यह लेख 30 दिन, 30 प्लान झारखंड की ऐतिहासिक सैर का दूसरा भाग है, इसके पहले भाग में हमने आपको 15 दिनों का प्लान दिया था, जिसमें आपने रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे कई अन्य शहरों की प्राकृतिक सौंदर्यता को देखा. इसी कड़ी में इससे आगे की सैर के लिए आईये एक बार फिर से चलते हैं इस राज्य की सैर पर. इन बाकी दिनों की सैर में ‘आध्यात्मिक‘ आनंद का असीम सुख प्राप्त कर सकते हैं…

सोलहवां दिन: बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

यात्रा के सोलहवें दिन की शुरुआत आप देवघर के बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर से कर सकते हैं. इसे बाबा धाम के रूप में भी जाना जाता है. यहां भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक मौजूद है. इस मंदिर का परिसर भारत के 51 शक्ति पीठों में से एक है. इसके पास तीन और मंदिर आपको देखने को मिलेंगे, जो बैजू मंदिर के नाम से जाने जाते हैं. यहां पूरा दिन बिताना आपको असीम सुख दे सकता है.

Baidyanath Dham Temple, Deoghar (Pic: unexploredbihar)

सत्रहवां दिन: बासुकीनाथ मंदिर

सत्रहवां दिन आप देवघर के ही बासुकीनाथ मंदिर के नाम कर सकते हैं.  यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है. यहां राम और सीता की शादी का शुभारंभ किया गया था. दिन के सही सदुपयोग के लिए आप इसके नजदीक में ही बने हुए सत्संग आश्रम को देख सकते हैं. यह आश्रम धार्मिक आस्था का प्रतीक माना जाता है. फिर भी समय बच जाता है तो आप यहां के संग्रहालय और चिड़ियाघर भी जा सकते हैं.

अठारहवां दिन: नौलखा मंदिर

यात्रा का अठारहवां दिन आपको नौलखा मंदिर को देना चाहिए. यह मंदिर इतना भव्य और सुंदर है कि इसे देखते ही बनता है. यह मंदिर बेलूर मठ में रामकृष्ण मंदिर के वास्तुकला और 9 लाख रूपये के निर्माण की लागत के समान है, इसलिए इसे नौलखा मंदिर के रूप में जाना जाता है. इस मंदिर की दीवारोंं पर बने कला के नमूने आपका पूरा दिन अपने नाम करने की काबिलियत रखते हैं.

उन्नीसवां दिन: त्रिकुट की खूबसूरती

उन्नीसवें दिन आप देवघर से निकलकर कुछ किलोमीटर दूर दुमका रोड पर पड़ने वाले एक ख़ूबसूरत पर्वत त्रिकूट को निहारने जा सकते हैं. यहांं का नजारा इतना शानदार माना जाता है कि लोगों का यहां से लौटने का मन नहीं करता. इस पहाड़ पर बहुत सारी गुफाएं और झरने हैं, जो आपको रोमांंचित कर सकते हैं. यहां से टाइम बचता है तो आप नंदन पर्वत की ओर बढ़ सकते हैं. यहां आपको मंदिरों के झुंड नजर आयेंगे, जो विभिन्न भगवानों को समर्पित हैं. यह जगह पिकनिक के लिए आदर्श स्थल मानी जाती है.

बीसवां दिन: भुमका झरना

अपनी बीसवें दिन की यात्रा में आप दुमका के मशहूर जल प्रपात, भुमका को देखने जा सकते हैं. रानीबहल के पास यह एक गर्म पानी का झरना है जो बहुत ख़ूबसूरत है. यहां के आसपास के दृश्य प्राकृतिक सौंदर्य से पटे पड़े मिलते हैं. यहां पर आपको कई परिवार पिकनिक मनाते दिख जायेंगे. यहां बिना बोर हुए पूरा दिन बिताया जा सकता है.

इक्कीसवां दिन: मसनजोर बांध

इक्कीसवां दिन भी आप दुमका में बिता सकते हैं. आप सुबह सवेरे नाश्ते के बाद मसनजोर बांध पर जा सकते हैं. इस बाँध को ‘कनाडा बांध’ के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि इसे बनाने में कनाडा ने वित्तीय सहायता दी थी. इसके निकट एक छोटी पहाड़ी पर दो विश्रामगृह भी हैं, जहां आप कुछ देर विश्राम कर सकते हैं. यहां से इस बांध को निहारना एक अलग अनुभव होता है.

बाईसवां दिन: मंदिरों का गांव मलूटी

दुमका से निकलकर आप बाईसवें दिन मलूटी गांंव की तरफ रुख कर सकते हैं. यह कहने के लिए तो गांव है, लेकिन एकदम अनोखा है. इस गांव में इतने मंदिर हैं कि इसे ‘मंदिरों का गांव’ कहा जाता है. यह दुमका से क़रीब 55 किलोमीटर दूर है. यहां 74 मंदिर हैं. यहां आपको सैलानियों की संख्या देखने को मिलेगी. यहां आराम से आप अपना पूरा दिन बिता सकते हैं.

Maluti Village Jharkhand (Pic: Fikree.com)

तेईसवां दिन: जिमतारा की पहाड़ियों के बीच

यात्रा का तेईसवां दिन आपको जिमतारा के नाम करना चाहिए. पहले यह दुमका जिले का हिस्सा हुआ करता था. बाद में इसे अलग करके नया जिला बना दिया गया. यह उत्तर में देवघर, पूर्व में दुमका, दक्षिण में धनबाद और गिरिडीह से घिरा हुआ है. यहां मौजूद पहाड़ियां आपके स्वागत में बांहें फैलाएं मिलेंगी, जिनके बीच आपका दिन कब निकल जायेगा आपको पता तक नहीं चलेगा.

चौबीसवां दिन: मधुपुर के मंदिर

चौबीसवें दिन आप मधुपुर की ओर बढ़ सकते हैं. माना जाता है कि यहां की आबोहवा इतनी ज्यादा शुद्ध है कि लोगों के कई सारे रोग दूर हो जाते हैं. घूमने की बात की जाये तो यहां आप 300 वर्ष पुराना मां काली का मंदिर देख सकते हैं. इसके अलावा भी यहां कई सारे अन्य देव व देवियों के मंदिर हैं, जिन्हें देखने में आपका पूरा दिन गुजर ही जाना है.

पच्चीसवां दिन: पश्चिमी सिंहभूम जिला

पच्चीसवें दिन आप झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले को देख सकते हैं. वैसे तो यह जिला औद्योगिक विकास और खनन उत्खनन के लिए जाना जाता है. लेकिन पर्यटन के लिहाज से भी यह किसी से पीछे नहीं है. यहां के घने जंगलों के साथ यहां से निकलने वाली नदी के तट सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं. इस लिहाज से यहां एक दिन गुजारा जा सकता है.

छब्बीसवां दिन: कुण्ड गुफ़ा और महल

छब्बीसवें दिन आप झारखण्ड के चतरा के कुण्ड गुफ़ा और कुण्ड महल को देखने जा सकते हैं. वैसे तो यह दोनों स्थल बहुत सुंदर हैं, लेकिन महल की तुलना में गुफ़ा ज़्यादा आकर्षित करती दिखती है. यहां के शांत वातावरण में अपना वक्त बिताना मन को सुकून देता है. कुण्ड गुफ़ा के अन्दर एक बड़ा हॉल है, जहां एक शिवलिंग मौजूद है. फाल्गुन की 14 तारीख को यहां पर भगवान शिव को समर्पित भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. कुल मिलाकर यहां दिन बिताना शानदार हो सकता है.

सत्ताइसवां दिन: द्वारी झरना का दीदार

सत्ताइसवें दिन आप द्वारी झरना देख सकते है. यह भी चतरा में स्थित है. इसे बलबल द्वारी के नाम से भी जाना जाता है. यह अपनी खूबसूरती के साथ अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. औषधीय गुणों के कारण इस झरने पर नियमित रूप से पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है. मकर संक्रान्ति के दिन यहां पर भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. यहां आप अपना एक दिन बिता सकते हैं.

अट्ठाइसवां दिन: तमासिन के जंगल

अट्ठाइसवें दिन आप तमासीन जा सकते हैं. यहां आपको देवी भगवती की मनोहारी प्रतिमा देखने को मिलेगी. इस प्रतिमा के अलावा यह अपने ख़ूबसूरत झरनों के लिए मशहूर है. झरनों के पास आप घने जंगलों की सैर भी कर सकते हैं. यह जंगल इतने घने हैं कि यहां पर सूरज की रोशनी भी नहीं पहुंच पाती.

उन्नतीसवां दिन: पलामू के किले

यात्रा के उन्नीतीसवें दिन आप पलामू टाइगर रिजर्व और बेल्‍टा नेशनल पार्क देख सकते हैं. इसके अलावा आप यहां पलामू किला देखने जा सकते हैं, जो पूर्व काल के राजाओं की कहानी बयां करता है. यहां आपको कई इतिहासकार शोध करते हुए दिख जायेंगे. यहां एक दिन बिताया जा सकता है.

तीसवां दिन: लोध जलप्रपात

तीसवें दिन आप लोध जलप्रपात को देखने जा सकते हैं. यह झारखण्ड के लातेहार ज़िले में मौजूद है. यह जलप्रपात प्रदेश के सबसे ऊंचाई के झरने हैं जो 468 फीट की ऊँचाई से गिरते हैं. यह ऊंचाई से गिरते हुए इतने शानदार होते हैं, कि लोग यहां से जाने का नाम नहीं लेते. यहां  परिवार के साथ वक्त बिताना अच्छा माना जाता है.

Lodh Waterfalls (Pic: mouthshut.com)

यह था झारखंड की सैर का एक प्लान, जिसमें हमने आपको इस राज्य के कई पर्यटक स्थलों की सैर कराई. इस प्लान को आप झारखंड जाने पर ट्राई कर सकते हैं. हां, अगर आप जा चुके हैं तो इनमें से काफी कुछ अनुभव कर चुके होंगे. फिलहाल इजाजत दीजिए… जल्द लेकर चलेंगे आपको 30 दिनों के 30 प्लान्स के साथ किसी और राज्य की सैर पर.

और हां, अगर आप इस लेख का पहला भाग किसी कारण से नहीं पढ़ सके हैं, तो इस लिंक पर जाएं, पढ़ें और कमेंट करना न भूलें. आपकी प्रतिक्रिया हमारा श्रेष्ठ उत्साहवर्धन है.

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