30 दिन 30 प्लान: पश्चिम बंगाल के लाजवाब टूर का यह दूसरा भाग है. पिछले भाग में आपने हावड़ा ब्रिज से होते हुए विभूतीभूषण बंदोपाध्याय वन्य अभ्यारण्य तक की सैर की थी. अन्य रोमांचकारी स्थलों की सैर के लिए हम लेकर आये हैं आगे के 15 दिनों का प्लान, ताकि आप पूरे दिन की छुट्टियों का मजा ले सके. तो देर किस बात आईये फिर से चलते हैं बंगाल की वादियों में:

सोलहवें दिन: मायापुर में चैतन्य महाप्रभु के दर्शन

हम अपने यात्रा के सोलहवें दिन नवद्वीप की यात्रा कर सकते हैं. धातुओं के बर्तन और मिट्टी के कलात्मक बर्तनों के लिए प्रसिद्ध यह शहर हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ स्थान माना जाता है. प्रसिद्ध संत चैतन्य महाप्रभु का जन्म यहीं हुआ था. यहां के शांत और लोकप्रिय वातावरण से आप बिलकुल भी बोर नहीं होंगे. यहां पर योगपीठ मंदिर, श्री चैतन्य मठ, श्री देवानंद गोदिया मठ, चन्दकाजी समाधि, इस्कॉन चंद्रोदय मंदिर घूमने के लिए बेस्ट स्थान माने जाते हैं. यहां आपका दिन कब बीत जायेगा पता भी नहीं चलेगा.

सत्रहवें दिन: शांतिपुर में तोप खाना मस्जिद

सत्रहवें दिन हम शांतिपुर में तोप खाना मस्जिद के खूबसूरत दृश्यों को निहार सकते हैं. कहा जाता है कि इस मस्जिद का निर्माण फ़ौजदार गाजी मोहमद यार खान ने कराया था. इस मस्जिद में बना गुम्बद और इसकी आठ मीनारें पर्यटकों को खूब लुभाती हैं. इसके अलावा यहां के श्याम चन्द मन्दिर, जलेश्वर और अद्वैत प्रभु मन्दिर भी खास आकर्षण के केंद्र माने जाते हैं. यहां सब घूमने के बाद शांतिपुर की प्रसिद्ध तांत की बुनाई वाली साड़ियों की खरीदारी करना ना भूलें.

अठारहवें दिन: प्लासी युद्ध का स्मारक

अठारहवें दिन हम प्लासी का युद्ध स्मारक देख सकते हैं. प्लासी वह स्थान है, जहां पर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और अंग्रेजों के बीच भयंकर युद्ध लड़ा गया था. इस युद्ध में अंग्रेजों की जीत हुई थी. युद्ध के बाद इस स्थान पर लार्ड कर्जन ने अंग्रेजों की जीत का स्मारक बनवाया था. यहां घूमने के बाद आप शिव निवास मंदिर का दर्शन कर सकते हैं. कहा जाता है कि इस मंदिर का शिव लिंग पूरे एशिया में सबसे बड़ा शिव लिंग है. इस स्थल को घूमने में आपका एक पूरा दिन जाना तय है.

उन्नीसवें दिन: शांति निकेतन में रवींद्र संग्रहालय

उन्नीसवें दिन हम शांतिनिकेतन घूम सकते हैं. यह छोटा शहर अपने विश्वविद्यालय और गुरदेव रवींद्र नाथ टैगोर के कारण पूरे दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां आपके पास देखने और घूमने के लिए रवींद्र नाथ टैगोर की जीवन से जुड़ी ढे़र सारी चीजें मिल जायेंगी. टैगोर की पेंटिंग, स्कैच, पत्र उनकी आवाज की रिकॉर्डिंग, उपहार, सम्म्मान आदि इस संग्रहालय में आपको मिल जायेंगे. इन सब के अलावा कला भवन, उत्तरायण गार्डन, डीयर पार्क में घूमकर आप अपना पूरा दिन गुजार सकते हैं.

 Kala Bhavan, Shanti Niketan (Pic:wikipedia)

बीसवें दिन: तारापीठ मंदिर में दर्शन

बीसवें दिन हम शांति निकेतन से तारापीठ मंदिर में दर्शन कर सकते हैं. यह स्थान बंगाल की प्रसिद्ध देवी तारा का मंदिर होने के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यह शक्तिपीठ भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. कहा जाता है कि शक्तिपीठों की स्थापना उन्हीं स्थानों पर हुई है, जहां-जहां सती के अंग पृथ्वी पर गिरे थे. उन्हीं में से एक शक्तिपीठ भी है. यहां दर्शन करने के लिए देश-विदेश से भक्त आते हैं.

इक्कीसवें दिन: मुर्शिदाबाद में हज़ार दुआरी पैलेस

इक्कीसवें दिन हम तारापीठ से मुर्शिदाबाद जिले का दीदार कर सकते हैं. मुर्शिदाबाद का ऐतिहासिक महत्व रहा है. एक ज़माने में यह जिला मुग़ल काल की राजधानी हुआ करता था. यहां देखने के लिए सबसे अच्छा हज़ार दुआरी पैलेस है. कहा जाता है कि इसका निर्माण नवाब नाजीम हुमायूं जाह ने करवाया था. अब यह महल संग्रहालय में परिवर्तित हो गया है. यहां नवाबों की अमूल्य चित्रकारी, फर्नीचर, प्राचीन वस्तुएं, दर्पण, झूमर आदि देखने योग्य चीजें हैं.

बाईसवें दिन: मोतीझील पार्क का नजारा

बाईसवें दिन हम मुर्शिदाबाद में ही मोती झील को देख सकते हैं. इस झील का आकार घोड़े की नाल जैसा है. कहा जाता है कि इसका निर्माण नवाजीश मोहम्मद खान ने करवाया था. झील के आस पास बंगाल के नवाबों की मूर्तियां भी देखी जा सकती हैं. यहां का वातावरण आपको रोमांचित कर देगा. इसके अलावा कटरा मस्जिद, कठगोला गार्डन, चार बंगला मंदिर आदि आकर्षण के केंद्र हैं. आप इन सबको दिनभर में आसानी से छू सकते हैं.

 Motijheel, Murshidabad (Pic:murshidabad)

तेईसवें दिन: प्राचीन गौड़ नगर का इतिहास

मुर्शिदाबाद से अपनी यात्रा के बाद हम मालदा के प्राचीन नगर गौड़ का इतिहास जान सकते हैं. यह नगर प्राचीन काल में संस्कृत विद्या केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था. इसके खण्हर आज भी देखें जा सकते हैं. कहा जाता है कि गौड़ नगर कभी बंगाल सूबे की राजधानी हुआ करती थी. आप यहां प्राचीन इतिहास के बारे में जान सकते हैं. इसके अलावा आप फिरोज मीनार, बोरो सोना मस्जिद, कदम रसूल मस्जिद समेत आदि स्थलों को अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं.

चौब्बीसवें दिन: दक्षिण दिनाजपुर की सैर

चौब्बीसवें दिन हम दिनाजपुर की सैर का आनंद ले सकते हैं. इस जिले का मुख्य व्यवसाय कृषि है. पर्यटन के मामले में यह जिला काफी आगे माना जाता है. इस जिले में बाल्लघाट, हॉली, सरंगबारी, कॉलेज म्युजियम, काली मंदिर, तपन बालुरघाट, बंगर आदि दिलचस्प स्थान हैं, जिनको आप एक दिन का टाइम निकालकर देख सकते हैं.

पच्चीसवें दिन: रायगंज पक्षी अभयारण्य में मौज मस्ती

पच्चीसवें दिन हम उत्तरी दिनाजपुर को देख सकते हैं. यहां देखने के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान रायगंज का पक्षी अभयारण्य है. इसे एशिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी अभयारण्य माना जाता है. अगर आप पक्षी प्रेमी हैं तो यह स्थान आपके लिए बेस्ट है. कुलिक नदी के तट पर बने इस अभयारण्य में बिल स्टॉर्क, नाईट हेरोंस, कोर्मोरंट्स आदि एशियाई देशों के पक्षी आकर्षण का केंद्र माने जाते हैं. यहां के वातावरण में आप बिना बोर हुए दिन भर मौज मस्ती कर सकते हैं.

Raiganj Bird Sanctuary,North Dinajpur (Pic: dmorg)

छब्बीसवें दिन: दार्जिलिंग की हसीन वादियों के नज़ारे

छब्बीसवें दिन हम दार्जिलिंग का दर्शन कर सकते हैं. यहां के ऊंचे-ऊंचे पेड़, ठंडी हवाएं, फूलों की मदहोश करने वाली खुशबू और बर्फीली घाटियां आपकी यात्रा को खुशनुमा बना सकती हैं. यहां घूमने के लिए आपके पास एक दिन कम पड़ेगा. फिर भी दिनभर में आप महाकाल मंदिर, हिमालय तिब्बत संग्रहालय, जापानी शांति पैगोडा, एवरेस्ट संग्रहालय का आनंद आसानी से ले सकते हैं.

सत्ताइसवें दिन: चाय बागानों की सैर

सत्ताइसवें दिन हम दार्जिलिंग में ही चाय बागानों को देख सकते हैं. यहां के चाय बागान की मनमोहक हरियाली किसी का भी मन मोह लेने में सफल माना जाती है. आप यहां प्राकृतिक दृश्यों को अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं. दिन के सही सदुपयोग के लिए आप यहां रोपवे की सवारी के साथ-साथ टाइगर हिल, पद्मजा नायडू हिमालय, जूलॉजिकल पार्क का भी मजा ले सकते हैं.

अट्ठाईसवें दिन: सिलीगुड़ी में मौज मस्ती

दार्जलिंग के बाद हम सिलीगुड़ी में मौज मस्ती कर सकते हैं. सिलीगुड़ी भारत के प्रसिद्ध पर्यटन स्थानों में से एक माना जाता है. यहां की हसीन वादियां और प्राकृतिक खूबसूरती हर किसी को दीवाना बना सकती है. यहां आपको घूमने के लिए कई दिलचस्प स्थान मिलेंगे. यहां इस्कॉन मंदिर, महानंदा वन्यजीव अभयारण्य, विज्ञान नगरी, कोरोनेशन पुल, मिरिक झील, सालूगारा मठ, मधुबन उद्यान और उमराव सिंह बोट क्लब की सैर कर आप अपना दिन यादगार बना सकते हैं.

Mahananda Wildlife Sanctuary, Siliguri (Pic: worldtravelserver)

उन्तीसवें दिन: जलपाईगुड़ी का जुबली पार्क

उन्तीसवें दिन हम सिलीगुड़ी से जलपाईगुड़ी घूम सकते हैं. जलपाई का अर्थ हिंदी में जैतून होता है. कहा जाता है कि यहाँ पर पहले जैतून बड़ी संख्या में पाए जाते थे. अपने जंगली पहाड़ियों, चाय बागानों, प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध इस शहर में घूमने के लिए बहुत कुछ है. यहां के सबसे चर्चित पर्यटन स्थानों में जुबली पार्क, टाउन क्लब स्टेडियम, नागराकटा और कराला नदी के किनारे पर बना तीस्ता पार्क में आप अपना दिन गुजार सकते हैं.

तीसवें दिन: जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान

तीसवें दिन हम अलीपुरद्वार जिले को घूम सकते हैं. कालजनी नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह शहर भूटान और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का प्रवेश द्वार माना जाता है. यहां घूमने के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान जलदापाड़ा राष्ट्रीय उद्यान है. इसकी स्थापना 1941  में पेड़ों और जीवों को बचाने के लिए की गई थी.

भारतीय गैण्डा सबसे ज्यादा यहीं पाए जाते हैं. यहां के प्रसिद्ध आकर्षणों में बुक्सा फोर्ट, बुक्सा टाइगर रिज़र्व, जलदापाड़ा संग्रहालय, त्रिकोण पार्क आदि आते हैं. यहां दिन बिताना आपके लिए सुखद हो सकता है. 

Jaldapara Wild Life Sanctuary Alipurdwar (Pic: wbnorthbengaldev)

तो कुछ ऐसा था पश्चिम बंगाल का लाजवाब टूर, जहां हमने आपको एक से बढ़कर एक स्थानों का भ्रमण कराया. उम्मीद है कि रोमांच से भरी यह यात्रा आपको बहुत पसंद आई होगी. हम जल्द ही आपको ले चलेंगे देश के किसी अन्य राज्य के टूर पर. फिलहाल आप पश्चिम बंगाल के सैर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया को नीचे दिए कमेंट बॉक्स में हमें देना मत भूलियेगा..
और हाँ, अगर किसी कारणवश इस लेख का पहला भाग आपसे छूट गया हो तो यहाँ क्लिक करें

Web Title: 30 Days, 30 Plans in West Bengal Part-2, Hindi Article

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