दुनिया में शायद ही ऐसा कोई हो, जो स्मार्ट फोन रखे और फेसबुक का एप न हो. तमाम विवादों और आरोपों-प्रत्यारोपों के बावजूद लोगों के बीच फेसबुक का क्रेज कम नहीं हुआ है. पर इस सोशल मीडिया नेटवर्किंग साइट को चलाने के पीछे हजारों लोगों की टीम काम कर रही है. इन चेहरों को न तो हमनें कभी देखा है न ही उनका नाम सुना.

किन्तु, जब फेसबुक में कृतिगा रेड्डी के नाम की गूंज उठी तो न केवल भारत ने बल्कि पूरी दुनिया ने उनकी तरफ देखा. कृतिगा रेड्डी भारत की वह पहली महिला हैं, जिसे फेसबुक ने अपनी कंपनी के सबसे उच्च पद पर बैठाया.

भारत में फेसबुक की तरक्की के पीछे कृतिका का बहुत सहयोग रहा है.

हालांकि, फेसबुक में उनका सफर आसान नहीं रहा. कृतिगा ने हर तरह की चुनौतियों का सामना करके दुनिया के सामने एक मिसाल पेश की है. तो चलिए आज मिलते हैं फेसबुक में काम करने वाली पहली भारतीय महिला से-

चेन्नई से अमेरिका तक का सफर

कृतिगा जुलाई 2010 में फेसबुक इंडिया की हेड बनी थीं. यह बात और है कि इस पद पर आने से पहले दुनिया में कृतिगा के नाम से अपरिचित रही पर तकनीक और सोशल नेवर्किंग के क्षेत्र में काम करने वाले दिग्गज कृतिगा की प्रतिभा से हमेशा से परिचि​त थे. कृतिगा का जन्म 1972 में चेन्नई में हुआ था.

पिता एक सरकारी कर्मचारी थे और मिडिल क्लास परिवार से होने के कारण कृतिका की परवरिश भी बेहद साधारण ढंग से हुई. लेकिन इससे उसकी असाधारण प्रतिभा पर कोई असर नहीं हुआ. जिस उम्र में लड़कियों अपने सहेलियों के साथ वक्त बिताना पसंद करती हैं उस उम्र में कृतिगा किताबों में सिर खपाए रहतीं थीं.

उन्होंने मुंबई के महात्मा गांधी मिशन इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलजी कॉलेज से कम्प्यूटर सांइस की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद यूनाइटेड स्टेट के स्टेनफोर्ड यूनीवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल आॅफ बिजनेस से एमबीए की डिग्री हासिल की. इसके साथ ही सिराकस वि​श्वविद्यालय से कम्प्यूटर साइंस के क्षेत्र में आगे की पढ़ाई जारी रखी.

Kirthiga Reddy (Pic: Speakerpedia)

मोटोरोला, जैसी कंपनियों का हिस्सा रहीं

तमाम डिग्रियां साल 1995 तक पूरी हो चुकी थीं, जिसके बाद कृतिगा का अगला लक्ष्य अच्छी जॉब करना था. कृतिगा ने अपने करियर की शुरूआत सिलिकॉन ग्राफिक्स के साथ की. जहां उन्होंने लगातार 6 साल काम किया.

हालांकि यह कृतिगा का मुकाम कभी नहीं रहा. बेशक सैलरी अच्छी थी और जॉब सिक्योरिटी जैसी व्यवस्था थी पर वह अपने करियर को बस यहीं नहीं रोकना चाहतीं थी. जॉब के दौरान ही कृतिगा के परिवार ने उनकी शादी की बात शुरू की. उन्हें परिवार की खुशियों की परवाह थी, पर शर्त केवल इतनी थी कि वे अपने करियर को प्राथमिकता देने वाले परिवार के साथ नाता जोड़ना चाहती थीं. देव के रूप में कृतिगा का यह सपना भी पूरा हो गया. दोनों पति-पत्नी अमेरिका में ही बस गए.

इस दौरान कृतिगा ने मोटोरोला, गुड टेक्नॉलजी, फोनेक्स टेक्नॉलजी जैसी नामचीन कंपनियों में बतौर टीम लीडर काम किया. उनके कौशल को देखते हुए फेसबुक ने उन्हें जॉब आॅफर किया. वह भी कोई छोटी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि भारत में फेसबुक की लीडर बनने की चुनौती.

कृतिगा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई तब कई पुरूषों का नाम सूची में शामिल था, जिन्हें पार कर कृतिगा के नाम पर मुहर लगी थी. कई लोगों ने उनकी आलोचना की और यहां तक कहा कि एक महिला पूरे देश की कमान सम्हालने के लायक नहीं हो सकती.

पहले ही दिन खोलना पड़ा आॅफिस क्योंकि...

कृतिगा के नाम पर खुद फेसबुक के सीईओ मार्क जुगरबर्क ने मुहर लगाई थी, इसलिए उनका खुलकर विरोध होना संभव नहीं था. बावजूद इसके स्टॉफ का सहयोग पाने के लिए कृतिगा को काफी मशक्कत करनी पड़ी.

बहरहाल कृतिगा ने अपनी मेहनत जारी रखी और साल 2011 में दुनिया की 50 पावरफुल वुमेन में अपनी जगह बनाई. जब कृतिगा ने भारत में अपनी जिम्मेदारी सम्हाली, तब फेसबुक को सोशल नेटवर्किंग के प्लेटफॉर्म की बजाए व्यावसायिक लक्ष्य के रूप में देखा जाना शुरू हुआ. उनका मकसद बड़े ब्रांडों के साथ जुड़ना रहा.

इस काम को कृतिगा ने बखूबी निभाया. नतीजा यह हुआ कि साल 2013 तक फेसबुक नामचीन कंपनियों के साथ-साथ स्टार्टअप करने वालों के लिए भी विज्ञापन का माध्यम बन गया. इससे फेसबुक को आर्थिक तौर पर काफी मुनाफा हुआ.

कृतिगा ने अपने एक इंटरव्यू में दिलचस्प वाक्ये का जिक्र किया था...

उन्होंने अपनी लाइफ के 'आह' मूवमेंट को शेयर करते हुए कहा कि जब वे भारत पहुंची और आॅफिस के पहले दिन समय से दफ्तर पहुंचीं, तो देखा वहां चौकीदार के सिवाए और कोई नहीं है. मजबूरन कृतिगा को खुद ही आॅफिस का शटर खोलना पड़ा.

Facebook Office (Pic: Vietnam)

परिवार का साथ बनाता है कामयाब

कृतिगा मानती हैं कि चाहे पुरूष हो या महिला, जब तक उसके पीछे उसका परिवार या शुभचिंतक न हो, वह मंजिल नहीं पा सकता. जब बेटी थी, तब पिता ने साथ दिया और जब पत्नी बनी तो पति ने खूब साथ निभाया.

अक्सर काम के बोझ के कारण कृतिगा थक जातीं या उन्हें घर आने में देर हो जाती थी. तब केवल देव ही थे, जो उनका सारा काम बांट लेते थे. वे उनके आॅफिस जाने से लेकर आने तक की हर तैयार रखते थे. तनाव के वक्त कृतिगा का मूड फ्रेश रखने की कोशिश करते रहते. देव का यही सपोर्ट कृतिगा को हर मुश्किल वक्त में मजबूत बनाएं रखे हुए था.

कृतिगा खुद कहती हैं कि हमेशा वक्त एक जैसा नहीं होता. कई बार वे अपने प्रोजेक्ट के इंप्रूवमेंट को लेकर इतना परेशान हो जाती थीं कि परिवार पर ध्यान नहीं दे पातीं थी. कई बार कलीग्स के साथ हुई अनबन से मानसिक तनाव रहता था. ऐसे में देव उनका बहुत सपोर्ट करते थे. जब कृतिगा को फेसबुक ने भारत को लीड करने की जिम्मेदारी दी थी, तब वे गर्भवति थीं.

यही कारण था कि कुछ लोग उन्हें काम के लायक नहीं समझ रहे थे. या फिर यह सोचते थे कि ​बच्चों की जिम्मेदारी आने के बाद शायद वो ठीक ढंग से काम न कर सकें. पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. कृतिगा आज दो बच्चों की मां हैं, पत्नी हैं और उससे भी अहम एक सशक्त महिला हैं.

कड़े फैसलों के लिए जानी जाती हैं

वे अपने कड़े फैसलों के लिए भी जानी जाती हैं. कृतिगा ने साल 2010 से 2016 तक भारत में फेसबुक की कमान सम्हाल रखी थी, लेकिन 2017 में उन्होंने भारत से वा​पिसी कर ली. जब कृतिगा ने यह फैसला लिया, तो खुद मार्क भी हतप्रत थे. क्योंकि यह निर्णय उस वक्त लिया गया था, जब फेसबुक के फ्री बेसिक्स प्रोग्राम को ट्राई से जोरदार झटका लगा था.

माना जाता है कि कृतिगा भारतीय यूसर्ज की अभिवक्ति की स्वतंत्रता को लेकर काफी सकारात्मक नजरिया रखतीं थीं. जबकि, फेसबुक इस पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा था.

कृतिगा ने अपने भारत फेसबुक से अपने इस्तीफे की जानकारी भी अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए दी. उन्होंने कहा था कि मैं वापस अमेरिका फेसबुक मुख्यालय जाकर वहां पर नए अवसरों की तलाश करूंगी.

मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मुझे दो ऐसे देश में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ, जिसे मैं अपना घर मानती हूं. हमारी कंपनी महिलाओं को अवसर देने में विश्वास करती है और मुझे विश्वास है कि वे इसे आगे भी जारी रखेंगे.

बहरहाल 2 साल पहले कृतिगा ने भारत से विदाई ले ली, पर उनके काम और जिम्मेदारी निभाने के तरीके ने फेसबुक को अब तक अपना मुरीद बनाया हुआ है. वे अमेरिका में फेसबुक के ग्लोबल क्लाइंट पार्टनर और इमर्जिंग मार्केट्स को लीड कर रही हैं. यह काम भी चुनौतियों से भरा हुआ है, क्येांकि अब उनके सामने केवल एक देश नहीं, बल्कि पूरी दुनिया है.

MD Kirthiga Reddy (Pic: People)

कृतिगा रेड्डी वाकई एक मिसाल हैं, खासतौर पर उन महिलाओं के लिए जो चुनौतियों को अवसरों में नहीं बदल पातीं. जो कुछ करना तो चाहती हैं, पर अपनी जिम्मेदारियों को बांट नहीं पातीं!

Web Title: India's First Facebook Female Employee Kirthiga Reddy's Success Story, Hindi Article

Feature Image Credit: yourstory.com