उम्मीद है कि आप इस लेख का पहला भाग पढ़ चुके होंगे. यह भी मुमकिन है कि आप उत्तर प्रदेश की यात्रा पर जाने का मन बना चुके होंगे. ऐसे में बाकी के 15  दिनों का प्लान भी आपको जानना बहुत जरुरी है. तो देरी कैसी, आइये चलते हैं एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की सुखद और रोमांचकारी यात्रा पर:

सोलहवें दिन: आजमगढ़ का इतिहास

आप जौनपुर से अपनी यात्रा समाप्त करके सोलहवें दिन आजमगढ़ घूम सकते हैं. इस जिले के पर्यटन स्थलों का बड़ा ही ऐतिहासिक महत्व है. यहां पर पूरे देश भर से लोग आते हैं. कहा जाता हैं कि इस शहर को ‘राजा आजमशाह’ ने बसाया था. यहां देखने लायक स्थलों में आज़म शाह का पुराना किला, भैरो बाबा का प्राचीन मंदिर, मेहनगर के प्राचीन स्मारक, दुर्वासा ऋषि का आश्रम, दत्तात्रेय ऋषि का आश्रम आदि आते हैं. बस आपके पास इनका आनंद उठाने के लिए एक दिन का समय होना चाहिए.

सत्रहवें दिन: लोर्ड कार्नवालिस का मकबरा

सत्रहवें दिन हम गाजीपुर घूम सकते हैं. मूल रूप से अतर और गुलाब के तेल के लिए मशहूर यह जिला पर्यटन के लिहाज से अब काफी आगे जा चुका है. कहा जाता है कि इस शहर को तुग़लक़ वंश के सैय्यद मसूद ग़ाज़ी ने बसाया था. बाद में यह शहर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रमुख केंद्र भी रहा. ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लोर्ड कार्नवालिस की मृत्यु यही हुई थी.

यहां घूमने के लिए शहर में सबसे अच्छा लोर्ड कार्नवालिस का स्मारक है. इसके अलावा आप यहां गंगा घाट, कामाख्या धाम, महाहर धाम, मारकंडे महादेव मंदिर, पोहारी बाबा मठ, भितारी जैसे अन्य स्थलों पर घूम सकते हैं. यहां आपको पूरा दिन खर्च करना पड़ेगा.

अठारहवां दिन: बलिया का इतिहास

अठारहवें दिन हम गाजीपुर से बलिया जिले का नजारा ले सकते हैं. इस शहर की स्वतन्त्रता आंदोलन में बड़ी प्रमुख भूमिका रही है. यहां का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भृगु मंदिर है, जो संत भृगु को समर्पित है. यहां बॉटनिकल गार्डन, ददरी का विश्व प्रसिद्ध मेला, बलिया बालेश्वर मंदिर, शहीद स्मारक, सुरहा ताल पक्षी अभ्यारण्य आदि स्थान भी प्रमुख माने जाते हैं. यहां कब दिन बीत जाता है, पता ही नहीं लगता.

उन्नीसवें दिन: बौद्ध तीर्थ शहर की सैर

उन्नीसवें दिन हम कुशीनगर का दीदार कर सकते हैं. यह शहर एक महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थल है. यह बौद्ध धर्म की वजह से देश-विदेश में काफी प्रसिद्ध माना जाता है. यहां घूमने के लिए महापरिनिर्वाण मंदिर, कुशीनगर संग्रहालय, रामभार स्तूप, सूर्य मंदिर, जापानी मंदिर, वाट थाई मंदिर, ध्यान पार्क, बुद्ध संग्रहालय आदि जगह हैं. यहां जाने के लिए आपके पास कम से कम दिन होना ही चाहिए.

 Nirvana Buddha, Kushinagar, UP (Pic: kushinagaronline)

बीसवें दिन: गोरखनाथ मंदिर का दर्शन

बीसवें दिन आप गोरखपुर का प्रसिद्ध मंदिर गोरखनाथ का दर्शन कर सकते हैं. इस मंदिर का नाम महायोगी गुरु गोरखनाथ ने नाम पर पड़ा था. इस मंदिर के दर्शन के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं. यहां दर्शन करने में आपका लगभग 4  घंटे का समय लगेगा. बाकी के बचे हुए समय में आप गीता प्रेस, कुसमी वन, गीता वाटिका, इमामबाड़ा, रामगढ ताल, तारा मंडल, रेल संग्राहलय, विन्ध्वासिनी पार्क जैसे स्थलों को छू सकते हैं.

इक्कीसवें दिन: भगवान राम की जन्म भूमि

इक्कीसवें दिन हम फैज़ाबाद घूम सकते हैं. इस जिले की सबसे प्रसिद्ध जगह अयोध्या है, जो भगवान राम की जन्म और कर्म स्थली मानी जाती है. यह शहर सरयू नदी के दाए तट पर बसा है. कहा जाता है कि इस नगर को प्राचीन काल में ‘कौशल देश’ कहा जाता था. यहां के प्राचीन मंदिरों में आप आज भी सीतारसोई तथा हनुमानगढ़ी को देख सकते हैं.

इसके अलावा आप रामकोट, राघवजी का मन्दिर, कनक भवन, गुलाब बारी, तुलसी उद्यान, ऋषभदेव राजघाट उद्यान, फोर्ट कलकत्ता, गुप्तार घाट, राम की पैड़ी आदि स्थानों का लुत्फ़ ले सकते हैं. यहां आप अपना पूरा दिन बिता सकते हैं.

बाइसवें दिन: किन्तुर का पारिजात वृक्ष

बाइसवें दिन आप बाराबंकी घूम सकते हैं. मुख्य रूप से कृषि उत्पाद में सक्रिय यह जिला पर्यटन के लिहाज से भी काफी आगे है. प्राचीन काल से यह कई संत महात्माओं की तपस्थली रह चुका है. यहां सबसे प्रसिद्ध किन्तुर गांव का पारिजात वृक्ष  मौजूद है, जो अपने आप में अकेला वृक्ष माना जाता है. इसके अलावा कुंतीश्वेर महादेव मंदिर, हजर बाग, सिमोरान चर्च, देवा शरीफ, कोटवा धाम, सतारी आदि आकर्षण का केंद्र माने जाते हैं. इस लिहाज से यहां पूरा दिन बिताया जा सकता है.

तेइसवें दिन: श्रावस्ती में जेतवन मठ

तेइसवें दिन हम श्रावस्ती घूम सकते हैं. गोंडा और बहराइच जिलों की सीमा पर मौजूद यह जिला बौद्ध एवं जैन धर्म का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान माना जाता है. कहा जाता है कि जेतवन मठ में बुद्ध ने अपने श्रावस्ती प्रवास के दौरान अधिकतम साल यही बिताये थे. अगर आप जैन और बौद्ध धर्म के बारे में रूचि रखते हैं,  तो यह जगह आपके लिए बहुत अच्छी है. यहां आप अंगुली माला का स्तूप, पयागपुर गांव और खड़गपुर को दिन भर की सैर में घूम सकते हैं.

 Angulimala Stupa, Shravasti, UP  (Pic: groupouting)

चौवीसवें दिन: दुधवा राष्ट्रीय उद्यान की सैर

चौबीसवें दिन हम खीरी लखीमपुर का प्रसिद्ध दुधवा राष्ट्रीय उद्यान घूम सकते हैं. यह उद्यान बड़ी संख्या में दुर्लभ और लुप्त होती प्रजातियों का घर है. यहां आपको टाइगर, तेंदुए बिल्ली, राइनोसेरस, हिसपिड खरगोश, हाथी, काले हिरण, दलदल हिरण आदि देखने को मिल जाएंगे. इस पार्क के अंदर बने मचानों से आप वन्य जीव का नजारा ले सकते हैं.

पच्चीसवें दिन: बरेली में खरीददारी

पच्चीसवें दिन हम बरेली शहर का नजारा ले सकते हैं. कहा जाता है कि इस शहर का नाम राजा बरलदेव के नाम पर रखा गया है. बरेली के बाजार अर्बन हाट, बड़ा बाजार, राजेंद्र नगर आदि खरीदारी के लिहाज से अच्छा विकल्प हो सकते हैं. साथ में फनसिटी, लक्ष्मीनारायण मन्दिर, दरगाह अला हज़रत, पांचाल संग्रहालय, सेना सेवा संग्रहालय आदि जगहों पर भी घूमा जा सकता है. बस आपके पास दिनभर का समय होना चाहिए.

छब्बीसवें दिन: ताजमहल का दीदार

छब्बीसवें दिन हम आगरा का ताजमहल देख सकते हैं. विश्व भर में प्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में करवाया था. यहां पर आप मुग़ल वास्तुकला के बेहतरीन नमूने देख सकते हैं. ताजमहल को देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक आते हैं. आप यहां बिलकुल भी बोर नहीं होंगे. इसके अलावा आगरा में महताब बाग, आगरा का किला, बुलंद दरवाजा जगहों का दीदार कर आप अपना दिन बिता सकते हैं.

सत्ताइसवें दिन: भगवान कृष्ण की नगरी

सत्ताइसवें दिन हम आगरा से भगवान कृष्ण की जन्भूमि मथुरा से रूबरू हो सकते हैं. मथुरा का एक ऐतिहासिक महत्त्व रहा है. ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपना बचपन यहीं बिताया था. गोपियों के संग उनकी रास लीला आज भी प्रसिद्ध मानी जाती है. यहां का श्रीकृष्ण मंदिर सबसे पवित्र मंदिरोंं में से एक है.

यहां की हर एक चीज किसी न किसी तरह से भगवान कृष्ण से जुडी है. यहां घूमने के लिए द्वारकाधीश मंदिर, गीता मंदिर, कंस किला, पोटारा कुंड आदि प्रसिद्ध जगहें हैं. आप वृन्दावन भी जा सकते हैं, ताकि आपके दिन का सही उपयोग हो सके. 

Geeta Mandir, Mathura (Pic: mapio)

अठाईसवें दिन: अलीगढ का किला

मथुरा से होकर अठाईसवें दिन हम अलीगढ जा सकते हैं. अपने मुस्लिम विश्वविद्यालय और ‘तालों’ के लिए दुनिया भर में मशहूरअलीगढ में घूमने के लिए काफी कुछ है. यहां आप अलीगढ का प्रसिद्ध किला देख सकते हैं. यह किला भारत के सबसे मजबूत किलों में से एक माना जाता है. इस किले में भारतीय और फ़्रांसिसी शैली के बेहतरीन नमूने देखे जा सकते हैं. इसके अलावा आप सर सैयद एकेडमी संग्रहालय, दोर किले, खेरेश्वर मंदिर, मौलाना आजाद पुस्तकालय में अपना दिन बिता सकते हैं.

उन्तीसवें दिन: मुरादाबाद की सैर

उन्तीसवें दिन हम मुरादाबाद घूम सकते हैं. यहां की पीतल पर हस्तशिल्प पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. इस शहर को मुग़ल शासक शाहजहां के पुत्र मुराद बक्श ने बसाया था. यहां घूमने के लिए सीता मंदिर, बड़े हनुमान जी मंदिर, नजिबुदौला का किला, मन्दवार का महल,जामा मस्जिद और प्रेम वंडरलैंड और प्रेम वाटर किंगडम आदि जगहें हैं.

इसके अलावा मुरादाबाद में खरीदारी किए बिना आपका सफर अधूरा ही रहेगा. इसलिए दिन के बचे हुए समय में आप तांबा और कांसे की खूबसूरत वस्तुएं खरीदना न भूलें.

तीसवां दिन: नवाबों की नगरी रामपुर

तीसवें दिन हम रामपुर घूम सकते हैं. अपने चाक़ू उद्योग के लिए प्रसिद्ध इस शहर को नवाब फ़ैजुल्लाह ख़ान बसाया था. यहां घूमने के लिए आपके पास ढे़र सारी जगहें हैं. यहां पर आप रामपुर क़िला, रामपुर राजा पुस्तकालय और कोठी ख़ास बाग़, आर्य भट तारा मंडल आदि का लुत्फ़ ले सकते हैं. यहां भी आपका पूरा दिन लग ही जाना है.

Rampur Raza Librery, Rampur, Uttar Pradesh (Pic: indiantourist)

यह तो रहा उत्तर प्रदेश की घुम्मकड़ी का सफर जहां हमने आपको प्रसिद्ध स्थानों की सैर कराई. उम्मीद है कि आपको यह यात्रा पसंद आई होगी. जल्द ही हम आपको लेकर चलेंगे किसी नए राज्य की सैर पर. फिलहाल आप इस राज्य की सैर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया नीचे दिए कमेंट बॉक्स में हमें देना मत भूलियेगा. और हाँ, अगर किसी कारणवश इस लेख का पहला भाग आपसे छूट गया हो तो यहाँ क्लिक करें…

Web Title: 30 Days, 30 Plans in Uttar Pradesh Part 2, Hindi Article

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