देश के मासूम और भोले-भाले आशिकों के लिए जीएसटी के दौर में गर्लफ्रेंड प्रबंधन खासा पेचीदा कार्य हो गया है. लेकिन आप इस कठिन दौर में घबराइए नहीं… धैर्य रखिये, हीन भावना का शिकार होने से बचें, आत्मविश्वास डिगने न दें क्योंकि हम आपके गर्लफ्रेंड मैनेजमेंट का कैप्सूल कोर्स लेकर हाजिर हैं. तो आइये पहले प्रेम के ‘अर्थ’ को समझें… 🙂

प्रेम का अर्थशास्त्र

हिन्दुस्तान में प्रेम करना काफी जटिल और महंगी प्रक्रिया है. अर्थशास्त्र से प्रेम करने वालों को पता होना चाहिए कि प्रेम का भी अर्थशास्त्र होता है. टर्न ओवर सिर्फ कम्पनियों का नहीं होता, प्रेम का भी होता है. जब पहला प्रेम ओवर हो जाता है तो आशिक टर्न मार लेता है. जीडीपी का एक फुलफॉर्म ‘गर्लफ्रेंड डिवोशन पोटेंशियल’ भी होता है. प्रेम इन्वेस्टमेंट माँगता है. बिना निवेश किये प्रेम में फायदा नही होता. प्रेम करने के लिए हालांकि कोई बैंक लोन नहीं देता फिर भी किश्त हर महीने चुकानी पड़ती है. कुछ प्रेमिकाएं तो इतनी विकट होती हैं कि आशिकों से वीकेंड के नाम पर हफ्ता वसूली भी करती हैं. गजब है प्रेम का बाजार जहाँ गर्लफ्रेंड का भाव बढ़ जाता है तो बाजार में तेजी आ जाती है और बॉयफ्रेंड बेचारा अपना जेब खर्च को लुटाकर अभाव में जीने लगता है.

रेस्टोरेंट में जाने पर इश्क में डूबा आशिक गर्लफ्रेंड को पूरा का पूरा मीनू सौंप देता है. हालांकि यह जीवन सौंपने से ज्यादा खतरनाक है. मैंने अक्सर ऐसे आशिकों को देखा है जो प्रेमिका के चिली पोटैटो के चक्कर में पड़ चिलचिलाती धूप में मोटरसाइकिल ठर्राते अर्थात खींचते हुए घर तक ले जाते हैं. बावला मन भूल जाता है कि तीस रूपये पेट्रोल के लिए बचा के रखने थे. प्रेम के अर्थशास्त्र को समझने के लिए डिमांड और सप्लाई के नियम को जानना जरूरी हो जाता है. प्रेमिका की डिमांड तय समय तक पूरी न हो पाने पर आशिक के प्रेम पर गम्भीर संकट मंडराने लगता है. जाहिर है, जिस तरह से एक सामान्य ग्राहक इस स्थिति में कम्पनी बदल देता है, वह आशिक को बदल देती है. इस प्रतिकूल स्थिति से बचने के लिए प्रतिभावान आशिक एडवांस सप्लाई का विकल्प चुनते हैं और प्रेमिका उसकी बाहों में टूटती हुई कहती है ‘मेरा बाबू बहुत प्यारा है, मेरी हर छोटी बड़ी जरूरतों को समझता है. मेरे सोना को मालूम रहता है कि मेरा आई लाइनर आधा खत्म हो चुका है’. आज प्रेमिकाएं उन आशिकों को कतई पसंद नहीं करतीं जो उसकी जुल्फों पर हाथ फेरते हुए कहते हैं-‘ तेरे गेसुओं के साए में डूब जाऊँ मैं’. वह बोल देगी -‘ पैसे लाओ पहले स्ट्रेटनिंग करा के आऊँ मैं! 🙂 🙂

अगर आशिक बोलता है कि – ‘तेरे गुलाबी होठों को देख दिल नही रहता है बस में’ उसका जवाब होगा- ‘700 की लिपस्टिक है ब्रांड है लक्मे. तो कुल मिलाकर आपको प्रेम करने से पहले इसकी इकोनॉमिक्स को आत्मसात करना बेहद आवश्यक है.

नोटबंदी के दौर में प्रेम की छीछालेदर

हाँ तो प्रेमी भाइयों, उपरोक्त सारा कुछ प्रेम की आधुनिक आदर्श स्थिति है. मुख्य मुद्दे पर आते हैं. इस समय प्रेम अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है. प्रेम पर सबसे पहला वार नोटबंदी ने किया. कैशलेस इकोनॉमी के चलते समाज में प्रेम भी लेस होने लगा. इसी त्रासदी से पीड़ित हमारे शहर के व्यंग्यकवि मुकुल महान की यह कविता सुन लीजिए-
“प्रेमिका प्रेमी से बोली
तुम्हारे प्यार में कमी आ गई ह
या हमारे बीच कोई लडकी,
नई आ गई है
यह सुन कर
प्रेमी मुस्कुराया
बोला -तेरा ऑब्जेक्शन
समझ में नहीं आया
बता , पहले और अब में
क्या फर्क है
इस बात के पीछे,
कौन सा तर्क है
प्रेमिका बोली
अब न पहले जैसे पिज्जा ,
न बर्गर ,न गोलगप्पे हैं
तेरे पास अब सिर्फ ,
बातों के मुनक्के हैं
प्रेमी बोला-बावरी,
कुछ तो रियलाइज कर
अपनी चटोरी भावनाओं को,
कुछ तो डिजिटलाइज कर
अब हमारा प्यार ,
ए टी एम से छिटक कर ,
पे टी एम पर लटक रहा है
दिमाग़ ख़राब है ,
दिल भटक रहा है
अब बहुत कठिन हो चुके हैं,
हमारे प्यार के रस्ते
इसे “कैशलेस” रखना हो तो बोलो,
वर्ना -“बहन जी नमस्ते”

रोमियोबन्दी के दौरान बिलबिलाता प्रेम और जीएसटी

रोमियो प्रेम की इस कैशलेस त्रासदी से उबरने की कोशिश में लगा था कि कुछ दिनों बाद एंटीरोमियो शुरू हो गया. कैशलेस के बाद सारे पार्क रोमियोलेस हो गए. हुआ कुछ यूँ कि नोटबंदी के बाद आशिकों ने शॉपिंग मॉल, क्लबों की जगह नदी के किनारों, पार्कों की बेंचों और कॉलेज की सीढ़ियों की शरण ली, जिससे प्रेम के बाजार पर बुरा असर पड़ा. देश की विकास दर अचानक नीचे गिरने लगी. कॉस्मेटिक उद्योग खतरे में आ गया. फैशन स्टोर बन्द होने के कगार पर पहुंच गए. इसलिए सरकार को मजबूरी में रोमियोबंदी का फैसला लेना पड़ा और आशिकों को पार्कों से निकाल कर उनके पुराने स्थलों पर पुनर्वास कराया गया. अब बेचारा रोमियो जो पार्क में बैठकर एक चिप्स की पैकेट, एक गुलाब का फूल और एक कोल्डड्रिंक में निपट लेता था उसको मैकडोनाल्ड, सीसीडी, पिज़्ज़ाहट का रुख करना पड़ा. डेबिट कार्ड को क्रेडिट कॉर्ड में बदलवाना पड़ा. क्रेडिट कार्ड देख प्रेमिकाएं अतिउत्साह में आने लगीं. बर्गर खाने आयी माशूका टॉप लेकर ही वापस लौटती. ऊपरवाला सब देख रहा था. उसने ब्रांडेड सामानों की बढ़ती बिक्री देख उस पर जीएसटी लगा दिया.

सरकार का विजन इस बार साफ़ था-‘ आशिकों की सहनशक्ति तभी बढ़ेगी जब उसकी क्रयशक्ति में बढोत्तरी होगी. 🙂 🙂

अब सरकार प्रेम के चक्कर में भोले भाले आशिकों की ऐसी तैसी कराने पर तुली हुई है. लेकिन आप फ़िक्र बिलकुल मत करिए जीएसटी को ‘गर्लफ्रेंड सुधार तकनीक’ में बदल डालिये. और जानिये इस स्थिति से निपटने के नुस्खे-

1- जब आपकी प्रेमिका भर भर मुंह पिज़्ज़ा खा रही हो तो उस समय कुछ मत बोलिये. महंगा पड़ सकता है. उसके बाद गन्ने का जूस पीती किसी दुबली पतली लड़की को अपलक निहारें. उससे सहन नहीं होगा और गुस्से में पूछेगी-
‘क्यों देख रहे उसको आँखे फाड़ फाड़ के, कौन सी हूर की परी है वो’
जवाब कुछ यूँ देना है
‘ जानू, मैं तुमसे आत्मिक प्रेम करता हूँ इसलिये तुम्हारे हेल्थ (फीगर कतई न बोलना) की परवाह भी है. सोच रहा था कि वह बर्गर के बजाय गन्ने का जूस पीती होगी रोज’

बस फिर वह कुछ भी बोले चुप रहना. इस नुस्खे का परिणाम दूसरे दिन से ही दिखाई पड़ने लगेगा. वह मैकडोनाल्ड की जगह मैकू जूस कॉर्नर पर खड़ी मिलेगी.

2- सौंदर्य प्रसाधनों पर 28 परसेंट टैक्स है. अब आपका यह नैतिक दायित्व बन जाता है कि उसे प्राकृतिक सुंदरता का एहसास कराएं कुछ इस तरह रोमांटिक अंदाज में-
‘ जानू, एक बात बोलूं – तुमको पता है ‘ये नदी ये पेड़, ये झरने, ये समंदर इतने खूबसूरत क्यों लगते हैं
‘क्यों?’
‘क्योंकि ये श्रृंगार नही करते, इसी को कहते हैं नेचुरल ब्यूटी’
‘अच्छा, तो इशारा मेरी तरफ है’
देखो न, तुम्हारे गालों की गुलाबी रंगत को लोरियल की क्रीम ने सफेदी में बदल दिया। तुम्हारे बाल पहले कितने घने और काले थे
‘सिर्फ समस्या ही बताओगे, कोई सॉल्यूशन नही दोगे’ 🙂
उसके ऐसा कहते ही बैग में हाथ डालना और मेहंदी का एक बड़ा पैकेट देते हुए बोला- यह लो खुशरंग हिना, इसको बालों में लगाना, और जब मैं बारात लेकर आऊँ तो हाथों में. उसके साथ मुल्तानी मिट्टी की क्रीम और चमेली का तेल फ्री भी दे डालना.
यकीन मानिये, वह गले लगा लेगी आपको

3- अगर इससे बात नहीं बनती है तो इमरजेंसी के लिए अपने मोबाइल पर मेकप्स और ब्यूटी एप डाउनलोड कर के रखें. फोटो एडिट टूल की घनघोर प्रैक्टिस कर लें. प्रेमिका की फोटो को इस तरह एडिट करिये कि उसे यह एहसास हो जाए कि वह संसार की सबसे खूबसूरत लड़की है.अगर फिर भी बात न बने तो उसकी फोटो कुछ घण्टों के लिए सपने व्हाट्सप की डीपी बना लेना.

4- क्रेडिट कार्ड या एटीएम को जला दीजिये. कोशिश करिये कि जब वह साथ में बैठी हो तो कभी भी उस रास्ते से न गुजरें जिसके किनारे कोई लेडीज फैशन स्टोर हो. कहीं उसने शोरूम के बाहर लगे न्यू एराइवल देख लिए तो समझो कटी जेब! ऐसी नौबत आ भी जाए तो घबराएं नहीं. बस जेब में 1000 से ज्यादा कतई न रखें. क्योंकि उसके ऊपर टैक्स सीधे 28 परसेंट पहुंच जाएगा.

5 – फिल्मों की बात करते हैं. 100 रूपये से ऊपर के टिकट पर टैक्स ज्यादा है. ऐसे में ‘फर्स्ट डे फर्स्ट शो’ की जगह ‘फर्स्ट डे फर्स्ट सीडी’ में यकीन दिलाएं. अब तो पायरेटेड सीडी फिल्म रिलीज हीने से पहले ही बाजार में आ जाती है. उसको यह कहकर स्पेशल फील कराएं कि तुम ही वो पहली शख्स हो जो फिल्म रिलीज होने से पहले ही देख रही हो.

6- प्रेमिका को मिड नाइट मेले में ले जाने के बजाय मऊ के मेले में ले जाएं. उसको तांगे की सवारी करवाएं. मेले से उसके लिए गजरा, चूड़ियां और बिंदी खरीदिये और बालों में गजरा पहनाने, माथे पर बिंदी लगाने और कलाइयों में चूड़ियां पहनाने का तिहरा सुख भी भोगें. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इन आइटम्स पर जीएसटी लागू नहीं है. 😛

7- उसको डिस्कोथेक में ले जाने के बजाय मुशायरे में ले जाएँ, किसी शायर से सेटिंग कर लें जो एक आध शेर उसको समर्पित करके पढ़ दे. उसकी नज़रों में आपकी इज्जत कई गुना बढ़ जायेगी लल्ला. बस सावधानी ये रखियेगा कि मुशायरा खत्म होने से पहले ही सरक लेना वरना शेर के समर्पण के चक्कर में शायर ही न समर्पित हो जाए.

8- कहा जाता है खाली दिमाग शैतान का घर! वैसे ही गर्लफ्रेंड का खाली दिमाग, गिफ्ट से भर. इसलिए उसके दिमाग को कतई खाली न होने दें. उसको लगातार व्हाट्सप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर बिजी रखिए. अब तो फ्री वाला जियो भी है इसलिए टेक्स्ट मैसेज भेजने के बजाय वीडियो भेजिये उसकी पसन्द के. अगर वो बिना स्माइली के सिर्फ :ओके’ लिखकर भेजे तो तुरन्त उसका टेस्ट चेंज करें. जब वह लगातार व्यस्त रहेगी तो आप जीएसटी के असर से बचे रहेंगे.

9- रात में ज्यादा प्रेमभरी, रसभरी बातें न करें. अपनी भावनाएं काबू में रखें वरना सुबह उसका गम्भीर परिणाम भुगतना पड़ सकता है. बेबी सीधे एफबीबी ले जाएगी. सारे आर्थिक वायदे रसभरी बातों के बीच ही करवा लिए जाते हैं.

10- जब जेब में पैसे न हों तो गर्लफ्रेंड के कैरियर के प्रति सजग हो जाना चाहिए. जब भी वो आउटिंग का मन करे तो आप आदर्शवादी बनकर कहिये- ‘समय को जो नष्ट करता है, समय उसको नष्ट कर देता है. तुम्हारे पास यही तो समय है पढ़ाई का. कितनी उम्मीदें पाल रखी हैं तुम्हारी मम्मी, पापा और मैंने’. ऐसा बोलते ही प्रेमिका को प्रेमी के अंदर पिता का स्वरूप दिखाई पड़ने लगता है और उसके दिल में प्रेमी की इज्जत कई गुना बढ़ जाती है.

तो प्यारे आशिक भाइयों, इन नुस्खों को ट्राई करें और जीएसटी के प्रकोप से बचे रहें. ध्यान रहे ये नुस्खे आप की गर्लफ्रेंड के हाथ कतई न लगें वरना इनका फेल होने तय है. ऐसी स्थिति में भी घबराएं नहीं , शराब जीएसटी के दायरे से बाहर है. 🙁 🙁

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