प्राकृतिक सुंदरता से भरे गुजरात की जितनी तारीफ की जाये, कम है. यह एक ऐसा राज्य है, जहां कदम-कदम पर एक से एक सुंदर स्थल देखने को मिलते हैं. कच्छ का रण और गिर अभयारण्य जैसी जगहें लोगों को गुजरात की तरफ आकर्षित करती हैं. अगर आप गर्मियों की छुट्टियां कही बाहर बिताने का मन बना रहे हैं, तो गुजरात एक बेहतर विकल्प हो सकता है. बस आपके पास यहां जाने के लिए एक सही प्लान होना चाहिए, ताकि आप अपनी छुट्टियों का आनंद ले सकें. इसलिए हम लेकर आये हैं आपके लिए एक नहीं बल्कि पूरे 30 दिनों का टूरिज्म प्लान:

पहला दिन: लक्ष्मी विलास पैलेस

वड़ोदरा के इस खूबसूरत महल का नजारा देखते ही बनता है. दुनिया भर से पर्यटक यहां आते हैं. वर्तमान समय में इस पैलेस के एक भाग में गायकवाड़ के वंशज रहते हैं. बाकी भाग पर्यटकों के लिए उपलब्ध हैं. कहा जाता है कि यह ब्रिटिश राजघराने के महल बकिंघम पैलेस से 3 से 4 गुना बड़ा है. इसका निर्माण 1890 में महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ ने करवाया था.

चूंकि, इस पैलेस को घूमने के लिए 3-4 घंटे बहुत होंगे, इसलिए आप इस पैलेस के पास मौजूद कमाटी बाग की तरफ अपना रुख कर सकते हैं. यह वड़ोदरा के सबसे प्रसिद्ध पार्कों में से एक है. इसके अंदर फ्लावर क्लाक और चिड़ियाघर का लुफ्त उठाया जा सकता है.

इसके बाद भी अगर समय बचता है तो आपको महाराजा फतेह सिंह संग्रहालय को भी देख लेना चाहिए, जो ज्यादा दूर नहीं हैं. यह कमाती बाग से बिलकुल सटा हुआ है. एक समय यह गायकवाड़ घराने का स्कूल हुआ करता था. इसमें आप देश के प्रसिद्ध चित्रकारों की पेंटिंग को निहार सकते हैं.

Kamati Bagh Vadodara, Gujarat (Pic: vadodara)

दूसरा दिन: पावागढ़ में माता के दर्शन

पंचमहल जिले में मौजूद पावागढ़ महाकाली का मंदिर गुजरात के प्रसिद्ध मंदिरो में से एक है. इस मंदिर में आपको अनोखी मिसाल देखने को मिलेगी. इसके एक ओर जहां काली माता का मंदिर है तो वही दूसरी ओर इसकी छत पर मुस्लिमों के अदानशाह पीर की दरगाह मौजूद है. इस मंदिर तक जाने के लिए आपको लगभग 250 सीढ़ियां चढ़नी होगी. हालांकि, यहां तक पहुंचने के लिए रोप वे का भी इंतजाम है. इस मंदिर के दर्शन में आपको लगभग 5 घंटे का समय लग सकता है.

ऐसे में अगर आप खुद को थका हुआ महसूस नहीं कर रहे हैं तो आपको पास मौजूद चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्विक उद्यान की सैर कर लेनी चाहिए. इसमें आप प्राचीन काल की जीवित धरोहर की झलक ले सकते हैं. इस तरह आप अपना पूरा दिन गुजार सकते हैं. 

तीसरा दिन: कांकरीया झील की सैर

यह झील अहमदाबाद की सबसे प्रसिद्ध और खूबसूरत झील कही जाती है. इस झील के बीच में एक महल और बगीचा है जिसे बाड़ी कहा जाता है. रात के अंधेरे में इस बाड़ी के रंगीन झरनों की रंग-बिरंगी रोशनी बहुत शानदार होती है. इस झील का निर्माण कुतुबद्दीन ने करवाया था. कहते हैं कि मुग़ल काल के दौरान यहां नूरजहां और जहांगीर भी घूमने आया करते थे. साथ ही पास मौजूद साबरमती आश्रम, केलिको वस्त्र संग्रहालय और सुंदर वन को देखना न भूलें, जो अलग-अलग खासियतों के लिए जाने जाते हैं. अब इतनी सैर के लिए एक दिन तो बनता ही है न.

Kankaria Lake, Ahmedabad (Pic: khazano)

चौथे दिन:अक्षरधाम मंदिर, गांधीनगर

अहमदाबाद की मौज मस्ती के बाद चौथे दिन आप गांधीनगर का अक्षरधाम मंदिर का दर्शन कर सकते हैं. यह अहमदाबाद से महज 26 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है. यह मंदिर दुनिया के खूबसूरत मंदिरो में से एक है. यह मंदिर गुलाबी पत्थरों से बना है, जिसमें भगवान स्‍वामीनारायण की मूर्ति हैं जो पूरी सोने से बनी है. मंदिर के हर खम्भे पर खूबसूरत नक्कासी की गई है. इस मंदिर में आप सारा समय बिना बोर हुए बिता सकते हैं.

पांचवे दिन: मेहसाणा का तोल झील

पांचवे दिन आप मेहसाणा जा सकते हैं. यहां आपको ‘तोल झील’ के सुन्दर नजारे देखने को मिल जायेंगे. यहां पर आप देशी-विदेशी पक्षियों को अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं. इस झील का निर्माण वड़ोदरा रियासत के महाराजाओं के द्वारा किया गया था. यहां घूमने में आपको कम से 5 घंटे का समय लग सकता है. इसलिए दिन के उपयोग के लिए आपको बड़नगर में मौजूद प्राचीन काल के अवशेष को देखना का मौका नहीं छोड़ना चाहिए. यह जगह प्राचीन इतिहास की अनगिनत यादें समेटे हुए है.

छठवां दिन: रानी की वाव

छठवें दिन आप पाटन की प्रसिद्ध रानी की वाव को देखने जा सकते हैं. इसका निर्माण रानी उदयमति ने अपने पति राजा भीम देव कि याद में किया था. बाव की दीवारों और स्तम्भों में राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि, आदि भगवान की मूर्तियां देखने को मिलती हैं. पाटन का बाजार पटोला साड़ियों के लिए जाना जाता है, इसलिए दिन भर घूमने के बाद लौटते समय यहां से परिवार की गृहणियों के लिए साड़ियां खरीद सकते हैं.

सातवां दिन: वाटसन संग्रहालय

सातवें दिन आप राजकोट का वाटसन संग्रहालय जा सकते हैं. यहां आपको जडेजा राजपूतों के कीमती वस्तुओं के साथ कई अन्य अमूल्य लेख, कलाकृतियां देखने को मिल जाएँगी. इसके बाद आप मन बदलने के लिए फन वर्ल्ड जा सकते हैं और वहां से रोटरी डॉल म्यूज़ियम, काबा गांधी नो डेलो होते हुए अपने होटल की ओर वापस लौट सकते हैं.

आठवां दिन: चामुंडा माता मंदिर

आठवें दिन आप चोटिला की पहाड़ियों पर माता के दर्शन कर सकते हैं. पहाड़ी पर बसा यह मंदिर गुजरात के प्रसिद्ध मंदिरो में से एक माना जाता है. यहां पर हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. इसके अलावा आप चोटिला कि सुन्दर पहाड़ियों का भी लुफ्त उठा सकते हैं. यहां दर्शन करने में आपका काफी समय लग सकता है. बचे हुए समय में…

आप हवा महल भी घूम सकते हो. इसका निर्माण झला शासकों ने किया था. इस महल में आपको वास्तुकला की कुशल कारीगरी के नमूने देखने को मिलेंगे. इस तरह से हम अपना पूरा दिन गुजार सकते हैं.

नौवां दिन: लाखोटा पैलेस

नौवें दिन आप जाम नगर का प्रसिद्ध लाखोटा पैलेस घूम सकते हैं. यहां पर आप प्राचीन काल के मिट्टी के बर्तन और व्हेल का कंकाल देख सकते हैं. इसका निर्माण राजा रणमलजी ने कराया था. आप प्रताप विलास पैलेस को भी देख सकते हैं. इस शाही पैलेस को राजा जाम सिंह ने बनवाया था. किले को देखने के बाद आप रणमल झील का आनंद ले सकते हैं. पक्षियों को देखने के लिए यह एक खूबसूरत स्थान है.

Pratap Vilas Palace, Jam Nagar, Gujarat (Pic: mapio)

दसवां दिन: गांधी जन्म भूमि

दसवें दिन आप पोर बन्दर के सबसे प्रसिद्ध स्थान कीर्ति मंदिर को देख सकते हैं. यह स्थान गांधी जी और उनकी पत्नी की स्मृति में बनाया गया था. यहां आप गांधी जी के बचपन को देख सकते हैं. आप दिन के सदुपयोग के लिए सुदामा मंदिर की ओर जा सकते हैं और फिर भी समय बच जाये तो ‘हुजूर पैलेस’ जरुर जाएं. हलांकि, इस पैलेस में पर्टयकों को अंदर नहीं जाने दिया जाता है, लेकिन बावजूद इसका बाहर से भी नजारा शानदार होता है.

ग्यारहवां दिन: गिरनार की पहाड़ियां

ग्यारहवें दिन आप जूनागढ़ में गिरनार की पहाड़ियों पर घूम सकते हैं. यहां से आपको बड़ी संख्या में मंदिर देखने को मिल जायेंगे. यह आपके लिए बड़ी रोमांचकारी यात्रा हो सकती है. यहां ट्रैकिंग का मजा ले सकते हैं. कब पूरा दिन निकल जायेगा आपको पता भी नहीं चलेगा.

बारहवां दिन: सक्कर बाग जूलोजिकल गार्डन

पहाड़ियों पर घूमने के बाद आप बारहवें दिन यहां के प्रसिद्ध गार्डन में सैर कर सकते हैं. यहां आप पक्षियों के अनेक किस्म के नमूने देख सकते हैं. कहा जाता है कि इस चिड़िया घर को जूनागढ़ के नवाबों ने बनवाया था. इसके अलावा आप महाबत मकबरा और दरबार हॉल संग्रहालय भी जा सकते हैं, ताकि पूरे दिन का सही उपयोग हो सके.

तेरहवां दिन: गिर राष्ट्रीय उद्यान की ओर

जूनागढ़ के बाद तेहरवें दिन आप ‘गिर राष्ट्रीय उद्यान‘ का मजा ले सकते हैं. करीब 1424 वर्ग किलोमीटर में फैले इस उद्यान का आकर्षण यहां के शेर हैं, जो आपको खुले में टहलते दिख जायेंगे. यह अपने करतब से किसी को भी चकित करने में माहिर माने जाते हैं. यह भारत का एक मात्र उद्यान है, जहां एशियाई शेर वास करते हैं. यहां घूमने के लिए आपको पार्क की ओर से गाड़ी मिल जायेगी. यह उद्यान इतना बड़ा है कि सारा दिन यहां बीत जायेगा.

चौदहवें दिन: भावनगर का तख्तेश्वर मंदिर

गिर के बाद हम चौदहवें दिन भावनगर का भ्रमण कर सकते हैं. कपास की खेती के साथ भावनगर में घूमने लायक ढे़र सारी जगहें हैं, जो आपकी यात्रा को यादगार बना सकती हैं. सबसे पहले आप तख्तेश्वर मंदिर में जाकर दर्शन करें. यह शहर से कुछ दूर एक पहाड़ी पर मौजूद है. इस मंदिर से पूरे शहर का नजारा देखा जा सकता है. मंदिर के दर्शन के बाद आप भावनगर के अन्य पर्यटन स्थल जैसे गांधी स्मृति, निलाम्बग पैलेस, गौरीशंकर झील आदि का भी लुत्फ़ ले सकते हैं. यहां भी आपका पूरा दिन बीतना तय है.

पन्द्रहवें दिन: सोमनाथ मंदिर का दर्शन

पन्द्रहवें दिन आप सोमनाथ का दर्शन कर सकते हैं. इसकी गिनती भारत के प्रसिद्ध मंदिरो में होती है. इस मंदिर का बड़ा रोचक इतिहास है. यह वही मदिंर है, जिसे महमूद गजनवी ने 17 बार लूटा था. इस मंदिर को घूमने में आपको लगभग 5 घंटे का समय लग सकता है. वैसे अगर आप यहां रुक कर दर्शन करें तो रात को 8 बजे साउंड एंड लाइट का शो चलता है, जिसमें मंदिर का सचित्र इतिहास दिखाया जाता है. बाकी इसके आस-पास के स्थानों को घूमने के लिए आपको पूरा एक दिन चाहिए होगा.

SomNath Temple, Gujarat (Pic:hindi)

तो यह था गुजरात की सैर करने का 15 दिनों का प्लान, जिसमें हमने आपको यहां मौजूद कई मंदिरों और उद्यानों के दर्शन कराएं. इसके आगे के प्लान को हम जल्द लेकर आयेंगे इस लेख के अगले भाग मेंं. फिलहाल हमें दीजिये इजाजत. हां, आपको यह पेशकश कैसी लगी? यह नीचे दिए कमेंट बॉक्स में जरुर बताएं…

Web Title: 30 Days, 30 Plans in Gujarat, Hindi Article

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