आप बैंकिंग तो करते ही होंगे, जाहिर तौर पर…

आज इससे कोई भी अछूता नहीं है. इसका एक कारण भारत में बहुतायत में बैंक होना भी है. आज यहां लगभग 190 बैंक कार्यरत हैं जिसमें से 43 बैंक विदेशी हैं.

इन सबके बावजूद क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे बड़ा बैंक कौन सा है?

आप अपने जीवन में कभी न कभी इस बैंक में गए जरूर होंगे और अगर आप ग्रामीण परिवेश से हैं तो ये संभव है कि आपने नजदीक इस बैंक को देखा होगा.

आइये भारत के सबसे बड़े बैंक की कहानी जानते हैं–

बैंक ऑफ कलकत्ता से हुई शुरूआत

ब्रिटिश भारत में एक ऐसा समय भी आया जब ईस्ट इंडिया कंपनी की माली हालत खराब हो रही थी. वो मराठा और मैसूर सल्तनत से लड़ाई में लगभग कंगाली की अवस्था में आ गई. अब आगे युद्ध लड़ने और अन्य जरूरतों के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी.

ब्रिटिश भारत में एक समय तक कलकत्ता सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र था. वहीं यूरोप के व्यापारी भारत से माल की सप्लाई लंदन किया करते थे और भारतीय लोगों को धंधों के लिए भी पूंजी की जरूरत थी. ऐसे में ईस्ट इंडिया कंपनी, यूरोप के व्यापारियों और भारत के कुछ अमीर लोगों की जरूरतों का ख्याल रखते हुए 2 जून 1806 ई. को बैंक ऑफ कलकत्ता की स्थापना की गई.

ये ब्रिटिश भारत का बंगाल सरकार के साथ पहला संयुक्त बैंक था. अपनी स्थापना के तीन साल बाद ही बैंक ऑफ कलकत्ता का नाम बदलकर बैंक ऑफ बंगाल कर दिया गया.

इस प्रकार से भारत में आधुनिक बैंकिंग की शुरूआत बैंक ऑफ कलकत्ता के साथ शुरू मानी जाती है.

इसी तरह बॉम्बे प्रैसीडेंसी में व्यापारिक गतिविधियों में जान फूंकने के लिए 15 अप्रैल 1840 को बैंक ऑफ बॉम्बे की स्थापना की गई, तो मद्रास प्रैसीडेंसी के लिए 1 जुलाई 1843 को बैंक ऑफ मद्रास खोला गया.

ये तीनों बैंक रॉयल चार्टर द्वारा संचालित थे और तीनों को अपने अधिकार क्षेत्र में नोट जारी करने का अधिकार था. हालांकि ब्रिटिश सरकार ने सन 1861 में पेपर करेंसी एक्ट पास करके इन बैंकों से नोट जारी करने के अधिकार छीन लिए और 1862 में इससे संबंधित सारे अधिकार तत्कालीन भारत सरकार को सौंप दिए गए.

बैंक ऑफ कलकत्ता का कार्यक्षेत्र बर्मा, संयुक्त प्रांत, मध्य प्रांत, पंजाब, दिल्ली, हैदराबाद और आधुनिक बंगाल, ओडिशा, बिहार और वर्तमान पाकिस्तान में मौजूद खैबर पख्तूनख्वा तक था. ब्रिटिश भारत की ज्यादातर आबादी इसी क्षेत्र में निवास करती थी. वहीं बैंक ऑफ बॉम्बे का कार्यक्षेत्र बंबई प्रैसीडेंसी, सिंध, इंदौर और बेरार तक था तथा बैंक ऑफ मद्रास का मैसूर व मद्रास प्रैसीडेंसी तक सीमित था.

इनके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में ज्यादातर भारत में काम कर रही यूरोपीय संस्थाओं के निदेशक थे, बाकी सरकार द्वारा नामित थे. ये बैंक मात्र एक लाख रुपए तक का ही लोन दे सकते थे.

सन 1876 तक इन बैंकों ने अपनी प्रैसीडेंसीज में कई शाखाएं खोलीं. इस समय तक बैंक ऑफ बंगाल की बंगाल प्रैसीडेंसी में 18 तो वहीं बैंक ऑफ मद्रास और बैंक ऑफ बॉम्बे की 15-15 ब्रांच थीं.

Bank of Bengal, Calcutta. (Pic: oldindianarts)

… और बना इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया!

27 जनवरी 1921 को बैंक ऑफ बॉम्बे, बैंक ऑफ मद्रास और बैंक ऑफ बंगाल की सभी 70 ब्रांच का एक साथ विलय कर दिया गया अब इसका नाम हो गया इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया.

इंपीरियल बैंक की एक शाखा लंदन में भी थी जिससे बंगाल, मद्रास और बॉम्बे बैंक के पुराने और नए ग्राहक पैसा जमा कर सकते थे. बैंक का ज्यादातर स्टॉक भारतीयों के पास था, वहीं इसके प्रबंधक यूरोपीयन थे.

इंपीरियल बैंक में विलय हुए तीनों बैंकों के पुराने शेयर होल्डर्स के स्थिति यथावत रही. ब्रिटिश सरकार को पहले तीन साल तक बैंक के लाभ में कोई भी हिस्सा नहीं दिया गया.

इंपीरियल बैंक ने सरकार के व्यापारिक और एक केंद्रीय बैंक के तौर कार्य किया. सन 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना के बाद केंद्रीय बैंक के सारे कार्य रिजर्व बैंक को हस्तांतरित कर दिए गए और इंपीरियल बैंक केवल व्यापारिक कार्यों तक सीमित रह गया.

भारत की स्वतंत्रता तक इंपीरियल बैंक की 172 ब्रांच, 200 सब ब्रांच में 275 करोड़ 14 लाख रुपए जमा थे.

Stock Certificate Issued by Imperial Bank of India. (Pic: cabinet-comfort)

ऐसे बना ‘स्टेट बैंक’

इंपीरियल बैंक के अलावा भी भारत में कई और यूरोपियन और देशी बैंक अपना कारोबार बढ़ा रहे थे लेकिन वो सभी अमीरों तक सीमित थे. ऐसे में भारत का एक बड़ा वर्ग बैंकिंग से वंचित था.

भारत की पहली पंचवर्षीय योजना के द्वारा इस ओर ध्यान दिलाया गया. वहीं एस्टड डिनशॉ गोरवाला की अध्यक्षता में बनी ऑल इंडिया रूरल क्रेडिट सर्वे कमिटी, 1951 ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में कृषि के लिए ऋण की व्यवस्था नहीं है.

इस प्रकार एक ग्रामीण बैंक की जरूरत महसूस की गई.

परिणामस्वरूप भारत की संसद में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया एक्ट पारित किया गया. एक जुलाई 1955 को इस अधिनियम के द्वारा इंपीरियल बैंक को भारतीय स्टेट बैंक ने अधिग्रहित कर लिया.

अब अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए सन 1959 में एसबीआई ने 8 अधीनस्‍थ बैंकों की स्थापना की. इसमें से कुछ बैंक पहले ही स्टेट बैंक में शामिल किए जा चुके हैं, बाकी स्टेट बैंक ऑफ ट्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, भारतीय महिला बैंक का 2017 में भारतीय स्टेट बैंक में विलय कर दिया गया.

इसी विलय के साथ भारतीय स्टेट बैंक 37 लाख करोड़ की परिसंपत्ति, देशभर में लगभग 60 हजार एटीएम और 24 हजार शाखाओं के साथ विश्व के 50 बड़े बैंकों में शामिल हो गया.

भारतीय स्टेट बैंक में कर्मचारियों की संख्या 2 लाख 70  हजार है वहीं ग्राहकों की संख्या लगभग 50 करोड़ है. भारत के घरेलू बैंकिंग बाजार के 23 प्रतिशत हिस्से पर भारतीय स्टेट बैंक का कब्जा है. वहीं 37 देशों में इसके 198 कार्यालय हैं और 72 देशों तक इसकी पहुंच है.

2017 की फार्च्यून ग्लोबल 500 कपनियों की सूची में इसका 217वां स्थान है.

इस समय भारतीय स्टेट बैंक में 37 करोड़ बैंक खाते मौजूद हैं, ये संख्या अमेरिका की जनसंख्या और रूस, जापान व जर्मनी की कुल आबादी से भी ज्यादा है.

State Bank of India UK Branch. (Pic: archinect)

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारतीय स्टेट बैंक भारत का सबसे बड़ा ग्रामीण बैंक भी है. भारतीय स्टेट बैंक की स्थापना का एक उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य धारा में लाना भी था.  हालांकि भारत की जीडीपी में कृषि क्षेत्र का योगदान गिर रहा है जो सन 1950-51 में जीडीपी का 51.81 प्रतिशत के मुकाबले आज 15.11 प्रतिशत ही रह गया है.

बावजूद इसके भारत के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक भारतीय स्टेट बैंक अपनी बैंकिंग सेवाएं लगातार पहुंचा रहा है.

आपको स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का सफ़र कैसा लगा, कमेन्ट-बॉक्स में अवश्य बताएं. साथ में अगर इस बैंक से जुड़ी कोई और ख़ास जानकारी आपके पास हो तो वह भी हमें बताएं!

Web Title: STATE BANK OF INDIA: INDIA’s LARGEST BANK, Hindi Article

Featured Image Credit: wikimapia