता है. कैंडिडेट्स को न सिर्फ रॉ बल्कि बाकी देशों की खुफिया एजेंसी के बारे में भी बताया जाता है.

1 से 2 साल चलने वाली इस ट्रेनिंग में इन्हें बताया जाता है कि कैसे असली जासूस काम करते हैं. विपरीत परिस्थितियों में इन्हें रखा जाता है. इन्हें हर तरह से मजबूत बनाया जाता है. फील्ड की ट्रेनिंग इन्हें किसी नकली नहीं बल्कि असली परिस्थिति में दी जाती है. इन्हें असली मिशन के दौरान ही इनकी ट्रेनिंग मिलती है. कैंडिडेट्स को सिखाया जाता है कि कैसे दुनिया से खुद को बचा के किसी की जासूसी की जाती है.

इसके बाद इन्हें इंटेरोगेशन के लिए तैयार किया जाता है. इसमें इन्हें सिखाया जाता है कि अगर कोई इन्हें पकड़ भी ले तो कैसे अपना मुंह बंद रखें. इन्हें कांटेक्ट बनाने और कई तरह की और जरूरी चीजें सिखाई जाती है. ट्रेनिंग खत्म होने के बाद इन्हें फाइनल स्कूल भेजा जाता है, जहाँ से आखिर में निकलता है एक असली जासूस.

Raw Candidates Have To Attend A 1-2 Year Intense Training Program (Representative Pic: eduexcellence)

खुद की पहचान खोनी पड़ेगी!

एक जासूस की जिंदगी बिलकुल भी आसान नहीं होती. उसके ऊपर इतनी जिम्मेदारियां होती हैं कि वह खुद के लिए जीना ही छोड़ देता है. फिल्मों में एक जासूस की जिंदगी एडवेंचर भरी दिखाई जाती है जबकि असल में यह ऐसी बिलकुल भी नहीं होती है.

इन्हें हर समय खुद को दुश्मन की नजर से बचाए रखना पड़ता है. एक गलती और सारा खेल खत्म. रॉ के जासूस को खुद से जुड़ी सारी जानकारी छिपा के रखनी पड़ती है. इतना ही नहीं यह अपने परिवार तक को नहीं बता सकते हैं कि आखिर यह करते क्या हैं. किसी भी मिशन के लिए इन्हें छोटी से छोटी जानकारी को भी इकठ्ठा करना पड़ता है.

अगर कभी यह देश से बाहर पकड़े जाते हैं तो यह खुद को देश से जुड़ा हुआ नहीं बता सकते हैं. माना जाता है कि खुद देश ही इन्हें अपना जासूस मानने से मना कर देगा. यूँ तो यह भी सेना की तरह देश को बचाने का ही काम करते हैं, लेकिन अपने काम के लिए इन्हें कोई मेडल नहीं मिलता. कोई इनकी पीठ नहीं थपथपाता. एक रॉ जासूस का काम है बस देश की निरंतर रक्षा करते रहना, बिना किसी प्रशंसा या लालसा के!

For Being A Spy You Have To Hide Everything About Your Identity (Representative Pic: spyschool)

आसान नहीं होते इनके मिशन…

रॉ के जासूसों में भारत के रविन्द्र कौशिक का नाम सबसे पहले लिया जाता है. उन्होंने दिखाया कि एक जासूस किस हद तक जा सकता है अपने काम के लिए. रविन्द्र एक आम घर के नौजवान थे. वह बहुत अच्छे थिएटर कलाकार थे. उनकी एक्टिंग देख रॉ के ऑफिसर भी हैरान हो गए और उन्होंने रविन्द्र को रॉ से जुड़ने के लिए कहा. देश सुरक्षा के लिए वह रॉ से जुड़ गए और अपने मिशन के लिए पकिस्तान चले गए.

अपनी जिंदगी के कितने ही साल उन्होंने वहीं पर काटे. वह पकिस्तान फौज में भी भर्ती हो गए. वहां से उन्होंने धीरे-धीरे अपनी रैंक को अफसर तक पहुंचा दिया. पाकिस्तान में रहकर ही रविन्द्र उनकी जासूसी करते थे. वह रॉ को पाकिस्तान की खुफिया जानकरी मुहैया किया करते थे. उनकी जिंदगी काफी सही चल रही थी कि तब तक उनका भेद खुल गया.

नतीजन रविन्द्र को गिरफ्तार कर लिया गया. रविन्द्र से जानकारी निकालने के लिए उन पर कई अत्याचार किए गए और 16 साल के लिए उन्हें जेल में तड़पने के लिए छोड़ दिया. रविन्द्र ने अंतिम सांस तक देश के खिलाफ कोई जानकारी नहीं दी. वह आखिरी सांस तक अपने काम के प्रति वफादार रहे. रविन्द्र की कहानी जान के पता चलता है कि रॉ का काम कितनी कठिनाइयों भरा है.

Ravinder Kaushik Was One Of The Greatest Indian Spy (Representative Pic: atimes)

तो यह है एक रॉ का जासूस बनने का तरीका. यह किसी आम 9 से 5 की नौकरी जैसा नहीं है, लेकिन फिर भी कई लोग इससे जुड़ते हैं देश की सेवा करने के लिए.

Web Title: How To Become A Raw Spy In India, Hindi Article

Feature Image Credit: Logical Hindu