30 दिन 30 प्लान: मध्य प्रदेश की घुमक्कड़ी का यह दूसरा भाग है. इसके पहले भाग में हमने आपको मध्य प्रदेश में छुट्टियां बिताने के लिए 15 दिनों का प्लान दिया था. इस दूसरे भाग में हम आपके लिए शेष 15 दिनों का प्लान लेकर आये हैं. इसमें हम आपको मध्य प्रदेश के कुछ और ऐतिहासिक स्थलों एवं राष्ट्रीय उद्यानों की सैर पर ले चलेंगे. तो देर किस बात की है आइये चलते हैं:

सोलहवां दिन: बोरी वन्यजीव अभयारण्य

वैसे तो इटारसी मध्य प्रदेश में एक व्यापारिक केंद्र के रुप में जाना जाता है. यहां हाथ से बने कपड़ों और कला के बेहतरीन उदाहरण देखने को मिलते हैं. पर यह पर्यटन के लिहाज से भी पीछे नहीं दिखाई देता है. तवा जलाशय, बोरी वन्यजीव अभयारण्य, इक्वैन्जिकल लुथेरन चर्च, बुद्धी माता मंदिर, हुसैनी मस्जिद आदि यहां आकर्षण के केंद्र माने जाते हैं. चूंकि इटारसी एक रेलवे जंक्शन है, इसलिए यहां ट्रेन से जाना आरामदायक होगा. समय की बात करें तो यहां एक दिन आराम से लग जाना है.

Bori Wildlife Sanctuary, Madhya Pradesh (Pic: groupouting.com)

सत्रहवां दिन: कुंड की आरती

विंध्य और सतपुरा वनों के मीटिंग बिंदु पर स्थित, अमरकंटक मध्य प्रदेश में एक सुंदर स्थान है. नर्मदा और सोना दो अलग-अलग दिशाओं में अमरकंटक के माध्यम से बहती हैं. यह छोटा सा शहर मध्य प्रदेश में परिवार के साथ छुट्टियों मनाने के लिए एक आदर्श स्थान हो सकता है. यहां होने वाली नर्मदा और कुंड की आरती, धुनी पानी की सैर और सोन नदी के उद्गम वाले स्थान पर जाना पर्यटकों को सबसे ज्यादा पंसद आता है.

अमरकंटक में ट्रेन से पहुंचा जा सकता है, जिसके लिए इसके नजदीकी रेलवे स्टेशन पेन्द्रा रोड और अनुपुर उतरना होगा. हां, यहां के लिए पूरे दिन का समय जरुर निकालकर आएं.

अठारहवां दिन: राजवाडा टाउन हॉल

इंदौर के बारे में कहा जाता है कि इस शहर में बहुत भीड़ है, लेकिन आपको बताते चलें कि इस शहर में मौजूद मुहाडी जलप्रपात, चोखीधानी केंद्रीय संग्रहालय, छत्रिस लाल बाग पैलेस, कांच मंदिर, राजवाड़ा टाउन हॉल और नेहरू पार्क कुछ ऐसे स्थान हैं, जो इसे दूसरे शहरों से अलग बनाते हैं. इस शहर को घूमने में एक दिन से कम का समय नहीं लगने वाला. इंदौर एयर और रेल द्वारा भारत के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. इसलिए यहां जाने के लिए आप किसी भी साधन को चुन सकते हैं.

उन्नीसवां दिन: खोए की जलेबियां

जबलपुर अपनी बेजोड़ प्राकृतिक सुंदरता के लिए सैलानियों की पंसद है. यह पूरा शहर ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर से पटा हुआ दिखाई देता है. यहां संग्राम सागर, मदन महल फोर्ट, फेडाघाट, पिसन हरी जैन मंदिर, रानी दुर्गावती मेमोरियल संग्रहालय, मदन महल फोर्ट आदि घूमने लायक स्थल हैं. जबलपुर की खोए की जलेबियां भी बहुत मशहूर हैं. यहां पूरा दिन गुजारना आपके लिए सुखद हो सकता है. जबलपुर तक पहुंचने का सबसे आसान और सबसे सस्ता तरीका ट्रेन पर चढ़ना होगा.

बीसवां दिन: कालींजर फोर्ट

छतरपुर मध्य प्रदेश का एक ऐतिहासिक शहर है. यहां का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को लुभाता है. यहां खजुराहो के मंदिर, हनुमान टौरी, जटाशंकर पांडव जलप्रपात, बाम्बर बनी कालींजर फोर्ट और आदीनाथ मंदिर कुछ देखने लायक स्थल हैं. खजुराहो से छतरपुर पहुंचने में लगभग 45 मिनट का समय लगता है. ऐसे में खजुराहो तक ट्रेन और फिर वहां से बस की सवारी लेना सुविधाजनक होगा.

इक्कीसवां दिन: पांडव गुफाएं

पचमढ़ी मध्यप्रदेश की एक बहुत खूबसूरत जगह है. कहा जाता है कि यहां पर गर्मियों की छुट्टियां बिताना शानदार होता है. यह वही पचमढ़ी है जहां अशोक और चक्रव्यूह जैसी हिन्दी फिल्मों की सूटिंग हो चुकी है. पचमढ़ी में झील के किनारों पर घंटो बैठना, छावनी परिसर में जाकर ऑर्केस्ट्रा सुनना, सुंदर कैथोलिक चर्च का दीदार और पांडव गुफाओं का भ्रमण यहां आने वालों के लिए खास होता है. बस उनके पास कम से कम एक दिन का वक्त होना चाहिए.

एक बात और अगर आप रेलगाड़ी से पचमढ़ी आते हैं, तो यहां पहुंचने के लिए पहले आपको पिपरिया रेलवे स्टेशन उतराना होगा, जहां से पचमढ़ी तक आसानी से एक कैब या बस पहुंचा देती है.

बाईसवां दिन: जीप की सफारी

पेंच राष्ट्रीय उद्यान वनस्पतियों और जीवों का एक समृद्ध स्थल है. यहां बाइसन, चीतल, सांभर, नीलगाय और तेंदुए देखने को मिलते हैं. साथ ही यहां पक्षियों की सुंदर आवाजें भी सुनी जा सकती हैं. यहां जीप की सवारी का आंनद लोगों को बहुत भाता है. वैसे तो इसको घूमने के लिए कई दिन भी कम पड़ जाते हैं, फिर भी एक दिन में इसको घूमा जा सकता है. ‘पेंच’ तक पहुंचने के लिए आप जबलपुर का रास्ता ले सकते हैं. वही सबसे नजदीक शहर है, जहां रेलवे स्टेशन मौजूद है.

Pench National Park, Jungle Safari, MP (Pic: thrillophilia.com)

तेईसवां दिन: ऐतिहासिक गांवों की सैर…

रीवा शहर अपने संग्रहालय, झरने और ऐतिहासिक गांवों के लिए जाना जाता है. यहां मौजूद किले और महल लोगों को अपनी तरफ खीचते हैं. यहां बघेल संग्रहालय, रीवा फोर्ट, पीली कोठी, गोविंदगढ़ पैलेस, वेंकट भवन, रानी तालाब, भैरोम बाबा मूर्ति, रानीपुर करचुली, पूर्वा जल प्रपात कुछ देखने लायक स्थान हैं. यह आपका पूरा दिन खाने में सक्षम है. रीवा जाने के लिए रेलगाड़ी उचित साधन है.

चौबीसवां दिन: विदिशा का शिल्प

विदिशा में वास्तुशिल्प के भव्य उदाहरण देखने को मिलते हैं. यह एक शानदार ऐतिहासिक स्थल माना जाता है. अगर आप सच में मध्य प्रदेश को करीब से जानना चाहते हैं तो आपको अपना एक दिन विदिशा को देना चाहिए. यहां सोला-कांबी मंदिर, दशावतार मंदिर, खंबा बाबा गिरधारी मंदिर और गडदमल मंदिर घूमना लोग पसंद करते हैं. यहां पहुंचने के लिए आप रेलगाड़ी का सहारा ले सकते हैं. यह शहर कई मुख्य शहरों से जुड़ा हुआ है.

पच्चीसवां दिन: माधव राष्ट्रीय उद्यान

शिवपुरी मध्यप्रदेश का एक प्राचीन शहर है. यह शहर ग्वालियर के सिंधिया शासकों की ग्रीष्मकालीन राजधानी था. किले, महलों और सेनोटैफ सहित यह शहर प्राचीन इमारतों, राष्ट्रीय उद्यानों और झरने के लिए भी प्रसिद्ध है. इनके भूरा खो और भदैया कुंड में पिकनिक, माधव राष्ट्रीय उद्यान में जंगल सफारी और बेटा चिराईया पक्षी अभयारण्य को देखना लोग नहीं भूलते. यहां की सैर आपके एक दिन को यादगार बनाने में कारगर है. अगर आप यहां रेल से जाते हैं, तो शिवपुरी रेलवे स्टेशन उतरना ठीक होगा.

छब्बीसवां दिन: देवगढ़ में बेतवा नदी

देवगढ़ मध्य प्रदेश का एक खूबसूरत गांव है. इस गांव से होकर निकलने वाली बेतवा नदी इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है. यहां जैन वास्तुकला के कई नमूने देखने को मिलते हैं. अगर आप एक दिन का समय लेकर यहां आते हैं, तो देवगढ़ किला, चंदेरी, तालबेहट, माताटीला डैम जैसे खूससूरत जगहों को घूम सकते हैं. यहां पहुंचने के लिए पहले आपको ललितपुर रेलवे स्टेशन पहुंचना होगा, जहां से देवगढ़ के लिए बस या टैक्सी ली जा सकती है.

सत्ताईसवां दिन: शियोपुर में खरीददारी

दारीमध्य प्रदेश का शियोपुर जिला लकड़ी में होने वाली नक्काशी के लिए बहुत मशहूर है. इसे शिल्प का केंद्र भी कहा जा सकता है. यहां से आप भिन्न-भिन्न प्रकार के लकड़ी के आइटम खरीद सकते हैं. एक बात और यहां लकड़ी के काम के अलावा पालपुर (कुनो) वन्यजीव अभ्यारण्य भी है, जहां जाना रोमांचकारी होता है. शियोपुर जिला छोटा जरुर है, लेकिन कब यहां पूरा दिन निकल जाता है, मालूम नहीं पड़ता. यहां पहुंचने के लिए आपको शिवपुरी रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक पड़ेगा.

अट्ठाईसवां दिन: चंदेरी का इतिहास

चंदेरी मध्य प्रदेश का एक और ऐतिहासिक शहर है. वो बात और है कि किसी लिखित साक्ष्य के न मिलने के कारण यहां के इतिहास को कम सच माना जाता है. खैर, यहां मौजूद कोशक महल, रामनगर पैलेस, काटी घाटी गेटवे, सिगनौर पैलेस, कीर्ति दुर्ग, जागेश्वरी मंदिर, चंद्रप्रभा मंदिर आदि कुछ ऐसे स्थल हैं, जहां आप अपना पूरा दिन गुजार सकते हैं. चंदेरी पहुंचने के लिए आपको ललितपुर रेलवे स्टेशन पर उतरना आरामदायक होगा, क्योंकि यहां से चंदेरी ज्यादा दूर नहीं है और साधन भी खूब चलते हैं.

उन्नतीसवां दिन: महेंद्र सागर की सैर

टीकमगढ़ ओरछा साम्राज्य का एक हिस्सा था, जिसे बुंदेला शासक रुद्र प्रताप सिंह ने बसाया था. यह छोटा जरुर है लेकिन यहां स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, रानी महल, सुंदर महल, दौजी की हवेली, जानकी मंदिर, महेंद्र सागर और गढ़कुंडर किला के अलावा कई ऐसे स्थल है, जो देखते ही बनते हैं. ललितपुर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन पड़ेगा यहां पहुंचने के लिए.

तीसवां दिन: प्राकृतिक सौंदर्यता

नर्मदा नदी के बाएं किनारे पर स्थापित, बारवानी मध्य प्रदेश में देखने के लिए एक और शानदार जगह है. यह सातपुरा और विंध्याचल के जंगल से घिरा हुआ है. इस कारण यहां प्राकृतिक सौंदर्यता कूट-कूट कर भरी हुई है. यहां के जैन मंदिर भी खासे प्रसिद्ध हैं. यहां के चूल गिरि में मौजूद आदिनाथ जी की प्रतिमा और बीजेसानी (दुर्गा) मंदिर को भी देखा जा सकता है. यहां भी न, न करते-करते पूरा दिन लग ही जाता है. बारवानी पहुंचने के लिए इंदौर रेलवे स्टेशन उतरना होगा. वहां से कोई दूसरा साधन लेकर यहां तक पहुंचा जा सकता है.

Barwani, Madhya Pradesh (Pic: groupouting.com)

यह था मध्य प्रदेश की घुमक्कड़ी का एक प्लान जिसमें हमने आपको इस राज्य के कई शहरों, कई जिलों और कई गांवों की सैर कराई. इस प्लान को आप मध्य प्रदेश जाने पर ट्राई कर सकते हैं. हां, अगर आप जा चुके हैं तो इनमें से काफी कुछ अनुभव कर चुके होंगे. फिलहाल इजाजत दीजिए… जल्द लेकर चलेंगे आपको 30 दिनों के 30 प्लान्स के साथ किसी और राज्य की सैर पर.

और हां, अगर इसी लेख का पहला भाग किसी कारण से नहीं पढ़ सके हैं, तो इस लिंक पर जाएं, पढ़ें और कमेंट करना ना भूलें. आपकी प्रतिक्रिया हमारा श्रेष्ठ उत्साहवर्धन है.

Web title: 30 Days, 30 things in Madhya Pradesh, Part 2, Hindi Article

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