कला, संस्कृति और विरासत की भूमि पश्चिम बंगाल की पर्यटन के मामले में जितनी तारीफ की जाए, कम है. अपनी पारंपरिक और आधुनिक संस्कृति के लिए प्रसिद्ध यह राज्य देश और दुनिया के लोगों को बड़ी संख्या में अपनी ओर आकर्षित करता है. चाहे वह काली मां का मंदिर हो या हावड़ा ब्रिज, सब अपने आप में अदभुत माने जाते हैं. ऐसे में अगर आपको गर्मी की छुट्टियां बितानी हो तो पश्चिम बंगाल आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. तो आईये चलते हैं इस राज्य की सैर पर:

पहला दिन: हाबड़ा ब्रिज का दीदार

यात्रा के पहले दिन आप हावड़ा जिले को घूम सकते हैं. वैसे तो यहां देखने के लिए बहुत कुछ है, लेकिन सबसे खास हुगली नदी पर बना विश्व प्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज है. कहा जाता है कि यह ब्रिज दुनिया के व्यस्ततम कैंटीलीवर ब्रिजों में से एक है. इस ब्रिज की सुंदरता देखते ही बनती है. इसे आप नाव के द्वारा नीचे से भी देख सकते हैं. इसके अलावा आप हावड़ा में बेलूरमठ, बॉटनिकल गार्डन, रेल संग्रहालय, संतरागाछी झील आदि स्थानों पर  घूमकर अपना पूरा दिन बिता सकते हैं.

दूसरा दिन: दक्षिणेश्वर काली के दर्शन

दूसरे दिन आप दक्षिणेश्वर काली का दर्शन कर सकते हैं. हुगली नदी के तट पर बने इस मंदिर का निर्माण 1855  में महारानी रासमणि ने करवाया था. प्रसिद्ध संत राम कृष्ण परमहंस इसी मंदिर के पुजारी हुआ करते थे. माना जाता है कि उन्हें मां काली के दर्शन भी प्राप्त हुए थे. यहां के दर्शन के बाद आप नदी के पास के साइड सीन्स का लुत्फ़ भी उठा सकते हैं. मंदिर के बगल में एक विवेकानन्द ब्रिज भी मौजूद है, जो देखा जा सकता है. ऐसे आपका पूरा दिन आंनदमय तरीके से बीत जायेगा.

Dakshineswar Temple, Kolkata (Pic: kolkatacitytours)

तीसरा दिन: काली घाट में मां काली के दर्शन

तीसरे दिन आप कोलकाता में मां काली के दर्शन कर सकते हैं. कालीघाट उस जगह का नाम है, जहा मां काली का मंदिर मौजूद है. विश्व प्रसिद्ध इस मंदिर की बड़ी मान्यता है. कहा जाता है कि इस जगह पर माता सती के दाये पैर की कुछ अंगुलियां गिरी थी, जिसके बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया था. यह मां के भक्तों का लिए एक बड़ा मंदिर है. इस वजह से आपको यहां बहुत भीड़ मिल सकती है. इसलिए यहां जाने के लिए एक दिन का समय होना ही चाहिए.

चौथा दिन: भारतीय संग्रहालय

चौथे दिन आप कोलकाता में ही भारतीय संग्रहालय देख सकते हैं. यह भारत का सबसे बड़ा संग्रहालय है. इसकी स्थापना डेनमार्क के वनस्पतिशास्त्री डॉ नाथनील वालिक ने 1814 में की थी. इसमें प्राचीन वस्तुएं, गहने, कंकाल, ममी, मुग़लकाल की पेंटिंग आदि चीजें देखी जा सकती हैं. यहां के बाद आप सेंट पॉल कैथेड्रल, इडेन गार्डन, फोर्ट विलियम, ब्रिगेड मैदान को घूमकर अपने दिन का सदुपयोग  कर सकते हैं.

पांचवें दिन: विक्टोरिया मेमोरियल

पांचवें दिन आप विक्टोरिया मेमोरियल घूम सकते हैं. यह समारक रानी विक्टोरिया की याद में बनाया गया था. इस स्मारक के अंदर एक शानदार संग्रहालय भी है. यहां रानी विक्टोरिया से जुड़ी तमाम चीजें देखी जा सकती हैं. इसका खुलने का समय सुबह 10  से शाम 4.30 है. सोमवार को यह संग्रहालय बंद रहता है. यहां के बाद आप अलीपुर चिड़ियाघर, धर्मतल्ला मैदान, तारा मंडल, शहीद मीनार जेसै कई अन्य स्थानों पर घूम कर आनंद ले सकते हैं. यहां आपका दिन कब बीत जाता है, पता ही नहीं चलता.

Victoria Memorial, Kolkata (Pic: expedia)

छठवें दिन: हुगली में बंडेल चर्च

छठवें दिन आप बंडेल चर्च की ओर जा सकते हैं. हुगली नदी के किनारे बना यह चर्च भारत के सबसे पुराने ईसाई चर्चो में से एक है. कहा जाता है कि इसकी स्थापना 1599  में पुर्तगालों द्वारा की गई थी. यह चर्च हुगली जिले में आकर्षण का केंद्र है. यह घूमने के लिए हजारों कि संख्या में टूरिस्ट आते हैं. यहां आपको तारक नाथ मंदिर, वानावीथी, हुगली इमामबाड़ा, राजबाड़ी आदि स्थान अपनी ओर खीचते दिख जायेंगे. इस लिहाज से यहां के लिए एक दिन ठीक रहेगा.

सातवें दिन: तमलुक का राजबाड़ी

सातवें दिन आप तमलुक के राजबाड़ी को देख सकते हैं. यह जगह काफी प्रसिद्ध मानी जाती है. कहा जाता है कि इस राजबाड़ी का काफी पुराना इतिहास है. इसे मयूरधा राजवंश द्वारा 5 वीं शताब्दी में बनाया गया था. यहां पर प्राचीन वास्तुशिल्प के अदभुत नमूने देखे जा सकते हैं. अगर आप इतिहास में रूचि रखते हैं, तो यहाँ पर आपको जरूर जाना चाहिए. यह महल आज भी आने वाले मेहमानों को मंत्रमुग्ध कर देता है. इसके अलावा बरगीभा मंदिर, पुराना हैमिल्टन स्कूल, रक्षा बरारी यहां के कुछ ऐतिहासिक स्थल हैं. यहां आप पूरा दिन बिता सकते हैं.

आठवें दिन: दीघा बीच पर मस्ती

आठवें दिन दीघा घूमा जा सकता है. यह बीच पूर्वी मिदनापुर जिले में बंगाल की खाड़ी के उत्तरी किनारे पर स्थित है. यह पश्चिम बंगाल के सबसे लोकप्रिय समुद्रीय रिसार्टो में से एक है. यहां के बाद पास में मौजूद शंकर बीच पर भी जाया जा सकता है.

Digha Beach, West Bengal (Pic: hotelsantiniketandigha )

कुरुम्बरा फोर्ट का दीदार

दीघा में मस्ती करने के बाद इसी दिन कुरुम्बरा किले का दीदार कर सकते हैं. यह भारत के प्राचीन किलों में से एक माना जाता है. यह किला चारों तरफ ऊंची दीवारों से घिरा होने के कारण बहुत भव्य दिखता है. फोटो शूट के शौक़ीन लोगों के लिए इस किले पर जाना किसी रोमांच से कम नहीं होता. इस किले को देखने के लिए देश-विदेश से एक बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं. यहां पूरा एक दिन गुजारना यादगार हो सकता है.

नवें दिन: गोपगढ़ पार्क की सैर

नवें दिन आप गोपगढ़ पार्क की सैर कर सकते हैं. यह पार्क पहले गोप राजा का किला था. बाद में इसे पार्क में तब्दील कर दिया गया. यह घूमने के लिए एक सुन्दर जगह है. यहां आप प्राकृतिक सौंदर्यता का भरपूर मजा ले सकते हैं. यहां के ख़ास आकर्षण हाथियों के झुण्ड होते हैं, जो अक्सर देखे जा सकते हैं. यहां की मस्ती के बाद द्वादश द्वारीफोर्ट, मिशन चर्च, दानेश्वर महादेव मंदिर, आदि स्थलों की ओर बढ़ा जा सकता है. हां, लेकिन समय बचने पर.

दसवें दिन: झाड़ग्राम राज पैलेस  का इतिहास

दसवें दिन आप झाड़ग्राम पैलेस को देख सकते हैं. पश्चिमी मिदनापुर जिले के झाड़ग्राम में स्थित इस महल को राजा नरसिंह मल्ला देब ने बनवाया था. इस महल में इटालियन और मुग़ल वास्तुकला के बेहतरीन नमूने देखे जा सकते हैं. इस महल के एक भाग में मल्ला देब शाही परिवार निवास करता है. बाकी के भाग को पर्यटकों के लिए खोला गया है. झाड़ग्राम राज महल देखने के बाद आप बाकी का समय झाड़ग्राम जूलोगिकल पार्क, झाड़ग्राम मिनी जू में घूम के बिता सकते हैं.

 Jhargram Palace, West Bengal (Pic: wikipedia)

ग्यारहवें दिन: विष्णुपुर में मंदिरों का दर्शन

ग्यारहवें दिन आप बांकुरा जिले में विष्णुपुर घूम सकते हैं. यह शहर अपने मंदिरों और बालूचरी साड़ियों के लिए दुनिया भर में मशहूर है. अपनी वास्तुकला और हस्तशिप के लिए प्रसिद्ध यहां के मंदिर दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. जोर-बंगला मंदिर, पंच रत्न मंदिर, मदनमोहन मंदिर, लालजी मंदिर,रसमंचा मंदिर यहां के कुछ प्रसिद्ध मंदिर है. इसके अलावा यहां मशहूर बालूचरी साड़ियों की खरीददारी जरुर करें, तभी सही मायने में आपके दिन का सदुपयोग माना जायेगा.

बारहवें दिन: बिहारी नाथ हिल का सुन्दर परिवेश

बारहवें दिन आप विष्णुपुर के बाद बिहारीनाथ हिल स्टेशन घूम सकते हैं. यह बांकुरा की सबसे ऊंची पहाड़ी है. कहा जाता है कि प्राचीन समय में यह पहाड़ जैन धर्म का प्रमुख केंद्र हुआ करता था. यह स्थान अपने सुन्दर प्राकृतिक परिवेश के काफी प्रसिद्ध माना जाता है. इसके अलावा आप नारायणपुर मुकुटमनपुर, जयराम बाटी, सुसुनिया हिल आदि खूबसूरत स्थानों को घूमने में अपना दिन व्यतीत कर सकते हैं.

तेरहवें दिन: पुरुलिया की मुरारदी झील का नजारा

तेहरवें दिन आप पुरुलिया जिले को देख सकते हैं. मुरारदी झील यहां की सबसे प्रसिद्ध झील मानी जाती है. पहाड़ से लगी हुई इस झील का नजारा देखते ही बनता है. यहां आने के बाद आप मंत्रमुग्ध हो जायेंगे. यहां के बाद आप अजोध्या हिल, सूरतिया, राकब वन, पंचथेधर पहाड़, मुर्गुमा बांध, साहिब बंद आदि जगहें भी जा सकते हैं.

 Ajodhya Hills, Purulia, West Bengal (Pic: purulia)

चौदहवें दिन: वर्धमान की सैर

यात्रा के चौदहवें दिन बर्धमान जिले को देखा जा सकता है. इस जिले का ऐतिहासिक महत्त्व रहा है. ऐसा कहा जाता है कि जैन तीर्थंकर महावीर अपने धर्म के प्रचार के सिलसिले में वर्धमान आए थे. यहां घूमने के लिए आपको बहुत कुछ मिलेगा. यहां आप ऑक्सबॉ झील, सट देउल, बर्द्धमान महाराजा महल, मेघनाद साहा तारामंडल, गरह जंगल, बिजॉय टोरन आदि को देख सकते हैं. यहां के लिए आपको कम से कम एक दिन चाहिए होगा.

पन्द्रहवां दिन: विभूतीभूषण बंदोपाध्याय वन्य अभ्यारण्य

पन्द्रहवें दिन हम विभूति भूषण वन्यजीव अभयारण्य में पिकनिक का मजा ले सकते हैं. नदिया जिले में स्थित इस पार्क को पहले परमारदान वन कहते थे. इच्छामती नदी के किनारे बने इस पार्क में हिरण, दुर्लभ पक्षियों, खरगोश और लंगूरो की एक बड़ी संख्या पाई जाती है. यहां घूमने के अलावा आप इच्छामती नदी में नाव की सवारी का भी आनंद उठा सकते हैं. इस तरह आपका दिन शानदार हो सकता है.

 Ichamati River, West Bengal (Pic: team D/youtube)

तो यह था शुरूआती 15  दिनों का प्लान, जिसमें हमने आपको पश्चिम बंगाल के ढे़र सारे प्रसिद्ध स्थानों की सैर कराई. उम्मीद है कि यह प्लान आपको पसंद आएगा. आगे के  15 दिनों का प्लान जानने के लिए क्लिक करें… , जिसमें हम आपको ले चलेंगे पश्चिम बंगाल के कुछ और शहरों की ओर. अभी तक की यात्रा आपको कैसी लगी ?
नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.

Web Title: 30 Days, 30 Plans in West Bengal, Hindi Article

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