भारत में बैंकों का राष्ट्रीयकरण एक बड़ा बदलाव था और इंदिरा गाँधी के काल का यह समय बेशक क्रांतिकारी माना जा सकता है. इससे पहले आम जनमानस सीधे तौर पर बैंकों से नहीं जुड़ा था और उन पर साहूकारी का मायाजाल चढ़ा हुआ था. इसके बाद क्रमवार ढंग से लोगों के जीवन में बदलाव आता गया, जो अब पूरी तरह टेक्नोलॉजी के हवाले हो चुका है. आज बैंकिंग का मतलब पूरी तरह बदल गया है और अधिकांश लोगों के लिए यह सिर्फ पैसे जमा करने, निकालने भर की एक संस्था नहीं रह गयी है.

2015 में मोदी सरकार द्वारा जनधन योजना लाई गयी, जिसमें तकरीबन 25 करोड़ नए खाते खुले. तमाम किन्तु-परन्तु के बावजूद यह एक बड़ी क्रांति सरीखा था, क्योंकि इससे बहुत से वैसे लोग भी जुड़े जो अब बैंकिंग से दूर थे. अब बैंकिंग के बदलावों और और प्रभावों पर एक नज़र डालना सामयिक रहेगा…

नोटबंदी के बाद

भारत की सवा सौ करोड़ आबादी को लाइनों में खड़ा करने वाले इस फैसले की कई तरह से व्याख्या की जा सकती है. कोई इसे विनाशकारी बता सकता है तो कोई काले धन पर लगाम लगाने वाला. कोई इसे नौकरियाँ कम करने वाला बता रहा है तो कोई आर्थिक वृद्धि की रफ़्तार पर ब्रेक लगाने वाला. वैसे, नौकरियां घटने और आर्थिक वृद्धि की रफ़्तार कम होने सम्बन्धी बातों में एक हद तक सच्चाई भी है. हालाँकि, इस बात से शायद ही कोई इंकार करे कि नोटबंदी के बाद बैंकिंग-क्षेत्र में आमूल चूल बदलाव देखने को मिले हैं. टेक्नोलॉजी ने जबरदस्त ढंग से दस्तक दी है तो और भी कई नियम बदले हैं.

भीम ऐप

Modern Banking and Technology, (Pic: indianceo)

इसका एंड्राइड वर्जन 10 मिलियन से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, जो निश्चित रूप से एक नए ऐप के लिए एक बड़ी संख्या है. 3 एमबी से भी कम इस ऐप को हिंदी, अंग्रेजी के अतिरिक्त भारत सरकार इसे तकरीबन 11 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करा चुकी है, जिससे इसकी पहुँच बेहद व्यापक होने वाली है. लगभग सभी बड़े बैंक इससे जुड़े हुए हैं और सुरक्षित यूपीआई यानी यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस से ट्रांजैक्शन की सुविधा उपलब्ध कराते हैं. इसमें मोबाइल नंबर के सहारे आसानी से पैसा भेजा जा सकता है. इतना ही नहीं, अगर आप भीम के जरिए पैसे मंगवाना चाहते हैं तो इसका तरीका भी बेहद आसान है. जिस व्यक्ति से आप पैसे मंगवाना चाहते हैं उसे आप रिक्वेस्ट भेजेंगे और अगर वह अपना पासवर्ड डालकर उसे ओके कर देगा तो आपके अकाउंट में तुरंत पैसे आ जाएंगे. सरकार इसे प्रमोट कर रही है और आने वाले दिनों में बैंकिंग में यह ऐप बड़ा बदलाव ला सकता है.

मोबाइल वॉलेट्स

कहना गलत न होगा कि नोटबंदी के दौरान इन वालेट्स ने जबरदस्त ढंग से लोगों को सहूलियत दी, अन्यथा हालात नियंत्रण से बाहर हो सकते थे. पेटीएम, एसबीआई बडी, मोबिक्विक, पेटीएम, ऑक्सीजन, एमरुपी, साइट्रस और फ़्रीचार्ज जैसी तमाम कंपनियां और वालेट्स ने कैश पर निर्भरता को कम किया और इनके इस्तेमाल में आया उछाल भी असाधारण था. बाद में रिजर्व बैंक से पेटीएम और एयरटेल ने बाकायदा लायसेंस लेकर बैंकिंग क्षेत्र में एंट्री ले ली है. जाहिर है, अब आपकी बैंकिंग का एक्सपीरियंस और भी बेहतर हो सकता है.

पेटीएम का पेमेंट्स बैंक

डिजिटल पेमेंट्स कंपनी पेटीएम अपना पेमेंट्स बैंक लॉन्‍च कर चुकी है. कस्‍टमर्स को डिपॉजिट पर 4 फीसदी ब्‍याज के साथ कैशबैक और ऐसी ही तमाम सहूलियतों के साथ यह व्यवस्था पारम्परिक बैंकिंग को निश्चित ही चुनौती दे सकती है. इसका टारगेट भी कम महत्वाकांक्षी नहीं है, बल्कि 2020 तक 50 करोड़ यूजर्स तक पहुँचने का दम भर रही है यह कंपनी. हाल फिलहाल इसके पास 20 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूजर हैं. आप नोटबंदी के दौर को याद करें. साथ ही पेटीएम की उस आक्रामक रणनीति को भी याद करें, जब उसने तमाम अखबारों के फ्रंट पेज पर प्रधानमंत्री की फोटो लगाकर आक्रामक विज्ञापन किया और करोड़ों यूजर्स तक पहुंची भी. हालाँकि, बाद में उसके यूजर और ट्रांजैक्शन कम जरूर हुए, किन्तु इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता. वैसे भी चीन का बड़ा अलीबाबा ग्रुप और जापानी सॉफ्टबैंक इसके इन्वेस्टर्स में से हैं.

इसी से मिलता जुलता एयरटेल पेमेंट बैंक भी है तो दूसरी कई कंपनियां शुरुआत करने की प्रक्रिया में हैं.

Modern Banking and Technology (Pic: economictimes)

इनटच बैंकिंग

अब बैंकों का सारा काम ऑटोमेटेड हो सकता है और ऐसा होगा तकनीक से जुड़ी उन मशीनो की सहायता से, जिसे भारतीय स्टेट बैंक ने ‘इन टच बैंकिंग‘ (In Touch Banking) नाम दिया है. गौर करने वाली बात यह भी है कि भारतीय स्टेट बैंक की मानव रहित बैंक की 70 शाखाएं बखूबी काम भी कर रही हैं. निश्चित रूप से इससे बैंक में लगने वाली भीड़ कम हो सकती है. बताया जा रहा है कि यह मशीन खाता खोलने, पासबुक अपडेट, पैसा निकालने या जमा करने, एटीएम कार्ड मुहैया करने से लेकर लोन के लिए आवेदन करने तक के सभी काम चुटकियों में पूरा कर देगी. दिलचस्प बात यह भी है कि ऐसे में बैंक रविवार सहित अन्य छुट्टियों को भी खुले रहेंगे. हालाँकि, तकनीक का सही इम्प्लीमेंटेशन और उसकी अपडेशन भी उतना ही आवश्यक है, अन्यथा इंटरनेट के युग में हैकर्स के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है.

बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी

अब ग्राहकों को बिना अपना अकाउंट नंबर बदले एक बैंक से दूसरे बैंक में खाता ट्रांसफर करने की सुविधा मिल सकती है. ठीक मोबाइल नम्बर पोर्टेबिलिटी की तरह. वैसे बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी की काफी समय से बात चल रही है और अगर ऐसा होता है तो ग्राहकों को कई बैंक अकाउंट खोलने से निजात मिल सकती है. हालाँकि, यह प्रक्रिया अभी शुरूआती चरण में है. अब जबकि तमाम प्राइवेट बैंक मार्किट में आ रहे हैं तो यह सुविधा महत्वपूर्ण हो सकती है, इस बात में दो राय नहीं.

कैश लेन देन पर लगाम

सरकार इस बात के प्रति सजग दिख रही है और इसका प्रमाण यही है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट लोगों को दो लाख रुपये से अधिक का नकद लेनदेन करने के प्रति आगाह कर रहा है. इसके लिए विभाग की ओर से बाकायदा [email protected] नामक ईमेल जारी हुआ है, जिस पर कोई भी व्यक्ति अधिक नकदी लेन देन की सूचना दे सकता है. सरकार ने वित्त अधिनियम 2017 के तहत एक अप्रैल 2017 से दो लाख रुपये से अधिक के नकद लेनदेन पर रोक लगा दी है. बताया जा रहा है कि धारा 269 एसटी का उल्लंघन करने पर नकद राशि प्राप्त करने वाले पर इतनी ही राशि के बराबर जुर्माना लगेगा. मतलब कैश कारोबार करने वालों के लिए सब इतना आसान नहीं रहने वाला है. हालाँकि, भारतीय अर्थव्यवस्था को साफ़ सुथरी बनाने की कोशिश अच्छी है, किन्तु अब तक दूसरे ढंग से चलने वाला समाज कितनी जल्दी बदलता है, यह अवश्य देखने वाली बात होगी.

Modern Banking and Technology (Pic: zeenews)

बैंकिंग के सन्दर्भ में कुछ और बातें हैं विचारणीय

इस बात पर वृहद चर्चा हो सकती है कि आज़ादी के 70 सालों बाद भी देश का आम आदमी बैंकिंग प्रक्रियाओं से उस ढंग से नहीं जुड़ पाया है, जैसे उसे जुड़ा होना चाहिए. अभी करोड़ों लोग ऐसे हैं जो बैंकिंग का मतलब सिर्फ पैसे भेजना और पाना ही समझते हैं. हालाँकि, बैंकिंग की मूल अवधारणा साहूकारी से मुक्ति है. आज भी तमाम लोगों को शिक्षा, शादी, व्यवसाय या किसी अन्य कठिनाई के समय बैंक की बजाय साहूकार ही नज़र आते हैं. गाँव तो गाँव, शहरों में भी एक पर्सेंट, दो पर्सेंट या तीन पर्सेंट पर ‘आधुनिक साहूकारी’ का धंधा खूब फल फूल रहा है तो इसे बैंकिंग सिस्टम की सफलता कैसे माना जाए?

आसान लोन सिस्टम

पिछले दिनों तत्कालीन रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने भारतीय बैंकों के सन्दर्भ में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि, “जब बैंको को ब्याज दर बढ़ाना होता है तो वो पॉलिसी रेट की बात करते हैं. लेकिन जब रिज़र्व बैंक अपना रेट कम करता है तो वो इसे कम क्यों नहीं करते.” ऐसे में तमाम अर्थशास्त्री सीधा मानते हैं कि बैंक अपनी ब्याज दरों में जितनी जल्दी कटौती करेंगे, अर्थव्यवस्था के बेहतर होने की सम्भावना भी उतनी ही बढ़ जाती है. लेकिन भारतीय परिदृश्य बैंको द्वारा ऊँची ब्याज दर रखी जा रही है और इससे अर्थव्यवस्था की बेहतरी की संभावनाएं कुछ हद तक ही सही क्षीण होती हैं. एक और बात ध्यान देने योग्य है कि आम आदमी बैंकों से क़र्ज़ लेने से डरता है, क्योंकि इसमें काफी उलझाव हैं. जाहिर तौर पर इसे सरल किये जाने की आवश्यकता है. इसके उलट कॉर्पोरेट्स के लिए तमाम बैंक ढील देते हैं और कई बार तो नियमों को ताक पर रखने की हद तक. बाद में यही मामला एनपीए तक पहुँचता है और बैंकों को बड़ी चपत लगती है. हाल ही में विजय माल्या का सन्दर्भ इस बाबत बेहतर ढंग से दिया जा सकता है.

सजगता

दिनों दिन टेक्नोलॉजी का प्रसार बढ़ता जा रहा है और बैंकिंग जैसे क्षेत्र तो इसके ऊपर पूरी तरह डिपेंड से हो गए हैं. ऐसे में आवश्यकता सावधानी की भी है, क्योंकि जिस तेजी से टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, उसी तेजी से बढ़ रहे हैं अपराध भी. तो आइये देखते हैं, इस मानक पर हमें किन महत्वपूर्ण बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए:

  • मोबाइल बैंकिंग में ऑफिशियल एप्स ही इस्तेमाल करें, तो बैंकिंग के लिए पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल कतई न करें. बैंकिंग से जुड़ी इंफोर्मेशन जैसे यूजरनेम, पासवर्ड, ट्रांजैक्शन पासवर्ड इत्यादि मोबाइल में कदापि सेव न करें. फोन को पासवर्ड और बेहतरीन मोबाइल सिक्युरिटी एप्स से जोड़ें रखें.
  • फिशिंग अटैक्स, आइडेंटिटी थेफ़्ट, की-लॉगर्स इत्यादि आपराधिक गतिविधियों के प्रति सजग रहें. बैंकिंग के लिए कभी भी लॉगिन-लिंक्स पर क्लिक करके न जाएं, बल्कि यूआरएल, यूजरनेम, पासवर्ड इत्यादि टाइप करें.
  • अपने बैंक अकाउंट में अंतिम लॉगिन डिटेल चेक करते रहें. अपने अकाउंट के बैलेंस पर आप बारीक नजर रखें, मतलब पासबुक अपडेट रहे, ताकि किसी संदिग्ध गतिविधि को आप तुरंत पकड़ सकें.
  • वैसे तो पब्लिक कंप्यूटर पर बैंकिंग करनी ही नहीं चाहिए, किन्तु बेहद जरूरी होने प्राइवेट ब्राउज़िंग / इन्कॉग्नीटो विंडो में लॉगिन करें.
  • ऑनलाइन शॉपिंग में क्रेडिट-कार्ड का इस्तेमाल ठीक रहता है क्योंकि फ्रॉड होने पर आप बैंक को सीधा रिपोर्ट कर सकते हैं, जबकि डेबिट-कार्ड में रियल-मनी तुरंत कट जाती है.
  • इसके अतिरिक्त विभिन्न एंटीवायरस सेफ बैंकिंग के लिए आपको वर्चुअल विंडो प्रोवाइड करते हैं.
  • यदि आपके पास कई बैंकों के ऑनलाइन पासवर्ड्स हैं तो उन सभी के पासवर्ड अलग रखने की कोशिश करें.

Modern Banking and Technology (Pic: vcb)

निश्चित रूप से बैंकिंग आज के युग में इंसान के जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुका है और इसलिए भी इसके बारे में हर एक को जानना समझना उतना ही आवश्यक है, जितना खाना खाना या पानी पीना. आप सजग रहें और बैंकिंग के दिन प्रतिदिन बदलते नियमों से तालमेल बिठाएं, तो आपका अर्थतंत्र अवश्य ही दुरुस्त रहेगा. अपना विचार कमेंट सेक्शन में अवश्य बताएं.

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