इतिहास में घटित ख़ास घटनाएं, किसी महान व्यक्ति का जन्मदिन या किसी हस्ती का अलविदा कह जाना एक पन्ना जोड़ देता है. यह वह लोग या घटनाएं होती हैं जिनके कारण लोगों पर कोई गहरा असर पड़ा हो. इन्होंने अपनी कुछ ऐसी छाप छोड़ी होती है कि वक़्त की धूल भी इनका कुछ नहीं कर पाती है.

आज के दिन भी कई ऐसी बातें  हुई हैं जिन्हें हम हर साल याद करेंगे.

तो चलिये जानते हैं कौन सी हैं वो बातें जो आज के दिन को ख़ास बनाती हैं–

मशहूर लेखक ‘चार्ल्स डिकेंस’ का जन्मदिन

आज अंग्रेज़ी के मशहूर लेखक चार्ल्स डिकेंस का जन्मदिन है. चार्ल्स डिकेंस ने अपनी कलम से कुछ ऐसे किरदारों को जन्म दिया जिनकी कहानियां आज भी हमें लुभाती हैं.

चार्ल्स का बचपन मुश्किलों से भरा रहा. उनके पिता को ऋणग्रस्त होने के कारण जेल जाना पड़ा. जिसकी वजह से चार्ल्स के परिवार को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ी.परिवार चलाने के लिए पैसों की जरूरत थी. चार्ल्स के पिता के जाने के बाद घर चलाना बहुत मुश्किल हो गया था. इसलिए ही चार्ल्स ने नौ साल की उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया. इसके बाद वह परिवार के लिए पैसा कमाने के लिए एक फैक्ट्री में काम करने लगे. इस अनुभव को डिकेंस ने अपने दो उपन्यासों ‘डेविड कॉपरफील्ड’ और ‘लिटिल डोरिट’ में अंकित किया है.

डिकेंस की प्रसिद्ध रचनाओं में ‘पिकविक पेपर्स’, ‘ओलिवर ट्विस्ट’, ‘निकोलस निकिलबी’, ‘टेल ऑफ़ टू सिटीज’ आदि शामिल हैं. इन कथाओं में डिकेंस ने तत्कालीन अंग्रेजी समाज की कुप्रथाओं और कुरीतियों पर प्रहार किया है.

वहीं, बॉलीवुड में भी चार्ल्स डिकेंस की कहानियों को फिल्मी पर्दे पर जगह मिली. कैटरीना कैफ़ और आदित्य राय कपूर की फ़िल्म ‘फ़ितूर’ चार्ल्स डिकेंस के उपन्यास ‘ग्रेट एक्सपेक्टेशंस’ पर आधारित थी.

English novelist Charles Dickens (1812 – 1870) (Pic: independent)

अनिल कुंबले ने चटकाए ‘दस विकेट’

आज सात फरवरी के दिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास के लिए बेहद ख़ास है. आज के दिन सन 1999 भारतीय टीम के सबसे कामयाब लेग स्‍पिनर अनिल कुंबले ने दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान में पाकिस्तान के सभी 10 खिलाड़ियों को टेस्‍ट मैच की एक ही इनिंग में आउट कर इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करवाया था.

कुंबले ये कारनामा करने वाले विश्‍व के दूसरे गेंदबाज बने. कुंबले से पहले सिर्फ इंग्लिश प्‍लेयर जिम लेकर ही 1956 में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ यह कारनामा कर पाए थे.

इस मैच में कुंबले ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन देते हुए कुल 14 विकेट लिए.

4 फरवरी से 7 फरवरी 1999 तक चले उस मुकाबले में कुंबले ने 18.2 ओवर के स्पेल में 37 रन देकर कुल 10 विकेट झटके थे. उस मैच में 402 रनों का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत बेहद शानदार हुई थी.

हालांकि पाकिस्तान की पारी 207 रनों पर ही सिमट गई और भारत ने 212 रनों से पाकिस्तान को मात दी थी. यह भारत की पाकिस्तान पर 23 टेस्ट मैचों के बाद पहली जीत थी.

Anil Kumble (Pic: theringsideview)

जब देश की आज़ादी के लिए शहीद हुए ‘सचिंद्रनाथ सान्याल’

देश की आज़ादी के लिए उनमें एक अजीब-सा दीवानापन था. ऐसा दीवानापन की काला पानी की सज़ा भी वे हंसते-हंसते सह गए. ऐसे थे स्वतंत्रता संग्रामी सचिंद्रनाथ सान्याल.

बनारस की धरती पर जन्मे इस वीर पुरुष ने आज के ही दिन दुनिया को अलविदा कहा था. इस स्वतंत्रता सेनानी ने देश के लिए अपने जीवन के 20 साल ब्रिटिश जेलों में गुजार दिए.

कॉलेज के दिनों से ही सान्याल आजादी की लड़ाई में जुड़ गए थे. कहा ये जाता है कि गांधी जी के आने से पहले और आने के दस साल बाद तक जितनी भी क्रांतिकारी गतिविधियां हुईं, उन सबमें सान्याल का नाम शामिल था. चाहे वो 1912 में अंग्रेजी वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने का केस हो, या फिर 1915 की गदर क्रांति, या फिर रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान के साथ काकोरी ट्रेन डकैती का केस हो. हर जगह सान्याल के कदम सिर्फ देश की आजादी के लिए थे.

पहली बार वह 1915 में बनारस कांड में शामिल हुए. उन्हें इस कांड में काला पानी भी भेजा गया. उनकी प्रॉपर्टी को ब्रिटिश सरकार ने कब्जे में ले लिया. वहां से आने के बाद 1924 में उन्होंने हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन किया. वर्ष 1923 में उनके द्वारा खड़े किए गये ‘हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ को ही भगत सिंह एवं अन्य साथियों ने ‘हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातांत्रिक संघ’ के रूप में विकसित किया.

सान्याल ने जेल में रहते हुए एक किताब भी लिखी. उस किताब का नाम था ‘बंदी जीवन’. उनकी इस किताब के चलते वो युवाओं की प्रेरणा बनकर उभरे.

Freedom Fighter Sachindra Nath Sanyal (Pic: geni/flipkart)

‘द बीटल्स’ बैंड अमेरिका पहुंचा

आज ही के दिन ब्रिटिश रॉक बैंड ‘द बीटल्स’ के सदस्य अपने पहले भ्रमण पर अमेरिका पहुंचे थे. दोपहर एक बजे के आसपास जब वो कैनेडी हवाई अड्डे पहुंचे तो उनके स्वागत के लिए 3,000 प्रशंसक वहां मौजूद थे.

कई लोग अपने स्कूल, कॉलेज, काम छोड़कर वहां पहुंचे थे. उनके हाथों में तख़्तियां थीं जिस पर लिखा था – हमें आपसे प्यार है. आप कृपया यहीं रहिए.

अमेरिका के बाज़ार में अपनी जगह बनाने वाला बीटल्स पहला ब्रिटिश संगीत बैंड था. कहा जाता है कि जब ये बैंड एक टीवी शो पर आया तो अमेरिका के 40% लोगों ने उस रात उस शो को देखा था. इतना ही नहीं कहते हैं कि उस दिन अमेरिका की दैनिक जुर्म दर भी 50% कम आंकी गई थी.

‘द बीटल्स’ अपने समय का सबसे मशहूर बैंड था. इसका यूनिक स्टाइल और संगीत दुनियाभर में लोकप्रिय था.

The Beatles Band (Pic: billboard)

‘लिटिल ट्रैंप’ के रूप में सामने आए चार्ली चैप्लिन

आज के दिन सन 1914 में, मूक फिल्म ‘किड ऑटो रेसेस ऐट वेनिस’ का प्रीमियर हुआ था. इसमें अभिनेता चार्ली चैप्लिन अपने सबसे मशहूर किरदार ‘लिटिल ट्रैंप’ के रूप में फिल्मी पर्दे पर आए.

चार्ली ने अपनी ज्यादातर फिल्मों में ‘ट्रैंप’ नामक किरदार का चित्रण किया. यह उनके असल जीवन के अतीत पर आधारित था. दुबले, ठिगने और फटेहाल ट्रैंप की मुफलिसी और बेफ़िक्री ने फिल्मी दर्शकों को खूब हंसाया.

ट्रैंप के बहाने चार्ली ने पुराने मानकों को तोङते हुए एक ऐसे सौंदर्यबोध को गढने की कोशिश की जिसमें गरीबी और अभाव में भी खुशमिजाजी है. चार्ली ने अपने जीवन के संघर्षों से एक ऐसा नज़रिया हासिल कर लिया था, जिससे वह अपनी फिल्मों में मेहनतकश आवाम की भावनाओं को बुलंदी के साथ जाहिर करते थे. चार्ली की सफलता का राज अभिनय की एक अनोखी शैली को विकसित करना था.

Charlie Chaplin (Pic: bestmoviesbyfarr)

तो ये थी आज के दिन की कुछ ख़ास बातें. अगर आप भी इतिहास में आज के दिन से जुड़ी किसी ख़ास बात की जानकारी रखते हैं तो कमेंट बॉक्स में ज़रूर शेयर करें.

Web Title: Important Events On February 7, Hindi Article

Feature Image Credit: biography/newindianexpress/lalalandhistory