एक लड़की थी, जिसकी उम्र लगभग 10 या 11 साल रही होगी. वो एक संस्था के पास गई और उनसे बोली कि वह गर्मियों की छुट्टियों में उनकी संस्था में काम करेगी.

इसके बदले में उसे केवल एक साइकिल चाहिए, ताकि वह मीलों दूर स्थित अपने स्कूल में पढ़ने जा सके.

इस छोटी सी बच्ची ने किसी को भी अपनी इस स्थिति के लिए दोष देने की बजाए काम के माध्यम से समस्याओं का समाधान तलाशा.

यहीं से शुरू होती है, स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण की कहानी. इस कहानी के दो पात्र थे, एक तो ये लड़की, जो अपने बलबूते समाज के साथ कदमताल करना चाहती थी, और दूसरी वो संस्था जिसके पास ये लड़की मदद मांगने गई थी.

संस्था का नाम है, ‘माण देशी फाउंडेशन’. इसकी स्थापना ही ग्रामीण भारत में महिला विकास को सर्वोपरि रखने के उद्देश्य से की गई.

बहरहाल, इस फाउंडेशन की नींव रखने वालीं चेतना गाला सिन्हा भारत के गांव-देहात की महिलाओं के लिए देवीतुल्‍य हैं.

अर्थशास्त्र की प्रोफेसर रह चुकीं चेतना सिन्हा ने इन्हीं महिलाओं के कल्याण के लिए अपनी नौकरी छोड़ी और अपना पूरा जीवन इनके लिए समर्पित किया है.

एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) एवं दी बेटर इंडिया (The Better India), यूएन विमेन (UN Women) के सहयोग से अपनी चेंजमेकर कैम्पेन में ऐसी ही ‘परिवर्तनकारी’ महिलाओं को सामने ला रहा है, जिन्होंने अपने हौसले से समाज में एक बड़ा बदलाव लाया.

ऐसे में आईए एक नजर चेतना के जीवन संघर्ष पर डालते हैं, ताकि हमें इस सवाल का जवाब मिल सके कि आखिर क्यों इन्हें भारत में महिला सशक्तिकरण की 'जिंदा मूरत कहा जाता है–

जेपी आंदोलन ने प्रभावित किया

एक बैंकर, सामाजिक कार्यकर्ता और माइक्रो फाइनेंस कंपनी ‘माण देशी महिला सहकारी बैंक’ की अध्यक्ष चेतना सिन्हा का जन्म मुंबई के एक गुजराती परिवार में हुआ था.

यहीं 70-80 के दशक में सिन्हा राजनीतिक सक्रियता के साथ बड़ी हुईं. इन्होंने मुंबई से ही पहले बी.कॉम और फिर 1982 में अर्थशास्त्र में मास्टर्स की डिग्री हासिल की.

इसके बाद ही इनकी नौकरी लग गई और ये प्रोफेसर बन गईं.

ये बात तब की है, जब जयप्रकाश नारायण का समाजवादी आंदोलन जोरों पर था. इधर, चेतना सिन्हा भी शुरू से ही राजनीतिक रूप से जुझारू महिला रहीं.

सो इन्होंने बिहार की राह पकड़ी ली और उनके समाजवादी राजनीतिक आंदोलन का हिस्सा बन गईं.

यहीं इनकी मुलाकात म्हसवाड़ के एक किसान नेता और कार्यकर्ता विजय सिन्हा से हुई. इसके बाद दोनों ने शादी कर ली.

चेतना सिन्हा ने मुंबई छोड़ दिया और फिर दोनों 1987 में म्हसवाड़ में रहने लगे.

Chetna Gala Sinha Started Women Cooperative Bank (Pic: wikipedia)

महिलाओं को पत्थर तोड़ते देख पसीजा दिल

...और एक रोज जब जेपी आंदोलन में भागीदारी के दौरान, उन्होंने सतारा जिले के सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा किया, तो उनका दिल पसीज उठा.

वह ये देखकर चौक गईं कि 49 डिग्री तापमान में रोजगार गारंटी योजना के नाम पर किस तरह से महिलाओं से पत्थर तुड़वाए जा रहे हैं.

इस तरह के दृश्य उन्हें कई और जगहों पर भी देखने को मिले. इसके बाद उन्होंने कैदियों जैसी जिंदगी जीने को मजबूर इन महिलाओं के कल्याण की ठान ली.

अपनी शादी के बाद इन्होंने सतारा जिला का एक गांव रहने के लिए चुना. यहां से वह महिला कल्याण का काम आसानी से कर सकती थीं.

इन्होंने कामकाजी महिलाओं को बचत के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि एक समय बाद जमा हुई पूंजी से वह अपना नया काम शुरू कर सकें. हालांकि, उन महिलाओं की तनख्वाह बहुत ज्यादा नहीं थी.

अपने परिवार को पालने के बाद उनके पास नाम मात्र के पैसे ही बचते थे.

She Works For Rural Women Development (Pic: Forbesindia)

...और खोल दिया महिला सहकारी बैंक

ये महिलाएं अगर कुछ नया व्यवसाय करना भी चाहतीं, तो उसके लिए उन्हें सालों तक बचत करनी पड़ती.

ऐसे में, चेतना सिन्हा इस समस्या का हल खोजकर लाईं.

उन्होंने महिलाओं को इकट्ठा किया और एक सहकारी बैंक खोलने की योजना बनाई. हालांकि, ये महिलाएं ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थीं, सो बैंक को लाइसेंस नहीं दिया गया!

उन्होंने बैंक को स्थापित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को अपना प्रस्ताव भेजा. बैंक ने इस प्रस्ताव को यह कहकर अस्वीकार कर दिया कि महिलाएं पढ़ी-लिखी नहीं हैं!

हालांकि, इन महिलाओं ने अपने आपको साक्षर बनाया और इसके लगभग छह महीने बाद इस सहकारी बैंक को मंजूरी दे दी गई.

इस तरह से 1997 में भारत के पहले महिला सहकारी बैंक ‘माण देशी बैंक’ की स्थापना हुई.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से सहकारी लाइसेंस प्राप्त करने वाला ये पहला ग्रामीण महिला सहकारी बैंक था.

1997 में स्थापना के बाद बैंक की कार्यशील पूंजी 7,08,000 रुपए थी. ये रकम इस बैंक की पहली 1335 महिला सदस्यों द्वारा जुटाई गई थी.

अगले 20 सालों में बैंक की महिला सदस्यों की संख्या बढ़कर 3,10,000 हो गई.

म्हसवाड़ से शुरू हुए इस बैंक की आज पूरे महाराष्ट्र में 7 शाखाएं हैं, जिनकी वर्किंग कैपिटल 150 करोड़ रुपए है.

इन ब्रांचों में 2 लाख महिला ग्राहक भी हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू किया गया ये बैंक, गांव की गरीब महिलाओं को पूंजी और अन्य वित्तीय सहायता प्रदान करता है.

इस बैंक में कोई भी अपना खाता खोल सकता है और इसमें कम से कम राशि भी जमा की जा सकती है. क्योंकि चेतना सिन्हा कहती हैं कि कोई भी रकम छोटी नहीं होती.

Chetna Sinha Visits A Goat Insemination Camp (Pic: mastercardcenter)

यहां से आया माण देशी फाउंडेशन बनाने का आइडिया!

चेतना शादी के बाद अपने पति के साथ बड़ी उम्मीद लगाए, सब कुछ छोड़कर म्हसवाड़ आई थीं. हालांकि, वह ये देखकर आश्चर्यचकित रह गईं कि उनके घर में शौचालय ही नहीं था!

अगली सुबह उन्होंने अपने पति से इसके बारे में पूछा, तो उन्होंने घर के पीछे एक खुली जगह पर जाने का इशारा कर दिया.

कौन बनेगा करोड़पति के एक विशेष ऐपिसोड में होस्ट अमिताभ के एक सवाल के जवाब में चेतना ने कहा था कि, शादी के बाद उन्हें अपने ससुराल में घर के पीछे ही खुले में टॉयलेट जाना पड़ता था.

तब उन्होंने इस स्थिति से निपटने की तैयारी की और गांव में टॉयलेट बनवाने का काम शुरू कराया.

यहीं से उनके फाउंडेशन की शुरुआत हुई.

माण देशी फाउंडेशन की शुरूआत 1996 में महाराष्ट्र के सतारा जिले के इसी म्हसवाड़ गांव से हुई थी. इसी फाउंडेशन के अंतर्गत महिला सहकारी बैंक भी आता है.

आज माण फाउंडेशन के अंतर्गत महिलाओं के लिए देश का पहला बिजनेस स्कूल, महिलाओं द्वारा संचालित सामुदायिक रेडियो प्रसारण और स्थानीय समुदायों के जीवन सुधार कार्यक्रम चल रहे हैं.

चेतना सिन्हा कहती हैं कि हम बैंक की स्थापना के बाद वित्तीय सेवाओं से भी आगे काम करना चाहते थे. हम महिलाओं को वित्तीय तौर पर स्वावलंबी बनाने के लिए उनकी मदद करना चाहते थे.

माण फाउंडेशन के बिजनेस स्कूल में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने और उनके उत्पादों को कैसे बाजार में बेचा जाए, ये सिखाया जाता है.

इसके अलावा, कई महिलाएं बिजनेस स्कूल में प्रशिक्षण के लिए नहीं आ पाती थीं. उनके लिए हमने एक गाड़ी को चलता-फिरता बिजनेस स्कूल बनाया. वहीं, यह भी सुनिश्चित किया गया कि कोई भी महिला वित्तीय सेवाओं और फाइनांस से दूर न रह पाए.  

वहीं, सामुदायिक रेडियो महिलाओं को अपनी जीत की कहानियों को साझा करने का मंच प्रदान करता है. उनके साहस की कहानियों से और भी महिलाओं को एक नई उम्मीद मिलती है.

बहरहाल, ग्रामीण भारत में लोक कल्याण की भावना से महिला उद्यमियों की स्थिति को बदलकर रख देने वाली चेतन की कहानी साहस, विनम्रता और सहानुभूति के स्तंभों पर तैयार हुई है.

चेतना सिन्हा ने ग्रामीण महिला उद्यमियों को समर्थन देने के लिए विमेंस चैम्बर ऑफ कॉमर्स और ग्रामीण महिलाओं को जरूरी उद्यमी कौशल प्रदान करने व प्रशिक्षण के लिए एक बिजनेस स्कूल की भी स्थापना की.  

Chetna Sinha With Mann Deshi Volunteers (Pic: manndeshibank)

एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) एवं दी बेटर इंडिया (The Better India), यूएन विमेन (UN Women) के सहयोग से भारतीय महिलाओं के सम्मान का उत्सव मना रहा है, जो प्रत्येक दिन नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं तो भारत को एक उन्नत भविष्य की ओर प्रभावी ढंग से अग्रसर कर रही हैं.   

चेतना ने यह साबित किया कि वह एक चेंजमेकर हैं और समाज में बदलाव लाने का दम रखती हैं. इस बारे में चेतना कहती हैं कि इन महिलाओं की सीखने की ललक, जीतने की चाह ने मुझे इस काम के लिए प्रेरित किया है.

ऐसे अभियानों को सपोर्ट करने के लिए आप यथासंभव दान कर सकते हैं. डोनेट करने के लिए इस लिंक पर जाएँ: https://milaap.org/fundraisers/mgchangemakers

एमजी मोटर इंडिया (MG Motor India) के बारे में और जानने के लिए आप इसके फेसबुक और इन्स्टाग्राम पेज पर जाएँ:

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Web Title: Chetna Sinha: Founder of First Rural Bank For Women In India

Feature Image Credit: manndeshifoundation