कभी एक समय ऐसा था कि जब एक ईमेल चेक करने के लिए भी किसी व्यक्ति को कंप्यूटर की जरूरत पड़ती थी. हालांकि आज तो फोन के जरिए ही यह काम बड़े आराम से हो जाता है. ईमेल और इसके जैसे कई फीचर पहले फोन में नहीं हुआ करते थे मगर ब्लैकबेरी ने मार्केट में आते ही सब बदल दिया.

कॉर्पोरेट वर्ल्ड के लोगों के लिए तो, ब्लैकबेरी एक ऐसा फोन था जिसने उनकी जिंदगी ही आसान बना दी थी. इसके साथ वह कहीं से भी काम कर सकते थे. वक्त के साथ ब्लैकबेरी ने फोन मार्केट में इतने बदलाव लाए कि कभी यह शिखर पर था. हालांकि आज ब्लैकबेरी इतना गिर गया है कि एक अच्छे कमबैक की दरकार उसे है.

तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि स्मार्टफोन की इस दुनिया में आज ब्लैकबेरी को कोई पूछता ही नहीं है? क्या थीं वो खामियां जिन्होंने इस जाइंट फोन मेकर को घुटनों पर ला दिया? चलिए जानते हैं–

ईमेल फंक्शन ने मोबाइल जगत में क्रांति ला दी!

1990 से 2000 के बीच कई बड़ी टेक कंपनियां वायरलेस फोन बनाने की कोशिश में लगी हुई थी. विदेशों में इंटरनेट धीरे-धीरे बढ़ रहा था. लोग कंप्यूटर और ईमेल का इस्तेमाल पहले से ज्यादा करने लगे थे. हालांकि उस समय इंटरनेट बहुत महंगा था और फोन के जरिए उसे इस्तेमाल करना जेब पर भारी पड़ता था. इसलिए अधिकतर फोन मेकर कॉलिंग वाले फोन बनाने में लगे हुए थे.

वहीं दूसरी ओर ब्लैकबेरी मार्केट को इंटरनेट से जोड़ना चाहता था. इसलिए उन्होंने एक ऐसा डिवाइस बनाने की सोची, जिसके जरिए डेटा छोटे-छोटे टुकड़ों में आगे भेजा जा सके. ब्लैकबेरी पूरे मार्केट से विपरीत सोच रहा था मगर यही सोच आगे चलकर उनकी सफलता की सीढ़ी बनी.

कुछ सालों की मेहनत के बाद साल 2000 में आखिरकार ब्लैकबेरी ने अपना पहला फोन RIM 957 लांच कर दिया. किसी को उम्मीद नहीं थी मगर इस फोन ने आते ही क्रांति फैला दी. छोटी सी स्क्रीन, ईमेल, चंद फंक्शन और क्वर्टी कीपैड वाले इस फोन ने सबको हैरान कर दिया.

इस फोन की एक ही खूबी थी कि इसके जरिए लोग ईमेल सेंड और रिसीव कर सकते थे. ईमेल से जुड़कर कंपनी ने खुद को मार्केट से पूरी तरह से अलग कर लिया था. यही चीज बनी उनकी सफलता की पहली सीढ़ी.

RIM 957 First Blackberry Phone (Pic: berryreporter)

भारत को बनाया अपना टारगेट

अपने पहले फोन की सक्सेस के बाद ब्लैकबेरी फोन के फंक्शन पर और भी ज्यादा ध्यान देने लगा. उन्हें समझ आ गया था कि ग्राहकों को अपनी ओर लाना है, तो नए फीचर लाना जरूरी है. इसके बाद ब्लैकबेरी ने वह दौर शुरू किया जिसने फोन को स्मार्टफोन बना दिया.

हर नए मॉडल के साथ ब्लैकबेरी नए फंक्शन देने लगा. इसकी शुरुआत उन्होंने अपने ब्लैकबेरी 5810 से की, जिसमें उन्होंने कॉलिंग फीचर लोगों को दिया. इसके बाद ग्राहक न सिर्फ ईमेल बल्कि कॉलिंग का मजा भी इस फोन में ले सकते थे. फोन के साथ एक हेडसेट भी भी मौजूद था जिसके जरिए कॉल पर बात की जाती थी. 

जमाना बदल रहा था और लोगों की मांग भी. इसलिए ब्लैकबेरी को फिर कुछ नया लाना था. इसके बाद उन्होंने अपना 7230 सेट निकाला, जो उनका पहला कलर फोन था. धीरे-धीरे भारत में भी फोन मार्केट आगे बढ़ रहा था. इंडिया में नोकिया ने अपना नाम जमा रखा था. 

हालांकि ब्लैकबेरी भी इंडिया में अपने कदम रखना चाहता था. इसलिए उन्होंने यहाँ पर टेलिकॉम कंपनी एयरटेल के साथ एक डील की. ब्लैकबेरी ने एयरटेल के साथ मिलकर अपने कुछ नए मॉडल इंडिया में लांच किए.

इंडिया में आते ही बिजनेस क्लास लोगों के बीच ब्लैकबेरी बहुत ही जल्दी मशहूर हो गया. इन फोन के दाम आम फोन से कहीं ज्यादा थे मगर इसको चाहने वालों ने बेझिझक उस दाम को देना पसंद किया. यहाँ से शुरू हुआ ब्लैकबेरी का वो सफर, जो उसे शिखर पर ले गया. 

Blackberry 7230 Was Their First Color Screen Phone (Pic: youtube)

BBM से मिली नई पहचान 

शुरुआती समय में ईमेल और इंटरनेट कनेक्शन जैसे फीचर ने ब्लैकबेरी को लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध कर दिया था. हालांकि अब बारी थी मार्केट में कुछ नया लाने की. इसलिए इंडिया में आते ही 2004-2005 के बीच ब्लैकबेरी ने BBM नाम की अपनी इंस्टेंट मैसेजिंग सर्विस शुरू कर दी. 

बस फिर क्या था, BBM ने कुछ ही वक्त में बूढों से लेकर युवा तक हर किसी को अपना दीवाना बना दिया. BBM फास्ट था, सिक्योर था और आम मैसेजिंग से ये काफी बढ़िया था. अपनी इन खूबियों के कारण ही यह इतना सफल हो पाया. 

इसके आने से पहले ब्लैकबेरी सिर्फ विदेशों में प्रसिद्ध था मगर इसके बाद ब्लैकबेरी भारत में भी अपने कदम जमा पाया. थोड़ा ही वक्त लगा ब्लैकबेरी को इंडियन फोन मार्केट में नोकिया को टक्कर देने में. हालांकि दोनों ही कंपनियों के अपने अलग-अलग टारगेट थे. 

जहाँ नोकिया आम लोगों के लिए फोन ला रहा था. वहीं दूसरी ओर ब्लैकबेरी सिर्फ कॉर्पोरेट के बड़े और अमीर लोगों के लिए फोन बना रहा था. कहते हैं कि एक समय वह भी था, जब हाथ में ब्लैकबेरी होना एक स्टेटस सिंबल माना जाता था. 

हालांकि थोड़े समय बाद ब्लैकबेरी ने भी सस्ते फोन मार्केट में अपनी जगह बनानी चाही. इसलिए उन्होंने 2011 में अपने 'कर्व' सीरीज के फोन मार्केट में उतार दिए. इनके दाम बाकी ब्लैकबेरी फोन से काफी कम कर दिए गए थे. इन्हें 10 हजार रुपए में बेचा गया ताकि स्टूडेंट्स भी इसे खरीद सकें.

कर्व ने आते ही वही किया जिसकी ब्लैकबेरी को उम्मीद थी. स्टूडेंट्स को ये सस्ता फोन बहुत पसंद आया. स्टूडेंट BBM ज्यादा से ज्यादा चलाएं इसलिए कंपनी ने अपने BBM प्लान भी सस्ते कर दिए. उन्होंने BBM मंथली प्लान को करीब 129 रुपए का कर दिया. 

देखते ही देखते BBM की मदद से ब्लैकबेरी इंडियन मार्केट में छा गया. 

BBM Became The Game Changer For Blackberry (Pic: crackberry)

जमाने के साथ नहीं चल पाना बना खात्मे की वजह

ब्लैकबेरी एक समय पर इतनी सफलता पा चुका था कि हर साल उसके लाखों सेट बेचे जाने लगे थे. हालांकि उनके सुनहरे दिनों का अंत होने वाला था. सालों से ब्लैकबेरी एक ही डिजाइन पर काम कर रहा था, जो कहीं न कहीं लोगों के लिए पुराना हो चुका था. 

फोन मार्केट एक बार फिर से बदलने की कगार पर था मगर इस बार ब्लैकबेरी को इसकी खबर नहीं लगी. 2007 वह साल था, जब ब्लैकबेरी का पतन होना शुरू हो गया था. ऐसा इसलिए क्योंकि मार्केट में टच स्क्रीन वाला आकर्षक 'आईफोन' जो आ चुका था. 

आईफोन ने आते ही मार्केट को कुछ इस तरह बदला कि ब्लैकबेरी का साम्राज्य एक दम से हिल गया. लोग तुरंत ही ब्लैकबेरी छोड़ आईफोन की ओर जाने लगे. टच स्क्रीन आने के बाद से लोगों को कीपैड वाले ब्लैकबेरी आउटडेटेड से लगने लगे थे. 

हालांकि फिर भी कंपनी ने अपने पुराने डिजाइन को ही चलाते रहना सही समझा. वहीं दूसरी ओर आईफोन दिन ब दिन फोन मार्केट में अपनी पहुँच बढ़ाता जा रहा था. आईफोन के पास अच्छे लुक्स और नए फीचर थे. हर उम्र के व्यक्ति को उसने अपना दीवाना बना दिया. 

कुछ समय बाद ब्लैकबेरी न सिर्फ लुक्स बल्कि फीचर के मामले में भी पिछड़ने लगा. उनके पास कोई अच्छा एप स्टोर भी नहीं था, वहीं एप्पल के पास बहुत बढ़िया एप स्टोर था. उनके ऑपरेटिंग सिस्टम में भी ज्यादा अच्छे फीचर नहीं थे. जब तक कंपनी इस बात को समझ पाती तब तक तो फोन मार्केट में एंड्राइड ने भी अपने पैर पसार दिए. 

आईफोन से अलग ये नए एंड्राइड ऑपरेटिंग सिस्टम वाले स्मार्टफोन काफी सस्ते थे. जो लोग महंगे आईफोन नहीं ले पा रहे थे, उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प था. इसके बाद तो स्मार्टफोन मार्केट पूरी तरह से टच स्क्रीन पर काम करने लगा. 

मार्केट पूरी तरह से बदल चुका था. ब्लैकबेरी को ये बात समझने में थोड़ा समय लग गया. जब तक वह अपना पहला टच स्क्रीन फोन लाए,  तब तक तो मार्केट से उनका नाम हट चुका था. लोग भूल चुके थे कि ब्लैकबेरी भी कोई कंपनी थी. 

इसके बाद थोड़े ही समय में फेसबुक और वाट्सएप ने BBM का भी खात्मा कर दिया. देखते ही देखते ब्लैकबेरी का सालों का बनाया हुआ साम्राज्य गिरने लगा. हाल ये रहा कि कंपनी इससे उभर भी नहीं पाई. ब्लैकबेरी ने एंड्राइड के साथ मिलकर भी फोन बनाए मगर वह भी नहीं चले. 

पहले 2015 में ब्लैकबेरी ने ये एलान किया कि अब से वह स्मार्टफोन नहीं बनाएंगे. इसके बाद उन्होंने कंपनी के काफी शेयर दूसरे इन्वेस्टर्स को बेच दिए. आंकड़ों की माने, तो 2017 में ब्लैकबेरी केवल 2 लाख फोन ही बेच सका. 

इसके बाद शायद उन्हें भी समझ आ गया कि वो वाकई अब पुराने हो चुके हैं. इसके साथ ही 2017 में उन्होंने यह भी कह दिया कि 2019 तक उनका एप स्टोर भी बंद हो जाएगा. इसके साथ ही अब शायद ही ब्लैकबेरी कोई फोन बनाए. 

Blackberry Stopped Making Phones (Pic: macleans)

तो यह थी कहानी ब्लैकबेरी के फोन साम्राज्य के गिरने की. कभी फोन मार्केट पर राज करने वाले ब्लैकबेरी का यह हाल होगा किसी ने सोचा भी नहीं था. हालांकि वक्त के साथ नहीं चलने पर उन्हें यह ठोकर खानी पड़ी. शायद समय रहते अगर ब्लैकबेरी अपनी कमजोरी समझ जाता, तो वो आज ऐसी गुमनामी में नहीं होता. 

Feature Image: bgr