सचिन और सहवाग जैसे खिलाड़ियों के रिटायरमेंट के बाद भारतीय क्रिकेट टीम में युवा क्रिकेटरों की एक बाढ़ सी देखने को मिली. कई नए खिलाड़ी खुद को साबित करने के लिए मैच दर मैच अपना दम-खम दिखाते आ रहे हैं. कई ऐसे भी हैं, जो खुद को टीम का एक मजबूत स्तंभ बना चुके हैं. ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा.

रोहित ने जब भारतीय टीम की तरफ से खेलना शुरू किया था तब उनके खेल को देखकर सचिन ने कहा था कि ‘यह लड़का लंबी रेस का घोड़ा साबित होगा’, जो बाद में सही भी साबित हुआ. तो आइये नजर डालते हैं रोहित के जीरो से हीरो बनने के सफरनामे पर:

बचपन के कोच का बड़ा योगदान

रोहित एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं. उनके पिता एक ट्रांसपोर्ट फर्म में कर्मचारी थे. घर की स्थिति इतनी मजूबत नहीं थी कि वह रोहित को पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट के लिए अलग से ट्रेनिंग दिला पाते. रोहित के चाचा ने इसको महसूस किया और उन्हें अपने साथ ले गये. चाचा के पास ही रोहित बड़े हुए और एक नार्मल क्रिकेट कैंप में खेलने जाते रहे.

इसी दौरान एक दिन उन्हें कोच दिनेश लाड ने खेलते हुए देखा और उनके खेल के मुरीद हो गये.  उन्होंने रोहित को सिखाने का मन बनाते हुए उनसे कहा ‘तुम अच्छा खेलते हो. मैं चाहता हूं तुम अपना स्कूल बदल लो, ताकि तुम और अच्छा खेल सको’.

रोहित ने अपनी आर्थिक हालत को देखते हुए मना कर दिया. बाद में लाड को इस बात का पता चला तो उन्होंने स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप में रोहित की मदद की और वह स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल का हिस्सा बन गये. यह भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का पहला कदम था.

शुरुआती सफर…

शुरुआत में रोहित एक ऑफ स्पिनर गेंदबाज बनना चाहते थे, लेकिन कोच ने उन्हें बल्लेबाजी पर ध्यान देने को कहा, क्योंकि उन्होंने उनके अंदर एक स्टार बल्लेबाज को देख लिया था. कोच के कहने पर ही उन्होंने ओपन बल्लेबाजी करनी शुरु कर दी. जल्द ही वह टॉप टेक्निकल बल्लेबाजों की तरह खेलने लगे. उन्होंने अपने जीवन का पहला शतक हैरिस एंड गिल्स शील्ड स्कूल टूर्नामेंट में बतौर ओपनर ठोका था.

जल्द ही रोहित शर्मा के जिंदगी में वह दिन आ गया, जिसके लिए वह घंटों नेट प्रैक्टिस में पसीना बहाया करते थे. 2005 में उन्होंने वेस्ट जोन के लिस्ट-ए के लिए सेंट्रल जोन के खिलाफ देवघर ट्रॉफी में डेब्यु किया. इसमें उन्होंने उदयपुर के खिलाफ 123 बॉलों पर 142 रन जड़कर सभी को सरप्राइज कर दिया.

शानदार प्रदर्शन के इसी सिलसिले के साथ उन्होंने 2006 में फ़र्स्ट क्लास में अपना कदम रखा और न्यूजीलैण्ड के खिलाफ डर्विन में डेब्यु किया. इसी साल उन्होंने रणजी के लिए भी डेब्यु किया. फरवरी 2007 में बंगाल के खिलाफ वह मुंबई की तरफ से खेले और अर्धशतक लगाकर मुंबई को जीत दिलाई. सचिन भी इस टीम का हिस्सा थे.

Cricket History of Rohit Sharma (Pic: thequint.com)

6 साल रहे चुनौतीपूर्ण

रोहित शर्मा को अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का पहला मौका 2007 के आयरलैण्ड दौरे पर मिला. हालांकि, उन्हें इस दौरे पर बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला. बाद में उन्हें इसी साल टी-20 विश्व कप के दौरान खेलने का मौका मिला, तो उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. इस टूर्नामेंट के दौरान रोहित ने द. अफ्रीका के खिलाफ तेज अर्धशतक ठोंक कर अपना दम दिखाया. इस टूर्नामेंट के खत्म होते-होते वह चयनकर्ताओं पर भरोसा जमाने में सफल रहे.

इसके बाद आया आईपीएल का मैदान, और यहां भी रोहित शर्मा ने अपना टी-20 प्रेम दिखलाया. रोहित ने लीग में डेक्कन चार्जर्स की ओर से खेलते हुए प्रतियोगिता में 36.73 की औसत से 404 रन बनाए और वे प्रतियोगिता के अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों में से एक रहे.

इसके बाद रोहित को कॉमनवेल्थ बैंक सीरीज में आस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने का मौका मिला. इस टूर्नामेंट में उन्होंने 2 अर्धशतक ठोके, जिसकी जमकर तारीफ हुई. खासकर सिडनी मैच में उन्होंने जिस तेजी से 66 रन बनाए उसने सुर्खियां बटोरीं. इसके बाद रोहित को कई और मौके दिए गये, लेकिन विराट कोहली, सुरेश रैना जैसे युवा खिलाड़ियों के साथ मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा और फॉर्म और फिटनेस की मार ने रोहित को थोड़े समय के लिए टीम से दूर कर दिया.

2013 लेकर आया ‘कई’ खुशियां

2013 रोहित के लिए खुशियां लेकर आया. पहले तो उन्होंने वेस्ट इंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच में डेब्यु करते हुए लाजबाव 177 रन बनाए और बाद में वह एकदिवसीय टीम में अपनी स्थाई जगह बनाने में कामयाब रहे. असल में इसी साल सचिन तेंदुलकर ने टेस्ट और एकदिवसीय मैचों से सन्यास ले लिया था, इसलिए उनकी जगह किसी को टीम का हिस्सा बनना था. खुशकिस्मती से उस समय रोहित का बल्ला चल रहा था, इसलिए उन्हें यह मौका दिया गया.

फिर 2015 में उन्होंने विश्वकप में अपना जलवा बिखेरा. वह भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे. क्वॉर्टर फाइनल में जिस तरह से उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 137 रन बनाए, क्रिकेटप्रेमी आज तक नहीं भूले होंगे.

वर्तमान में वह टीम के एक मजबूत स्तंभ हैं और टीम के लिए ओपन करते हैं. मौजूदा चैम्पियंस ट्रॉफी में भी वह सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज हैं. यही नहीं जिस तरह से वह प्रदर्शन कर रहे हैं, उम्मीद है कि आने वाले प्रत्येक मैच में उनका बल्ला बोलेगा और वह मैन ऑफ द सीरीज के प्रबल दावेदार होंगे.

हर शैली में रोहित शर्मा हिट

रोहित अपने लम्बे-लम्बे छक्कों के लिए मशहूर हैं. उनकी बल्लेबाजी को ‘स्लीपिंग ब्यूटी’ कहा जाता है. वह गेंदबाजी का भी हुनर रखते हैं. कई बार वह गेंदबाजी करते हुए देखे गए हैं. वह भारतीय टीम के चुनिंदा चुस्त फिल्डरों में से एक माने जाते हैं. रोहित में टेस्ट, वनडे और टी-20 सभी फोर्मट्स खेलने की क्षमता है. उनके पास क्रिकेट के लगभग सभी शॉट हैं. उनमें सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपनी खुद की शैली में बल्लेबाजी करना पंसद करते हैं.

गेंद को देखने की क्षमता, कलाइयों का इस्तेमाल और टाइमिंग उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग बनाती है. यही कारण है कि विराट जैसे बड़े खिलाड़ी अक्सर कहते रहते हैं कि रोहित का चलना टीम के लिए बहुत जरुरी हो जाता है. वह बड़े मैच के बड़े प्लेयर हैं.

Rohit Shrama (Pic: sportszeeta.com)

बतौर कप्तान भी रखते हैं दम

टीम को लीड करने की बात हो तो रोहित शर्मा हमेशा से एक विकल्प रहे हैं. 2017 चैम्पियंस ट्रॉफी में भी वह उप-कप्तान हैं. बताते चलें कि जब से वह आईपीएल में मुम्बई इंडियंस के कप्तान बनाए गये हैं, तब से टीम ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया है. उनकी ही कप्तानी में 2013, 2015 और फिर 2017 में मुंबई इंडियंस ने तीन आईपीएल खिताब जीते हैं.

आज के दौर में वह विराट और रैना जैसे अपने साथियों को पीछे छोड़ते हुए आईपीएल के बेस्ट कैप्टन बन चुके हैं. वह स्वभाव से शांत हैं और विवादों में नहीं रहते. साथ ही टीम के खिलाड़ियों के साथ उनके संबध मैत्रीपूर्ण रहते हैं. यह उनकी कुछ खूबियां हैं, जो उन्हें कप्तान के रुप में एक विकल्प के तौर पर खड़ा करती हैं.

उपलब्धियों पर एक नजर…

  • टेस्ट में 21 मैचों की 36 पारियों में 37.00 की औसत से रोहित ने 1184 रन बनाए हैं, इसमें 2 शतक और 7 अर्धशतक शामिल हैं.
  • रोहित शर्मा ने 157 वनडे मैचों की 151 पारियों में 42.79 की औसत से 5435 रन बनाए हैं जिसमें 2 दोहरे शतक, 11 शतक और 31 अर्धशतक शामिल हैं.
  • 62 टी-ट्वेटी मैचों की 55 पारियों में रोहित ने 31.72 की औसत से 1364 रन बनाए हैं, इसमें 1 शतक व 11 अर्धशतक शामिल हैं.
  • प्रथम श्रेणी के 81 मैचों की 126 पारियों में 54.52 की औसत से 6161 रन जिसमें 1 तेहरा शतक, 19 शतक और 27 अर्धशतक शामिल हैं.
  • रोहित ने आईपीएल के 253 मैचों की 241 पारियों में 32.71 की औसत से 6542 रन बनाए हैं, इसमें 3 शतक और 46 अर्धशतक शामिल हैं.
  • एकदिवसीय मैच की एक पारी में सबसे अधिक (16) छक्के लगाने का कीर्तिमान है इनके नाम.
  • एकदिवसीय मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी की जमीं पर सबसे अधिक रन (171 रन) बनाने वाले खिलाड़ी हैं रोहित.

Rohit Sharma (Pic: espncricinfo.com)

रोहित अर्जुन अवार्ड्स से सम्मानित किए जा चुके हैं. आस्ट्रेलिया के खिलाफ उनके 209 रन की आतिशी पारी और श्रीलंका के खिलाफ 264 रन की पारी शायद ही कोई भूला होगा. एकदिवसीय मैचों में दोहरा शतक बनाने वाले वह दुनिया के इकलौते बल्लेबाज हैं. ईश्वर ऐसे टैलेन्टेड खिलाड़ी हर दौर में बनाता रहे, ताकि क्रिकेट की खुमारी कभी कम न हो.

Web Title: Cricket History of Rohit Sharma, Hindi Article

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