भारत अपनी गोद में कई सारी प्राचीन यादों और धरोहरों को समेटे हुए है. इन्हीं धरोहरों में से एक है देश में मौजूद मीनारें. चाहे फिर वह हैदराबाद की चार मीनार हो, दौलताबाद की चांद मीनार हो या फिर दिल्ली में मौजूद कुतुब मीनार ही क्यों न हो. खास बात तो यह है कि इतने सालों बाद भी यह मीनारें उतनी ही प्रासांगिक हैं, जितनी पहले थीं. तो आईये जानते हैं कुछ ऐसी ही मीनारों को:

क़ुतुब मीनार

दिल्ली में स्थित क़ुतुब मीनार का निर्माण कार्य दिल्ली के पहले मुस्लिम शासक कुतुबद्दीन ऐबक ने शुरू कराया था, जिसे बाद में इल्तुतमिश ने पूरा कराया गया था. लाल ईंटों से बनी यह मीनार दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में से एक है. इसकी ऊंचाई 72.5 मीटर है. इसमें 379 सीढ़ियां हैं. इस मीनार के परिसर में भारतीय कला के उत्कृष्ट और बेजोड़ नमूने देखने को मिलते हैं. इस मीनार को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा दे चुका है. इतने सालों बाद आज भी देश-विदेश से लोग इसके दीदार के लिए आते हैं.

चोर मीनार

दिल्ली में स्थित इस मीनार को टॉवर ऑफ चोर्स भी कहा जाता है. इसका निर्माण 13 वी सदी में खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था. इस मीनार में 225 छेद हैं. स्थानीय किंवदंतियों की मानें तो मुगलों के शासन काल में यहां चोरों के कटे हुए सर को इन छेदों से लटकाया जाता था. वही कुछ इतिहासकारों का मानना है कि खिलजी राजा इस मीनार का उपयोग मंगोलों से युद्ध में छिपने के लिए करते थे. इस मीनार का इतिहास कुछ भी रहा हो, लेकिन इसको देखने के लिए सैलानियों की भीड़ आज भी उमड़ती है.

चंद मीनार

महाराष्ट्र के औरंगाबाद के निकट दौलताबाद में स्थित इस मीनार को अल्लाउद्दीन बहमनी ने बनवाया था. दौलताबाद किले के अंदर स्थित यह मीनार भारत की दूसरी सबसे ऊंची मीनार है. इसकी ऊंचाई 210 फीट है. इस मीनार में इस्लामी कला के उत्कृष्ट नमूने आज भी देखे जा सकते हैं. यह मीनार पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है.

Chand Minar, Daulatabad (Pic: trektourclick)

शहीद मीनार

कोलकाता में स्थित यह मीनार दिल्ली की क़ुतुब मीनार के तर्ज पर ही बनाई गई है. इस मीनार का निर्माण सर डेविड ऑक्टरलोनी ने 1848 में नेपाल की लड़ाई जीतने की याद में करवाया था. इससे पहले इस मीनार को ऑक्टरलोनी स्मारक के नाम से जाना जाता था. बाद में इसे नया नाम शहीद स्मारक दे दिया गया. इसकी ऊंचाई 48 मीटर है. इस मीनार को तीन अलग शैलियों में बनाया गया है. इसकी बनावट मिश्र की शैली की है. कहते हैं कोलकत्ता जाने वाला इस मीनार को देखने का मौका नहीं छोड़ता.

झुलती मीनार

अहमदाबाद में स्थित झूलती मीनार दो हिलती मीनारों का एक जोड़ा है. इनमें एक मीनार सिदी बशीर मस्जिद की तरफ है, तो दूसरी राज बीबी मस्जिद के तरफ. इन दोनों जोड़ी वाली मीनारों की सबसे खास बात यह है कि एक मीनार हिलने के कुछ देर बाद ही दूसरी मीनार भी हिलती लगती है. ऐसा माना जाता है कि इन मीनारों का निर्माण सुल्तान अहमद शाह के शासन काल में उनके गुलाम सीदी बशीर के द्वारा करवाया गया था. इन मीनारों में मुग़ल काल की झलक देखने को मिलती है.

सरगासूली मीनार

जयपुर में स्थित इस मीनार का निर्माण राजा ईश्वरी सिंह ने 1749  में अपने दुश्मनों पर जीत के बाद करवाया था. इस मीनार का नाम पहले ईसरलाट रखा गया था. अधिक ऊंची होने के कारण स्थानीय लोगों ने इसका नाम ‘सरगासूली’ रख दिया. मीनार का नक्शा राजा ईश्वरी सिंह के राज शिल्पी गणेश खोवान ने तैयार किया था. यह मीनार सात खंडो में बनी हुई है. मीनार की निर्माण शैली राजपूत और मुग़ल शैली को मिलाकर किया गया है.  इसे देखने के लिए पहले आम जनता का प्रवेश नहीं था. बाद में इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया.

Sargasuli  Minar, Jaipur (Pic: topworldresort)

चार मीनार

हैदराबाद की सबसे प्रसिद्ध चार मीनार का निर्माण मुहम्मद कुली क़ुतुब शाही ने 1591  में  उस समय करवाया था, जब उसने गोलकुंडा से हैदराबाद अपनी नई राजधानी बनाई थी. कहा जाता है कि उन्होंने इसका निर्माण शहर में फैली महामारी से बचने के लिए करवाया था. चार मीनार का अर्थ चार टावर होता है. इस मीनार में प्राचीन काल के वास्तुशिल्प के बेहतरीन नमूने देखे जा सकते हैं. चार मीनार अपनी भव्यता और पुराने इतिहास के कारण आज भी पर्यटकों की पहली पसंद मानी जाती है.

एक मीनार

एक मीनार मस्जिद कर्नाटक में कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच रायचूर शहर में स्थित है. फ़ारसी अभिलेख से प्राप्त सूचना के आधार पर कहा जाता है कि इसका निर्माण महमूद शाह बहमनी ने करवाया था. इस मीनार की ऊंचाई 65  फीट है. यह मीनार मस्जिद के दक्षिणी कोने में स्थित है. यह मीनार दो मंजिला है. इसके ऊपर का भाग बहमनी शैली के गुम्बद से ढकी है.

कीर्ति स्तम्भ

यह मीनार राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में मौजूद है. इसका निर्माण जीजा जी कथोड़ नाम के एक जैन व्यापारी ने बारहवीं शताब्दी में करवाया था. यह मीनार 22  मीटर ऊंची है. यह सात मंजिला मीनार है. इसकी भीतरी दीवारों में जैन धर्म से सम्बंधित चित्र आज भी जीवांत है. अपनी बनावट के कारण यह मीनार पर्यटकों की पहली पसंद मानी जाती है.

विजय स्तम्भ

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ क़िले में स्थित इस स्तम्भ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1448 में करवाया था. कहा जाता है कि यह स्तम्भ महाराणा कुम्भा ने महमूद शाह खिलजी को परास्त करने की याद में भगवान विष्णु को समर्पित किया था. यह स्तम्भ 122 फीट ऊंचा है जो नौ मंजिलों में बंटा हुआ है. वास्तुकला की नजर से यह स्तम्भ अपने आप में बेमिसाल है. इसकी ऊपरी मंजिल में झरोखा होने के कारण इसके भीतरी भाग में हमेशा रोशनी रहती है. वहीं इसके भीतरी भाग की दीवारों में भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों के अवतारों के चित्र देखे जा सकते हैं. साथ ही महाभारत और रामायण काल के चित्रों को भी उकेरा गया है.

Vijay Stambh, Chittaurgarh (Pic: panoramio)

राजबाई क्लॉक टॉवर

यह मीनार मुंबई में स्थित एक घड़ी टावर है. इस मीनार की आधारशिला 1869  में रखी गई थी. इसका डिजाइन अंग्रेज वास्तुकार सर जॉर्ज गिलबर्ट स्कॉट ने बनाया था, जो लन्दन के बिग बेन के मॉडल पर आधारित था. इस टावर की ऊंचाई 85 मीटर है. इस मीनार के निर्माण में लगने वाली राशि एक बड़े व्यापारी प्रेमचंद रॉयचंद ने इस शर्त पर दी थी, कि इसका नाम उनकी माता राजबाई के नाम पर रखा जाए. हुआ भी ऐसा ही, कहा जाता है कि उनकी माता अंधी थी और इस टावर में लगी घड़ी उनका सहारा होता था.

सदियां बीत जाने के बाद भी यह मीनारें अपनी भव्यता से पूरी दुनिया के लोगों को आकर्षित करती आ रही हैं. ऐसे में सरकार के साथ-साथ हमारी भी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपनी महान विरासत को सहेज कर रखें, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनका न केवल दीदार कर सकें, बल्कि इसके पीछे छिपे इतिहास को भी समझ सकें.

Web Title: History of 11 Famous Towers in India, Hindi Article

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