पिछले दिनों एक खबर आयी कि एक प्रेमिका ने अपने प्रेमी को गोली मार दी है. देखने में यह क्राइम की एक खबर भर है, किन्तु यह आमतौर पर होने वाला क्राइम नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपा है ‘नेम, फेम’ पाने का जुनून! इस खबर का सन्दर्भ देखना उचित रहेगा, क्योंकि इसके बाद ही हम अंदाज़ा लगा सकेंगे कि ‘फेमस होने के लिए लोग क्या-क्या कर रहे हैं’, खासकर आज का यूथ…

इसके अनुसार, अमेरिका के मिनेसोटा की 19 वर्षीय मोनालिसा पेरेज और उसका 22 वर्षीय ब्‍वायफ्रेंड पेड्रो रुइज यूट्यूब पर एक चैनल चलाते थे. जल्‍दी मशहूर होने और फॉलोअर्स बढ़ाने के मकसद से यह पूरी दुर्घटना घटी. यह स्टंट कुछ ऐसा था कि बॉयफ्रेंड एक मोटी किताब अपने सीने के सामने पकड़ेगा और तभी गर्लफ्रेंड गोली चलाएगी. हमारी आपकी सोचकर ही रूह काँप जा रही है, लेकिन इन नवयुवाओं ने इसे अंज़ाम दे डाला.

गर्लफ्रेंड ने जैसे ही गोली चलाई, वह किताब को भेदते हुए बॉयफ्रेंड के सीने में उतर गई और नतीजा निकला मौके पर उसकी मौत से. गर्लफ्रेंड गैर इरादतन हत्‍या के जुर्म में जेल में गयी, पर सवाल इस सोच का है, जो दिन ब दिन ‘महामारी’ जैसा रूप लेती जा रही है. लोग एक-दूसरे के प्रति तो असंवेदनशील हो ही रहे हैं, अपनी ज़िन्दगी को भी दांव पर लगाने से नहीं चूक रहे हैं.

सर्वाधिक अज़ीब बात तो यह है कि यह सब ‘कैमरे’ के सामने रिकॉर्ड भी हो रहा है, किसी दस्तावेज की तरह.

सिर्फ यही एक खबर क्यों, ऐसी तमाम दूसरी ख़बरें हैं. ऐसे ही एक हेल्थ ब्लॉगर ने कैमरे के सामने ज़हर खा लिया (Link in English) तो दूसरे तमाम प्रैंक्स में एक्सीडेंट्स की ख़बरें आना आम सा हो गया है.प्रश्न उठता है कि आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है और उससे भी बड़ा सवाल यह कि इससे हासिल क्या हो रहा है? चीजें बदल रही हैं और ऐसे में इस ज्वलंत मुद्दे का आंकलन करना सामयिक रहेगा…

इंटरनेट का दौर

नज़र दौड़ाने पर सीधा सा कारण यही दिखता है कि परम्पराएं टूटी हैं और इंटरनेट के ज़माने में लोकप्रियता के लिए नए रास्ते खोजे जा रहे हैं. जाहिर है, जब नए रास्ते खोजे जाएंगे तो राह में कंकड़-पत्थर भी आएंगे और ऊपर वर्णित घटना को निश्चय ही चुभने वाला नुकीला पत्थर कहा जा सकता है. इस तरह के बुरे अनुभव के पीछे यह मानसिकता भी काम करती है, जिसके अनुसार इंटरनेट रातों रात लोकप्रिय होने का टूल बन चुका है.

अगर यूट्यूब की ही बात की जाए तो 1.3 बिलियन से अधिक यूजर हैं इस पर. ऐसे ही फेसबुक पर 2 बिलियन से अधिक एक्टिव यूजर हो चुके हैं. दूसरे इंटरनेट-प्लेटफॉर्म्स भी खासे यूजर्स के साथ मौजूद हैं. ज़ाहिर तौर पर यह एक बड़ी मार्किट के तौर पर उभर चुका है और सबसे ख़ास बात यह कि यह सभी के लिए उतना ही ओपन है, जितना किसी बड़े ग्रुप के लिए. ऐसे में युवाओं को लोकप्रिय होने का सीधा रास्ता दिख जा रहा है. पर क्या वाकई यह रास्ता उतना ही सीधा है, जितना शुरुआत में नज़र आता है?

जल्दबाजी और ऊंटपटांग हरकत ठीक नहीं, क्योंकि…

यह बात काफी हद तक सच है कि कुछ लोग बड़ी तेजी से इंटरनेट की वजह से सफल हुए हैं. अभी हाल ही में ढिंचक पूजा नाम के यूट्यूब चैनल के वीडियो काफी चर्चित रहे हैं. संगीत के नाम पर बेशक उसमें कुछ ख़ास न रहा हो, किन्तु कुछ गानों के व्यूज करोड़ों में आ गए. ज़ाहिर तौर पर दूसरे लोगों को इस तरह की बातों से उत्सुकता होती है, किन्तु समझा जाना चाहिए कि यह अपवाद ही हैं. यूट्यूब पर काफी दूसरे चैनल भी लोकप्रिय हैं, जो दिखने में काफी कैजुअल लगते हैं, पर उस कंटेंट के पीछे काफी मेहनत और रिसर्च छिपी होती है.तमाम युवा इस मेहनत से बचने के लिए शॉर्टकट अपनाने की राह पर बढ़ जाते हैं.

समस्या तब और बढ़ जाती है, जब यही शॉर्टकट ऊंटपटांग हरकतों में बदल जाता है और कई बार तो जानलेवा रिस्क तक में. कई बार लोग ‘प्रैंक’ इत्यादि के चक्कर में दूसरों को हर्ट करने से नहीं चूकते हैं तो ऐसे मामले भी बढ़ रहे हैं, जहाँ वीडियो बनाने के चक्कर में लोग सामान्य मानवीय मूल्यों को भी ठोकर मार दे रहे हैं. मसलन अगर कहीं कोई पानी में डूब रहा है तो लोग उसकी वीडियो बनाने लगते हैं, बजाय उसको बचाने के. या फिर, अगर सड़क पर लोग झगड़ रहे हों तो बीच-बचाव कौन करने जाए, पहले वीडियो बना लो, ताकि ‘व्यूज’ बढ़ें, जैसी सोच बढ़ती जा रही है.

इंसान के नाते इस प्रकार की आपकी प्रतिक्रिया आपको संकुचित बनाती जाती है, जिससे अंततः आपका तनाव ही बढ़ता है.

सेल्फी तुम भले ले लो आज, लेकिन…

ढिंचक पूजा का यह गाना अब तो यूट्यूब से किसी कॉपीराइट के चलते हटाया जा चुका है, किन्तु लोकप्रिय काफी हुआ. उससे पहले भी बॉलीवुड हंक सलमान खान की बजरंगी भाई जान की ‘चल बेटा सेल्फी ले ले रे’ ने धूम मचाई थी, किन्तु क्या आप जानते हैं कि सेल्फी के चक्कर में कइयों की जान चली जाती है.आप मानें या न मानें किन्तु एक आंकड़े के अनुसार समूचे विश्व में ‘सेल्फी’ लेते हुए जान जाने में भारत पहले नंबर पर रहा है.

जाहिर तौर पर यह भी लोकप्रियता पाने का खुमार ही है, जिसके नशे में युवाओं को पता नहीं चलता कि वह ट्रेन की पटरी पर खड़े हैं अथवा किसी खाई के किनारे पर. ऐसे ही, वह भूल जाते हैं कि वह जिस सड़क के बीचों बीच खड़े होकर कूल सेल्फी लेने का प्रयत्न कर रहे हैं, वह उन्हें सदा के लिए ‘कूल’ कर सकती है. निश्चित रूप से इस प्रकार के नशे से बचा जाना चाहिए, किसी कीमत पर.

सावधानीपूर्वक योजना क्रियान्वयन आवश्यक

इस बात में दो राय नहीं है कि तेज़ स्पीड इंटरनेट ने संभावनाओं के बड़े द्वार खोले हैं, किन्तु असावधानी से न केवल अनचाहा परिणाम आता है, बल्कि खुद की ज़िन्दगी पर बड़ा रिस्क भी आ जाता है. आप टेक्नोलॉजी का फायदा अवश्य उठाएं, किन्तु सावधानी और योजना के साथ. ध्यान रहे, यूनिक कंटेंट और ऊंटपटांग कंटेंट में आपको अंतर करना पड़ेगा. इसके साथ सफलता के लिए आपको नियमित तौर पर कार्य करना पड़ेगा. ऊंटपटांग और उल-जलूल कार्यों से आप कुछ कंटेंट तो अवश्य परोस सकते हैं, किन्तु लम्बे दौर के खिलाड़ी आप कतई नहीं बन सकेंगे.

कारण साफ़ है कि ‘रिसर्च की आदत’ आपको होगी ही नहीं और सब कुछ चटपट-झटपट पाने की मानसिकता आपको संभवतः वहीं ले जाएगी, जहाँ ‘पेड्रो रुइज’ जा चुका है. नाम तो नहीं भूले इस लड़के का… देखिये इस लेख का शुरूआती पैराग्राफ!

Web Title: Social Media Age, Risking Life for Fame, Hindi Article

Keywords: Popularity Chart, Social Media, Selfie, Video Making, Human Touch, Risking Life

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