लाइक्स, कमेंट और शेयर!

ये सोशल मीडिया की भावों को व्यक्त करने वाली दुनिया के शब्द हैं. टेक्नोलॉजी, विज्ञान, इंटरनेट और सोशल मीडिया के कॉम्बिनेशन से हमे एक नयी दुनिया मिली है, जो कहलाती है वर्चुअल वर्ल्ड.

इस वर्चुअल वर्ल्ड ने मीडिया को लोकतांत्रिक बना दिया है. जहां हर किसी को बोलने और लिखने की आजादी है. आज लोग ज्यादा से ज्यादा एक्टिव हो रहे हैं और सरकार से जुड़ी हर नीति पर अपना विचार रखते हैं. इससे न सिर्फ लोग ज्यादा जागरूक हो रहे हैं बल्कि ये एक लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छा संकेत भी है. इससे सरकार की जवाबदेही बनी रहती है.

लेकिन, वो कहते हैं न कि सिक्के की दो पहलू होते है. यहां भी हाल कुछ ऐसा ही है. जहां एक ओर इसके तमाम फायदे हैं, वहीं दूसरी ओर इस वर्चुअल वर्ल्ड में ‘ट्रोलिंग’ एक गंभीर समस्या की तरह सामने आ रहा है.

इसके प्रकोप से कोई नहीं बच पाया है. अब वह चाह कोई पॉलिटिशियन, सेलेब्रिटी हो या फिर पत्रकार हो. बड़े लोगों के साथ-साथ हर वो इंसान जो आज सोशल मीडिया पर एक्टिव है, वह जरुर ट्रोलिंग का शिकार हुआ होगा.

‘ट्रोलिंग’ की समस्या इतनी बढ़ गयी है कि आज हर कोई इससे परेशान है. ऐसे में, इसको विस्तार से जानते हैं. साथ ही, जानते हैं आखिर किन उपायों को अपनाकर ‘ट्रोलिंग’ से बचा जा सकता है-

‘ट्रोलिंग’ आखिर है क्या?

‘ट्रोल’ शब्द की उत्पत्ति के विषय में माना जाता है कि स्कैनडिनेवियन देशों की पौराणिक कथा में एक बदसूरत और भयानक जीव का जिक्र है, जिसकी वजह से लोग अपनी यात्रा पूरी नहीं कर पाते थे, और इस राक्षसी प्रवृत्ति वाले जीव का नाम ट्रोल था.

लिहाज़ा, भारत में फिलहाल ट्रोलिंग को परिभाषित नहीं किया गया है इसीलिए इस पर अलग-अलग एक्सपर्ट अलग राय रखते हैं. जिसमे कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि वो व्यक्ति जो इंटरनेट पर ऐसी एक्टिविटी करे जिससे दूसरे व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशानी हो.

इसके अलावा, अगर कोई भी व्यक्ति पांच आक्रामक और अनर्गल  मैसेज किसी अकाउंट से भेजता है, तो उसे ट्रोल कहा जा सकता है. दरअसल, आज किसी भी मुद्दे पर चल रही चर्चा को लोग एक वैचारिक मतभेद में बदल देते हैं. जिसके लिए ट्रोलर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए आक्रामक और अपशब्दों का प्रयोग करते हैं.

यही नहीं वे बेवजह की बातें उठाते या लिखते है जिससे सामने वाले व्यक्ति को मानसिक परेशानी हो. आप एक आंकड़े के ज़रिये इस समस्या की गंभीरता को समझें. दरअसल, साल 2016 में  ट्वीटर के आंकड़ों के अनुसार 1.9 लाख या सिर्फ .061 फीसदी ट्वीटर एकाउंट ही वेरिफ़ाइड हैं. ऐसे में, ऑनलाइन दुनिया की तस्वीर कुछ अच्छी नहीं!

इन सबके अलावा, आर्गेनाइज्ड ट्रोलिंग तो और भी खतरनाक है जिसमें कुछ कंपनियां, राजनीतिक पार्टी और सरकारें काफी सोच समझकर एक अच्छी खासी ट्रोल्स की फौज खड़ी करती हैं जो उनके लिए एक अच्छी छवि का निर्माण करते हैं. साथ ही, उनके खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफार्म में कोई निगेटिव राय न बना सके, इस बात को ध्यान रखते हैं.

अब प्रश्न उठता है कि क्या इनसे बचने के कोई उपाय नहीं. इनसे बचने के लिए हम किन बातों का ध्यान रख सकते हैं और इनसे खुद को बचा सकते हैं उस पर चर्चा आगे चर्चा करेंगे…

Online Trolling Mentally torture Us (Pic: conversation)

भारत में इसके खिलाफ क्या कानून हैं?

वैसे अगर हम बात भारत की करें तो यहां अलग से ट्रोल्स से निपटने के लिए कानून नहीं है. हालांकि, आईटी एक्ट में ऐसा प्रावधान है जिसके तहत सरकार कंपनियों के साथ मिल कर ट्रोल्स के खिलाफ उनपर कार्रवाई हो सकती हैं.

इस ट्रोलिंग की समस्या से छुटकारा पाने के लिए केएन गोविन्दाचार्य ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. उस याचिका की वजह से ही साल 2013 में अदालत ने कई आदेश पारित किये थे.

भारत में पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट के तहत सोशल मीडिया अकाउंट, भारत सरकार का आधिकारिक संवाद केन्द्र है. ऐसे में, सोशल मीडिया के पर मौजूद लोगों के अकाउंट का वेरिफिकेशन हो. साथ ही, इसके लिए शिकायत अधिकारी की नियुक्ति हो तो काफी हद तक इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है.

वहीं दूसरी ओर मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि री-ट्वीट के लिए भी कानूनी जवाबदेही तय होनी चाहिए.

….और इस तरह इनसे निपटा जा सकता है!

वैसे तो क्या स्त्री क्या पुरुष. हर कोई सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार हुआ है. लेकिन, इस मामले में महिलाओं को ज्यादा मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है.

अमेरिका की एक रिसर्च के अनुसार, क़रीब 40 फ़ीसद अमेरिकी वयस्क नागरिक ऑनलाइन ट्रोलिंग के शिकार हुए हैं. जिसमे उनके साथ गाली-गलौज, बदसलूकी का व्यवहार किया गया.

इन आंकड़ों के मुताबिक़ इसमें महिलाओं की संख्या बहुत ज़्यादा है जिसमें उन्हें लोग बलात्कार जैसी घृणित धमकियां देने से भी नहीं कतराते. ऐसे में, इन बेमतलब की ट्रोलिंग से बचा जा सकता है.

इससे बचने का सबसे बेहतर उपाय है कि इनकी बातों पर ध्यान ही नहीं देना.

दरअसल, इनका मकसद ही यही होता है कि वे आपको गुस्सा और असहज महसूस कराए. जिसके बदले में आप कुछ कहें और वो फिर अपनी बेमतलब की बातों से आपको परेशान करें.

ऐसे में, इन्हें अनदेखा करना आपकी सबसे अच्छी रणनीति है क्योंकि जब उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी, तो वे खुद ही दूर चले जाएंगे. ये बात एक रिसर्च में भी साबित हुई है.

इसमें प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, 60% लोगों ने ऑनलाइन उत्पीड़न को अनदेखा करने का विकल्प ही चुना.

इंटरनेट पर पहचान की भी बड़ी समस्या है. जिसमे लोग फेक अकाउंट बनाकर इन हरकतों को अंजाम देते हैं. अनामिता इंटरनेट की आधारशिला रही है, साथ ही यह एक स्वस्थ चर्चा पर भी जोर देता है.

किन्तु, अगर  इंटरनेट पर भी असली बातचीत और असली इंसानों के बीच होती है तो इसमें एक जवाबदेही और जिम्मेदारी भी बनती है. ऐसे में, फेक अकाउंट से बचना चाहिए और गुमनाम लोगों से इंटरेक्ट नहीं करना चाहिए.

Women Suffer More Online Harassment (Pic: engadget)

बिना मतलब के कमेंट करने से भी बचें!

आपने ये बात तो सुनी ही होगी कि भीड़ के पास दिमाग नहीं होता है बल्कि सिर्फ सिर होते हैं. लिहाज़ा, एक अकेला व्यक्ति तो स्मार्ट है, लेकिन भीड़ हमेशा बेवकूफ ही रहती है.

इसीलिए इन ट्रोल्स से बचने एक बेहतर उपाय ये है कि ज्यादा कमेंट्स करने से बचें.

खासकर ऐसे कमेंट्स, जिसमें वोटिंग या आपकी राय मांगी जाती है. इसके अलावा, अपनी एक अच्छी ऑनलाइन कम्युनिटी बनाए, जो आपस में भरोसा और अच्छे व्यवहार को दिखाए.

ऐसे में, अगर आप ट्रोलिंग का शिकार होते हैं तो आपकी कम्युनिटी भी आपके साथ खड़ी होती है. अंत में, हमेशा अपने ट्रोलर का जवाब हास्यास्पद तरीकों से दें. ऐसे में, कई बार वो खुद ही पीछे हट जाते हैं.

Ignorance Will Help You (Pic: winmagpro)

इन तरीकों से आप खुद को ट्रोल होने से काफी हद तक बचा सकते हैं.

Web Title: Easy Ways To Prevent From Online Trolling, Hindi Article

Feature Image Credit: fabcnews