Important Aspects of Budget 2017, Currency Ban (Pic: Trak.in)

इस बार का बजट बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि ‘नोटबंदी’ के बड़े फैसले के बाद आर्थिक परिदृश्य पर जो धुंधलका छाया हुआ था, उसे दूर करने की सर्वाधिक महत्वपूर्ण कोशिश सरकार बजट में ही करेगी. इसके साथ-साथ हो रहे आर्थिक बदलावों के परिप्रेक्ष्य में लोगों को इस बार के बजट से क्या उम्मीदें हैं और वह किस हद तक पूरी होती हैं, यह भी देखने समझने वाली बात होगी. वैसे भी इस बार का बजट एक महीने पहले पेश हो रहा है, तो तमाम फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशन्स को भी उसी हिसाब से अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा. आइये जानते हैं इससे सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें …

लोगों की उम्मीदें

  • आयकर छूट की सीमा

यह बेहद व्यवहारिक उम्मीद है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली 1 फरवरी को देश के साधारण टैक्स पेयर्स की मुश्किलों को कम करने हेतु आयकर छूट की सीमा बढ़ाएं. फिलहाल यह सालाना 2.5 लाख रुपये है, जिसे कई बार व्यवहारिक बनाने की वकालत की जा चुकी है.

डेलॉय ने पिछले साल दिसंबर में एक सर्वे किया था, जिसमें उसने पाया कि 80 फीसदी लोग इनकम टैक्‍स छूट की लिमिट 3.5 लाख चाहते हैं, तो कई जगहों पर विशेषज्ञ इसे 5 लाख तक बढाए जाने की वकालत करते हैं, जो पूरी तरह जायज़ भी है.

  • कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए दो कदम

अपना व्यक्तिगत अनुभव बताऊँ तो 3000 का राशन लेने के बाद पेमेंट देने के लिए पर्स से डेबिट कार्ड निकाला, किन्तु 1% का टैक्स बचाने की खातिर वापस उसे पर्स में ठूस लिया. मेरे जैसे करोड़ों लोगों की सोच हो सकती है कि आखिर 30 रूपये क्यों दूं? चूंकि, लोग कैश खर्च करते हैं, इसलिए कैश लेना भी चाहेंगे और इस तरह “कैशलेस सोसायटी” की सोच पीछे रह जाती है. संभव है इस बार के बजट में वित्त मंत्री कैशलेस ट्रांजैक्शन्स को प्रमोट करने की कई स्कीमें देंगे.

हालाँकि, कार्ड पेमेंट पर छूट या फिर टोल बूथ पर कार्ड पेमेंट पर छूट आदि को पहले ही अमल में लाया जा चुका है, किन्तु इतना भर पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्ड से पेमेंट पर एक पैसा भी एक्स्ट्रा लगेगा, तब तक ‘कैशलेस सोसायटी’ का असल उद्देश्य पूरा नहीं होगा.

कार्ड कंपनियों को पेमेंट देने के लिए प्रोडक्ट पर ही टैक्स लगाया जा सकता है या फिर कोई दूसरी राह खोजी जा सकती है.

Important Aspects of Budget 2017, Arun Jaitley with PM Modi (Pic: Aquasag Tech.)

  • नोटबंदी की वजह से किसानों को रबी की फसल बेचने में काफी दिक्कतें पेश आईं और उन्हें नुकसान भी हुआ. किसानों को उम्मीद है कि इस बजट में सरकार उनकी हालत को ध्यान में रखते हुए मुआवजे के तौर पर कोई तोहफा दे सकती है, तो सरकार से अपेक्षा है कि शहरों की तरह गांवों में भी कैशलेस ट्रांजैक्शन्स के माध्यमों को तेजी से पहुंचाया जाएगा.
  • इनकम टैक्‍स कानून के सेक्‍शन 80सी के तहत अभी 1.5 लाख रुपए तक ही सालाना सेविंग दिखा सकते हैं. सरकार लॉन्‍ग टर्म इन्‍वेस्‍टमेंट को प्रमोट करने के लिए इसकी सीमा बढ़ा सकती है.

इन ‘इंडस्ट्रीज’ को चाहिए ‘संजीवनी’!

रियल एस्टेट

नोटबंदी की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर को काफी धक्का पहुंचा है. चूंकि, यह सेक्टर हमारी जीडीपी के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए नकदी की समस्या से जूझ रहे इस सेक्टर को बजट में इनकम टैक्स रेट, वेतनभोगी लोगों को हाउस रेंट अलाउंस में इजाफा, कन्स्ट्रक्शन मटीरियल की कीमतों का निर्धारण आदि से जुड़ी घोषणाओं की उम्मीद है. वैसे सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि ‘हाउसिंग लोन ब्याज’ पर वित्त मंत्री का क्या रूख रहता है.

स्टार्टअप पर सरकार का रूख

ख़बरों के मुताबिक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्टार्टअप कंपनियों को टैक्स में छूट दिए जाने के संकेत दिए हैं. संकेत यह भी हैं कि वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से स्टार्टअप कंपनियों के लिए टैक्स छूट की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 7 साल करने की मांग की है, जो बेहद महत्वपूर्ण है. वस्तुतः स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया मोदी सरकार का महत्वकांक्षी प्रोग्राम रहा है, किन्तु “नोटबंदी” के कदम से ‘स्टार्टअप सोच’ को ख़ासा नुक्सान पहुंचा है. ऐसे में सरकार का रूख स्टार्टअप पर क्या रखता है, यह बेहद महत्वपूर्ण सवाल है.

छोटे और मझोले उद्योग

कंपनियों में छंटनी, नई नौकरियों के अवसर कम होने और टैक्‍सेशन के दावपेंच में विदेशी कंपनियों का इन्‍वेस्‍टमेंट फंसा है. लोगों को कैश की किल्‍लत झेलनी पड़ रही है. ऐसी स्थिति अधिकांश उद्योगों के साथ है, खासकर छोटे और मझोले उद्योगों की तो कमर ही टूट चुकी है. इन स्थितियों से निपटने के लिए, खासकर स्माल और मीडियम स्केल इंडस्ट्रीज को सरकार के सहारे की जरूरत पड़ने वाली है.

Important Aspects of Budget 2017, Railway Budget (Pic: Indianrailwaynews)

बजट के सम्बन्ध में कुछ रोचक तथ्य

  1. आम बजट अब 1 फरवरी को आएगा, जबकि अब से पहले यह 1 मार्च को पेश होता रहा है.
  2. इस बार रेल बजट अलग से पेश नहीं होगा बल्कि रेल मंत्रालय के प्रपोजल आम बजट में ही शामिल किये जायेंगे. यह फैसला सितंबर 2016 में ही हो चुका है.
  3. बजट बनाने में इंडस्‍ट्री बॉडी, इकोनॉमिस्‍ट्स, ट्रेड यूनियंस, एग्री एक्‍सपर्ट्स और राज्‍यों के वित्‍त मंत्रियों के साथ प्री-बजट डिस्‍कशन किया जाता है, जो बजट पेश होने के तीन महीने पहले होता है. इस बार यह नवम्बर में शुरू हुआ था.
  4. बजट तैयार करने की प्रक्रिया में ‘हलवा सेरेमनी’ का ख़ास रोल होता है और इसी के साथ बजट तैयार करने का काम पूरी गोपनीयता के साथ शुरू हो जाता है.
  5. बजट से एक सप्‍ताह पहले, इसकी तैयारियों में लगे अफसरों को किसी भी बाहरी से संपर्क करने की अनुमति नहीं होती है तो इनकी सख्‍त मॉनिटरिंग सीसीटीवी और आईबी के अफसरों द्वारा की जाती है.
  6. बजट स्‍पीच से मात्र दो दिन पहले सरकारी पब्लिक रिलेशन एजेंसी (पीआईबी) के तकरीबन 20 अफसर इसमें शामिल होते हैं जो अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू तीन भाषाओं में प्रेस रिलीज तैयार करते हैं. उन अफसरों को भी वित्‍त मंत्री द्वारा बजट स्‍पीच पेश होने तक वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती है.

विवाद जो इस बार ‘बजट’ से जुड़ गए!

पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में 4 फरवरी से 8 मार्च के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में कांग्रेस सहित दुसरे विपक्षी दलों ने आयोग से इस बाबत शिकायत दर्ज कराई और दलील दिया कि मतदान से पहले बजट भाषण से जनता पर सत्ताधारी दल असर डालने की कोशिश करेगा. हालाँकि, चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार को बजट पेश करने की मंजूरी दे दी है, लेकिन इसके साथ ही उसने शर्त रखी है कि इसमें पांच चुनावी राज्यों से जुड़ी किसी योजना का ऐलान नहीं किया जा सकता और न ही इन राज्यों में सरकार की उप्लब्धियों का बखान होना चाहिए. बजट को लेकर ऐसा विवाद पहले कभी नहीं देखा गया है.

Important Aspects of Budget 2017, Real Estate (Creative: renrealty.in)

Web Title: Important Aspects of Budget 2017, Analysis in Hindi

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