Makar Sankranti 2017 (Pic Credit: India.com)

विविधता भरे भारतवर्ष में भिन्न-भिन्न संस्कृतियां और त्यौहार मौजूद हैं, जिससे वर्ष के हर महीने गुलजार रहते हैं. इन्हीं त्यौहारों में से एक महत्वपूर्ण त्यौहार है ‘मकर संक्रांति’. बताते चलें कि मकर संक्रांति को साल का पहला बड़ा त्यौहार भी माना जाता है, जो कई रूपों में देश के विभिन्न भागों में मनाया जाता है. इसे ऐसा एकमात्र त्यौहार भी कहा जा सकता है, जो भारत के लगभग हर राज्य में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. इतना ही नहीं भारत के बाहर विदेशों तक में इस दिन तमाम पर्व मनाये जाते हैं:

देश विदेश में पर्व के विभिन्न नाम

यूं तो ‘मकर संक्रांति’ मुख्यतः भारतवर्ष में ही मनाया जाता है, किन्तु देश से बाहर इसे बांग्लादेश में पौष संक्रान्ति, नेपाल में माघे सङ्क्रान्ति या ‘माघी सङ्क्रान्ति’ अथवा ‘खिचड़ी सङ्क्रान्ति’, तो थाईलैण्ड में सोङ्गकरन, लाओस में पि मा लाओ, म्यांमार में थिङ्यान, कम्बोडिया में मोहा संगक्रान और श्री लंका में भी पोंगल और उझवर तिरुनल के नाम से मनाया जाता है.

अगर देश में बात करें तो एक तरफ उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति तोअसम में बिहू और दक्षिण भारत में इस महत्वपूर्ण त्यौहार को पोंगल के नाम से जाना जाता है. ऐसे ही, मध्य प्रदेश में यह पर्व ओंकारेश्वर संक्रांति के नाम से मशहूर है, तो महाराष्ट्र में महिलाएं रंगोली सजाती हैं और सूर्य देवता की पूजा करती हैं. पश्चिम बंगाल में समूचे देश से असंख्य भक्त-श्रद्धालु गंगासागर द्वीप पर एकत्रित होते हैं और पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं. इस दिन लोग खिचड़ी बनाकर भगवान सूर्यदेव को भोग लगाते हैं, जिस कारण इस पर्व को ‘खिचड़ी’ के नाम से भी जाना जाता है. जैसा कि हमें ज्ञात है कि हमारे देश में सभी त्यौहारों का धार्मिक और सामाजिक महत्त्व है और मकर संक्रांति सहित सभी त्यौहार कुछ न कुछ सामाजिक सन्देश भी देते हैं.

Makar Sankranti 2017, Pongal in South India (Pic Credit: India Today)

मकर संक्रांति से जुड़े धार्मिक पक्ष

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस द‌िन सूर्य देव मकर राश‌ि में आते हैं और इसके साथ देवताओं का द‌िन शुरु होना माना जाता है. इस दिन को ‘उत्तरायण’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन सूर्य नारायण दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं.

उत्तरायण काल का हमारे धर्म में बेहद महत्त्व है और इस बात का अंदाजा हम इससे लगा सकते हैं कि महाभारत काल में पितामह भीष्म जिन्हें इच्छा-मृत्यु का वरदान प्राप्त था, उन्होंने बाणों की शैय्या पर 6 माह तक उत्तरायण की प्रतीक्षा की थी और उसके पश्चात प्राण त्यागे!

धार्मिक मान्यता है कि उत्तरायण में प्राण त्यागने वालों को विष्णु जी के चरणों में स्थान मिलता है और वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है. मकर संक्रांति को लेकर एक और कथा प्रचलित है और कहा जाता है कि इसी दिन गंगा जी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं. इससे भागीरथ के पूर्वजों को मोक्ष मिला था. इसीलिए संक्रांति के दिन पितरों के मोक्ष दिलाने के लिए भी अनुष्ठान किया जाता है.

सामाजिक महत्त्व

भारतवर्ष में त्यौहारों का असल मकसद ही सामाजिक समरसता की प्रवृत्ति को आगे बढ़ाना होता है. आप चाहे होली की बात करें, दिवाली की बात करें या फिर किसी अन्य त्यौहार की, हर त्यौहार समाज और उससे जुड़े लोगों को ध्यान में रखकर ही बना होता है. कमोबेश यही बात ‘मकर संक्रांति’ पर भी लागू होती है. यह त्यौहार आपस में मिल -जुल कर मनाये जाने के कारण ‘सौहार्द्रपूर्ण’ वातावरण बनता है.

गौरतलब है कि इस त्यौहार में दान करने का भी बहुत महत्त्व होता है. गरीब लोगों में तिल, गुड़, चावल, चिउड़ा इत्यादि बांटा जाता है, जिससे एक ओर जरूरतमंदों की मदद होती है तो दूसरी ओर सामाजिक समरसता की भावना का संचार होता है.

इस त्यौहार में छोटा- बड़ा, अमीर- गरीब का किसी प्रकार का भेद नहीं होता है और लोग इसे एक साथ मनाते हैं. भारतवर्ष के कई क्षेत्रों में गंगा घाट पर भारी भीड़ होती है और गंगा-स्नान करने की परंपरा को समाज के तमाम वर्गों के लोग एक साथ निभाते हैं.

Makar Sankranti 2017, Ganga Sagar Bath (Pic Credit: TopNews.in)

संक्रांति का वैज्ञानिक महत्त्व

संक्रांति का त्यौहार उस समय मनाया जाता है, जब देश में कड़ाके की ठण्ड पड़ रही होती है. चूंकि इस पर्व में तिल और गुड़ का विशेष महत्त्व होता है तो विज्ञान के अनुसार तिल और गुड़ की तासीर गर्म होती है और इसका सेवन करने से सर्दी का असर कम होता है. इसके अलावा संक्रांति के एक दिन पहले उत्तर भारत के पंजाब हरियाणा और दुसरे क्षेत्रों में ‘लोहड़ी’ मनाई जाती है, जिसे कई अर्थों में मकर संक्रांति से भी जोड़ा जाता है. इसमें आग जलाकर सामूहिक उत्सव मनाने, नाचने गाने की परंपरा से लोगों में सक्रियता बनी रहती है और ठण्ड का असर कम महसूस होता है.

निश्चित रूप से त्यौहारों का हमारे जीवन में विशिष्ट स्थान है और इस बार तो मकरसंक्रांति पर 28 साल बाद दुर्लभ महायोग बन रहा है, जिसे काफी शुभ माना जाता है, खासकर दान करने से अत्यधिक पुण्य मिलने की बात कही जा रही है. तो उत्सव मनाइये, उसका आनंद भी उठाइये, किन्तु जरूरतमंदों को ‘दान’ के रूप में कुछ मदद अवश्य करें!

Web Title: Makar Sankranti 2017

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