शर्मा जी के लिये अपना दैनिक भाग्यफल जानना सांस लेने से भी कहीं ज्यादा ज़रूरी है. सांस नहीं लेंगे तो एक दम से प्राण जायेंगे, लेकिन भाग्यफल नहीं जानेंगे तो घुट घुट कर मरेंगे. जनाब पिछले बीस मिनट से टीवी के चार सौ बीस कामर्शियल ब्रेक्स के इमोशनल अत्याचार को झेलते हुए ढाढस बांधे ‘बेजान दारूवाला’ के श्रीमुख से अपने भाग्य फल जानने की कोशिश में लगे हुए हैं.

जनाब इन ज्योतिषाचार्यों के इतने बड़े फैन हैं कि अपने पूरे दिन का प्लान, इनके दिये हुए ज्ञान के आधार पर ही फिक्स करते हैं. यूं समझ लीजिए हमारे शर्मा जी का सारा साफ्टवेयर इन्हीं ज्योतिषियों के द्वारा डाउनलोड किया जाता है. हमारे शर्मा जी सुबह उठते ही टीवी के सामने नतमस्तक होकर समाधि लगा लेते हैं और बारी-बारी से हर चैनल के ज्योतिषियों से अपनी राशि की पोस्ट-मार्टम रिपोर्ट सुनते हैं. जब जनाब सारे विशेषज्ञों की राय सुन लेते हैं तब जाकर कहीं अपने पूरे दिन का चलना-फिरना, उठना-बैठना, खाना-पीना तय करते हैं.

उन्हें इससे फरक नहीं पड़ता कि उन्होंने दफ्तर की पेंडिग फाइल निपटाई है या नहीं. अगर उन्हें पता चल जाता है किउनके भाग्य में आज बॉस की डांट खाना बदा है तो वह फाइल को पेंडिंग में ही रखते हैं.

अभी पिछले हफ्ते की ही बात है. एक ज्योतिषी के श्रीमुख से यह देववाणी निकली कि ‘आज उनकी राशि के लोगों की दुर्घटना होने के आसार हैं’. अब क्या था महोदय इस कदर भयभीत हो गये मानो पाकिस्तान परमाणु हमला करने जा रहा हो. जनाब ने हर सम्भावित खतरे को टालने के लिए दुर्घटना बाहुल्य बिन्दुओं को दूर करने का सारा प्रबन्ध कर दिया. फूंक-फूंक कर कदम रखने वाला मुहावरा तो आपने कई बार सुना होगा, लेकिन हमारे शर्मा जी तो पोंछ-पोंछ कर कदम रखने लगे. सुबह उठते ही बाथरूम की ओर जनाब ने जितने भी कदम बढ़ाये, सारे कदम जमीन पर रखने से पहले एक बूंद पानी तक पोंछ के चले हैं कि कहीं फिसल गये तो ज्योतिषी की बात सच न हो जाये. दहशत के मारे आखिर उन्होंने आफिस से छुट्टी लेकर घर पर ही उन्होंने पूरा दिन बिताने का निश्चय किया और तो और जनाब घर में हेलमेट लगाकर घूमे कि कहीं छत का पंखा ही न सिर पर गिर जाये. सावधानी न हटे और दुर्घटना न घटे, इसके लिए जनाब ने कोई कसर नहीं छोड़ी.

उनके साथ घटे भाग्यफल के अनेक किस्से उनके मोहल्ले वाले चटकारें लेकर बताते फिरते हैं. एक दिन तो हद ही हो गई. एक भाग्य फल बताऊ कार्यक्रम ‘बोले तारे’ में किसी ने बोल दिया कि ‘आज विपरीत लिंग के प्रति आपकी सहभागिता बढ़ सकती है’. बस फिर क्या था शर्मा जी कन्फ्यूजन में पड़ गये कि उनकी श्रीमती जी तो उन दिनों मायके में विराजमान थीं. अब इनका यह भाग्यफल आखिर पूरा कैसे हो? अब भाग्यफल है तो उसे तो घटना ही है. यही सोच लिये जनाब छत पर कपड़े फैलाने निकल पड़े. यूं समझ लीजिए उन्होंने आस-पड़ोस की सभी छतों की स्कैनिंग कर यह जानने की कोशिश में लग गए कि कहीं कोई भाभी जी तो इनमें इन्ट्रेस्ट नहीं ले रही. खैर छतों पर भाभी जी टाइप की तो कोई चीज नहीं मिलीं अलबत्ता दो-चार धूप सेंकती चाचियाँ जरूर दिख गयीं.

अब महोदय निराश होकर आफिस में ही इस भविष्यवाणी के सच होने की आशा बनाने लगे. फ्लशबैक में जाकर जनाब सोचने भी लगे कि अभी कल ही तो बगल की रीना जी ने उन्हें लन्च ऑफर किया था. आज हो सकता है कुछ और…

जनाब जोश से भरे हुए और होश से डरे हुए जैसे ही आफिस पहुंचे, पता चला आज बॉस और रीना जी किसी आफीशियल टूर पर गये हैं. अपने दिल के हजारों टुकड़ों को फेवीक्विक से जोड़ने के बाद वह समझ गये कि यह भाग्यफल इनका नहीं उनके बॉस का था.

एक दिलचस्प घटना और जनाब के साथ घटी. हमेशा की तरह भाग्यफल का अवलोकन करते हुए उन्हें पता चला कि ‘आज उनके कई रुके हुए अधूरे कार्य पूरे होंगे’. अब चूंकि भाग्यफल सकारात्मक था, लाभ पहुंचाने वाला था, तो वह प्रसन्न मुद्रा में अपने उन सारे कामों पर नजर डालने लगे जो तथाकथित अधूरे हैं और जिनके पूरे होने की सम्भावना हो सकती है. अब पत्नी जी चूंकि गर्भवती थीं और अभी एक महीने की देर भी थी. जनाब शक कर गये कि कहीं यही रुका हुआ कार्य तो आज पूरा नहीं हो जायेगा. बस फिर क्या था बिना किसी लेबरपेन के महज अधूरे काम के गेन के लिए शर्मा जी ने पत्नी जी को नर्सिंग होम में भर्ती करवा दिया. जब डॉक्टर से डांट पड़ी तो समझ में आया कि शायद नसीब में अधूरा कार्य पूरा होने नहीं बल्कि इन्सल्ट होना लिखा था.

ज्योतिषियों के जितने भी मजेदार भाग्यफल थे उससे भी कहीं मजेदार घटनाएँ हमारे शर्मा जी के साथ घट चुकी हैं. जिस दिन यह भाग्यफल होता है कि ‘क्रोध और उत्तेजना पर नियंत्रण रखें’, समझ लिजिए घर वालों की की लाटरी निकल आती है. श्रीमती जी दिन भर धड़ल्ले से मन चाहे सीरियल देखती हैं, जानती हैं कि आज श्रीमान जी को गुस्सा आने से रहा. बच्चे अपने जितने भी जीरो नम्बर पाये हुए टेस्ट होते हैं, उनमें उसी दिन साइन कराते हैं. पापा जी चाहते हुए भी ‘नो गुस्सा मोड’ में लगे रहते हैं. उस दिन इनसे कोई झगड़ा भी करता है तो जनाब पलटकर जवाब नहीं देते हैं. यानि की जो बात गांधीगिरी न कर पाई वह ज्योतिषगिरी कर जाती है.

मज़े की बात है कि अगर उनके राशिफल में लिखा होता है कि परिवार को वाद –विवाद से बचाएं तो फिर शर्मा जी किसी अनहोनी के चक्कर में अपने बच्चे को स्कूल की वाद –विवाद प्रतियोगिता तक में भाग लेने से मना कर देते हैं. वह तो उस दिन की परीक्षा तक में बच्चों को अपने मन के मुताबिक पढ़ा कर भेजते हैं, जिस दिन भाग्यफल में लिखा होता है कि आज मन मुताबिक काम होगा. जिस दिन का भाग्यफल में यह होता है कि मेहनत से राह आसान होगी उस दिन शर्मा जी अपने बच्चों को वैन के बजाये पैदल स्कूल भेजते हैं, ताकि उनकी मेहनत ऊपर वाले को दिखती रहे. जिस दिन उन्हें पता चलता है कि आज पड़ोसियों से सम्बन्ध अच्छे बना कर रखने हैं, तो उस दिन शर्मा जी अगल-बगल के लोगों को बिना अपनी श्रीमती जी से पूछे शाम के खाने की दावत दे आते हैं. यह अलग बात है कि पड़ोसियों से सम्बन्ध बनाने के चक्कर में उनके सम्बन्ध अपनी खुद की बीबी से बिगड़ जाते हैं.

हमारे शर्मा जी इन ज्योतिषियों के बताये हुए समाधान पर भी गहरी आस्था रखते हैं. जनाब की दसों उंगलियां रंग-बिरंगे नगीनों की अंगूठियों से भरी रहती हैं. गले में दो-चार ताबीज हमेशा लटकते रहते हैं. कभी इस पेड़ के नीचे दिया जलाते हैं तो कभी उस पेड़ पर धागा बांधते हैं. समझ लीजिए कि महोदय हर दिन एक भूरी गाय को रोटी खिलाने का टारगेट पूरा करते हैं. इस चक्कर में दो-तीन किलोमीटर दूर टहलते हुए न जाने कितनी सफेद, काली और भूखी गायों को नजरअन्दाज करते हुए अपने लक्ष्य को पाकर ही मानते हैं. यह बात कोई आज तक समझ क्यों नहीं पाया कि ग्रह नक्षत्र सुधारने में भूरी गाय को ही खाना खिलाने की शर्त आखिर क्यों? क्या सफेद या काली गाय की दुआ में कम ताकत होती है..?

खैर, ज्योतिष महिमा अनंत है और उसकी कथा भी!

Web Title: Hindi Satire on Astrologers, Alankar Rastogi

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