खेल की दुनिया में किक्रेट की लोकप्रियता का ग्राफ हर रोज़ तेज़ी से बढ़ रहा है.

टी-20, आईपीएल आने के बाद इस खेल में खिलाड़ियों के बीच काफी प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है. इससे जुड़ा हर खिलाड़ी खेल के दौरान बेहतर तकनीक अपनाते हुये अपने देश और टीम को जीत दिलाने की हर मुमकिन कोशिश करता है.

खेल की इस तकनीक में ऐसा ही एक नाम है ‘रिवर्स स्विंग’!

मैदान पर गेंदबाज़ों द्वारा इस तकनीक का इस्तेमाल करते हुये कई बार बल्लेबाज़ के विकेटों की गिल्लियां बिखेरी जा चुकी हैं.

ऐसे में रिवर्स स्विंग की कला को जानना, समझना दिलचस्प रहेगा–

ऐसे हुई ‘रिवर्स स्विंग’ की खोज

मैदान में खिलाड़ियों द्वारा अपनी टीम को जीत दिलाने की कोशिश के लिये किये जाने वाले नये प्रयोग से ही मैदान पर नई तकनीकों का अविष्कार होता आया है. किक्रेट में स्पिनर्स द्वारा जैसे ‘दूसरा’ गेंद का अविष्कार किया गया ठीक वैसे ही रिवर्स स्विंग का अविष्कार भी एक तेज़ गेंदबाज़ ने किया. इस गेंदबाज़ का नाम था सरफराज़ नवाज़.

क्रिकेट की दुनिया में सरफराज़ नवाज़ को रिवर्स स्विंग का जनक कहा जाता है. माना जाता है कि सरफराज़ नवाज़ ने रिवर्स स्विंग का तोहफा गेंदबाज़ो को देकर उन्हें बल्लेबाज़ो के लिये और घातक बना दिया है.

सरफराज़ द्वारा रिवर्स स्विंग के अविष्कार की कहानी दिलचस्प है. इस गेंदबाज़ ने गेंदबाज़ी ट्रायल देने के दौरान ही रिवर्स स्विंग का अविष्कार किया था. इससे पहले वे एक तेज़ गेंदबाज़ के रुप में बस कटर बॉल फेंकते थे, लेकिन ट्रायल देते- देते और ट्रायल में होने वाली गलतियों से उन्होंने बॉल को रिवर्स स्विंग कराना सीख लिया.

Sarfraz Nawaz (Pic: thecricketmonthly)

मुश्किल होता है इसका सामना

मैच के दौरान गेंदबाज़ गेंद पुरानी होने पर गेंद को रिवर्स कराते हैं. मैच के दौरान नारंगी रंग की कुकाबूरा बॉल की चमक खोने के बाद एक तेज़ गेंदबाज़ गेंद को रिवर्स कराकर बल्लेबाज़ को मुश्किल में डालता है. विपरीत दिशा में तेजी से निकलने वाली गेंद को समय पर पढ़ पाना एक बल्लेबाज़ के लिये काफी मुश्किल भरा होता है.

मैच के दौरान जब लेदर की बॉल पूरी तरह से पुरानी हो जाती है, तब गेंदबाज़ बॉल का एक हिस्सा रगड़ कर उसे काफी चमका कर रखता है. कहा जाता है कि रिवर्स स्विंग कराने का सबसे बड़ा मूलमंत्र यही है कि गेंद पुरानी हो और गेंद का एक हिस्सा दूसरे हिस्से की तुलना में काफी चमकता रहे.

सबसे अहम बात यह है कि रिवर्स स्विंग बॉलिंग एक ऐसी तकनीक है, जो क्रीज पर लंबे समय से जमे बल्लेबाज़ को आउट करने के लिये तेज़ गेंदबाज़ द्वारा इस्तेमाल की जाती है.

एकदिवसीय मैच देखते हुये कभी आपने गौर किया है कि कप्तान द्वारा अधिकतर आखिर के आठ-दस ओवर तेज़ गेंदबाज़ो से ही क्यों कराये जाते हैं. एक चालाक और दिग्गज़ कप्तान अपने तेज़ गेंदबाज़ो के कोटे के ओवर आखिर के लिये ज़रुर बचा कर रखता है. इसकी सबसे बड़ी वजह होती है कि विपक्षी टीम कम रन बनाये और विपक्षी बल्लेबाज़ो को अधिक आक्रामकता वाली बल्लेबाज़ी से रोका जा सके.

तीस चालीस ओवर पूरे होने के बाद गेंद बेहतर रुप से रिवर्स होने लगती है. इसलिये कप्तान द्वारा अपनी टीम के सबसे कुशल गेंदबाज़ों से आखिर के ओवर कराये जाते हैं, ताकि रन गति पर एक हद तक अंकुश लगाया जा सके.

Zaheer Khan (Pic: enter10mentonly)

‘आईपीएल’ ने दी नई पहचान

यूं तो रिवर्स स्विंग कला काफी पुरानी है और लंबे समय से इसका प्रयोग क्रिकेट मैदान पर तेज़ गेंदबाज़ों द्वारा किया जाता रहा है. किन्तु रिवर्स स्विंग की इस कला को सही मायने में पहचान आईपीएल आने के बाद ही मिली.

हालांकि, इससे पहले रिवर्स स्विंग की परिभाषा सिर्फ खिलाड़ियों तक ही सीमित थी. आईपीएल शुरु होने के बाद क्रिकेट प्रशंसकों ने इस कला को और नजदीक से जाना और अपने पसंदीदा गेंदबाजों को मैदान पर इस कला का प्रदर्शन करते हुये करीब से देखा.

रिवर्स स्विंग की बदौलत आईपीएल के हर सीज़न में तेज़ गेंदबाजों का काफी वर्चस्व रहा है. भारतीय गेंदबाजों के साथ विदेशी गेंदबाजों ने आईपीएल में अपनी रिवर्स स्विंग से काफी बल्लेबाजों को खूब छकाया.

तेज़ पिचों पर तो बल्लेबाज़ों के लिये रिवर्स स्विंग अभिशाप बनती जा रही है. मैदान में नये बल्लेबाज़ो के लिये रिवर्स स्विंग गेंदबाज़ो को खेलना चुनौती बनता जा रहा है. रिवर्स स्विंग के खौफ़ का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान के पूर्व कप्तान मिस्बाह उल हक ने अपनी टीम की खराब बल्लेबाज़ी से परेशान होकर यहां तक कह दिया था कि रिवर्स स्विंग गेंदों को खेलना पाकिस्तान के बल्लेबाज़ो की बस की बात नहीं है.

पाकिस्तान के इस पूर्व कप्तान ने ये बयान साल 2016 में इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच चल रही टेस्ट सीरीज़ में दिया था. मैच में पाकिस्तान टीम के बल्लेबाज़ो ने बेहद खराब प्रदर्शन किया था. टीम ने एक रन पर अपने चार बल्लेबाज़ो के विकेट गंवा दिये थे.

‘रिवर्स स्विंग’ के मशहूर धुरंधर

रिवर्स स्विंग के जनक माने जाने वाले पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ ने रिवर्स स्विंग में दक्षता हासिल करने के बाद यह कला इमरान खान को सिखाई थी. जिसकी बदौलत इमरान खान ने अपनी गेंदबाज़ी से विश्व क्रिकेट में भूचाल ला दिया था.

इमरान की कप्तानी में ही पाकिस्तान ने 1992 में अपना पहला वर्ल्ड कप जीता था. जिसके बाद इमरान खान ने यह कला वसीम अकरम को सिखाई, जो किंग ऑफ स्विंग के नाम से विश्व क्रिकेट में मशहूर रहे.

भारत में सबसे बेहतर रिवर्स स्विंग बॉलिंग कराने में पूर्व गेंदबाज़ ज़हीर खान का नाम लिया जाता है. ज़हीर खान ने अपनी रिवर्स स्विंग से कई बल्लेबाज़ो के विकेटों की गिल्लियां बिखेंरी और विश्व क्रिकेट में काफी सुर्खियां बटोरीं.

मौजूदा भारतीय टीम में मोहम्मद शमी एवं भुवनेश्चवर कुमार की जोड़ी गेंद को काफी बेहतर रुप से रिवर्स स्विंग करा रही है. इंग्लैंड के गेंदबाज़ भी रिवर्स स्विंग कराने के लिये विश्व क्रिकेट में काफी मशहूर रहे.

Wasim Akram (Pic: NDTV Sports)

अगर आप भी क्रिकेट की दुनिया के किसी ऐसे गेंदबाजों को जानते हैं जो ‘रिवर्स’ स्विंग गेंद फेंकने के लिए काफी मशहूर हों, या फिर वर्ल्ड क्रिकेट में ‘रिवर्स’ स्विंग गेंद की तर्ज पर अन्य तरह की गेंद फेंकने के लिये मशहूर हों तो नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताना मत भूलियेगा.

Web Title: Reverse Swing Bowling Technic, Hindi Article

Feature Image Credit: forensic