बालम ,कलकत्ता और गोरी का बहुत ही गहरा सम्बन्ध है. गोरी परेशान है उसकी रातों की नींद और दिन का चैन उड़ा हुआ है …ये सोच सोच कर कि बालम का काम बार बार कलकत्ता में ही क्यों होता है? चलो मान लिया काम होता भी है, तो पूरे दफ्तर में अकेले उसी के बलमा रह गए हैं क्या, जिन्हें बार बार कलकत्ता भेज दिया जाता. बलम जी भी इतना खुश-खुश कलकत्ता ही क्यों जाते हैं, जबकि देश के मानचित्र पर अनेक शहर हैं फिर कलकत्ता में ऐसी कौन सी डोर बंधी है जो गोरी के बालम को खींच रही है और बालम भी गोरी के नाज नखरे, लटके झटके, प्रेम, मुहब्बत सब बिसार कर उधर ही खिंचा जाता है.

गोरी विरहा की अग्नि में जल रही है. ऊपर से सावन उसकी विरहाग्नि को ठीक उस तरह भड़काने का काम कर रहा है जैसे होम में घी करता है. गोरी के हृदय से ये फ़िल्मी गाने के बोल निकल रहे हैं

“हाय हाय ये मजबूरी ये मौसम और ये दूरी, तेरी दो टकिया नौकरी में मेरा लाखों का सावन जाए”

पर ना तो कोई गोरी की हालत समझ रहा है, ना ही उसका गीत सुन रहा है. गोरी के दिल का बोझ बढ़ता गया और आखिरकार उसने अपनी पीड़ा का अपनी हम उम्र सखियों को बताई. उसकी पीड़ा सुनकर सखियाँ भी उदास हुई. एक बोली

“रे सखी कही तेरे बालम का दिल वहां की किसी सांवली सलोनी पर तो नहीं आ गया”?

“धत ऐसा नहीं हो सकता, हमारी इत्ती सुन्दर सखी को छोड़ कही नहीं जायेगा जीजा” दूसरी उसे डपटते हुए बोली

तभी तीसरी बोली “अरी हमने सुना है वहां की औरतें काला जादू जानती हैं, मर्दों को अपने बस में कर लेती हैं”

हां री हमने भी बचपन में अपनी दादी से सुनी थी, जो भी मरद कलकत्ता गए वे कभी ना लौटे फिर. वहां की लुगाइयां मर्दों को भेड़-बकरा या तोता कुछ भी बना डालती हैं जादू से और अपने यहाँ पालती हैं. उनकी लुगाइयां बेचारी ऐसे ही जिन्दगी भर इन्तजार करती रहती उनका… दूसरी सखी ने उसमें जोड़ा.

हां री मैंने भी सुना हैं जे तो… कलकत्ता गए मर्द कभी ना आते वापिस!

हाय राम! ऐसा हुआ तो हम कहाँ जायेंगे? गोरी का कलेजा बैठने लगा, बहुत कोशिश करके भी खुद को रोक ना पायी और बुक्का फाड़ के रो पड़ी “ हाय रे मैं क्या करूं, कहाँ जाउंगी में कहीं वो भेड़ बकरा बन गए तो मेरे किस काम के रह जायेंगे … एक तो पहले ही शकल बकरे जैसी थी ऊपर से जादू से बकरा बना ही दिया तो कहाँ रखूंगी में उन्हें”

सारी सखियाँ उसकी बातों पर हँसने लगी. मामला सीरियस होने पर सभी मिलकर गोरी को चुप कराने लगी, उसे समझा बुझा कर घर भेज दिया. अरी रो मत हम तो तुझसे मजाक कर रहे थे … ये सच नहीं है. ऐसा कुछ नहीं होता .. जीजा बहुत जल्द आ जायेंगे.

गोरी घर तो आ गयी पर उसके मन का बोझ कई गुना बढ़ गया था. वो मन ही मन समझ रही थी कि जो बातें सखियों ने कही वो झूठ नहीं थी. क्योंकि उसने भी वैसी बातें सुन रखी थी … पर उसका बालम तो नहीं सुनता, इस बार तो कई महीनों से वापिस नहीं आया. उसे अचानक याद आया उसका बलम कई बार कह भी चुका है कि कलकत्ता की लुगाइयां बड़ी सलोनी सी सुन्दर ही होती हैं. “हे भगवान में पहले क्यूँ ना समझी! गोरी की रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया है पर ये बलम भी कैसा निष्ठुर है! एक फोन तक नहीं कर रहा उससे बात करने को

..बताओ उस फ़िल्मी हिरोइन के बालम ने तो रंगून से भी फोन किया “तुम्हारी याद सताती है” भी कहा , वो भी उस ज़माने में और ये मेरा बलम है जो कलकत्ता से भी फोन नहीं कर रहा.

“ऊपर से दिन भर सास के ताने “जे आजकल की लड़कियां भी बिना खसम के रह ही ना सकें, जाने काहे की आग लगी है? हम भी तौ कभी जवान हते. हमारे बू तौ छ छ महीने कूं परदेश जाते कमाबे कूं …

हम तौ यूँ टसुये ना बहाते थे… पूरी गृहस्थी का काम और करे थे. मर्द और बैल कभी खूंटा से बाँध के रखे जायं का, उन्हें तौ काम करनों ही पड़ेगो तभी तौ पेट भरेंगे सबके.”

Husband Wife and Kolkata, Hindi Satire Story, Beauty (Pic: pinterest.com)

गोरी बेचारी चुपचाप ताने सुन सुनकर घर के काम कर रही थी. वैसे भी हमारे बृज की बहुओं की आदत होती है. जे ताने तौ उनके लिए रोटी ब्यालू से हैं, जब तक मिले ना, पेट ही ना भरे. गोरी मन ही मन भगवान से प्रार्थना कर रही थी कि उसके बालम की रक्षा करें और जल्द उसके पास भेज दें. वो गिरिराज जी भगवान का भोग और परिक्रमा भी बोल चुकी थी, उसने ठान लिया था इस बार बालम बस वापिस आ जाएँ एक बार फिर उन्हें कहीं भी जाने दूंगी, पर कलकत्ता नहीं जाने दूंगी! चाहे कुछ भी हो जाय, वो अपने पति के रस्ते को वैसे ही रोकेगी जैसे गोपियों ने उद्धव जी का रथ रोका था, जब वो कान्हा को लेकर मथुरा जा रहे थे.

गोरी पल पल अपने बालम का इन्तजार कर रही थी उसके कान हर समय द्वार पर ही लगे थे

“हर आहट पे समझी वो आय गयो रे …टाइप गाने उसके मन मस्तिस्क में बज रहे थे.

भगवान ने जैसे गोरी की पुकार सुन ली हो… उस दिन सुबह सुबह सचमुच आहट हुई और द्वार पर बलम को देख गोरी अति प्रसन्नता में भाव विभोर हो पति से ऐसे लिपट गयी मानो चन्दन के बृक्ष पर सांप लिपटे हों. वो तो ऐसे ही लिपटी रहती यदि सास ने सुमधुर ध्वनी में उसके पूरे खानदान की आरती ना उतारी होती. गालियों की बौछारों ने उसके अन्दर से फूटे प्रेम के झरने को बहने से तुरंत रोक दिया.

गोरी ने अपनी भावनाओं को कर्मो के बाँध में बाँधा और चुपचाप कामों में जुट गयी. भले ही उसकी आँखे बालम पर टिकी थी. आखिरकार इन्तजार की घड़ियाँ खत्म हुई और गोरी का बालम से मिलन हुआ पर ये मिलन स्थाई तो नहीं था ना … गोरी के दिल में हर दम डर लगा रहता, बलम फिर से ना कहे कलकत्ता जाने की. वो अपने बालम की हर इच्छा का ख्याल रखती ताकि उसे जाने की याद न आये. वो प्यार मनुहार से बालम के दिल को टटोलने का प्रयास कर रही थी जिसकी डोर का एक सिरा कलकत्ता में बंधा तो है पर किससे? पर अब तक कामयाब ना हो सकी सो बालम के प्रेम में मगन हो गयी.

अभी कुछ ही दिन प्रेम नदी में डुबकियाँ लगाते बीते ही थे कि बालम जी ने फिर कलकत्ता राग अलापा. इधर उनका आलाप शुरू हुआ… उधर गोरी ने ऐसा रुदन शुरू किया कि बालम के स्वर हिलने लगे. गोरी जमीन में लोट लोट कर दहाड़े मार रही थी .. बालम बेचारा हैरान परेशान उसे जितना चुप करने की कोशिश करता गोरी उतने ही तीव्र स्वर में अपना राग रुदन शुरू कर देती. सारा घर, सारा मोहल्ला इकट्ठा हो गया.

सासु ने भी अपने चिरपरिचित अंदाज में गोरी को चुप होने का आदेश दिया पर आज तो गोरी ने उनकी भी ना सुनी उसका रिकार्डर एक ही जगह फंस गया था “इस बार बालम को कलकत्ता नहीं जाने दूंगी.” जितने लोग उतने उपाय कोई कहे इस पर भूतनी का साया है, इसे तांत्रिक बाबा के पास ले चलो… कोई चप्पल सुंघाने की सलाह दे रहा था… कोई कहे इसके खसम का किसी कलकत्ते वाली से टांका भिड़ा है. उसके बारे में गोरी को पता लग गया है इसलिए इतनी फ़ैल रही है.

बालम बेचारा अपने माथे पर हाथ धर के बैठ गया. सब मिलकर गोरी से जानने का प्रयास कर रहे थे कि ऐसा क्या कारण है कि वो अपने बलम को कलकत्ता नहीं जाने देना चाहती पर गोरी पर तो जैसे सच्ची भूत सवार था वो दहाड़े मार मार के रोये ही जा रही थी और कलकत्ते पर गलियां बरसा रही थी. ये नाटक और कई घंटे चलता पर इतने में किसी ने पुलिस को फोन कर दिया. कुछ देर तो पुलिस के सामने भी नाटक चालू रहा पर जैसे ही दरोगा जी ने डंडा फटकार कर कहा इसको इसकी सास को और पति को ले चलो और जेल में डाल दो सारा सच सामने आ जायेगा .. जेल का नाम सुनते ही गोरी के रोने पर झटके से ब्रेक लग गया वो एक साँस में बोली हमें ना भेजना अपने बालम को कलकत्ता, वहां की औरतें काला जादू जानती हैं, इसे जादू से बकरा बना कर अपने घर में बाँध लेंगी फिर हमारा क्या होगा? और गोरी फिर से रोने लगी, गोरी की बात सुनकर बाकी लोग हँसने लगे. गोरी रोना बंद कर मुहं बाये सबको देखने लगी …

उसने देखा बलमा भी हँस रहा है …”धत पगली ऐसा किसने कह दिया तुमसे, इस ज़माने में ऐसी कहानी कहाँ से सुन ली.. बलमा ने उसे मीठी फटकार लगाईं. “मैंने बचपन में सुना था ऐसा, जो भी बलम कलकत्ता जाते वो कभी वापिस नहीं आते और मेरी सब सखियों ने भी तो ऐसा ही कहा सच्ची” गोरी ने बताया.

अब सासू जी बोली “जे कौन सी सखी हैं तेरी मोकुं बता मैं खबर लूँ उनकी बताओ छोरी कौ दिमाग ख़राब करके धर दीनो… कोई भी लुगाई जे सुनेगी बा बिचारी कौ कालजो तौ धसक ही जायगो … चल अब तू भीतर चल कहीं ना जाएगो अब तेरो बालम जी ..और तुम सब भी अपने अपने घर कूं जाओ, जहाँ कोई मेला ना है रहो.”  सब चल दिए और दरोगा जी भी हँसते हुए वापिस चले गए. आखिर गोरी की जीत जो हो गयी बाके बालम जी बकरा बनबे से बच गए.

Husband Wife and Kolkata, Howrah Bridge (Pic: whatsuplife.in)

Web Title: Husband Wife and Kolkata, Hindi Satire Story

Keywords: Satire, Hindi Story, Love Stories in Hindi, Lok Katha, Intimacy, अवैध सम्बन्ध, Family Relations, Lol, Laughing Stories, Love Affair, Marriage Life, Archana Chaturvedi

Featured image credit / Facebook open graph: clipartfox.com / wall2mob.com