सुरक्षा की बात आती है, तो निश्चित तौर पर भारत में सेना के बाद पुलिस का नाम ही लिया जाता है. जिस तरह सेना के सिपाही सरहदों पर मुस्तैद होकर दुश्मनों से देश की रक्षा करते हैं, ठीक उसी तरह पुलिस सीमा के भीतर रहकर आम लोगों को सुरक्षा देती है.

वैसे भी देश को जितना ख़तरा अन्य देशों के दुश्मनों से होता है, उतना ही ख़तरा देश के भीतर रहकर जुर्म को अंजाम देने वाले गिरोहों से भी होता है. ऐसे ही गिरोहों पर नज़र रखने और उनको किसी बड़ी घटना को अंजाम देने से रोकने के लिए पुलिस बल को मुस्तैद रहना पड़ता है.

किन्तु, क्या आप जानते हैं कि देश के विभिन्न हिस्सों में पुलिस की अगुवाई करने वाले ये अफसर तैयार कहां होते हैं? अगर आपके दिमाग में नेशनल पुलिस अकादमी का नाम आ रहा है, तो आप बिल्कुल सही है.

तो आईये जानते हैं कि यह संस्थान कैसे बना और इसमें किसकी भूमिका खास रही–

‘लौह पुरुष’ ने रखी थी बुनियाद

1947 में आज़ाद होने के बाद हमारा देश धीरे- धीरे प्रगति के रास्ते पर बढ़ रहा था. सरकार सरहदों से लेकर देश की आंतरिक सुरक्षा को मज़बूत करने में लगी हुई थी.

इसी क्रम में उस वक्त डिप्टी पीएम रहे सरदार वल्लभ भाई पटेल ने एक नए संस्थान के गठन में अपनी अहम भूमिका निभाई. उनका मानना था कि देश में ऑल इंडिया सर्विस की स्थापना होनी चाहिए, ताकि देश को बेहतरीन अफसर मिल सकें. आगे वह इसके लिए प्रयत्नशील हुए तो 1948 में भारत को नेशनल पुलिस अकादमी के रूप में एक नया संस्थान मिला.

जानकर हैरानी होगी कि नेशनल पुलिस अकादमी का गठन राजस्थान के माउंट आबू में हुआ. बाद में इसे हैदराबाद में दोबारा से स्थापित किया गया.

Sardar Vallabhbhai Patel (Pic: rediff.com)

यूपीएससी के बाद मिलती है एंट्री

हैदराबाद में स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल नेशनल अकादमी में जाना इतना आसान नहीं है. भारत के सबसे बड़े और कठिन एग्ज़ाम यूपीएससी पास करने के बाद इस संस्थान के दरवाज़े युवाओं के लिये खुलते हैं. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में मिलने वाली रैंक के आधार पर कैडेट संस्थान का चयन करते हैं.

जो कैडेट आईपीएस सेवा चुनता है, उसे यहां से ट्रेनिंग लेना अनिवार्य होता है.

इसके बाद शुरू होती है उनकी ट्रेनिंग, जिसको पूरी करने के बाद उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनाती मिलती है.

सुनने में यह बहुत आसान मालूम पड़ता है, पर सच तो यह है कि यह आसान नहीं होता!

कहते हैं कि यहां दाखिल होने के बाद कैडेट्स को बाहरी दुनिया को एकदम भुलाना पड़ता है. एक साल तक कमर तोड़ने वाली इस ट्रेनिंग में कैडेट्स को हर स्थिति से निपटने की तालीम दी जाती है.

कड़ी ट्रेनिंग की एक वजह यह भी होती है कि आईपीएस अधिकारी को तैनाती मिलने के बाद पूरे राज्य के किसी एक ज़िले की पुलिस फोर्स को लीड करना होता है. ऐसे में उनका इस कठिन ट्रेनिंग में पास होना जरूरी होता है. कई बार तो उन्हें स्पेशल ट्रेनिंग के लिए विदेशों तक में भी भेजा जाता है.

IPS officer after Training (Pic: Auclip.net)

‘सत्य, सेवा और सुरक्षा’ का नारा

हर संस्थान का अपना एक नारा होता है. यह नारा ही संस्थान की सबसे बड़ी पहचान होता है. नारे के दम पर ही बहादुर कैडेट्स मैदान ए जंग में दुश्मनों को चित करने के लिए कूद जाते हैं.

ठीक वैसे ही जैसे इंडियन आर्मी की हर रेजिमेंट का एक युद्ध नारा होता है.

भारतीय सेना के यह नारे ही सेना की ताकत बढ़ाते हैं. जब सैनिक इन्हें चीखता हुआ दुश्मन के पास जाता है तो उसकी भी रूह कांप जाती है. यही कारण है कि सब ही सेना रेजिमेंट को उनके अलग-अलग नारे दिए हुए हैं.

ठीक इसी तरह इस अकादमी का नारा है. सत्य, सेवा और सुरक्षा.

यानी एक आईपीएस के लिए हमेशा यह ज़रुरी है कि वह समाज में सत्य का साथ दे, मुजरिमों को सलाखों तक पहुंचाए साथ ही अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन करे. इसमें भी ज्यादा अहम कि वह समाज के आम नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करे.

अकादमी के नारे से साफ़ जाहिर होता है कि एक आईपीएस के कंधों पर समाज की कितनी बड़ी जिम्मेदारी होती है. हर साल पासिंग आडट परेड में पास आउट होने वाले आईपीएस अफसरों को इन तीन अहम लफ्ज़ों का निष्ठा से पालन करने की बात कही जाती है.

सबसे दिलचस्प नेशनल पुलिस अकादमी का गाना भी है.

लोहे जैसी हिम्मत है, लोहे सा जज़्बा अपना
आंखों में लिए चलते हैं हम लौहपुरूष का सपना…

इस गाने को पासिंग आउट परेड के दौरान कैडेट्स एक स्वर में गाते हैं.

IPS officers after Passing out parade (Pic: darkroom)

‘महिला अफसरों’ ने बजाया डंका

देश में यूं तो महिला और पुरुष की बराबरी के लिए दिन रात बहस चलती रहती है, किन्तु ज़मीनी स्तर पर हक़ीकत को देखा जाए तो तस्वीर काफी अलग है. कई साल पहले तक कहा जाता था कि महिलाओं के लिए पुलिस की नौकरी ठीक नहीं है. यह नौकरी केवल पुरूषों के लिए हैं.

किन्तु, नेशनल पुलिस अकादमी में न सिर्फ हर साल कई महिला अफसर आईपीएस बनने की ट्रेनिंग लेती हैं, बल्कि ऊंचे ओहदों पर पहुंच कर बखूबी देश सेवा भी कर रही हैं.

इतना ही नहीं जिस संस्थान की बुनियाद लौहपुरूष सरदार पटेल ने रखी थी. उस संस्थान की बागडोर संभालने का गौरव भी महिलाओं को प्राप्त हुआ है. 1979 बैच की आईपीएस महिला अफसर अरुणा बहुगुणा को संस्थान की पहली महिला डॉयरेक्टर बनने का गौरव प्राप्त है.

वहीं मौजूदा समय में भी अकादमी की बागडोर 1986 बैच की महिला अफसर डीआर डोले बरमन के हाथों में है. शायद यही कारण है कि पुलिस सर्विस में हर साल लड़कियों का रुझान बढ़ रहा है और देश भर से काफी संख्या में लड़कियां आईपीएस की ट्रेनिंग के लिये चुनी जाती हैं, जोकि देश के लिए गौरव की बात है.

DR Doley Barman (Pic: Pinterest)

नेशनल पुलिस अकादमी हर साल देश को जांबाज आईपीएस अफसर दे रहा है, जो देश के कोने-कोने में आंतरिक सुरक्षा को मज़बूत बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं. अगर आप को भी इस संस्थान से जुड़ी कुछ अहम बातें पता हो तो कमेंट बॉक्स में ज़रुर बताएं.

Web Title: Facts of National Police Academy, Hindi Article

Feature Image Credit: NYOOOZ