नारायण–नारायण की रिंग टोन बजाते हुए नारद मुनि धरती लोक की लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज़ लेकर इंद्र देवता के सामने प्रकट हुए.

इंद्र देवता उनको देखकर सरप्राइजिंग मोड में आकर बोले –‘हे नारद मुनि तनिक शीघ्र बताओ इस समय धरती लोक में क्या चल रहा है ?’

नारद मुनि अपनी न्यूज़ की बढती टीआरपी देखकर बहुत प्रसन्न हुए. लेकिन जो समाचार वह लाये थे वह निश्चित रूप से इंद्र देवता को अप्रसन्न करने वाला था, इसलिए वह उन्हें पहले से ही मानसिक रूप से तैयार करते हुए बोले -‘अरे महाराज! कुछ मत पूछिए इस समय धरती लोक की कंडीशन पर ज्यादा अटेंशन मत दीजिये नहीं तो दिमाग में टेशन हो जायेगी.’

नारद मुनि के इस हत्थे से काट देने वाले बर्ताव को इंद्र देवता पचा न पाए और अपनी उत्सुकता का सेकेण्ड गियर लगाते हुए बोले –‘अब ऐसा भी इस समय धरती लोक में क्या चल रहा है जो सबको टेंशन दिए जा रहा है. फिकर नॉट ज़रा खुल कर साफ़ –साफ़ बताओ.’ अब नारद मुनि भी समझ चुके थे कि इन्हें प्राइम टाइम की तगड़ी डोज़ लिए बिना शांति मिलने वाली नहीं.

‘महाराज! इस समय धरती लोक में अजब सा माहौल बना हुआ है. हर तरफ हाहाकार टाइप का कुछ चल रहा है. जहाँ सत्संग होता था वहां पर सब कुछ सील बंद किया जा रहा है. जहाँ लाखों लोग एक साथ भजन करते थे वहां पर अब इक्का- दुक्का मक्खियों की भिनभिनाहट सुनाई देती है.

जहाँ पर ‘लव चार्ज’ करने का दावा किया जाता था वहां पर अब ‘लाठी चार्ज’ किया जा रहा है. जिन भक्तों के अन्दर की आग को शांत करने का दावा किया जाता था वही लोग दुनिया भर में आग लगाते फिर रहे हैं.

जहाँ कभी तथाकथित सच्चे सौदे का डेरा था वहां पर पुलिस की गाड़ियों का फेरा लग रहा है. जो अपने अन्दर भगवान के वास का विश्वास दिलाते थे आज वही वासना के खेल में लगे हैं. जो कभी ‘मसेंजर ऑफ़ गॉड’ थे आज वही ‘पसेंजर ऑफ़ जेल’ हो चुके हैं’… नारद जी की इस सनसनी ब्रांड रहस्यमयी रिपोर्टिंग सुनकर इंद्र देवता कन्फ्यूजिया कर बोले –‘अरे देवर्षि तुम धरती लोक से समाचार लेकर आये हो या पहेलियों का अम्बार. तुम्हारी इस सनसनीखेज रिपोर्टिंग ने इन्द्रलोक में इंद्रजाल सा बना दिया है. तनिक साफ़ –साफ़ और सरल फार्मेट में समझाओ?’

चूँकि इंद्र देवता इक्कीसवीं सदी में भी पुराने वर्ज़न में ही अपडेट थे. इसलिए नारद मुनि उनकी दो जीबी की मेमोरी को बत्तीस जीबी में कनवर्ट करते हुए बोले – ‘महाराज! यही तो समस्या है कि यहाँ मेरी बात आप जैसा देवता तक को समझ नहीं आ रही है और वहां धरती लोक पर बाबाओं की बात हर कोई समझे जा रहा है. एक अदद बाबा लाखों करोड़ों को अपनी बात से अपना मुरीद बनाए जा रहा है. फिर चाहे वह बाबा उसके बदले में चाहे जिस प्रकार की और चाहे जितनी फीस वसूल कर ले.

“वह सत्संग के नाम पर शील भंग करते हैं. प्रवचन के नाम पर अनर्गल प्रपंच करते हैं. दीक्षा के नाम पर अश्लीलता की परीक्षा लेते हैं. धर्म के मर्म के नाम पर अधर्म का कुकर्म करते हैं. माया मोह की बातें करते –करते उसी में डुबकी लगा जाते हैं.

यानि इस समय धरती लोक पर बाबाओं का अतिक्रमण और संक्रमण हो गया है. या फिर कह लीजिये वहां पर प्रति व्यक्ति उतने शौचालय नहीं बन पाए हैं, जितने बाबा तैयार हो गए हैं. इसलिए तो सर्वत्र गंदगी का वास दिखता है. धरती लोक में बाबा रूपी गुब्बारा तभी फूटता है जब वह अय्याशियों की हवा की ओवर डोज़ ले लेता है. अभी हाल ही में धरती लोक में एक ऐसे ही बाबा का तिलस्म टूटा है महाराज.’

नारद जी की दार्शनिक रिपोर्टिंग कुछ देर तक तो इंद्र देवता के दिमाग में बफरिंग करती हुई घूमती रही फिर थोड़ी देर बाद जाकर मामला समझते हुए इंद्र देवता ने नारद मुनि से अपनी अन्य जिज्ञासाएं शांत करते हुए पूछा –‘ अच्छा नारद एक बात बताओ जिस देश को तैतीस करोड़ देवताओं का प्रचंड समर्थन प्राप्त हो उसे ऐसे छोटे –मोटे बाबाओं के चक्कर में पड़ने की क्या आवश्यकता है ? आखिर क्यों बुद्ध, नानक, रहीम और कबीर के इस देश को इन बाबाओं की ज़रूरत है?

इंद्र देवता के इन स्तरीय प्रश्नों को सुनकर नारद जी समझ गए कि इन्होंने अपने दिमाग का ‘लोलीपोप वर्ज़न अभी हाल में आये ओरियो’ में अपडेट कर लिया है. इसलिए नारद मुनि भी अब फुल फॉर्म में अपनी कमेंट्री करने लग गए.

‘महाराज! धरती लोक के सॉफ्टवेयर में यही तो सबसे बड़ा लोचा है. वहां की शस्य श्यामला भूमि चाहे जितनी भी गौरवमयी क्यों न रही हो लेकिन अभी तक वहां का मनुष्य अपने हाथ की मेहनत के बजाये किसी बाबा के द्वारा सर पर हाथ फेर देने से अपना भाग्य चमकाने पर अधिक भरोसा करता है. उसे अपने सत्कर्म के बजाये किसी बाबा के मायावी कर्मकांड पर ज्यादा भरोसा है. वह अपनी सफलता के लिए अपनी योग्यता बढाने में उतना ध्यान नहीं देता जितना ध्यान बाबाओं से निकटता बढाने पर देता है. उसे अपने कष्ट दूर करने के लिए अपने खून – पसीने पर नहीं, बल्कि किसी बाबा की लाल –हरी चटनी पर अधिक भरोसा है.

मनुष्य मेहनत को अपनी सफलता का मन्त्र न मानकर किसी बाबा के द्वारा कान में फूंके गये मन्त्र को अधिक भरोसेमंद मानता है. उसे जहाँ ज्ञान का प्रयोग कर अपनी आँखे खोलनी चाहिए वह पाखंडी बाबाओं के यहाँ अज्ञानी बनकर आपनी ऑंखें मूद लेता है. वह अपने हाथों के छालों से अपनी सफलता आश्वस्त नहीं करता है, बल्कि किसी बाबा के बताये हुए हाथों की लकीरों में अपनी बुलंदी ढूंढता है.’

नारद जी की रिपोर्टिंग में अब आक्रोश का छौंका लग चुका था. इसलिए इंद्र देवता ने उन्हें रिलेक्स करते हुए घनघोर ठंडा सोमरस ऑफर कर दिया जिसे नारद मुनि ने ‘नो थैंक्स’ कहते हुए वापस भी कर दिया. असल में अब इंद्र देवता भी नारद जी की रिपोर्टिंग में बहुत आनंद लेने लगे थे.

और इस समय तक पूरे मूड में आ चुके थे इसलिए वह नारद मुनि की तरफ एक और प्रश्न उछालते हुए बोले – ‘ बात तो आपकी बिलकुल ठीक है देवर्षि! लेकिन जिस देश में विश्व का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है. जिस देश में राष्ट्रपति से लेकर सभासद तक जनता के द्वारा चुना जाता हो वहां पर भी अगर बाबा लोग भोली भली जनता को बेवकूफ बना रहे हों तो यह नेता लोग क्या कर रहे हैं?

इंद्र देवता के सवाल पर अपनी हंसी को लगभग रोकते हुए नारद मुनि बोले –‘ महाराज! अब आपने पूछा है मिलियन डॉलर क्वेश्चन. यही नेता ही तो इन बाबाओं के फलने –फूलने के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करते हैं. यही तो उनके लिए बेशर्मी की अनुकूल रोशनी, सुविधाओं की उपजाऊ खाद, सहूलियतों की निर्बाध सिंचाई से उनको पालते –पोषते हैं. यही कारण है कि नेताओं से निराश वोट बैंक रुपी घायल जनता को बाबाओं में सांत्वना का मलहम दिखाई पड़ने लगता है.’

‘लेकिन देवर्षि! जब इन छद्म बाबाओं का जेल भ्रमण प्रारंभ हो गया है तो फिर अब धरती लोक को शीघ्र ही इनसे छुटकारा मिल जाएगा? ’ नारद मुनि अपनी रिपोर्टिंग को फिनिशिंग टच देते हुए बोले–‘महाराज! यह बाबा रुपी वायरस इस धरती लोक के सिस्टम से तभी सदा के लिए विदा होगा जब यहाँ के लोगों में तार्किकता का एंटी वायरस लोड किया जायेगा. वरना यह जिद्दी वायरस है आसानी से जाता नहीं है.’

Web Title: Satire on Saints Like Baba Ram Rahim, Hindi Article

Keywords: Alankar Rastogi Satire, Satire, Spirituality vs  Hypocrisy, Cheating Business, Frauds in India, Frauds in the name of Religion, Vyangya

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