आधुनिकता के इस दौर में हर देश खुद को मज़बूत बनाने की दौड़ में लगा हुआ है. बात जब दुनिया के सबसे पावरफुल देशों की होती है, तो उसमें अमेरिका देश का नाम जरुर लिया जाता है. अमेरिका हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है. तकनीक से लेकर युद्ध के मैदान तक हर जगह उसका डंका बजता है.

इसी कड़ी में बात जब युद्ध के मैदान की होती है, तो यूएस आर्मी के हथियारों को जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है. आखिर उसके हथियार ही तो हैं, जिनकी दम पर अमेरिका अपने दुश्मन देशों को मात देता आया है.

यूं तो अमेरिका के पास काफी आधुनिक हथियारों का ज़खीरा मौजूद है, किन्तु अमेरिका की एम-16 राइफल एक अलग ही अहमियत रखती है. इसे अमेरिकी सेना के सबसे घातक हथियारों में गिना जाता है.

तो आईए जानते हैं आखिर यह क्यों खास है-

यूगेन स्टोनर ने डिज़ाइन किया

एम-16 राइफल भले ही दुनियाभर में लोकप्रिय है, किन्तु कम लोग ही जानते होंगे कि यह राइफल अमेरिका के प्रसिद्ध डिज़ाइनर यूगेन स्टोनर की देन है. अमेरिकन फायरआर्म डिज़ाइनर यूगेन स्टोनर ने साल 1957 में इस राइफल का डिज़ाइन तैयार किया था.

यूगेन स्टोनर वहीं इंसान थे, जिन्होंने इससे सबसे पहले एआर15 राइफल का डिज़ाइन तैयार किया था, जोकि खासी लोकप्रिय हुई थी. कहते हैं कि उसी की सफ़लता से खुश होकर यूएस आर्मी के अधिकारियों ने उन्हें नई राइफल बनाने की बात कही थी.

फिर क्या था स्टोनर जुट गए नई राइफल बनाने में. कुछ समय बाद ही उन्होंने अमेरिका को एम-16 राइफल के रूप में ऐसा हथियार दिया, जिसका युद्ध में प्रयोगकर अमेरिका ने विश्वभर में तहलका मचा दिया.

साल 1997 में यूगेन स्टोनर की मौत हो गई, किन्तु उनका एम-16 का डिज़ाइन दुनियाभर में लोकप्रिय हो गया. माना जाता है कि इस राइफल के बलबूते अमेरिका ने कई महत्वपूर्ण मिशन में अपना परचम लहराया है. वर्तमान समय में अमेरिकी सेना एम-16 राइफल को अपने मुख्य हथियार के रूप में प्रयोग कर रही है.

Eugene Stoner (Pic: imgur)

वज़न में हल्की, निशाना है अचूक!

यूगेन स्टोनर ने एम-16 को इस तरह से डिज़ाइन किया था कि यह आसानी से युद्ध में इस्तेमाल की जा सके. यही कारण है कि सबसे घातक हथियार होने के बावजूद यह राइफल वज़न में काफी हल्की है.

एम-16 का वज़न महज़ 3.26 किलोग्राम है. वज़न में हल्की होने के कारण सेना के ख़तरनाक ऑपरेशन में इसको ले जाना काफी आसान रहता है. एम-16 राइफल के सहारे सेना के जवान तीन हज़ार मीटर से अधिक दूरी तक निशाना लगा सकते हैं.

असल में इस राइफल को बनाया ही इसलिए गया था कि इसकी मदद से अधिक दूरी तक निशाना लगाया जा सके. युद्ध के दौरान कई बार सैन्य जवान अपने दुश्मन को दूर से ही टारगेट करते हैं. ऐसे में एम-16 राइफल दूरी से दुश्मन को टारगेट करने में कारगार होती है.

कहते हैं कि टारगेट पर निशाना साधने के बाद एक बार एम-16 का ट्रिगर दबा दिया जाये तो दुश्मन का बच पाना नामुमकिन होता है. 30 राउंड मैग्ज़ीन वाली एम16 राइफल एक मिनट के भीतर 700 से 950 राउंड फायरिंग कर सकती है.

इससे आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि युद्ध के मैदान में जब अमेरिकी सैनिक एम-16 का ट्रिगर दबाते होंगे, तो सामने लाशों के ढेर लग जाते होंगे.

M16 Most Dangerous Rifle (Pic: warrior-lodge)

वियतनाम युद्ध से हुई प्रसिद्ध

एम-16 राइफल अपनी घातक श्रेणी के कारण वियतनाम युद्ध से ही मशहूर है. वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने इस घातक हथियार का इस्तेमाल कर हज़ारों दुश्मनों को मौत की नींद सुला दिया था.

दक्षिण वियतनाम के पास स्थित माई लाई नरसंहार को कौन भूल सकता है. जहां वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों ने खून की होली खेली थी.

एम-16 राइफल हाथ में आने के बाद अमेरिकी सेना ने वियतनाम की धरती पर, जो खून की इबारत लिखी थी, उसके ज़ख्म कई साल गुज़रने के बाद भी आज ताज़ा हैं.

अमेरिकी सेना ने वियतनाम युद्ध में एम-16 राइफल का प्रयोग करते हुये वहां लाशों के ढेर लगा दिए थे. वियतनाम में हुए कत्लेआम के बाद एम-16 की घातकता से दुनिया के लोग पहली बार वाकिफ़ हुये थे.

यही कारण था कि इस राइफल को ‘वियतनाम गन’ के नाम से भी जाना जाता है.

अमेरिकी सेना की 11वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की चार्ली बटालियन को सेना के उच्च अधिकारियों से संदेश मिला कि वियतनाम के गुरिल्ला लड़ाकों का कब्ज़ा वियतनाम के एक क्वांग नगाई गांव पर है.

अमेरिकी सेना ने अपने सैन्य जवानों को गुरिल्ला लड़ाकों को मारने के आदेश दे दिया. आदेश पाकर अमेरिकी सेना ने गांव में घुसपैठ करना शुरु कर दी और गांव को चारों ओर से घेर लिया. गांव में सर्च ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना को गुरिल्ला लड़ाके नहीं मिले, किन्तु गांव में रहने वाले निहत्थे मजदूर लोग औरतें और बच्चे मिले.

जिनपर अमेरिकी सेना ने एम-16 की मदद से गोलियां दागनी शुरु कर दी और सभी लोगों को मौत के घाट उतार दिया. वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना की बंदूकों से काफी संख्या में लोगों की जान गई थीं.

M16 Most Dangerous Rifle (Pic: powerpolitic)

स्नाइपर के लिए भी मानी जाती है ख़ास!

एम-16 राइफल स्नाइपर्स के लिए भी काफी मददगार हथियार है. ऊंची पहाड़ियों पर दूर से लगाने की बात हो या बर्फ की सफ़ेद चादर में छुपकर दुश्मन को ढेर करने का मिशन. अमेरिकन स्नाइपर्स की एम-16 राइफल पहली पसंद है.

इस राइफल की मदद से स्नाइपर्स अधिक दूरी तक बड़ी आसानी से निशाना लगा सकते हैं. यूं तो अमेरिकी सैनिक कई घातक राइफल का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें एम-16 राइफल भी एक है. जब से एम-16 राइफल वजूद में आई हैं, तब से इसको और बेहतर बनाने के लिए इसके डिज़ाइन में परिवर्तन किया जाता रहता है.

यही कारण है कि एम-16 कई तरह के रूप में मौजूद है. जिसमें एम16ए1, एम16ए2 और एम16ए3 मौजूद हैं. अमेरिका के सबसे सफल स्नाइपर्स क्रिस काइल के नाम से कौन परिचित नहीं है.

क्रिस काइल अपने ढाई सौ से अधिक सफल निशाने के लिए जाने जाते थे. इराक में तैनाती के दौरान उन्होंने अपने कई दुश्मनों पर सफल निशाने लगाए थे. जानकर हैरानी होगी कि क्रिस काइल के पसंदीदा हथियारों की फेहरिस्त में एम-16 का नाम भी है. इराक में तैनाती के दौरान इस अमेरिकन स्नाइपर ने एम-16 का इस्तेमाल किया था.

कई सैन्य मिशन में हो चुकी है इस्तेमाल

एम-16 राइफल का इस्तेमाल अमेरिकी सेना कई महत्वपूर्ण मिशन में कर चुकी है. वर्तमान समय में भी अमेरिकी फौज इस राइफल का इस्तेमाल कर रही है.

सोमालियन युद्ध में अमेरिकी सेना ने इस राइफल की मदद से सोमालिया के कई लड़ाकों पर अंकुश लगाने में सफलता हासिल की थी. इसके बाद अफगानिस्तान युद्ध और इराक युद्ध में भी अमेरिकी सेना ने इस राइफल का इस्तेमाल करते हुये कई अहम मिशन पूरे किए थे.

कुल मिलाकर अमेरिकी सेना, जब भी दूसरे देशों में उतरती है तो उसके सैनिकों के हाथ में एम-16 राइफल ज़रूर होती है. इतना ही नहीं अमेरिका के सबसे घातक कमांडो में शुमार सील कमांडो के सैनिक भी दुश्मन को मौत की नींद सुलाने के लिए इस घातक हथियार का प्रयोग करते हैं.

वियतनाम युद्ध में नौंवी इन्फैन्ट्री डिवीजन में तैनात एडेलबर्ट वाल्ड्रॉन ने एम-16 राइफल का प्रयोग कर 109 लोगों को मौत के घाट उतारा था.

M16 Most Dangerous Rifle (Pic: toptentrends)

एम-16 राइफल अमेरिकी सेना का सबसे घातक हथियार बन चुका है. अमेरिका इस राइफल को और घातक बनाने के लिये शोध करता रहता है.

यह भी सच है कि बिना घातक हथियारों के युद्ध में लड़ाईयां नहीं जीती जा सकती, तभी युद्ध में आधुनिक हथियारों का प्रचलन बना हुआ है.

क्यों सही कहा न?

Web Title: M16 Most Dangerous Rifle, Hindi Article

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