आगे निकलने की होड़ में हर देश सबसे ताकतवर बनना चाहता है. सभी इस कोशिश में लगे नजर आते हैं कि किसी भी तरह दुनिया पर उनका वर्चस्व स्थापित हो सके. नए-नए हथियारों की खोज इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. हो भी क्यों न, दुनिया में अपना दबदबा बनाने के लिए हथियारों का होना अहम हो जाता है. तो आइये आज विश्व के कुछ ऐसे हथियारों की चर्चा करते हैं, जिनके बारे में आपने पहले न कभी पढ़ा होगा न ही सुना होगा:

‘समलैंगिक बम’

पढ़ने में यह नाम आपको अजीब लग सकता है, लेकिन यह एक खास किस्म के बम का नाम है. इसे अमेरिका द्वारा बनाया जाना था. कुछ सालों पहले अमेरिका के रक्षा विभाग ने इसकी जानकारी दी थी. 1994 (Link in English) के आसपास टेक्सास में स्थित प्रयोगशाला में कार्यरत एक वैज्ञानिक ने इस अजीब तरह के बम को बनाने का प्रस्ताव दिया था. उन्होंने कहा था कि वह एक ऐसा बम तैयार करना चाहते हैं, जो गोलियां नहीं प्रेम बरसायेगा. यह बम अमेरिका के शत्रुओं से लड़ने की बजाय युद्ध के मैदान में उन्हें एक-दूसरे के लिए आकर्षित करेगा. इस बम को समलैंगिकता के फॉर्मूले पर बनाने की बात कही गई थी. वैज्ञानिक का दावा था कि इस बम के प्रयोग से दुश्मन प्यार में पागल हो जायेगा, जिसका सीधा फायदा अमेरिका को मिलेगा.

यह प्रस्ताव जितना हैरान कर देने वाला था, उतना ही हास्यपद था. इसके लिए मांगा गया बजट. इस समलैंगिकता बम को बनाने के लिए 7.5 मिलियन डालर की मांग की गई थी. बाद में कुछ कारणों से इस बम को तैयार नहीं किया गया और यह योजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई. इसी कड़ी में अमेरिकी रक्षा विभाग ने ‘स्टिंग मी’ और ‘मैं कौन’ जैसे कुछ अन्य बमों का मसौदा भी तैयार किया था. यह दोनों रासायनिक बम थे, जो दुश्मन के झुंड को खत्म करने में कारगार थे.

Top Weird Weapons (Pic: iamisatthedoors)

‘आवाज हथियार’

ऐसा कोई हथियार सच में है या बनाया जा रहा है. यह कहना कठिन होगा, लेकिन माना जाता है कि अमेरिका एक ऐसे हथियार की रुपरेखा तैयार कर चुका है, जो बिल्कुल अनोखा होगा. यह काम कैसे करेगा? इसके जवाब में बताया जाता है कि इसके प्रयोग से युद्ध भूमि में दुश्मन को एक अलग आवाज सुनाई देगी. दुश्मन को ऐसा लगेगा कि उससे कोई कुछ कह रहा है. ऐसी दशा में वह मानसिक रुप से भटकाव की स्थिति में आ जायेगा और अमेरिकी सेना इसका फायदा उठाएगी. कुल मिलाकर यह हथियार दुश्मन को भ्रमित करने के लिए तैयार किया जारहा है. इसमें माइक्रोवेव ऑडिट इफेक्ट (Link in English) जैसी तकनीक के प्रयोग का अनुमान है.

‘फ्लाइंग टैंक’

आपने जमीन पर चलने वाले टैंकों के बारे में तो खूब सुना होगा लेकिन, अगर आपसे कहा जाये कि आपने उड़ने वाले टैंक को देखा है? बिल्कुल किसी पक्षी की तरह, तो शायद आपका जवाब न होगा. बताते चलें कि विश्व युद्ध में कई देशों ने फ्लाइंग टैंक (Link in English) के बारे में गहन शोध किए थे. इस शोध का मुख्य बिंदु था, एक ऐसा टैंक बनाना, जो हवा में उठकर दुश्मन पर मार कर सके. इसके लिए विभिन्न प्रकार के मॉडल भी प्रस्तुत किए गए. इन्हीं में से एक था बेयन्स बॉट. इसका डिजाइन एक ब्रिटिश ने तैयार किया था. उन्होंने अपने डिजाइन में पंखों के आकार पर विशेष बल दिया था. उनका दिया गया प्रारुप बैट (चमगादड़ ) से मिलता जुलता था.

इस डिजाइन के आने के बाद उम्मीद की जाने लगी थी कि उड़ने वाले टैंक देखने को मिलेंगे. सब उत्साहित थे इसके लिए. जल्द ही यह टैंक बनकर तैयार हो गया तो इसके परीक्षण की जिम्मेदारी कुशल पायलट एपिक एरिक ब्राउन को दी गई. उन्होंने इसमें सवार होकर उड़ान भरी तो इसकी परफारमेंस बहुत ठीक थी. इसमें ज्यादा आवाज भी नहीं आ रही थी, पर कुछ दूरी जाने के बाद यह बेकाबू हो गया. बाद में भी इसका परीक्षण सफल नहीं रहा, इसलिए यह भी आते-आते रह गया.

Baynes Bat (Pic: photobucket.com)

‘दर्द तरंग और अचेत बंदूकें’

इराक युद्ध के शुरुआती दिनों में, अमेरिकी ने कुछ खास हथियारों को बनाने में अपना मोटा पैसा लगाया. अपनी योजना के तहत वह लोगों को बिना मारे उन्हें रोकना चाहता था. इसके लिए उसने एक तरफ ऐसी तंरग के निर्माण का प्लान तैयार कराया जो दर्दनाक तो हो, लेकिन किसी की जान न ले सके. वहीं दूसरी तरफ खास किस्म की बंदूकें बनाने का आदेश दिया, जिसके वार से दुश्मन को पलक झपकते ही बेहोश किया जा सके. इलेक्ट्रोशॉक हथियार (Link in English), गैर-घातक गोलियां, ग्रेनेड, फिसलन फोम और लेजर डोजलर्स इसके ही कुछ उदाहरण हैं.

‘सूरज बंदूक’

1945 (Link in English) के आसपास जर्मनी ने तकनीक विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक ऐसा हथियार तैयार करने की योजना बनाई, जिससे दुश्मन को सूरज की रोशनी से ही जलाने का प्लान था. इस हथियार को सूरज बंदूक के कहकर बुलाया गया. इसमें तकनीक का प्रयोग करके एक बड़े आकार के दर्पण को प्रयोग किया गया. इसमें सूरज की किरणों को इकट्ठा किया जाता था. माना जाता कि यह तरंगे इतनी ज्यादा गर्म होती थी कि दु्श्मन तुरंत झुलस सकता था.

हालांकि, इस प्लान को धरातल पर उतारना आसान नहीं था. इसके लिए एक मानव-निर्मित अंतरिक्ष स्टेशन चाहिए था, जिसमें कम से कम 30 फुट के छेद चाहिए थे. इसमें कई प्रकार के रसायनों को संग्रहित किया जाना था, जो सूरज से आने वाली किरणों के ताप को मेनटेन रख सके, अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते थे. इस प्लान पर खूब काम हुआ, लेकिन इसको मूल रुप नहीं दिया जा सका.

Sun Gun (Pic: io9.gizmodo.com)

तो यह थे कुछ अजीबो-गरीब हथियार जो अच्छा हुआ प्रचलन में नहीं आ सके. अन्यथा यह परमाणु हथियारों से भी ज्यादा खतरनाक हो सकते थे. वैसे यह तो महज कुछ एक नाम भर हैं, ऐसे कई सारे और हथियार हो सकते हैं, जिनको बनाने का मसौदा तैयार किया जा चुका होगा. मुमकिन है कि ऐसे कई हथियारों पर तकनीकी के महारथी काम कर रहे हों. कुल मिलाकर हम हथियारोंं के ऐसे ढ़ेर के बीच में हैं, जहां आग की एक चिंगारी किसी का भी नामो-निशां मिटा सकती है.

Web Title: Top Weird Weapons, Hindi Article

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