सैर-सपाटा किसे पसंद नहीं होता. यह हमे रोज की चिल्लम-चिल्ली से भरी जिंदगी से मानो छुटकारा दिलाता है. इस बार भी आप अगर अपना बैग बांधने के विषय में सोच रहे हैं तो, जरा गुजरात के इस सुंदर शहर पर जरूर नजरें घुमाए.

इस बार हम एक ऐसे शहर की सैर पर निकलते हैं, जिसके बारे में लोग कम ही जानते हैं. इस शहर ने जहाँ एक ओर गुजरात की राजधानी बनने का गौरव प्राप्त कर चुका है तो, कभी पूरी तरह से गुमनामी के पन्नों में भी विलीन हो गया था.

इसे साल 2004 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा भी दिया. ये जगह है ही कुछ ख़ास!

यहाँ मंदिर, मस्जिद, जैन मंदिर समेत वाटर इंस्टालेशन और दीवारें मौजूद हैं. यह शहर एक अनूठी सी भव्यता लिए हुए है.

ऐसे में, अगर आप इतिहास की सैर पर निकलने का प्लान बना रहे हैं तो, यह एक ‘उम्दा’ जगह है. जहां आकर आप को यकीनन इस ऐतिहासिक शहर को करीब से देखकर अच्छा लगेगा.

तो चलिए, निकलते हैं ‘चंपानेर पावागढ़’ शहर की सैर पर-

कुछ दिन तो गुजारो ‘चंपानेर पावागढ़’ में

गुजरात का चंपानेर वास्तुकला. मंदिरों और विशेष जल संग्रहण का नायाब नमूना है. कम समय के लिए ही सही पर राजधानी होने का मान प्राप्त कर चुके इस शहर में धार्मिक, कृषि-संबंधी और सैन्य संरचनाएं हैं. यह हिन्दू मुस्लिम आदि धर्मों के मेल का एक खूबसूरत उदाहरण है.

इसके साथ ही, इस ऐतिहासिक जगह के अंदर ही एक छोटा सा गाँव भी शामिल है. यहाँ मौजूद दो अहाते भी बेहद दिलचस्प हैं. पहला अहाता है शाही, यह मीनारों और प्रवेश द्वारों समेत सुरक्षा देने वाली दीवारों से महफूज है. इस क्षेत्र में बगीचे, शाही मस्जिद और प्रशासनिक भवनों का स्थान हुआ करता था.

जबकि दूसरा अहाता जहांपनाह कहलाता था. इसकी खुदाई नहीं करवाई गयी. यहाँ मंदिर, मस्जिद समेत पत्थरों पर नक्काशी की गयी है. जो कला का एक बेहद सुंदर नमूना है.

यहाँ जमी मस्जिद. केवड़ा मस्जिद, नगीना, लीला गुम्बज की मस्जिद, कमानी मस्जिद आदि मौजूद हैं. अगर बात करें मंदिरों की तो, लकुलीश मंदिर, जैन मंदिर, कलिका माता आदि मंदिर शामिल हैं.

आप तीनों मार्गों द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं. यहाँ की एक साप्ताहिक सैर तो बनती है. लेकिन इससे पहले इसके इतिहास को भी जानते चलें….

Jami Masjid In Champaner (Pic: findmessages)

विभिन्न प्रकार की इमारतें, मंदिर, मस्जिद और...

चंपानेर-पावागढ़ पुरातात्विक उद्यान, जो यूनेस्को द्वारा संरक्षित है. इसे यह संरक्षण साल 2004 में दिया गया है. इस पार्क को विश्व धरोहर का भी दर्जा मिला हुआ है. इस पार्क का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था. यह चावड़ा साम्राज्य के दौरान बनवाया गया.

इसे चावड़ा वंश के महाराज वनराज चावड़ा ने बनवाया था. यहाँ अलग-अलग प्रकार की 11 बिल्डिंग्स हैं. जिसमें मंदिर, मस्जिद से लेकर दीवारें और कुएँ मौजूद हैं.

इस बेहद सुंदर किले के नाम को लेकर ही कई सारे मत हैं. एक पक्ष का मानना है कि महाराज ने इसका नाम चंपानेर अपने मित्र और मंत्री ‘चंपा’ के नाम पर इस शहर का नाम रखने की इच्छा थी.

वहीं दूसरे पक्ष का मानना है कि यहाँ पर मौजूद पावागढ़ पत्थर पीले और लाल रंग का कुछ ऐसा मिश्रण है, जो दिखने में चम्पक (एक फूल) की तरह दिखते हैं. इसी के ऊपर इसका नाम रखा है.

पावागढ़ राज्य उस समय में गुजरात और मांडू के बीच में एक सबसे महत्वपूर्ण रास्ता बन चुका था. इसके अलावा, यह मुख्य मार्ग के तौर पर भी उभरा था, जो गुजरात को बाकी के उत्तर और दक्षिणी भारत से व्यापार करने में मदद देता था.

The Pavagadh Hills (Pic: gujaratheritages)

मुगलों का कब्ज़ा और गुमनामी के अंधेरे में तब्दील

समय के साथ हर जगह सत्ता का प्रारूप बदला है. धरती हमेशा वही रही, लेकिन उस धरती ने कई साम्राज्यों को बनते और बिगड़ते हुए देखा है. यहाँ भी आलम कुछ ऐसा ही रहा. पावागढ़ और चंपानेर शहर पर भी 1300 AD में चौहान राजपूतों ने कब्ज़ा कर लिया. आगे चलकर, उनके द्वारा किया गया यह कब्जा 200 वर्षों तक रहा.

पावागढ़ पर समय के साथ, कई बार गुजरात सुल्तानों ने भी अपना कब्ज़ा जमाना चाहा. सन 1484 में करीब 20 महीने तक शहर पर लगातार अपने निगाहें टिकाने के बाद सुल्तान महमूद बेगड़ा इस पर अपना कब्ज़ा जमाने में सफल हो गया.

यहाँ अपना कब्ज़ा जमाने के बाद उसने इस शहर का नाम मुहम्मदाबाद रख दिया.

अगले 23 साल तक उसने इस शहर को सुंदर और विकसित बनाने के लिए निर्माण कार्य किया. इसके अलावा, उन्होंने अहमदाबाद को अपनी राजधानी हटाकर ‘पावागढ़’ को बना दिया. सन 1535 में मुग़ल सम्राट हुमायूँ ने इस शहर पर विजय प्राप्त कर ली.

मुग़लों ने जब गुजरात और मालवा पर अपना कब्ज़ा जमा लिया. इसके बाद इस शहर की अहमियत को एक व्यापार मार्ग की तरह समाप्त कर दिया. मुगलों ने एक बार फिर अहमदाबाद को राजधानी बना दिया. इस जगह का हाल अगली चार शताब्दियों तक ठीक नहीं रहा. यह अब पहले जैसी तरक्की नहीं कर रहा था.

One Of The Monument In Champaner (Pic: yatra)

जंगल में बदल चुके इसे शहर की खोज

मराठों के शासनकाल के दौरान भी, इस पर ध्यान नहीं दिया गया. कहा जाता है कि यहाँ बस कुछ लोग रह रहे थे, एक समय ऐसा आया जब यह जंगलों से घिर गया. इस जगह के बारे में बहुत कम इस्लामी और पुर्तगाली लेखकों ने जिक्र किया.

पर माना जाता है कि उस समय पावागढ़ में हिन्दू लोग माँ काली के दर्शन करने आया करते थे. दरअसल, यहाँ पहाड़ियों पर माँ काली का एक मंदिर था, जहाँ लोग उनके दर्शन के लिए आया करते थे.

जब 19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों ने इस पर अपना अधिकार किया, तब तक यह पूरे एक जंगल में तब्दील हो चुका था. यहां की जनसंख्या महज 500 थी. ब्रिटिश सर्वेक्षणों ने जंगलों में खो चुके किलों के बारे में संज्ञान और उन्हें खोजना शुरू किया. जर्मनी के आर्कियोलोजिस्ट हरमन गोएट्ज ने इस पर स्टडी करना शुरू किया.

साल 1969 तक बरोडा की एक यूनिवर्सिटी में लगातार सात सालों तक अध्ययन के बाद इसके विकास, पतन और इसकी पहचान के बारे में काफी हद तक जानकारी जुटाई गयी.

इसमें मौजूद किले की दीवारें 10 मीटर तक ऊँची हैं. दीवारों को दुश्मनों पर हमला करने के लिए बेहद बेहतरीन ढंग से डिजाईन किया गया था. यहाँ एक शाही महल हिस्सार-ए-खास और जमी मस्जिद है. जो सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र हैं.

Structure In Champaner (Pic: discoveryproject)

गुजरात के इस शहर को एक बार जरूर करीब से देखें. यहाँ एक शहर के निर्माण और खोने की कहानी है. यहाँ पर सीखने के लिए बहुत कुछ है. ऐसे में, इस बार गुजरात की ट्रेन जरुर पकड़े.

Web Title: Champaner Pavagarh Park: A City Which Was lost For Centuries, Hindi Article 

feature Image Credit: wikipedia