आस्था… एक ऐसी शक्ति, जिसके आगे असम्भव भी सम्भव लगने लगता है. उसके सम्मान में हर एक व्यक्ति अपना सिर झुकाता नज़र आता  है. इसी आस्था का प्रमाण हैं, हमारे मंदिर, जहां सदियों से दैवीय अनुभवों का सरोकार मानव से होता  है.

इसका जादू इतना असरदार होता है कि इंसान जीवन भर इसके आगे माथा टेकता है और यहीं से उसे सांत्वना और शांति मिलती है. ये मंदिरों क शक्ति का स्त्रोत भी है, शायद यही कारण है कि इनका पूजन चिर-प्राचीन काल से होता आ रहा है.

इसी क्रम में आज हम ऐसे मंदिर के बारे में जानेंगे, जहां चमत्कार की उम्मीद में आस्था का जनसैलाब हर रोज उमड़ता है. यह स्थान है उज्जैन का काल भैरव मंदिर..!

यहां भगवान काल भैरव द्वारा हर रोज मदिरा पीने का चमत्कार देखा जाता है. उनकी मूरत से मदिरा की प्याली लगाते ही प्याली से मदिरा गायब होने लगती है. लोगों का ऐसा मानना है कि भगवान काल भैरव उस मदिरा को पी जाते हैं. श्रद्धालुओं के सामने यह मंजर किसी करिश्मे से कम नहीं होता.

ऐसे में इस चमत्कार के बारे में जानना दिलचस्प रहेगा–

इस तरह प्रकट हुए काल भैरव!

स्कन्द पुराण में भगवान काल भैरव का जिक्र किया गया है. इस पुराण के अनुसार जब भगवान शिव क्रोध में थे, तब उन्होंने अपने तीसरे नेत्र को खोल दिया और इसी से काल भैरव का जन्म हुआ. काल भैरव के जन्म और क्रोध में भगवान शिव द्वारा तीसरे नेत्र खोले जाने के पीछे भी एक कहानी है जो कुछ ऐसी है..

दरअसल, वेदों के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने चार वेद बनाने के बाद पांचवा वेद बनाए जाने का फैसला लिया, लेकिन अन्य देवता उनके इस फैसले के खिलाफ थे. असल में वह पांचवा वेद नहीं चाहते थे. यही कारण था कि देवों ने मिलकर ब्रह्मा जी को 5वां वेद बनाए जाने से मना किया.

जब ब्रह्मा जी ने उनकी बात नहीं मानी तो समस्त देवगण शिव के समक्ष प्रार्थना करने पहुंचे. उन्होंने सारी बात उन्हें बताई. इस तरह देवों की बात सुनकर महादेव ने ब्रह्मा जी को पाँचवा वेद लिखने से मना किया, लेकिन ब्रह्मा अपने अहंकार में चूर थे. उन्होंने शिव के आदेश को मानने से साफ इंकार कर दिया.

महादेव इस बात पर अत्यंत क्रोधित हो उठे और उन्होंने अपने तीसरे नेत्र को खोल दिया. इससे इतना तेज उत्पन्न हुआ कि उससे काल भैरव का जन्म हुआ. महादेव की बात टालने से उग्र हुए काल भैरव ने ब्रह्मा जी का एक सिर काट दिया. इस तरह काल भैरव के हाथ में ब्रह्मा का कटा हुआ सिर अहंकार के विनाश का प्रतीक है.

काल भैरव ने क्रोध में ब्रह्मा जी का सिर तो काट दिया, लेकिन इससे वह ब्रह्मा हत्या के दोषी हो गए. उन्हें शिव ने उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे प्रायश्चित करने का आदेश दिया. अपने आराध्य का आदेश पाकर काल भैरव उज्जैन स्थित क्षिप्रा नदी के तट पर कठोर तप करने लगे. इस प्रकार उन्होंने अपने पापों से मुक्ति पा ली.

ऐसा कहा जाता है कि तभी से वहीं काल भैरव की पूजा होने लगी और आगे चलकर उस स्थान पर एक मंदिर बना, जो काल भैरव मंदिर के नाम से जगत विख्यात हुआ.

The Third Eye of Lord Shiva. (Pic: pinterest)

हजारों साल पुराना है मंदिर

उज्जैन का काल भैरव मंदिर करीब 6 हज़ार साल पुराना माना जाता है. कहा जाता है कि प्राचीन समय में इसका निर्माण राजा भद्रसेन द्वारा कराया गया था. इस मंदिर को वाम मार्गी तांत्रिक मंदिर भी माना जाता है.

कई सालों पहले इस मंदिर में तांत्रिकों द्वारा मन्त्र क्रियाएं की जाती थीं. तब इस मंदिर में उन्हीं का आना-जाना रहता था और शायद तभी से यह मंदिर तांत्रिक कहलाने लगा. आगे चलकर इसे भक्तों के लिए भी खोला गया.

भगवान काल भैरव को भोग के रूप में मदिरा चढ़ाने की यह प्रथा सदियों से चली आ रही है. प्राचीन समय में भी तांत्रिकों द्वारा भगवान काल भैरव को मदिरा पान ही कराया जाता था, जो प्रथा आज तक बदस्तूर जारी है.

हालांकि, काल भैरव की प्रतिमा द्वारा मदिरा पान किए जाने का चमत्कार कब से चल रहा है, इसका कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलता. कुछ साल पहले तक इस मंदिर में पशुओं की बलि भी दी जाती थी, जिस पर अब रोक लगा दी गई है.

अब भगवान को भोग के रूप में मदिरा, और प्रसाद ही चढ़ाया जाता है.

Kal Bhairav Temple Ujjain. (Pic: MouthShut)

भोग के लिए सजती है मदिरा

काल भैरव के मंदिर के सामने आस्था का अनूठा नजारा देखने को मिलता है. सभी आस्था के दरबारों की भांति यहां फूल-माला, अगरबत्ती, कर्पूर इत्यादि तो मिलता ही है. इसके साथ ही पूजा का सामान बेचने वाले दुकानदार मदिरा से भरी बोतलें भी रखते हैं, ताकि काल भैरव को चढ़ावे और भोग के रूप में मदिरा चढ़ाई जा सके.

जितने भी श्रद्धालु भगवान काल भैरव के दर्शन के लिए मंदिर में जाते हैं, उनके हाथों में मदिरा की बोतल अवश्य ही होती है. भोग के रूप में सभी श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर के अंदर प्याली में मदिरा गिराई जाती है. सबसे बड़ा करिश्माई नजारा तो तब होता है, जब मदिरा से भरी प्याली काल भैरव के मुख पर लगाते ही प्याली से मदिरा अपने आप ही समाप्त हो जाती है.

Alcohol Outside the Temple in Ujjain. (Pic: Travel magic)

क्या है रहस्य.. !

काल भैरव की प्रतिमा द्वारा किया जाने वाला मदिरा पान आखिर कहां जाता है, इसका आज तक कुछ पता नहीं चल सका है. इसका रहस्य अंग्रेजों के लिए भी हैरत का विषय था. इसका पता लगाने के लिए ब्रिटिश शासन काल में अंग्रेजों ने काफी खुदाई करवाई, लेकिन इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका. ऐसा कहा जाता है कि मंदिर की खुदाई करवाने के बाद अंग्रेजों ने भी इस मंदिर में माथा टेकना शुरू कर दिया था.

हजारों साल से इस मंदिर में काल भैरव को मदिरा का भोग लगाया जाता रहा है. हर रोज काल भैरव द्वारा सैकड़ों लीटर मदिरा ग्रहण कर लेने से इस मंदिर में भक्तों का जमावड़ा सा लगा रहता है. ऐसा कहा जाता है कि उज्जैन आने वाले लोग भगवान काल भैरव के दर्शन किए बिना वापस नहीं लौटते.

Lord Kal Bhairav inside the Temple. (Pic: Travel magic)

जहां भगवान द्वारा भक्तों का भोग ग्रहण किया जाता, वहां आस्था का सैलाब उमड़ना तो लाजमी ही है. ऐसे में एक तरफ जहां विज्ञान के आधुनिक युग में क्रांति ने पूरी दुनिया में अपना पांव पसारा है, वहीं इस मंदिर में भगवान काल भैरव द्वारा मदिरा पान किया जाना दैवीय शक्तियों की मौजूदगी का ऐहसास कराता है.

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Web Title: Kal Bhairav Temple, the Guardian Deity of Ujjain, Hindi Article

Featured Image Credit: Wikimedia Commons